चेतना

कहीं बस्ती गरीबों की कहीं धनवान बसते हैंसभी मजहब के मिलजुल के यहाँ इन्सान बसते हैंभला नफरत की चिन्गारी कहाँ से आ टपकती है,जहाँ पर राम बसते हैं वहीं रहमान बसते हैंकरे ईमान की बातें बहुत नादान होता हैमिले प्रायः उसे आदर बहुत बेईमान होता हैयही क्या कम है अचरज कि अभीतक तंत्र जिन्दा है,बुजुर्गों के विचारों का बहुत अपमान होता हैसभी कहते भला जिसको बहुत सहता है बेचारादया का भाव गर दिल में तो कहलाता है बेचाराहै शोहरत आज उसकी जो नियम को तोड़ के चलते,नियम...
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जाने किस उम्मीद के दर पे खड़ा था. बंद दरवाज़े को दस्तक दे रहा था. कोई मंजिल थी, न कोई रास्ता था उम्र भर यूं ही भटकता फिर रहा था. वो सितारों का चलन बतला रहे थे मैं हथेली की लकीरों से खफा था. मेरे अंदर एक सुनामी उठ रही थी फिर ज़मीं की तह में कोई ज़लज़ला था. इसलिए मैं लौटकर वापस न आया अब न आना इस तरफ, उसने कहा था. और किसकी ओर मैं उंगली उठाता मेरा साया ही मेरे पीछे पड़ा था. हमने देखा था उसे सूली पे चढ़ते झूठ की नगरी में जो सच बोलता था. उम्रभर जिसके लिए तड़पा हूं गौतम दो घडी पहलू में आ जाता तो क्या था. ----देवेंद्र गौतम

जाने किस उम्मीद के दर पे खड़ा था.बंद दरवाज़े को दस्तक दे रहा था. कोई मंजिल थी, न कोई रास्ता थाउम्र भर  यूं ही   भटकता फिर रहा था. वो सितारों का चलन बतला रहे थेमैं हथेली की लकीरों से खफा था. मेरे अंदर एक सुनामी उठ रही थीफिर ज़मीं की तह में कोई ज़लज़ला था. इसलिए मैं लौटकर वापस न आयाअब न आना इस तरफ, उसने कहा था. और किसकी ओर मैं उंगली उठातामेरा साया ही मेरे पीछे पड़ा था. हमने देखा था उसे सूली पे चढ़तेझूठ की नगरी में...
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fact n figure: अपना ही गिरेबां भूल गए निर्मल बाबा

आज तक चैनल पर निर्मल बाबा का इंटरभ्यू उनपर लगे आरोपों का खंडन नहीं बन पाया. किसी सवाल का वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके. इस दौरान उनके चेहरे पर नज़र आती बौखलाहट इस बात की चुगली खा रही थी कि वे कोई पहुंचे हुए महात्मा नहीं बल्कि एक साधारण व्यापारी हैं. एक साधारण मनुष्य जो प्रशंसा से खुश और निंदा से दुखी होता है. जिसे राग, द्वेष जैसी वृतियां प्रभावित करती हैं. वे आरोपों का शांति से जवाब नहीं दे सके. यदि उनकी छठी इन्द्रिय सक्रिय है तो क्या...
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fact n figure: कृपा के कारोबार में टीवी चैनलों की भूमिका

निर्मल बाबा का ईश कृपा का कारोबार पूरी तरह इलेक्ट्रोनिक मीडिया की बदौलत चल रहा है. प्रिंट मीडिया ने साथ उनका कोई लेना देना नहीं रहा. प्रिंट और इंटरनेट मीडिया ने जब उनकी तरफ निगाह डाली तो उनके तीसरे नेत्र का भरम खुलने लगा. अब इस बात पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है कि टीवी चैनलों को किराये पर टाइम स्लॉट देने के पहले पात्र-कुपात्र पर विचार करना चाहिए या नहीं. एक निर्धारित कीमत पर यह किसी को किसी तरह के कार्यक्रम के लिए दे दिया जाना...
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fact n figure: निर्मल बाबा के विरोध का सच

