दर्द

राम तेरी गंगा मैली हो गयी.....

इतिहास गवाह है कि विश्व की महान मानव सभ्यताओं का विकास नदीयों के किनारे हुआ है। हर काल में मानव सभ्यता के विकास में नदीयों से गहरा रिष्ता रहा है। बात चाहे सिन्धु नदी घाटी सम्यता का हो या अमेजन की अथवा नील नदी की लें ख मोक्षदायीनी गंगा को लें। हर स्थान व काल में मानव का नदीयों से माँ-पुत्र का रिष्ता रहा है। मानव सभ्यताओं के विकास में नदीयों की अहम भूमिका रही है। अफसोसनाक बात आज यह है कि आधुनिकीकरण के अन्धि दौड़ में आकर मानव ने माँ-पुत्र के रिष्ते को कलंकित किया है। अपने उपभोग के उपरान्त कचरे व विषाक्त पदार्थों को गंगा के हवाले कर उसे दूषित करने का काम किया है।
षिव की जटाओं से निकली मोक्षदायीनी गंगा जहाँ पूरे मानव सभ्यता को पापमुक्त करने का काम किया है वहीं पाप के स्याह रंग में डूबा मानव अपने पापों समेत दूषित कचरों व कल-कारखानों के विषाक्त पदार्थों को इसमें समाहित कर अपने को तो कुछ हद तक पाप मुक्त कर लिया है मगर माँ गंग के अस्तित्व पर प्रष्न चिन्ह सा लगा दिया है ? बात अगर पूर्वांचल की करें तो वाराणसी को छोड़ कर कहीं भी दूषित जल शोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लान्ट) नहीं है जबकि पूरे पूर्वांचल का दूषित जल, कचरा व विषाक्त पदार्थ गंगा के जिम्मे है। गंगा को दूषित करने के लिए तमाम साधन उपलब्ध हैं जैसे कि कल-कारखानों के विषाक्त पदार्थ व दूषित जल, गंगा स्नान के दौरान दूर-दराज से ढ़ोकर लाया गया कचरा समेत स्नान के दौरान साबुन व डिटेर्जंट का प्रयोग, मृत जानवरों को गंगा के हवाले करने व शवों को गंगा में मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रवाहित करने की संस्कृति ने भी गंगा को कुछ हद तक नुक्सान पहुँचाया है। कचरों व विषाक्त पदार्थों को ढ़ोते-ढ़ोते गंगा जल प्रदूषित होकर ठीक उसी प्रकार नीली पड़ गयी है जैसे विशपान के बाद मानव शरीर हो जाता है। भारत की जीवन रेखा मानी जाने वाली गंगा की स्थित इस हद तक बदतर हो गयी है इसका अन्दाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रति वर्ष गंगा का जल स्तर 2.5 से 3 मीटर गिर रहा है।
पूर्वांचल की स्थित पर निगाह डालें तो केवल वाराणसी महानगर से 300 एमएलडी दूषित जल गंगा में प्रवाहित होता है, मीरजापुर से 100 टन कचरा युक्त जल, भदोहीं से 90 टन कचरा युक्त जल, चन्दौली से 110 टन कचरा युक्त जल, गाजीपुर से 5 एमएलडी दूषित जल व बलिया से 120 टन कचरा युक्त दूषित जल प्रति दिन गंगा में प्रवाहित किया जाता है। जबकि पूरे पूर्वांचतत्रल में केवल वाराणसी में ही दूषित जल शोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लान्ट) है, जिसमें केवल 100 एमएलडी दूषित जल ही शोधित हो पाता है ऐसी स्थित में गंगा का क्या होगा इस का अंदाज स्वयं लगाया जा सकता है ? परिणाम अब यह है कि नदी में लगातार आता कचरा व रेत खनन न होने से इसमे मार्च-अप्रैल के महीने में ही रेत के टीले नजर आने लगते हैं। नदी के दोनों किनारों पर कूड़ों का अम्बार अनायास ही देखने को मिलता है। जल का रंग चमकदार दूधिया से जहरीला भूरा सा हो गया है। दूर से आने वाले दर्षनार्थी यहाँ इस उम्मीदसे आते है कि उनको पापों से मुक्ति मिलेगी मगर गंगा का ये हाल देख आष्चर्यचकित हो जाते हैं। जानकारो की मानें तो दिन-प्रतिदिन गंगा नदी के सिमटने से धारा प्रवाह मध्य में हो गया है जिससे कि चलते नदी में फेंके जाने वाली गन्दगी बहने के बजाए किनारे एकत्र होकर नदी को प्रदूषित करते हैं।
वाराणसी को मोक्ष की काषी नगरी के रूप में जाना जाता है। जहाँ विष्व के हर कोने से दर्षनार्थी पापमुक्ति के लिए तो आते ही हैं साथ में ढ़ेर सारे कूड़ा-कचरा ले आते हैं जिससे कि घाटों पर कचरों का अम्बार सा लग जाता है। स्वयं पापमुक्त तो होते हैं साथ में कचरों को भी मुक्त कर गंगा को कचरायुक्त कर देते हैं। शहरो में स्थापित कल- कारखानों से प्रतिदिन मुक्त होने वाले विषाक्त पदार्थ व कचरा युक्त जल गंगा को दूषित कर देती हैं। चन्दौली में स्थिति यह है कि जनपद के उत्तरी छोर पर स्थित ब्लाकों चहनियाँ व धानापुर के सैकड़ों तटवर्ती गाँवों के लोगों द्वारा दूषित जल गंगा में प्रवाहित किया जाता है। गंगा स्नान के नाम पर साबुन के काॅस्टिक झाग व प्लास्टिकों के अम्वार घाटों के पास लगा देते हैं। कुछ स्थानों पर तटवर्ती गाँवों के महिलाओं द्वारा बर्तनों के धोने का काम भी गंगा में किया जाता है। मारूफपुर, तिरगांवा, टांडा, सैफपुर, रामपुर दीयाँ, प्रसहटाँ, हिंगुतर, बुद्धपुर, रायपुर, धानापुर नरौली, बड़ौरा खलसा, अमादपुर, मेढ़वां, महुजी समेत दर्जनों तल्हटी के गाँवों के लोग गंगा के उपर अश्रित हैं चाहे सिंचाईं का मामला हो या जल का । जिससे कि अतिक्रमण का अन्देषा ज्यादा है। गाजीपुर में जल प्रवाह न्यून्तम है और ददरी घाट से 15 मीटर दूर तक गंगा प्रदूषित हो चुकी है। जल निगम के अभियन्ता इकबाल अहमद की माने तो यहाँ प्रति दिन 5 एमएलडी दूषित जल गंगा में प्रवाहित होता है। जबकि 61 करोड़ की लागत से दूषित जल शोधन संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लान्ट) के लिए योजना प्रस्तावित है मगर वह भी अभी अधर में है। मीरजापुर में दर्जनों नालों द्वारा प्रतिदिन 100 टन कचरा युक्त दूषित जल गंगा में उडेला जाता है। बलिया में शहर का दूषित जल नालों द्वारा गंगा को दान दिया जाता है। इस प्रकार माँ गंगा पूरे पूर्वांचल समेत उत्त्र प्रदेष के अन्य जगहों का कचरा अपने गोद में समा कर भी अपना दर्द नहीं बयां करती हैं।
दूषित जल व विषाक्त पदार्थों को ढ़ोते-ढ़ोते आज आलम यह है कि पूर्वांचल के आधा दर्जन जनपदों को जीवन देने वाली गंगा में अब मछलियाँ भी बमुष्किल मिलती हैं। जिससे कि मल्लाहों के पेट पर वज्रपात सा हो गया है। गंगा के जल में खतरनाक जीवाणुओं की संख्या कब की सरकारी मानक को लांघ चूकी है। वो दिन अब लद चुके जब लोग बोतलों में गंगा जल को वर्षों तक घरों में रखते थें। अब तो सप्ताह भर में जल का रंग बदल जाता है। गंगा को साफ करने के लिए वैसे तो शासन द्वारा अनेकों योजनाएं चलायी गयी जिसमें गंगा एक्षन प्लान काफी चर्चित रही। सभी योजनाओं का मूल असफलता रहा। इसके पीछे क्या कारण है सयुस के रा0 सचिव मनोज सिंह ‘डब्लू’ का मानना है कि ‘‘गंगा को तभी प्रदूषण मुक्त किया जा सकता है जब समाज का हर व्यक्ति इसपर गहन चिंतन करे तथा इसका संकल्प ले कि पूजा-पाठ के नाम पर गंगा को प्रदूषित नहीं करेगा। कल-कारखानों से मुक्त होने वाले विषाक्त पदार्थ व दूषित जल को ट्रीटमेंट प्लान्टों द्वारा वहीं पर शोधित कर दिया जाए तथा गंगा के सफाई हेतु जो भी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है उसमें जनता की प्रत्यक्ष सहभागिता हो और इसके प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।’’
भारत की जीवन रेखा माने जाने वाली मोक्षदायीनी गंगा शायद आज कराह रहीं है मगर उनकी आवाज आज हमारे कानों तक नहीं पहुँच पा रही है। शासन व सत्ता के लोगों को शायद इसका भनक भी न लगे अनकरीब वह वक्त आयेगा जब माँ गंगा को नाले के रूप में हम पायेंगे। तब गंगा हमसे कह रही होगी कि...
‘‘ राम तेरी गंगा मैली हो गयी ,पापीयों के पाप धोते-धोते। ’’

