चेतना

कहीं बस्ती गरीबों की कहीं धनवान बसते हैं
सभी मजहब के मिलजुल के यहाँ इन्सान बसते हैं
भला नफरत की चिन्गारी कहाँ से आ टपकती है,
जहाँ पर राम बसते हैं वहीं रहमान बसते हैं

करे ईमान की बातें बहुत नादान होता है
मिले प्रायः उसे आदर बहुत बेईमान होता है
यही क्या कम है अचरज कि अभीतक तंत्र जिन्दा है,
बुजुर्गों के विचारों का बहुत अपमान होता है

सभी कहते भला जिसको बहुत सहता है बेचारा
दया का भाव गर दिल में तो कहलाता है बेचारा
है शोहरत आज उसकी जो नियम को तोड़ के चलते,
नियम पे चलने वाला क्यों बना रहता है बेचारा

अलग रंगों की ये दुनिया बहुत न्यारी सी लगती है
बसी जो आँख में सूरत बहुत प्यारी सी लगती है
अलग होते सुमन लेकिन सभी का एक उपवन है,
कई मजहब की ये दुनिया अलग क्यारी सी लगती है
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जाने किस उम्मीद के दर पे खड़ा था. बंद दरवाज़े को दस्तक दे रहा था. कोई मंजिल थी, न कोई रास्ता था उम्र भर यूं ही भटकता फिर रहा था. वो सितारों का चलन बतला रहे थे मैं हथेली की लकीरों से खफा था. मेरे अंदर एक सुनामी उठ रही थी फिर ज़मीं की तह में कोई ज़लज़ला था. इसलिए मैं लौटकर वापस न आया अब न आना इस तरफ, उसने कहा था. और किसकी ओर मैं उंगली उठाता मेरा साया ही मेरे पीछे पड़ा था. हमने देखा था उसे सूली पे चढ़ते झूठ की नगरी में जो सच बोलता था. उम्रभर जिसके लिए तड़पा हूं गौतम दो घडी पहलू में आ जाता तो क्या था. ----देवेंद्र गौतम

जाने किस उम्मीद के दर पे खड़ा था.
बंद दरवाज़े को दस्तक दे रहा था.

कोई मंजिल थी, न कोई रास्ता था
उम्र भर  यूं ही   भटकता फिर रहा था.

वो सितारों का चलन बतला रहे थे
मैं हथेली की लकीरों से खफा था.



मेरे अंदर एक सुनामी उठ रही थी
फिर ज़मीं की तह में कोई ज़लज़ला था.

इसलिए मैं लौटकर वापस न आया
अब न आना इस तरफ, उसने कहा था.

और किसकी ओर मैं उंगली उठाता
मेरा साया ही मेरे पीछे पड़ा था.

हमने देखा था उसे सूली पे चढ़ते
झूठ की नगरी में जो सच बोलता था.

उम्रभर जिसके लिए तड़पा हूं गौतम
दो घडी पहलू में आ जाता तो क्या था.

----देवेंद्र गौतम

ग़ज़लगंगा.dg: बंद दरवाज़े को दस्तक दे रहा था:

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fact n figure: अपना ही गिरेबां भूल गए निर्मल बाबा