निर्मल बाबा की पृष्ठभूमि खंगाली जा रही है. प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया और इन्टरनेट मीडिया तक ने उनके विरुद्ध हल्ला बोल दिया है. हालांकि लखनऊ के दो बच्चों को छोड़ दें तो अभी तक किसी आम नागरिक ने उनके विरुद्ध कहीं कोई शिकायत दर्ज करने का प्रयास नहीं किया है. फिर भी मीडिया के लोगों ने आम लोगों की आंखें खोलने के अपने कर्तव्य का पालन किया है. मीडिया के लोग आम तौर पर विज्ञापनदाताओं की जायज़-नाजायज़ सभी हरकतों को संरक्षण दिया करते हैं....
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हमने बादल देख के मटके फोड़ लिए थे

डा. ताबिश महदी के एज़ाज़ में  ग़ालिब एकेडमी दिल्ली में ४ अप्रैल को एक मुशायरा संपन्न हुआ . वहां यह शेर कहा गया. तुम से मिल कर सबसे नाते तोड़ लिए थे हमने बादल देख के मटके फोड़ लिए थे -मुईन शादाब...
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सितारा बन जगमगाते रहो

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो,रात काली सही कोई गम न करो ।एक सितारा बनो जगमगाते रहो,जिंदगी मेँ सदा मुस्कुराते रहो...
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सितारा बन जगमगाते रहो

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो ,रात काली सही कोई गम न करो...
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'बुनियाद' ब्लॉग पर डा. अनवर जमाल की कुछ ताज़ा पोस्ट्स Best Hindi Blogs

ताज़ा पोस्टबुनियाद   3 ख़ास पेशकश डा. अनवर जमाल ख़ान  ...
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अखबारों का छपना देखा

मुस्कानों में बात कहोचाहे दिन या रात कहोचाल चलो शतरंजी ऐसीशह दे कर के मात कहोजो कहते हैं राम नहींउनको समझो काम नहींयाद कहाँ भूखे लोगों कोउनका कोई नाम नहींअखबारों का छपना देखालगा भयानक सपना देखाकितना खोजा भीड़ में जाकरमगर कोई न अपना देखामिलते हैं भगवान् नहींआज नेक सुलतान नहींबाहर की बातों को छोडोमैं खुद भी इंसान नहींअनबन से क्या मिलता हैजीवन व्यर्थ में हिलता हैभूलो दुख और खुशी समेटोसुमन खुशी से खिलता...
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (38) Human Nature

अस्-सलामु अलैकुम और ओउम् शांति के बाद, आप सभी का हार्दिक स्वागत है हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल की ताज़ा पोस्ट्स के साथ   डॉ. श्यामल सुमनभाई से प्रतिघात करोमजबूरी का नाम न लो मजबूरों से काम न लो वक्त का पहिया घूम रहा है व्यर्थ कोई इल्जाम न लो  खुदा भी क्या मौसम देते हैंखुशियाँ जिनको हम देते हैंवो बदले में गम देते हैंजख्म...
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भाई से प्रतिघात करो

मजबूरी का नाम न लो मजबूरों से काम न लो वक्त का पहिया घूम रहा है व्यर्थ कोई इल्जाम न लो धर्म, जगत - श्रृंगार है पर कुछ का व्यापार है धर्म सामने पर पीछे में मचा हुआ व्यभिचार है क्या जीना आसान है नीति नियम भगवान है न्याय कहाँ नैसर्गिक मिलता भ्रष्टों का उत्थान है रामायण की बात करो भाई से प्रतिघात करो टूट रहे हैं रिश्ते सारे कारण भी तो ज्ञात करो सुमन सभी संजोगी हैं कहते मगर वियोगी हैं हृदय-भाव की गहराई में घने स्वार्थ के रोगी ...
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गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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  • - कहीं भी अपनी भाषा में टंकण (Typing) करें - Google Input Toolsप्रयोगकर्ता को मात्र अंग्रेजी वर्णों में लिखना है जिसप्रकार से वह शब्द बोला जाता है और गूगल इन...
    12 years ago

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