एम. अफसर खां सागर

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खुदा भी क्या मौसम देते हैं

खुशियाँ जिनको हम देते हैं
वो बदले में गम देते हैं

जख्म मिले हैं उनसे अक्सर
हम जिनको मरहम देते हैं

हैं नफरत के काबिल फिर भी
प्रीत उन्हें हरदम देते हैं

देहरी उनके दीप जलाया
जो लोगों को तम देते हैं

जिनकी वाणी में अंगारा
व्यर्थ उन्हें शबनम देते हैं

बरसातों में प्यासी धरती
खुदा भी क्या मौसम देते हैं

सबकुछ सुमन दिया अपनों को
फिर भी कहते कम देते हैं
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बोल्ड विषय पर संभलकर बोलना चाहिए

वंदना गुप्ता ने मियां बीवी के ताल्लुकात खुशगवार बनाने के लिए कुछ टिप्स दिए तो श्याम गुप्ता को बुरा क्यों लगा ?
और बुरा लग भी गया तो श्याम जी भड़क क्यों गए ?
मैं तो समझ नहीं पाया .
कोई समझा हो तो वह श्याम गुप्ता को समझा दे कि समाज में सभ्यता के साथ कैसे रहा जाता है ?, 
खासकर हिन्दी ब्लॉग जगत में.
बोल्ड विषय पर संभलकर बोलना चाहिए खासकर विरोध करते हुए.
लिंक देखो - http://vandana-zindagi.blogspot.in/2012/04/blog-post_02.html#comment-form_7423012858527681431
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जीव-जंतु

