हम तो चले तिहाड़ जेल दोस्तों !

 आज में सरकार से इस पोस्ट के माध्यम से पूछना/जानना  चाहता हूँ कि अगर एक सभ्य ईमानदार व्यक्ति दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को रिश्वत नहीं दें तो क्या वो अधिकारी मात्र एक महिला के कहने से बिना सबूतों के ही गम्भीर आरोप लगाकर मामला दर्ज कर सकता है ? क्या किसी व्यक्ति का पक्ष सिर्फ रिश्वत देने पर ही सुना जायेगा? क्या सारी महिलाएं सच्ची है और सारे पुरुष झूठे व अत्याचारी होते हैं? 
मेरा भारत देश की न्याय व्यवस्था से विश्वास ही उठ गया है. अब आप मुझे बेशक मेरे खिलाफ झूठी एफ.आई.आर के संदर्भ में फांसी की सजा दे दें. मैं वोट की राजनीति खेलने वाले देश में अपनी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में "अपील" या "दया याचिका" भी नहीं लगाऊंगा. भारत देश की न्याय व्यवस्था अफजल गुरु और कसाब जैसे अपराधी के अधिकारों की रक्षा करती है. यहाँ संविधान की धाराओं का लाभ सिर्फ अमीरों व राजनीतिकों मिलता है या दिया जाता है. जिनके पास वकीलों की मोटी-मोटी फ़ीस देने के लिए और संबंधित अधिकारियों को मैनेज करने के लिए लाखों-करोड़ों रूपये है. गरीबों को "न्याय" देना न्याय व्यवस्था के बस में ही नहीं है. मुझे आज भारत देश की न्याय व्यवस्था की कार्य शैली पर बहुत अफ़सोस हो रहा है. न्याय व्यवस्था की अब तक की कार्यशैली के कारण भविष्य में मुझे न्याय मिलने की उम्मीद भी नहीं है. अपने खिलाफ दर्ज केस के संदर्भ में बस इतना ही कहना है कि -
१. हाँ, मैंने बिना दहेज लिये ही कोर्ट मैरिज करके बहुत बड़ा अपराध किया है.
२. हाँ, मैंने कोर्ट मैरिज करके अपने माता-पिता का दिल दुखाकर भी बहुत बड़ा अपराध किया है.
३. हाँ, मैंने अपनी पत्नी की बड़ी-बड़ी गलती पर उसको माफ़ करके बहुत बड़ा अपराध किया है.
४. हाँ, मैंने अपनी पत्नी को मारने के उद्देश्य से कभी भी ना छूकर बहुत बड़ा अपराध किया है.
५. हाँ, मैंने गरीब होते हुए भी भारत देश की न्याय व्यवस्था से "न्याय" की उम्मीद करने का अपराध किया है. 
 तिहाड़ जेल में हमारे पास न मोबाईल होगा और न फेसबुक होगी. तब मेरे पास क्या होगा, यह जानने के लिए नीचे लिखा पत्र देखें.
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क्या दिल्ली हाईकोर्ट के जज पूरी तरह से ईमानदार है ?