आज तक चैनल पर निर्मल बाबा का इंटरभ्यू उनपर लगे आरोपों का खंडन नहीं बन पाया. किसी सवाल का वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके. इस दौरान उनके चेहरे पर नज़र आती बौखलाहट इस बात की चुगली खा रही थी कि वे कोई पहुंचे हुए महात्मा नहीं बल्कि एक साधारण व्यापारी हैं. एक साधारण मनुष्य जो प्रशंसा से खुश और निंदा से दुखी होता है. जिसे राग, द्वेष जैसी वृतियां प्रभावित करती हैं. वे आरोपों का शांति से जवाब नहीं दे सके. यदि उनकी छठी इन्द्रिय सक्रिय है तो क्या उन्हें इस बात का पहले से इल्हाम नहीं हो जाना चाहिए था कि वे विवादों से घिरने जा रहे हैं. इल्हाम होता तो वे इसका सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होते और चेहरे पर कोई भाव आये बिना इसके निराकरण का मार्ग तलाश लेते. विवाद उठने के बाद दो दिनों तक उनका चुप्पी साध लेना इस बात को इंगित करता हुआ कि जो कुछ हुआ वह उनके लिए अप्रत्याशित था. उनका इंटरभ्यू देखने के बाद मुझे मजाज़ का एक शेर याद आ गया-
'सबका तो मुदावा कर डाला अपना ही मुदावा कर न सके 
सबके तो गिरेबां सी डाले अपना ही गिरेबां भूल गए.'
जनाब! टीवी चैनलों पर प्रसारित होनेवाले अपने समागम के दौरान वे भक्तों की समस्याओं को सुनते और उनका हल बताते देखे जाते हैं. उनकी तीसरी आंख भक्त तक आती ईश्वरीय कृपा के मार्ग में आने वाली बाधाओं को देख लेती है.उसकी गति को माप लेती है और बाधा हटाने तथा गति बढ़ने के उपाय भी बता देती है लेकिन ईश्वर और स्वयं उनके बीच आनेवाले प्रश्नों का जरा भी आभास नहीं करा पायीं.उनका आधा-अधूरा जवाब तलाशने में भी उन्हें 48 घंटे से ज्यादा वक़्त लग गया. उनके प्रारंभिक जीवन की जो जानकारियां पिछले कई दिनों से विभिन्न माध्यमों से आ रही थीं उन्हें स्वयं अपने भक्तों के बीच रखने में उन्हें क्या परेशानी थी. अपने वेबसाईट पर इन बातों को रखने में हर्ज़ क्या था. यदि वे इंदर सिंह नामधारी के साले हैं और एक ज़माने में कई व्यवसाय कर विफल हो चुके हैं तो इसमें छुपाने जैसी क्या बात थी? उनहोंने स्वयं स्वीकार किया कि उनका टर्नओवर 248 करोड़ का है जिसका वे बाकायदा आयकर चुकाते हैं. भक्तों की दी हुई इस रकम पर सिर्फ उनका अधिकार है. टर्नओवर शब्द व्यवसाय जगत का है. अध्यात्म की दुनिया में टर्नओवर नहीं बल्कि चढ़ावा होता है. टर्नओवर शब्द का अपने मुंह से प्रयोग कर उन्होंने बतला दिया कि वे शुद्ध रूप से व्यापार कर रहे हैं और जो कमा रहे हैं उसका टैक्स जमा कर रहे हैं. वे अपने प्रचार पर खर्च कर रहे हैं और अपने नाम का एक भव्य मंदिर बनाना चाहते हैं ताकि उनके बाद भी भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती रहे. प्रतिवर्ष 248  करोड़ की रकम वे इसी मकसद से जमा कर रहे हैं. यह मंदिर कहां बन रहा है. इसपर क्या लागत आनी है इसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया. अपने किसी समागम में भी इसका जिक्र नहीं किया.बतलाते तो भक्तों को प्रसन्नता ही होती. अपने जीजा और दीदी पर भी उन्होंने आरोप लगाये. कोई संत इतना भावुक नहीं होता. वह तो अपने आप में मस्त रहता है. जाहिर है कि बाबाजी जिन बातों को छुपाना चाहते थे उनका खुलासा होने से परेशान हो उठे. उनकी पोल-पट्टी खुल गयी. यह अलग बात है कि उनकी लोकप्रियता पर इन बातों का कुछ खास असर नहीं पड़ेगा. उनकी दुकानदारी पहले की तरह चलती रहेगी क्योंकि यह भारत है जहां ज्यादा दिनों तक बातें याद नहीं रखी जातीं. जहां विश्वास उठते-उठते उठता है.

fact n figure: अपना ही गिरेबां भूल गए निर्मल बाबा:

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fact n figure: कृपा के कारोबार में टीवी चैनलों की भूमिका

निर्मल बाबा का ईश कृपा का कारोबार पूरी तरह इलेक्ट्रोनिक मीडिया की बदौलत चल रहा है. प्रिंट मीडिया ने साथ उनका कोई लेना देना नहीं रहा. प्रिंट और इंटरनेट मीडिया ने जब उनकी तरफ निगाह डाली तो उनके तीसरे नेत्र का भरम खुलने लगा. अब इस बात पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है कि टीवी चैनलों को किराये पर टाइम स्लॉट देने के पहले पात्र-कुपात्र पर विचार करना चाहिए या नहीं. एक निर्धारित कीमत पर यह किसी को किसी तरह के कार्यक्रम के लिए दे दिया जाना चाहिए या चैनल के संपादकीय विभाग को कार्यक्रम की रूपरेखा देखने के बाद सहमति-असहमति का अधिकार देने चाहिए और उसकी अनुशंसा को आवंटन का आधार बनाया जाना चाहिए. कोई आचार-संहिता होनी चाहिए या नहीं.
यदि निर्मल बाबा जैसे लोग रातो-रात लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच कर लोगों की पिछड़ी चेतना का लाभ उठाते हुए आर्थिक दोहन करने लगते हैं तो इसके लिए उपजाऊ ज़मीन मुहैय्या करने का काम टीवी चैनल ही तो करते हैं. भारत ऋषि-मुनियों का देश रहा है. यहां बड़े-बड़े संत महात्मा गुज़रे हैं. त्यागी भी और ढोंगी भी. आमलोग उनके बीच ज्यादा फर्क नहीं कर पाते. जिस तरह लोग अपने लिए उपयुक्त जन-प्रतिनिधि का चुनाव नहीं कर पाते उसी तरह सही आध्यात्मिक गुरु का भी चयन नहीं कर पाते. इसमें उनका नहीं भक्ति योग का दोष है जो अदृश्य शक्ति के सामने आत्म-समर्पण कर देने की शिक्षा देता है और राजा के दैवी को मान्यता दिलाता है. जन-मानस पर भक्तियोग का प्रबल प्रभाव नहीं होता तो निर्मल बाबा का ईश कृपा का कारोबार भी नहीं चलता. फिलहाल स्टार-न्यूज़ ने निर्मल बाबा का कार्यक्रम बंद करने की घोषणा की है लेकिन शेष 34 चैनल उनके विज्ञापन से होने वाले लाभ का मोह त्याग सकेंगे अथवा नहीं कहना कठिन है. इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने बाबागिरी के धंधे को चमकने का मौका दिया है. कई चैनल तो उनके मालिकाना अधिकार में हैं. लिहाज़ा मीडिया जगत के लिए यह आत्ममंथन का समय है. इसका उपयोग जन-चेतना को उन्नत करने के लिए हो या उसे पीछे धकेलने के लिए.