गायब होते गिद्ध


मुझे अच्छी तरह याद है, अभी कुछ ज्यादा अरसा भी नहीं गुजरा है गिद्ध बड़ी आसानी से दिखाई देते थें मगर आजा हालात बदल गये हैं, अब ढ़ूढ़ने से भी नहीं दिखते। हमारे घर के पीछे एक बड़ा तालाब है, जिसे गांव वाले न जाने क्यूं खरगस्सी कहतेे हैं वहीं ताड़ के दर्जन भर पेड़ कतारबद्ध खड़े हैं। गवाह हैं ताड़ के वे पेड़ जो कभी गिद्धों का आषियाना हुआ करते थें। अक्सर षाम के वक्त डरावनी आवाजें ताड़ के पेड़ों से आती मानों कोलाहल सा मच जाये। मालूम हो जैसे रनवे पर जहाज उतर रहा हो। मगर अब वो दिन नहीं रहे। आज एक भी गिद्ध नहीं बचा। लगभग ऐसे ही हालात अन्य जगहों के भी हैं।
गिद्ध प्रकृति की सुन्दर रचना है, मानव का मित्र और पर्यावरण का सबसे बड़ा हितैशी साथ ही कुदरती सफाईकर्मी भी। मगर आज इनपर संकट का बादल मंडरा रहा है। हालात अगर इसी तरह के रहें तो अनकरीब गिद्ध विलुप्त हो जायेंगे। एक वक्त था कि मुल्क में गिद्ध भारी संख्या में पाये जाते थे। सन् 1990 में गिद्धों की संख्या चार करोड़ के आसपास थी। मगर आज यह घटकर तकरीबन दस हजार रह गयी है। सबसे दुःखद पहलू यह है कि मुल्क में बचे गिद्धों की संख्या लगातार तेजी से घट रही है। वैसे तो गिद्ध मुल्कभर में पाये जाते हैं मगर उत्तर भारत में इनकी संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है। भारत में व्हाइट, बैक्ड, ग्रिफ, यूरेषियन और स्लैंडर प्रजाति के गिद्ध पाये जाते हैं।
गिद्धों का प्रमुख काम परिस्थितकी संतुलन को बनाये रखना है। मुल्क के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में मृत पषुओं को खुले मैदान में छोड़ दिया जाता है। जहां गिद्धों का झुण्ड कुछ ही देर में उसका भक्षण करके मैदान साफ कर देते हैं। मृत जानवरों का मांस ही गिद्धों का प्रमुख भोजन है।
पशु वैज्ञानिकों का मानना है कि गिद्ध हजार तरह के भयंकर बीमारीयों से बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं। वैसे तो गिद्ध मानव के साथी हैं मगर मानवीय लापरवाही की वजह से इनके अस्तित्व पर संकट मण्डराने लगा है। आखिर क्या वजह है कि मुल्क में अचानक गिद्धों की संख्या इतनी कम हो गई ? अगर गौर फरमाया जाए तो गिद्धों के खात्मे के लिए अनेक वजह हैं मगर पषुओं के इलाज में डाइक्लोफिनाक का इस्तेमाल प्रमुख कारण है। असल में डाइक्लोफिनाक दर्दनाशक दवा है जोकि पशुओं के इलाज में काफी कारगर है। अगर इलाज के दौरान पशुओं की मौत हो जाती है तो उसे गिद्ध खाते हैं जिससे गिद्धों के शरीर में डाइक्लोफिनाक पहुंच जाता है। डाइक्लोफिनाक की वजह से गिद्धों के शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, गिद्ध इसे मूत्र के द्वारा षरीर से बाहर नहीं निकाल पाते जिससे उनकी किडनी खराब हो जाती है जो उनके मौत की जिम्मेदार बनती है।
वैश्विक स्तर पर गिद्धों की घटी संख्या पर चिंता जताई जा रही है। कई मुल्कों ने तो डाइक्लोफिनाक पर रोक लगा रखा है। भारत में गिद्धों की घटती संख्या के लिए डाइक्लोफिनाक को जिम्मेदार माना जा रहा है। भारत सरकार ने भी डाइक्लोफिनाक का पशुओं पर इस्तेमाल प्रतिबंधित कर रखा है। गिद्धों की घटती संख्या पर सरकार भी काफी चिंतित है इसलिए इनके संरक्षण व प्रजनन के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। जिसमें विदेषों से भी मद्द मिल रहा है। ब्रिटिष संस्था रायल सोसाइटी आफ बर्ड प्रोटेक्शन ने इंडो-नेपाल बार्डर को ‘‘ डाइक्लोफिनाक फ्री जोन ’’ बनाने का बीड़ा उठाया है। जिसमें भारत व नेपाल की सरकारें सहयोग करेंगी। इस योजना के तहत दो किलोमीटर तक क्षेत्र को 2016 तक डाइक्लोफिनाक मुक्त करने का प्लान है। इसके लिए उत्त्र प्रदेष में पांच जोन बनाये गये हैं, जिसमें पीलीभीत-दुधवा क्षेत्र, बहराईच का कतरनिया घाट प्रभाग, बलरामपुर का सोहेलवा और महाराजगंज जिले का सोहागी बरवा क्षेत्र शामिल है।
तेजी से विलुप्त हो रहे गिद्धों को बचाने के लिए सरकार देष में तीन गिद्ध संरक्षण प्रजनन केन्द्र चला रही है, जो पिंजौर हरियाणा, राजाभातखावा पष्चिम बंगाल व रानी असम में स्थापित हैं। मगर ये सभी योजनाएं गिद्धों को बचाने में नाकाफी साबित हो रही हैं। जंगल के इस सफाईकर्मी की घटती संख्या से वन्य जीवों समेत मानव की जान पर खतरा मंडराने लगा है, जिससे वाइल्ड लाइफ प्रेमी काफी चिंतित हैं। मुल्क के शहरी व ग्रामीण इलाकों में अगर गिद्धों की चहल-पहल देखनी है तो इनके संरक्षण के लिए हमें आगे आना होगा। नही तो मानव का सच्चा हितैषी विलुप्त हो जाएगा और हमें तरह-तरह की भयंकर बीमारियों से दो चार होना पड़ेगा। जिसके लिए हम खुद जिम्मेदार होंगें।