दोस्तों ! एक बार जरा मेरी जगह अपने-आपको रखकर सोचो और पढ़ो कि-एक पुलिस अधिकारी रिश्वत न मिलने पर या मिलने पर या सिफारिश के कारण अपने कार्य के नैतिक फर्जों की अनदेखी करते हुए मात्र एक महिला के झूठे आरोपों(बिना ठोस सबूतों और अपने विवेक का प्रयोग न करें) के चलते हुए किसी भी सभ्य, ईमानदार व्यक्ति के खिलाफ झूठा केस दर्ज कर देता है. फिर सरकार द्वारा महिला को उपलब्ध सरकारी वकील, जांच अधिकारी, जज आदि को मुहँ मांगी रिश्वत न मिले. इसलिए सिर्फ जमानत देने से इंकार कर देता है. उसके बाद क्या एक सभ्य व्यक्ति द्वारा देश की राष्ट्रपति और दिल्ली हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की मांग करना अनुचित है. एक गरीब आदमी कहाँ से दिल्ली हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के अपनी याचिका लगाने के लिए पैसा लेकर आए ? क्या वो किसी का गला काटना शुरू कर दें ? क्या एक पुलिस अधिकारी या सरकारी वकील या जांच अधिकारी या जज की गलती की सजा गरीब को मिलनी चाहिए ? हमारे भारत देश में यह कैसी न्याय व्यवस्था है ? क्या हमारे देश में दीमक की तरह फैले भ्रष्टचार ने हमारी न्याय व्यवस्था को खोखला नहीं कर दिया है ? क्या आज हमारी अव्यवस्थित न्याय प्रणाली सभ्य व्यक्तियों को भी अपराधी बनने के लिए मजबूर नहीं कर रही है ? इसका जीता-जागता उदाहरण मेरा "सच का सामना" ब्लॉग है और मेरे द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट को लिखा पत्र (नीचे) देखें. क्या दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत सभी जज पूरी तरह से देश और देश की जनता के प्रति ईमानदार है ? मेरे पत्र को देखे और उसके साथ स्पीड पोस्ट(http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/06/blog-post_18.html) की रसीद को देखें. मेरे द्वारा 137 दस्तावेजों के साथ 15 फोटो वाला 760 ग्राम का पैकेट 13/06/2011 को भेजने के बाद भी आज तक संज्ञान नहीं लिया या यह कहूँ देश के राजस्व की उन्हें कोई चिंता नहीं है. उनको सिर्फ अपनी सैलरी लेने तक का ही मतलब है. क्या देश की अदालतों में भेदभाव नहीं नीति नहीं अपनाई जाती है. अगर मेरे जैसा ही अगर किसी महिला ने एक पेज का भी एक पत्र दिल्ली हाईकोर्ट में लिख दिया होता तो दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ न्यायादिश के साथ अन्य जज भी उसके पत्र पर संज्ञान लेकर वाहवाही लूटने में लग जाते है, इसके अनेकों उदाहरण अख़बारों में आ चुके है. क्या भारत देश में एक सभ्य ईमानदार व्यक्ति की कोई इज्जत नहीं ? 
भारत देश की न्याय व्यवस्था ने मेरे परिवार के साथ हमेशा अन्याय किया है. आजतक इन्साफ मिला ही नहीं है और न भविष्य में किसी गरीब को देश की अदालतों से इंसाफ मिलने की उम्मीद है.
मेरे प्रेम-विवाह करने से पहले और बाद के जीवन में आये उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा पत्नी और सुसरालियों के फर्जी केस दर्ज करने वाले अधिकारी और रिश्वत मांगते सरकारी वकील,पुलिस अधिकारी के अलावा धोखा देते वकीलों की कार्यशैली,भ्रष्ट व अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है "सच का सामना"आज के हालतों से अवगत करने का एक प्रयास में इन्टरनेट संस्करण जिसे भविष्य में उपन्यास का रूप प्रदान किया जायेगा.
1. एक आत्मकथा-"सच का सामना"
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post.html
2. मैं देशप्रेम में "सिरफिरा" था, "सिरफिरा" हूँ और "सिरफिरा" रहूँगा
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post_14.html
3. मैंने अपनी माँ का बहुत दिल दुखाया है
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post.html
4. मेरी आखिरी लड़ाई जीवन और मौत की बीच होगी
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_22.html
5. प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html
6. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post.html
7. मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html
8.कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_13.html
9. एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है कि-
मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा
ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें.
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_18.html
10. भगवान महावीर स्वामी की शरण में गया हूँ
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/09/blog-post.html
11. मेरी लम्बी जुल्फों का कल "नाई" मालिक होगा.
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/11/blog-post.html
12.सरकार और उसके अधिकारी सच बोलने वालों को गोली मारना चाहते हैं.
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/11/blog-post_02.html
13.मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर एक प्रश्नचिन्ह है
http://rksirfiraa.blogspot.in/2011/06/blog-post.html
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तीन तलाक़ एक साथ देने वाले की पीठ पर कोड़े बरसाते थे इस्लामी ख़लीफ़ा