---देवेंद्र गौतम

fact n figure: कृपा के कारोबार में टीवी चैनलों की भूमिका:

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fact n figure: निर्मल बाबा के विरोध का सच

निर्मल बाबा की पृष्ठभूमि खंगाली जा रही है. प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया और इन्टरनेट मीडिया तक ने उनके विरुद्ध हल्ला बोल दिया है. हालांकि लखनऊ के दो बच्चों को छोड़ दें तो अभी तक किसी आम नागरिक ने उनके विरुद्ध कहीं कोई शिकायत दर्ज करने का प्रयास नहीं किया है. फिर भी मीडिया के लोगों ने आम लोगों की आंखें खोलने के अपने कर्तव्य का पालन किया है. मीडिया के लोग आम तौर पर विज्ञापनदाताओं की जायज़-नाजायज़ सभी हरकतों को संरक्षण दिया करते हैं. कितने ही काले कारनामों पर उन्होंने सफलतापूर्वक पर्दा  डाल रखा है. आज की तारीख में देश के दर्जनों बड़े पत्रकार कई घोटालों में संलग्न होने के आरोपी हैं. जांच एजेंसियों के पास इसके प्रमाण भी हैं लेकिन उनपर हाथ नहीं डाला जा रहा है. उनका लिहाज़ किया जा रहा है. निर्मल बाबा भी बड़े विज्ञापनदाता हैं. 35  चैनलों पर उनके विज्ञापन प्रसारित हो रहे हैं. यदि वे आमजन की अंधभक्ति का दोहन कर रहे हैं और ईशकृपा की मार्केटिंग कर रहे हैं तो मीडिया को उसका हिस्सा भी दे रहे हैं. उनकी गल्ती यही है कि 35  चैनलों के अलावा जो मीडिया घराने हैं उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं. ध्यान देते तो यह हमले या तो नहीं होते या फिर उनकी धार कुछ कमजोर होती.  
फिलहाल उनके प्रारंभिक जीवन के जो खुलासे हुए हैं उनमें कुछ भी आपत्तिजनक नज़र नहीं आता. झारखंड के चतरा के निर्दलीय सांसद इन्दर सिंह नामधारी का साला होना या पूर्व में कपडे का थोक व्यापार करना, ठेकेदारी करना कोई गुनाह नहीं है. वे कोई मंगल ग्रह से नहीं आये हैं कि धरती पर उनका कोई रिश्तेदार न हो. सोने का चम्मच लेकर नहीं पैदा हुए कि उन्हें जीवन में संघर्ष न करना पड़ा हो. ज्ञान चक्षु तो उम्र के किसी भी पड़ाव पर खुल सकते हैं. भगवान बुद्ध भी तो ज्ञान प्राप्त होने के पूर्व पत्नी और बच्चे को नींद में सोता छोड़ यानी अपनी जिम्मेवारियों को छोड़ कर भागे हुए एक कापुरुष ही कहे जा सकते हैं. लेकिन सुजाता के हांथों से खीर खाने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ तो वे महान और युग प्रवर्तक बन गए. बाद में उन्हें विष्णु का नवां अवतार तक मान लिया गया.
निर्मल बाबा जिस तीसरी आंख का दावा करते हैं उसकी वास्तविकता क्या है यह एक बहस का विषय हो सकता है. अभी तक हमारी जानकारी में भगवान शिव तीन नेत्रों वाले माने गए हैं. उनके तीसरे नेत्र के खुलने पर कामदेव भस्म हो गए थे. उनका यह नेत्र कभी-कभार ही खुलता था. निर्मल बाबा की मानें तो उनका यह नेत्र हमेशा खुला ही रहता है लेकिन किसी को भस्म करने के लिए नहीं भक्तों तक ईश कृपा के निर्वाध वितरण के लिए. वे अपने भक्तों को त्याग और संयम की शिक्षा नहीं देते. महंगी से महंगी चीजें खरीदने और ऐश के साथ जीने की सलाह देते हैं. वे अध्यात्म की नहीं भौतिक जीवन को बेहतर बनाने की बात करते हैं. भारत में भक्तियोग का बोलबाला है. लोग अपनी समस्याओं से निजात पाने के लिए किसी दैवी शक्ति के चमत्कार के इंतज़ार में रहते हैं. उनकी इसी कमजोरी का लाभ निर्मल बाबा जैसे लोग उठाते रहे हैं और जबतक भक्तियोग की जगह कर्मयोग या ज्ञानयोग का प्रचालन नहीं बढेगा उठाते रहेंगे. एक निर्मल बाबा जायेंगे दस पैदा होंगे. जनता के साथ इस तरह की ठगी का यदि कोई ह्रदय से विरोध करता है और सिर्फ टीआरपी या प्रसार संख्या बढ़ने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करते उन्हें जन चेतना को भक्तियोग से उबारने का प्रयास करना चाहिए.