एम. अफसर खां सागर
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युवा

रीतेश तोमर : भाजपा का युवा चेहरा


रीतेश तोमर भारतीय जनता पार्टी के उभरते हुए युवा नेता हैं। छात्र जीवन से राजनीति में कदम रखने वाले रीतेष अपने जुझारू व्यक्तित्व के बल पर भाजपा में विभिन्न पदों पर रहते हुए आज ह्यूमन राइट सेल में रा0 एक्जीक्यूटिव मेम्बर हैं साथ ही दिल्ली भाजपा के संवाद सेल में सह-संयोजक की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं। इनका जन्म 9 अक्टूर 1984 को मेरठ के मुण्डाली गांव में हुआ। शुरूवाती शिक्षा मेरठ में हुई उसके बाद नोएडा से बी. टेक किया। इनका बचपन संघ के गोद में बीता तथा 2004 से भारतीय जनता युवा मोर्चा के सक्रीय सदस्य के रूप में पार्टी के लिए काम किया। फ्रैंस आफ बीजेपी के बैनर तले पूरे भारत में मूहीम चलया गया जिसमें रीतेष ने सम्पूर्ण उत्तर प्रदेष में सम्मेलन कर युवाओं को भाजपा से जोडने का सफल प्रयास किया। उत्तर प्रदेश के विधासभा चुनाव में भी रीतेश ने मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, नोएडा, वाराणसी समेत विभिन्न जगहो पर भाजपा के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया।
रीतेश का मानना है कि जरूरतमन्दों और गरीबों की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। इनकी सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होता है तथा मन को शान्ति मिलता है। मेरा प्रयास रहता है कि हर उस व्यक्ति के मदद के लिए पहुंचू जो परेशान और गरीब है। इसीलिए तो इन्होने मेरठ, नोएडा गेटर नोएडा समेत विभिन्न क्षेत्रों में गरीबों में कम्बल, साडी दवा मुफत वितरित करवाया। समय-समय पर ये गरब बस्तियों में मेडिकल कैंप का आयोजन करवातें हैं।
देषभक्ति के जज्बे से लबेरेज रीतेष भ्रष्टाचार के खिलाफ कई मुहीम छेड चुके हैं। भाजपा का उभरता युवा चेहरा रीतेश की सोच भारत को बुनन्दियों पर ले जाने वाली है। तकनीकी शिक्षा में निपुण यह युवा अपने साथ हजारों युवाओं का काफीला लेकर चल रहा है जिसके जीवन का उददेश्य भारत की तस्वीर के साथ तकदीर बदलने वाली है। फिल्वक्त रीतेश दिल्ली एमसीडी चुनाव में भाजपा के लिए धुआंधार प्रचार कर रहे हैं, इनकी सभाओं में युवाओं का रेला उमड रहा है।
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (37) Truth Only

अस्-सलामु अलैकुम व ओउम् शांति !

दोस्तो! धर्म और संस्कृति ने बताया है कि ‘झूठ बोलना पाप है‘ और पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब स. ने सिखाया है कि झूठ बोलने से आदमी ईमान की हालत में नहीं रहता। 
ग़र्ज़ यह कि काशी से काबा तक यही एक शिक्षा है कि झूठ का त्याग करो और सत्य का अनुसरण करो। 
भारत जब विश्व गुरू था तो हमारा तरीक़ा यही था।
विश्व को हमें यही पाठ पढ़ाना है लेकिन इससे पहले यह पाठ हमें ख़ुद भी दोहराना होगा।
एक अप्रैल के मौक़े पर जम कर झूठ बोला गया।
यह दुखद घटना हिंदी ब्लॉग्स पर भी देखी गई।
अंग्रेज़ अप्रैल फ़ूल मनाते हैं तो इंडियन ब्लॉगर्स की ज़िम्मेदारी यह है कि उन्हें सच्चाई और सदाचार की शिक्षा दी जाए न कि उनके पाप की दलदल में ख़ुद भी छलांग लगा दी जाए।
धर्म संस्कृति की श्रेष्ठता के गुणगायक भी यही करते नज़र आए।
सद्-गुण हमारे जीवन व्यवहार का हिस्सा बनें,
यही हमारा संदेश है और यही हमारा अभियान है।

श्रेष्ठ मार्ग पर चलने और चलाने के लिए कटिबद्ध है आपका प्यारा मंच

‘हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल‘ HBFI
ब्लॉगर्स मीट के इस ख़ास मौक़े पर आज जनाब दिनेश गुप्ता ‘रविकर‘ जी भी हमारे साथ हैं।
उनके चुनाव ने इस मीट में बेशक चार चांद लगा दिए हैं।
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पहले देखते हैं रविकर जी का सेलेक्शन
श्रेष्ठ जनों का अनुसरण, अर्गल अनवर रूप ।
रविकर का सौभाग्य है, आया अतिथि स्वरूप ।

आया अतिथि स्वरूप, आप की किरपा चाहूँ ।
रहा कूप-मंडूक,  तुच्छ अदना सा पाहू ।

  "रविकर" चर्चा मंच, प्यार है मेरा पहला ।
आया ब्लागर्स मीट,  ताकता रूप सुनहला ।।   


Bashir Badr's poetry: Voh duroodoN ke, salaamoN ke nagar yaad aaye....


















वोह दुरूदों के सलामों के नगर याद आये 
नातें पढ़ते हुए क़स्बात के घर याद आये 
[Naat=poety in Prophet Muhammad's praise]


शाम के बाद कचेहरी का थका सन्नाटा
बेगुनाही को अदालत के हुनर याद आये 


घर की मस्जिद में वोह नूरानी अज़ान से चेहरे 
खानकाहों में दुआओं के शजर याद आये 


मेरे सीने में कोई सांस चुभा करती है
जैसे मजदूर को परदेस में घर याद आये


कितने ख़त आये गए शाख में फूलों की तरह
आज दरया में चिरागों के सफ़र याद आये

बशीर बद्र
 (१)
  डॉ. अनवर जमाल Blog News  पर
१०० चुनिन्दा हिंदी ब्लॉग परिकल्पना पर देखें : परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-2011 (भाग-10) *वर्ष-2011 के 100 ब्लॉग* *इसी के साथ परिकल्पना वार्षिक ब्लॉग विश्लेषण के कार्यों को संपन्न किया जा रहा है, * * *
(२)
धारा-प्रवाह गुरु गाते हैं ,
सस्नेह अर्थ समझाते हैं ।
सुख में तो सब जी लेते 
दुःख में वे राह दिखाते हैं  ।

गंभीर धीर गुणवान प्रभु-
अनुभव को शीश झुकाते हैं ।
दुःख का विष-गरल पियो ऐसे-
शिव-शंकर ज्यों पी जाते हैं ।।
(३)
Naaz
दो राहे पर चाँदनी, चकित थकित सा सोम ।
  सूर्य धरा के फेर से, कैसे निपटूं व्योम ??

कैसे निपटूं व्योम, धरा का टुकड़ा प्यारा ।
रहा अनवरत घूम, सूर्य का मिला सहारा ।

रविकर का एहसान, जगत सारा जो चाहे ।
बड़ा धरा का मान, खड़ा बेबस दोराहे ।।
(४)
मुद्राएँ या भंगिमा, चंचल चित्त प्रदर्श ।
उत्तेजित क्रोधित बदन, चाहे होवे हर्ष ।

चाहे होवे हर्ष, वर्ष भर भरे कुलांचें  ।
तनिक हुआ आकर्ष, रोज वो सिर पर नाचें ।

रविकर साला का' न्ट , आप की हो ली होली ।
खुशियाँ सबको बाँट, डाल के भँग की गोली ।।

(५)
अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
दिल के जोड़े से कहाँ, कृपण करेज जुड़ाय ।
सौ फीसद हो मामला, जाकर तभी अघाय । 

जाकर तभी अघाय, सीखना जारी रखिये ।
दर्दो-गम आनन्द, मस्त तैयारी रखिये ।

आई ना अलसाय, आईना क्यूँकर तोड़े ।
आएगी तड़पाय, बनेंगे दिल के जोड़े ।।
(६)
तीर्थ यात्रा न सही, सही यात्रा पीर ।
काशी में क्या त्यागना, बूढ़ा व्यर्थ शरीर ।

बूढा व्यर्थ शरीर, काम न किसी काज का ।
बढे दवा का खर्च, शत्रू  फल अनाज का ।

मैया मथुरा माय, मर मेहरा मेहरारू ।
वृद्धाश्रम भेज, सनक सुत *साला दारू।।
*घर / शाळा
(७)
य्ुवा पत्रकार और जनसत्ता के वरिष्ठ उपसंपादक फ़ज़ल इमाम मल्लिक को साल 2011 के लिए पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा गया है। नई दिल्ली के फिक्की सभागार में आयोजित एक समारोह में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें साल ...

(८)
  देवेन्द्र पाण्डेय  बेचैन आत्मा  पर
हम भटके बेचैनीमें तुम ठहरे हातिमताई। हम सहते कितनेलफड़े तुमने खड़ेखड़े बदलेकपड़े ! मेहरबानतुम पर रहती हरदम ही धरती माई। ना जनमलिया ना फूँका तन वैसे कावैसा ही मन कर डाला फिरसुंदर तन कहाँ सेसीखी ...

(९)
सलीम अख्तर सिद्दीकी 
रसोई गैस लेने वालों की गैस गोदाम पर सुबह छह बजे से लंबी लाइन लगी हुई थी। वक्त बढ़ने के साथ लाइन लंबी होती जा रही थी। लंबी लाइन देखकर देर से आने वाले लोगों के माथे पर शिकन पड़ रही थीं। सबक...