----देवेंद्र गौतम 


fact n figure: निर्मल बाबा के विरोध का सच:

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हमने बादल देख के मटके फोड़ लिए थे

डा. ताबिश महदी के एज़ाज़ में  ग़ालिब एकेडमी दिल्ली में ४ अप्रैल को एक मुशायरा संपन्न हुआ . वहां यह शेर कहा गया.

तुम से मिल कर सबसे नाते तोड़ लिए थे
हमने बादल देख के मटके फोड़ लिए थे
-मुईन शादाब
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सितारा बन जगमगाते रहो

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो,
रात काली सही कोई गम न करो ।

एक सितारा बनो जगमगाते रहो,
जिंदगी मेँ सदा मुस्कुराते रहो ।
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सितारा बन जगमगाते रहो

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो ,
रात काली सही कोई गम न करो ।
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'बुनियाद' ब्लॉग पर डा. अनवर जमाल की कुछ ताज़ा पोस्ट्स Best Hindi Blogs

ताज़ा पोस्ट

बुनियाद
 
3 ख़ास पेशकश डा. अनवर जमाल ख़ान  Tuesday April 10, 2012 ‘मुशायरा‘ ब्लॉग पर 3 ख़ास पेशकश मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत मिल जाएं जो पीरी में तो मिल सकती है जन्नत लाज़िम है ये हम पर कि करें उन की इताअत जो हुक्म दें हम को वो बजा लाएं उसी वक्त ...

पत्नी चाहती क्या है? डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday April 07, 2012 पत्नी की संतुष्टि उसका स्वाभाविक अधिकार है Women's Natural Right वंदना गुप्ता जी ने हिंदी ब्लॉग जगत को एक पोस्ट दी है ‘संभलकर, विषय बोल्ड है‘ हमने उनकी इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा है कि वंदना गुप्ता जी ! आपने नर नारी...

संतुष्टि के उपाय ख़ुद नारी बताए डा. अनवर जमाल ख़ान  Friday April 06, 2012 वंदना गुप्ता जी का मानना है कि नारी की संतुष्टि के लिए अंतरंग संबंध बनाते समय पुरूष के लिए धैर्य परमावश्यक है। उनके इतना कहने मात्र से ही हिंदी ब्लॉग जगत में एक ज़बर्दस्त बहस का आग़ाज़ हो गया। वंदना गुप्ता जी को श्री कृष्ण जी की कथा वाचिका के रूप में...

ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं? डा. अनवर जमाल ख़ान  Thursday April 05, 2012 ब्रहमा जी जैसी महान हस्ती को आज ऐतिहासिक शख्सियत के बजाय केवल एक मिथकीय पात्र मानकर उनकी महत्ता को घटाया क्यों जाता है ? हिंदी ब्लॉगर्स ने चैत्र मास से आरंभ होने वाले नवसमवत्सर पर लेख लिखे। हमने भी इस विषय पर लेख लिखा। चैत्र मास से आरंभ होने वाला यह...

हिंदी वेबसाइट का मजा मोबाइल पर डा. अनवर जमाल ख़ान  Wednesday April 04, 2012 एक ख़ास तोहफ़ा मोबाइल पर इंटरनेट का लुत्फ़ उठाने वालों के लिए तकनीकी विशेषज्ञ दे रहे हैं जानकारी हिंदी वेबसाइट का मजा लीजिए मोबाईल पर अक्‍सर आपने  देखा होगा कि मोबाईल में कोई हिंदी की वेबसाईट खोलने पर डब्‍बे डब्‍बे से...

ब्रह्मा जी ने मनुष्य बनाया डा. अनवर जमाल ख़ान  Monday April 02, 2012 होली आकर जा चुकी है और नया हिन्दू वर्ष आरम्भ हो गया है . हिन्दू धर्म की मान्यता है कि ब्रह्मा ने चैत्र मास के प्रथम दिन प्रथम सूर्योदय होने पर की. 'Hindi Bloggers Forum International' की ओर से  विक्रमी संवत 2069 के शुभ आगमन पर नव...

सूफ़ी दर्शन (पहला सबक़) डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday March 31, 2012 सच्चे बादशाह से बातें कीजिए God hears. रूह में रब का नाम नक्श है। रूह सबकी एक ही है। जो भी पैदा होता है, उसी एक रूह का नूर लेकर पैदा होता है। रूह क्या है ? रब की सिफ़ाते कामिला का अक्स (सुंदर गुणों का प्रतिबिंब) है। सिफ़ाते कामिला को...

फ़ायदे ग्रीन टी के डा. अनवर जमाल ख़ान  Friday March 30, 2012 चाय आज हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा है , इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो इसके नुकसान से बचा जा सकता है . देखें एक रिपोर्ट: बुढ़ापे की दिक्कतों से बचा सकती है ग्रीन टी नीतू सिंह ॥ नई दिल्ली || अगर आप ...