(१०)
 आमिर दुबई   मोहब्बत नामा - पर
*सलमान की मेरिज * जब सलमान खान लड़की देखने गया सलमान खान लड़की देखने गया लड़की की मां बेहोश हो गई, होश आया तो किसी ने पूछा क्या हुआ? *मां बोली :* 20 साल पहले ये मुझे भी देखने आया था।
(११)
posted by Asha Saxena at Akanksha 
आप को यह सूचित करते हुए मुझे बहुत हर्ष हो रहा है कि कल शनीवार दिनांक ३१.३.२०१२ को अपरान्ह ४.३० बजे होटल विक्रमादित्य, रिंग रोड चौराहा, नानाखेड़ा उज्जैन में मेरे कविता संग्रह "अनकहा सच " का विमोचन है, इस ...
आकाँक्षा पूरी करे, ईश्वर बड़ा महान । 
होय अनकहा सच सफल, बढे काव्य की शान ।

बढे काव्य की शान, हमारी आशा दीदी ।
हम भी हैं मेहमान, नेह का प्यासा दीदी ।

निपटाने कुछ काम, बड़ा एक्जाम जरुरी ।
महाकाल से विनय, करे आकाँक्षा पूरी ।।


(१२)
A

पेन में स्याही जबरदस्त, झल्ला जेहन स्याह ।
चुटका चुटकी में छपे,  मेधा रही कराह ।।

मोबाइल नेट दोस्ती,  रेस्टोरेंट जहीन ।
इम्तिहान बेहद खले, भूला मोट-महीन ।।

मुर्ग-मुसल्लम नोचता, आज नोचता बाल ।
शुतुरमुर्ग बन ताकता, किन्तु गले न दाल ।

पानी पी पी कोसता, प्रश्न-पत्र को घूर ।
थोड़ी भी ना नम्रता, शिक्षक सारे क्रूर ।

B
कासे कहूँ?
सारे दुःख की जड़ यही, रखें याद संजोय |
समय घाव न भर सका, आँखे रहें भिगोय ।

आँखे रहें भिगोय, नहीं मांगें छुटकारा  ।
सीमा में चुपचाप, मौन ही नाम पुकारा ।

रविकर पहला प्यार, हमेशा हृदय पुकारे ।
दिख जाये इक बार, मिटें दुःख मेरे सारे ।।


C

चीनी ड्रैगन लीलता, त्रिविष्टप संसार ।
दैव-शक्ति को पड़ेगा, पाना इससे पार ।

पाना इससे पार, मरे न गन से ड्रैगन ।
देखेगा गरनाल, तभी यह काँपे गन-गन ।

भरा पूर्ण घट-पाप,  दूंढ़ जग चाल महीनी ।
होय तभी यह  साफ़, बड़ी कडुवी यह चीनी ।।

गायत्री मंत्र रहस्य भाग 3 The mystery of Gayatri Mantra 3

 इस लेख का पिछला भाग यहां पढ़ें-
http://vedquran.blogspot.in/2012/03/3-mystery-of-gayatri-mantra-3.html

टंगड़ी मारे दुष्ट जन, सज्जन गिर गिर जाय ।
विद्वानों की बात को, दो दद्दा विसराय ।

 दो दद्दा विसराय, राय आस्था पर देना ।
रविकर नहीं सुहाय, नाव बालू में खेना ।

मिले सुफल मन दुग्ध, गाय हो चाहे लंगड़ी । 
वन्दनीय अति शुद्ध, मार ना "सर-मा" टंगड़ी ।।   



E

डॉ.  अनवर  जमाल  खान 
सबसे सच्चा है वही,  उससे बड़ा न कोय ।
 बादशाह के नूर से, चम्-चम् जीवन होय ।

चम्-चम् जीवन होय, बंदगी नियमित करिए ।
तन मन अपना खोय, सामने माथा धरिये ।

सबसे सच्चा दोस्त, समझ ले नादाँ बच्चा ।
कण कण में मौजूद, बादशाह रविकर सच्चा ।।
F

 नन्हे सुमन
बाबा को प्यारा लगे, मूल से ज्यादा सूद ।
एह्सासें फिर से वही, बालक रूप वजूद ।

 बालक रूप वजूद, मिली मन बाल सुन्दरी
संस्कार मजबूत, चढाते लाल चूनरी ।

मेला सर्कस देख,  चाट भी जमके चाबा ।
करें खटीमा मौज, साथ में दादी बाबा ।।

G
  रश्मि प्रभा...   वटवृक्ष पर   

नहीं  घोंसले में  लगा, मन को होता क्षोभ ।
तूफानों से डर रहा, या सजने का लोभ ।   

या सजने का लोभ, नीड़ की भीड़ गुमाए ।
जीवन का अस्तित्व, व्यर्थ ऐसे भी जाए ।

तिनके तनिक उबार,  डूबते  जहाँ  हौसले  ।
तिनके तिनके साथ, जरूरत नहीं घोंसले ।।




posted by Maheshwari kaneri at अभिव्यंजना 
रिश्ते रिसियाते रहे, हिरदय हाट बिकाय ।
परिचित बेगाने हुए, ख़ुशी हेतु भरमाय ।

ख़ुशी हेतु भरमाय, नहीं अंतर-मन देखा।
धर्म कर्म व्यवसाय, बदल ब्रह्मा का लेखा । 

  दीदी का उपदेश, सरल सा चलो समझते ।
दिल में रखे सहेज, कीमती पावन रिश्ते ।।
posted by RITU at कलमदान -
कलम माँगती दान है, कान्हा दया दिखाव ।
ऋतु आई है दीजिये, नव पल्लव की छाँव ।

नव पल्लव की छाँव, ध्यान का  द्योतक पीपल।
फिर से गोकुल गाँव, पाँव हो जाएँ चंचल ।

छेड़ो बंशी तान, चुनरिया प्रीत उढ़ाओ ।
रस्ता होवे पार, प्रभु उस नाव चढ़ाओ ।।


J
 क्यों फूलती है सांस?
साँसत में न जान हो, रखो साँस महफूज  ।
सूजे ब्रोंकाइल नली, गए फेफड़े सूज ।