लड़कियों,महिलाओं के लिए नैचरोपैथी डा. अनवर जमाल ख़ान  Tuesday March 27, 2012 लड़कियों और महिलाओं के लिए नैचरोपैथी में करिअर बनाना बहुत आसान भी है और बहुत लाभदायक भी. इसके ज़रिये वे खुद को और अपने परिवार को तंदरुस्त भी रख सकती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं. प्राकृतिक जीवन पद्धति है नैचरोपैथी Naturopathy...

सबका धर्म एक है डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday March 24, 2012 ‘सबका धर्म एक है, सम्पूर्ण मानव जाति एक है‘ - स्वामी ब्रजानंद जी महाराज God is One ‘सबका धर्म एक है, सम्पूर्ण मानव जाति एक है‘ विषय पर गोष्ठी का आयोजन जामिया उर्दू अलीगढ़ में विश्वस्तरीय ख्याति प्राप्त धर्मगुरू एवं...

नैचरोपैथी: एक प्राकृतिक जीवन पद्धति डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday March 24, 2012 प्राकृतिक जीवन पद्धति है नेचुरोपैथी Naturopathy in India नेचुरोपैथी सीखने के लिए हमने औपचारिक रूप से भी D.N.Y.S. किया है। आजकल धनी लोग इस पैथी की तरफ़ रूख़ भी कर रहे हैं। रूपया काफ़ी है इसमें। फ़ाइव स्टारनुमा अस्पताल तक खुल चुके हैं नेचुरोपैथी के और...

ज्योतिषियों-बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक डा. अनवर जमाल ख़ान  Wednesday March 21, 2012 भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक रोज़ी रोटी की तो क्या यहां हलवा पूरी की भी कोई समस्या नहीं है नज्म सितारे को कहते हैं और नूजूमी उसे जो सितारों की चाल से वाक़िफ़ हो। सितारों की चाल के असरात ज़मीन की आबो...

मूत्र मार्ग संक्रमण की रोकथाम UTI डा. अनवर जमाल ख़ान  Sunday March 18, 2012   मूत्र मार्ग संक्रमण मूत्र मार्ग संक्रमण जीवाणु जन्य संक्रमण है जिसमें मूत्र मार्ग का कोई भी भाग प्रभावित हो सकता है। हालाँकि मूत्र में तरह-तरह के द्रव एवं वर्ज्य पदार्थ होते है किंतु इसमें जीवाणु नहीं होते। यूटीआई से ग्रसित होने पर ...

राजनीतिक ब्लॉगर्स की औक़ात क्या है? डा. अनवर जमाल ख़ान  Friday March 16, 2012 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अब श्री अखिलेश यादव जी हैं। अखिलेश यादव जी की पार्टी के लिए हिंदी ब्लॉगर्स के बहुमत ने कोई आंदोलन नहीं चलाया इसके बावजूद उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाल रही है। उत्तराखंड की बागडोर भाजपा के हाथ से निकल गई है हालांकि...

अरब और हिंदुस्तान का ताल्लुक़- 1 डा. अनवर जमाल ख़ान  Thursday March 15, 2012 काबा वह पहला घर है जो मालिक की इबादत के लिए बनाया गया है। इसे हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने सबसे पहले बनाया था। आदम अलैहिस्सलाम को स्वयंभू मनु कहा जाता है। जब उनके बाद जल प्रलय आई तो उसका असर इस घर पर भी पड़ा था। इसके बाद हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने आज से ...
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अखबारों का छपना देखा

मुस्कानों में बात कहो
चाहे दिन या रात कहो
चाल चलो शतरंजी ऐसी
शह दे कर के मात कहो

जो कहते हैं राम नहीं
उनको समझो काम नहीं
याद कहाँ भूखे लोगों को
उनका कोई नाम नहीं

अखबारों का छपना देखा
लगा भयानक सपना देखा
कितना खोजा भीड़ में जाकर
मगर कोई न अपना देखा

मिलते हैं भगवान् नहीं
आज नेक सुलतान नहीं
बाहर की बातों को छोडो
मैं खुद भी इंसान नहीं

अनबन से क्या मिलता है
जीवन व्यर्थ में हिलता है
भूलो दुख और खुशी समेटो
सुमन खुशी से खिलता है
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (38) Human Nature



अस्-सलामु अलैकुम और ओउम् शांति के बाद,
आप सभी का हार्दिक स्वागत है
हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल की ताज़ा पोस्ट्स के साथ
  डॉ. श्यामल सुमन

भाई से प्रतिघात करो

मजबूरी का नाम न लो मजबूरों से काम न लो 

वक्त का पहिया घूम रहा है व्यर्थ कोई इल्जाम न लो  

खुदा भी क्या मौसम देते हैं

खुशियाँ जिनको हम देते हैंवो बदले में गम देते हैं

जख्म मिले हैं उनसे अक्सरहम जिनको मरहम देते हैं

अफ़सर पठान

जीव-जंतु


गायब होते गिद्धमुझे अच्छी तरह याद है, अभी कुछ ज्यादा अरसा भी नहीं गुजरा है गिद्ध बड़ी आसानी से दिखाई देते थें मगर आजा हालात बदल गये हैं, अब ढ़ूढ़ने से भी नहीं दिखते। हमारे घर के पीछे एक बड़ा तालाब है, जिसे गांव वाले न जाने क्यूं खरगस्सी कहते हैं

 

दर्द

 

राम तेरी गंगा मैली हो गयी..... इतिहास गवाह है कि विश्व की महान मानव सभ्यताओं का विकास नदीयों के किनारे हुआ है। हर काल में मानव सभ्यता के विकास में नदीयों से गहरा रिष्ता रहा है। बात चाहे सिन्धु नदी घाटी सम्यता का हो या अमेजन की अथवा नील नदी की लें ख मोक्षदायीनी गंगा को लें। हर स्थान व काल में मानव का नदीयों से माँ-पुत्र का रिष्ता रहा है।...
डा. अयाज़ अहमद

बोल्ड विषय पर संभलकर बोलना चाहिए


वंदना गुप्ता ने मियां बीवी के ताल्लुकात खुशगवार बनाने के लिए कुछ टिप्स दिए तो श्याम गुप्ता को बुरा क्यों लगा ? और बुरा लग भी गया तो श्याम जी भड़क क्यों गए ? मैं तो समझ नहीं पाया . कोई समझा हो तो वह श्याम गुप्ता को समझा दे कि समाज में सभ्यता के साथ कैसे रहा जाता है ?,  खासकर हिन्दी ब्लॉग जगत में. बोल्ड विषय पर संभलकर बोलना चाहिए...
दोस्तो ! डा. अयाज़ अहमद साहब की पोस्ट पेश करने के साथ ही यह बता देना भी ज़रूरी है कि यह हफ़्ता वंदना जी की पोस्ट का मुददा ही हिंदी ब्लॉगर्स के दरम्यान सबसे ज़्यादा चर्चित रहा है।
देखिए ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर

संभोग रहस्य - Vandana Gupta 




वंदना गुप्ता जी का मानना है कि नारी संतुष्टि के लिए संभोग में पुरूष का धैर्य आवश्यक है। यह संभवतः पहला मौक़ा है जबकि हिंदी ब्लॉग जगत में किस



एक नारी ने नर-नारी के जटिल संबंधों को देखा और उनमें मौजूद मुख्य समस्या नारी की संतुष्टि के विषय पर उस नारी ने ही समाधान भी दिया। जिसका स्वा
(मनोज कुमार)



एक अच्छी रचना देने के लिए आपका शुक्रिया . रब ने हमें एक सुंदर शरीर दिया, आत्मा दी और वह सब कुछ दिया जिसके ज़रिये हम उसे पा सकते हैं। ...
ऑल इंडिया ब्लॉगर्स असोसिएशन

‘संभलकर, विषय बोल्ड है‘ पर टिप्पणी

वंदना गुप्ता जी ! आपने नर नारी संबंधों के क्रियात्मक पक्ष की जानकारी बहुत साफ़ शब्दों में दी है। यह सबके काम आएगी। तश्बीह, तम्सील और बिम्बों के ज़रिये कही गई बात को केवल विद्वान ही समझ पाते हैं और फिर उनके अर्थ भी हरेक आदमी अलग अलग ले लेता है। 

वंदना गुप्ता जी की पोस्ट से ध्यान हटाने की कोशिश करते हुए ख़ुशदीप सहगल जी ने जो कोशिश की,
वह ख़ुद एक मुददा बन गई।

मां बाप का आदर करना सीखिए Manu means Adam

 



बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​ के सन्दर्भ में   ख़ुशदीप सहगल किसी ब्लॉग पर अपनी मां का काल्पनिक नंगा फ़ोटो देखें तो उन्हें...
@ ख़ुशदीप जी ! सारे इंटरप्रेटेशन से अलग हटकर भी क्या आप यह बात नहीं जानते कि मुसलमान ... नबियों के चुटकुले नहीं बनाते यह बात आप जानते हैं न ?
यह बात जानने के बाद भी आपने चुटकुला यहां पब्लिश किया और नंगे फ़ोटो के साथ पब्लिश किया। 

पुरखों के सम्मान से, जुडी हुई हर चीज ।
अति-पावन है पूज्य है, मानवता का बीज ।
मानवता का बीज, उड़ाना हँसी ना पगले ।
करे अगर यह कर्म, हँसेंगे मानव अगले ।  
पढो लिखो इतिहास, पाँच शतकों के पहले ।
आदम-मनु हैं एक, बाप अपना भी कह ले ।



ख़ुशदीप जी ने हमारे ऐतराज़ के बाद पहले तो टाल मटोल का रवैया अपनाया लेकिन जब हमने ब्लॉग जगत में कई मंचों पर यह मुददा उठाया तो फिर उन्होंने

दो बेहतरीन पोस्ट
‘बड़ा ब्लॉगर कैसे बनें ?‘ पर

बड़ा ब्लॉगर वह है जो दुनिया जहान का विश्लेषण करता है Real Blogger

आदमी की सहज वृत्ति है कि वह सदा दूसरों का विश्लेषण करता है।
जब वह ब्लॉगिंग में आता है तो अपनी यह आदत भी साथ लेकर आता है।
एकलव्य कितना ही बड़ा धनुर्धर हो लेकिन उसके पक्ष में खड़ा होने की परंपरा यहां है ही नहीं। राजपाट हार जाएं तो ख़ुद पांडवों के साथ भी कोई खड़ा नहीं होता बल्कि वे ख़ुद भी अपनी पत्नी द्रौपदी के पक्ष में खड़े नहीं होते।
खड़े होने से पहले लोग यह देखते हैं कि इसके साथ खड़े होकर हमें क्या ईनाम मिलेगा ?