 गए फेफड़े सूज, चिलम बीडी दम हुक्का ।
प्राण वायु घट जाय, लगे गर्दन में धक्का ।

रंगे हाथ फँस जाय, करे या धूर्त सियासत ।
उलटी साँस भराय, भेज दे जब *घर-साँसत ।
* काल-कोठरी
दर्शन जीवन का लिए, गीता-गीत-सँदेश |
अगर कुरेदे दिन बुरे, बाढ़े रोग-कलेश |

बाढ़े रोग-कलेश, आज को जीते जाओ |
जीते रविकर रेस, भूत-भावी विसराओ |


मध्यम चिंता-मग्न, जान जोखिम में डाले | |
दोनों ग्यानी मूर्ख, करें मस्ती मत वाले |

 

मोहन के बापू  हुवे, ज़रा हाथ से तंग ।।
मिली नसीहत शुक्रिया, शब्द-भाव से दंग ।

शब्द-भाव से दंग, रखी है  गिरवी लाठी ।
करे न सिस्टम भंग, सड़े चरखे संग *माठी । 
है केन्द्रक कमजोर, करें सब मिलकर दोहन ।
धरे हाथ पर हाथ, बैठ सोनी का मोहन ।   
*कपास की प्रकार 
M

राखा जंगल का सदा, जानवरों ने मान |
भंडारण करते नहीं, भूख लगे लें जान |


भूख लगे लें जान, नहीं थाना विद्यालय | 
भरे पेट पर व्यर्थ, शरारत झगड़ा टालय |


सुन रे तिकड़म बाज, मिटा तू  धरती खा-खा |
शीघ्र गिरेगी गाज, बचा तो हमने राखा |

N
posted by रवीन्द्र प्रभात at वटवृक्ष -

ये लहरें ही हैं असल, अन्तर्घट-हिल्लोल |

नेह-कंकरी करे नित, तन मन में किल्लोल ||


O

posted by मनोज कुमार at विचार

धर्म-ग्रन्थ पर आस्था, निष्ठा ज्ञान करम |

केवल हिरदय शुद्धता, सुमिरो ईश परम |

सुमिरो ईश परम, साध ले सीढ़ी सातों |

हो जाओ  इरफ़ान, नूर में उसके मातो |

सद-दर्शन पहचान, सत्य अनुभव निज-अंतर |

यही नशा ले जाय, बेखुदी तक हे रविकर ||

बहुत-बहुत आभार है, करते जो बर्दाश्त ।

पाठक गण के नेह से, प्रेम-परास्त ।।



...और अब पेश हैं ‘हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल‘ HBFI  की ताज़ा पोस्ट्स

  • Dr. Ayaz Ahmad

  • चुनौती जिन्दगी की: संघर्ष भरे वे दिन (१६), यह एक दमदार पोस्ट है.

    प्रस्तुतकर्ता: रेखा श्रीवास्तव जीवन के अलग अलग रंग होते हें और सबके संघर्ष का रंग भी अलग अलग होता है ...

    ब्लॉगर्स मीट वीकली (35) , पुरुष नारी सम्बन्ध तन मन और आत्मा तीनों स्तर पर


    ब्लॉगर्स  मीट वीकली (35) का ख़ास मौज़ू है प्रेम .क्या प्रेम आदमी की रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ा देता है ?
    साइको -सेक्स्युअलिटी और ओब्सेसिव कम्पल्सिव डिस-ऑर्डर की संक्षिप्त और सुन्दर व्याख्या भी यहाँ पर है .

     


  • DR. ANWER JAMAL

  • जानिये दिमाग क्या याद रखता है और क्या भूल जाता है ?

    भागदोड़ और बेहद व्यस्तताओं से भरी हुई आधुनिक जीवनशैली ने इंसान को शारीरिक रूप से ही नहीं, मन-मस्तिष्क के स्तर पर भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। 



    हरदोई/एजेंसी ! बेटी के हाथ पीले करने की खातिर किसी बाप को अगर पहले अपने हाथ पीले करने पडे़ तो यह सुनने में ही अजीब लगेगा...


    साथियों सबसे पहले हिंदू नव संवत्सर 2069 की शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए और पढ़िए एक उम्दा लेख ब्रह्मा जी ने ब्रह्म विद्या सिखाकर हमें मनुष्य बनाने का मिशन आज के दिन से शुरू किया था. 
    posted by DR. ANWER JAMAL
    Read More...

     

    शालिनी कौशिक

    बढ़ चलो ए जिंदगी

                           
    हर अँधेरे को मिटाकर बढ़ चलो ए जिंदगी 
    आगे बढ़कर ही तुम्हारा पूर्ण स्वप्न हो पायेगा. 
    गर उलझकर ही रहोगी उलझनों में इस कदर, 
    डूब जाओगी भंवर में कुछ न फिर हो पायेगा.