गीता पर चलिए और बड़ा ब्लॉगर बनिए Gita as a bloggers' guide

प्यारे छात्रों ! आज के लेक्चर में आपके सामने मानव प्रकृति का एक सनातन रहस्य अनावृत होने जा रहा है। इसे विशुद्ध प्रोफ़ेशनल दृष्टि से समझने और आत्मसात करने की आवश्यकता है।

भारतीय दर्शन 6 हैं जो कि न्याय, सांख्य, वैशेषिक, योग दर्शन, पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा दर्शन हैं। उत्तर मीमांसा दर्शन को ही वेदान्त दर्शन कहा जाता है। ये सभी दर्शन क्लिष्ट और गूढ़ हैं। गीता इन सबका सरल और समन्वित रूप है।
युद्ध की भांति ही सेक्स भी मनुष्य को आदिकाल से ही आकर्षित करता रहा है। इसके सटीक इस्तेमाल से भी आप एक बड़ा ब्लॉगर बन सकते हैं। आगामी किसी क्लास में इस विषय पर भी लेक्चर अवश्य दिया जाएगा।

कुछ हिंदी ब्लॉगर्स के बारे में वंदना गुप्ता जी की ताज़ा पोस्ट
जिन्होंने उनका विरोध नहीं किया बल्कि उनसे रंजिश निकालीण्
वह कहती हैं-


हिंदी ब्लॉगिंग के गिरते हुए स्तर पर अलबेला खत्री जी भी चिंतित हैं।
कहते हैं कि
महात्मा गाँधी की  एक अत्यंत  उपयोगी और सार्थक  सूक्ति  पोस्ट की तो 

उसे पाठक मिले कुल  आठ  और  एक दिन पहले  घटिया सी पोस्ट लगाई 

तो अब तक उसे पाठक मिले 1081 ...
भारतीय नारी ब्लॉग पर कहा जा रहा है कि
पुरुष ब्लोगर्स आत्म निरीक्षण अवश्य करें ! - पुरुष ब्लोगर्स आत्म निरीक्षण अवश्य करें ! सभी पुरुष ब्लोगर्स से आज इस मंच के माध्यम से यही कहना चाहती हूँ कि किसी भी महिला ब्लोगर के साथ ऐसा व्यवहा...
दूसरी तरफ़ अलबेला खत्री जी पुरानी बात को नए अंदाज़ में दोहरा रहे हैं

वन्दना करूँ, तुम्हारी वन्दना करूँ , ऐसी करूँ वन्दना कि बन्द ना करूँ 

कोमल है, शीतल है, सुन्दर संरचना 

प्रभु ने बनाया तुम्हें  अनुपम  रचना  

भीड़ है लुटेरों की, तू  लुटने से बचना 

तेरी इच्छा के विरुद्ध करे कोई टच ना 

तेरा  अपमान मैं  पसन्द  ना करूँ 

वन्दना करूँ,  तुम्हारी वन्दना करूँ... 

 

 हास्यकवि अलबेला खत्री

बच्चों की समस्या किसी तरह ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही है


राहत इंदौरी साहब ने शायरी को इबादत बना लिया है और इबादत भी किसी पहुँचे हुए फ़क़ीर जैसी।

सब अपनी-अपनी ज़ुबां में अपने रसूल का ज़िक्र कर रहे हैं
फ़लक पे तारे चमक रहे हैं, शजर पे पत्ते खड़क रहे हैं

ऐसे शे’र कहते वक़्त शायर रुहानीयत के शिखर पर पहुँच जाता है और फिर उसके अल्फ़ाज़ सचमुच जी उठते हैं।

मुलाहिज़ा कीजिए -


मेरे पैयंबर का नाम है जो , मेरी ज़बां पर चमक रहा है

गले से किरनें निकल रही हैं,लबों से ज़म-ज़म टपक रहा है

मैं रात के आख़री पहर में, जब आपकी नात लिख रहा था

लगा के अल्फ़ाज़ जी उठे हैं , लगा के कागज़ धधक रहा है

सब अपनी-अपनी ज़ुबां में अपने रसूल का ज़िक्र कर रहे हैं

फ़लक पे तारे चमक रहे हैं, शजर पे पत्ते खड़क रहे हैं

मेरे नबी की दुआएँ हैं ये , मेरे ख़ुदा की अताएँ हैं ये

कि खुश्क मिट्टी का ठीकरा भी , हयात बनकर खनक रहा है

जन्मदिन मेरा नहीं, बल्कि मेरे ब्लाग " आधा सच " का है।
 


दहशत और चुनौती से भरी वह एक रात


आज यह् सारा वाकया एक कहानी की तरह लग रहा है लेकिन जब मैं इस अनुभव से गुजरी थी और उस वक्त मुझ पर जो बीती थी ईश्वर से प्रार्थना है ऐसा दिन वह किसीको ना दिखाये ! 