    श्यामल सुमन

    मच्छड़ का फिर क्या करें

      जीव मारना पाप है कहते हैं सब लोग।

    मच्छड़ का फिर क्या करें फैलाता जो रोग।।

    दुखित गधे ने एक दिन छोड़ दिया सब काम। 

    गलती करता आदमी लेता मेरा नाम।।

    चाहत

    लगे चुराने सपन हमारे, सुनहरे सपने सजाये रखना

    ख़तम तीरगी कभी तो होगी, चिराग दिल में जलाये रखना 


    अश्क बनकर बह गए

    भाव प्रायः जिन्दगी के, गीत मेरे कह गए

    अनकहे जो रह गए, वो अश्क बनकर बह गए 

    बात वो लिखना ज़रा

    भावना का जोश दिल में सीख लो रूकना ज़रा

    हो नजाकत वक्त की तो वक्त पे झुकना ज़रा

    मेरा फोटो

    टेलीपैथी सिखाने वाला एक नया हिन्दी ब्लॉग



    टेलीपैथी सिखाने वाला एक नया ब्लॉग अब हिन्दी में Easy Telepathy 
     RELAXATION EXERCISE BY WILLIAM HEWITT
    ब्रहमा जी जैसी महान हस्ती को आज ऐतिहासिक शख्सियत के बजाय केवल एक मिथकीय पात्र मानकर उनकी महत्ता को घटाया क्यों जाता है ? - हिंदी ब्लॉगर्स ने चैत्र मास से आरंभ होने वाले नवसमवत्सर पर लेख लिखे। हमने भी इस विषय पर लेख लिखा। चैत्र मास से आरंभ होने वाला यह कैलेंडर हिंदू वैज्ञानिकों न...
    - फेसबुक और जीमेल चैट में हिंदी टाइप कैसे करें ? ये एड ऑन सिर्फ फ़ायरफ़ॉक्स पर ही काम करेगा तो अपना फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउजर शुरू कीजिये और https://addons.mozilla... 
    ‘मुशायरा‘ ब्लॉग पर 3 ख़ास पेशकश

    मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

    मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत
    मिल जाएं जो पीरी में तो मिल सकती है जन्नत

    लाज़िम है ये हम पर कि करें उन की इताअत

    जो हुक्म दें हम को वो बजा लाएं उसी वक्त

    Patriotic Music in India and the Muslim Contribution

    AS we celebrate our 63rd Republic Day, let’s take a look at some Muslim contribution to patriotic songs in India over the years. The list is not exhaustive and considers only the more popular ones.

    डा. रूपचंद शास्त्री 'मयंक' जी

    डा. रूपचंद शास्त्री 'मयंक' जी
    सद्र (अध्यक्ष), महफ़िल ए मुशायरा

    हम बिना पंख उड़ के आयेंगे


     जो भी आगे कदम बढ़ायेंगे।
    फासलों को वही मिटायेंगे।।
     तुम हमें याद करोगे जब भी,
    हम बिना पंख उड़ के आयेंगे।

    विकलांग लड़की की पत्थर से शादी



    फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)।। इस वैज्ञानिक युग में भी समाज को अंधविश्वास की जकड़न से छुटकारा नहीं मिल पाया है। समाज को झकझोर देने वाला अंधविश्वास का नया मामला उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जनपद के एक गांव का है, जहां एक पिता अपनी विकलांग बेटी की शादी पत्थर से तय कर निमंत्रण पत्र भी बांट चुका है। शादी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और...
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    गायत्री मंत्र पर उठने वाली आपत्तियों का निराकरण करने वाली एक दुर्लभ लेखमाला ‘वेद क़ुरआन‘ ब्लॉग पर
    जिसे 24 साल से ज़्यादा अध्ययन करने के बाद लिखा गया है और जिसकी अहमियत को समझने वाले बहुत ही कम हैं

    एसपी रावत।। कुरुक्षेत्र।। आज के युग में बेटे-बेटियां अपने बूढे मां बाप को सहारा देने से कतराते हैं, लेकिन एक ऐसी बेसहारा मां भी है जो अपने अपाहिज बेटे का पिछले 45 साल से लालन पालन करने में लगी है। मगर अब खुद उसे अपनी जिंदगी पर भरोसा नहीं रहा तो वह उसके लिए अपने से पहले मौत मांग रही है।
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    जानिए सफलता का अटल विधान
    हाई स्कूल पास करते ही हमने पूरी जागरूकता के साथ फ़ैसला कर लिया था कि हम नेकी और ईमानदारी के साथ अपनी ज़िंदगी गुज़ारेंगे। बचपन से भी हम यही करते आए थे लेकिन वह एक आदत थी जो मां बाप को और घर के दूसरे लोगों को देखकर ख़ुद ही पड़ गई थी। अब अपनी राह ख़ुद चुननी थी और उस राह के अच्छे बुरे अंजाम को भी ख़ुद ही भोगना था। नौजवानी की उम्र एक ऐसा पड़ाव है,...
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    ....पत्नियां तो पति सही हो या गलत....उसका साथ देती ही है!...लेकिन ऐसे कितने पति होते है जो गलत होते हुए भी पत्नी का साथ देते है?...

    निर्मल बाबा का दरबार बोले तो लाफ्टर शो ...-महेंद्र श्रीवास्तव 


      मैं आपको बता दूं कि कुछ लोगों ने अपने निर्मल बाबा की कृपा को ही रोक लिया और उन्हें सवा करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। बात लुधियाना की है। बाबा को बैंक ने जो चेक बुक दी है, उसकी हूबहू कापी तैयार करके एक व्यक्ति ने सवा करोड़ रुपये बाबा के एकाउंट से निकाल लिया । हालाकि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गई है, पुलिस को फर्जीवाड़ा करने वालों की तलाश है। पर मेरा सवाल है कि जब बाबा के खुद के एंकाउंट में सेंधमारी हो गई और बाबा बेचारे कुछ नहीं कर पा रहे तो वो दूसरों के एकाउंट की रक्षा कैसे कर पाएंगे ?


    ...और अब मीट के अंत में यह भी देख लेना ज़रूरी है कि वेस्टर्नर्स   क्या कहते हैं सच के बारे में ?

    Islam: The Religion Of Truth by Abdur Raheem Green - YouTube

    In this video Abdul-Raheem Green explains some of the primary evidences for the truthfulness of Islam. How ...
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    अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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