पर्वत की महिलाएँ,
हँसिया लेकर जंगल जातीं।
पेड़ों से सूखी शाखाएँ,
काट-काटकर लातीं।।

थकान-करे बेकाम

एक भाभीजी थी काफी उदास
उनकी शिकायत थी,कि जब उनके पति,
जब  घर आते है,
दिन भर ऑफिस में काम करने के बाद
तो शाम को किसी भी काम के नहीं रह जाते है
न बाज़ार से सब्जी लाते है
न होटल में खिलाते है
बस थके हारे,खर्राटे भरते हुए सो जाते है
अब उन्हें ये कौन बताये,
वो ओफिस मे क्या क्या गुल खिलाते है
और शाम तक होती क्यों,ऐसी हालत है
क्योंकि उनकी सेक्रेटरी के पति को भो,
अपनी पत्नी से ,ये ही शिकायत है
 

वात्स्यायन थे 'पुरुषवादी',अब नया कामसूत्र

वात्स्यायन के कामसूत्र को अब महिलाओं के नजरिए से लिखने की कोशिश हो रही है। यह पहल की है लेखिक के. आर. इंदिरा ने। महिलाओं को कामसूत्र का पाठ पढ़ाने वाली उनकी किताब जून के पहले हफ्ते में रिलीज़ होगी।
इंदिरा का मानना है कि वात्स्यायन के कामसूत्र को पुरुषों के नजरिए से लिखा गया है।
 
जिसमें बताया गया है कि महिलाओं का कैसे इस्तेमाल किया जाए।


बेसुरम ब्लॉग पर 

उल्लू गधा कहो या रविकर

विद्वानों से डर लगता है , उनकी बात समझना मुश्किल ।
आशु-कवि कह देते पहले, भटकाते फिर पंडित बे-दिल ।
आर्य भोजन ब्लॉग पर 

गुड फूड-बैड फूड Good Food & Bad Food

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खाते तो सभी हैं। कुछ जीभ (स्वाद) के लिए खाते हैं तो कुछ पेट (भरने) के लिए। खाने के ये दोनों ही अंदाज गलत हैं।
अभिव्यक्ति ब्लॉग पर

"पापूलर लिट" हिन्दी साहित्य पर नया हमला

‘‘रासायनिक हथियारों पर पाबंदी’’ और ‘‘आतंकवाद’’ से लड़ने के नाम पर निर्ममतापूर्वक कुचल दिया गया। इंसानी बस्तियों और अस्पतालों पर मिसाइलों से हमले किये ही नहीं गये, उन्हें दुनिया भर के टी.वी. चैनलों पर दिखाया भी गया। लाखों बेगुनाहों के कत्ले-आम के दृश्य ‘मनोरंजन-चैनलों’ पर प्रसारित हुए और लम्बे अरसे से अनुकूलित कर दिये गये दिल-ओ-दिमागों व जबानों से कोई ऐसी चीख नहीं निकली ...

कुमार राधारमण जी की पेशकश

कहाँ ग़ायब हुआ स्वाद मुँह का?

बुजुर्ग अक्सर शिकायत करते हैं कि उनके मुँह का स्वाद ग़ायब हो गया है। उन्हें अब किसी व्यंजन में स्वाद महसूस नहीं होता। बढ़ती उम्र के साथ कुछ बुजुर्ग मरीज़ों में रसना इंद्रियों के शिथिल होने के साथ घ्राणशक्ति भी क्षीण हो जाती है। इसकी वजह से उनकी भूख भी कम हो जाती है और वज़न घट जाता है।


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Islamic Concept of Balance in Human Nature : Unique Work of Dr.Tahir-ul-Qadri in Islamic Literature

Download Book Link www.minhajbooks.com Extract from Restoring Balance Faith, Law and Courage to Love (Al-Hidayah 2010)

रोल मॉडल ने बदली जीवन की दिशा - N. R. Nayaynana




  • इंफोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति की गिनती दुनिया के एक दर्जन सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में होती है। उन्होंने पूरी दुनिया में भारत को एक नई पहचान दी। पेश है न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के छात्रों के सामने दिया गया उनका एक भाषण: मैं यहां आपके साथ अपने जीवन के कुछ अनुभव बांटना चाहता हूं। उम्मीद है कि ये अनुभव जीवन के संघर्ष में आपके लिए मददगार साबित होंगे।
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    भाई से प्रतिघात करो

    मजबूरी का नाम न लो
    मजबूरों से काम न लो
    वक्त का पहिया घूम रहा है
    व्यर्थ कोई इल्जाम न लो

    धर्म, जगत - श्रृंगार है
    पर कुछ का व्यापार है
    धर्म सामने पर पीछे में
    मचा हुआ व्यभिचार है

    क्या जीना आसान है
    नीति नियम भगवान है
    न्याय कहाँ नैसर्गिक मिलता
    भ्रष्टों का उत्थान है

    रामायण की बात करो
    भाई से प्रतिघात करो
    टूट रहे हैं रिश्ते सारे
    कारण भी तो ज्ञात करो

    सुमन सभी संजोगी हैं
    कहते मगर वियोगी हैं
    हृदय-भाव की गहराई में
    घने स्वार्थ के रोगी हैं
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    अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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