भोपाल। ताजुल मसाजिद परिसर में आयोजित दो दिनी 12वें खवातीन इज्तिमा (औरतों का सम्मेलन) का रविवार को समापन हो गया। लगभग 20 हजार खवातीन के मजमे के बीच आलिम--खवातीन ने दीन पर चलने और अल्लाह के हुक्म को मानने की नसीहत देते हुए कहा कि औरतों को शरीअत और इस्लाम के साये में ही जिंदगी बसर करना चाहिए। इसमें ही उनकी भलाई है।
आखिरी और दूसरे दिन का आगाज मोहतरमा अकीका साहिबा के दर्से कुरआन से हुआ। इसके बाद मोहतरमा निदा साहिबा ने ‘आजादी ए निस्वां, फरेब और नारा’ पर कहा कि आवारगी को औरत की आजादी का नाम दिया जा रहा है। आजादी का ये अर्थ किसी भी तरह से कुबूल नहीं किया जा सकता कि औरत बेबाकी से मर्दो के साथ घुल मिल जाये। व्यावासायिक कारोबार के लिए उसके हुस्नों जमाल को इस्तेमाल किया जाये। आर्थिक उन्नति के नाम पर शैक्षणिक संस्थाओं में बेहयाई और सेक्स को बढ़ावा दिया जाये। मोहतरमा अनीसा साहिबा ने कहा कि इस्लामिक शिक्षा की रोशनी में औरत का लिबास ऐसा होना चाहिए कि उसका बदन पूरी तरह ढंका रहे। घर से बाहर निकलें तो अपनी ‘जीनत’ जेबर, कपड़े और चेहरा आदि को छुपा लेना चाहिए।

निकाह और तलाक का हक पर कनाडा से आए इकबाल मसूद नदवी ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिये जो हुक्म दिये हैं उनका उद्देश्य समाज में रिश्ते-नाते वजूद में लाना है। शरीके हयात के चुनाव में भी यह नसीहत दी गई है कि पैसा और खूबसूरती से ज्यादा सलाहित और चरित्र को महत्व दिया जाये। शादी के बाद पति-पत्नी में निभती नहीं है तो इस्लामिक तलाक का विकल्प खुला हुआ है, ताकि जिंदगी बोझ न बने, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि तलाक देने के जो तरीके शरीयत में बताये गये हैं यदि तमाम कोशिशें नाकाम हो जाती हैं तो आखिरी फैसला तलाक का है। तलाक के बाद दूसरी शादी को इस्लाम मान्यता देता है। हैदराबाद से तशरीफ लाईं नासिरा खानम ने शाम को नेकी पर कायम रहने और शरीयत और इस्लाम के हिसाब से जिंदगी गुजर करने की दुआ करते हुए मौजूद ख्वातीन हजरात को नसीहत दी। इस इज्तिमा में तकरीबन 20 हजार महिलाएं शामिल हुईं।
पूरी रिपोर्ट इस लिंक पर देखें-

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

एक मुश्त तीन तलाक़ देना ‘बिदअत‘ है, गुनाह है, तलाक़ का मिसयूज़ है। यह कमी मुस्लिम समाज की है न कि इस्लाम की। अल्लाह की नज़र में जायज़ चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद तलाक़ है। जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं, बहुत से अलग-अलग मिज़ाजों के लोगों के सामने बहुत तरह की समस्याएं आती हैं। जब दोनों का साथ रहना मुमकिन हो और दोनों तरफ़ के लोगों के समझाने के बाद भी वे साथ रहने के लिए तैयार न हों तो फिर समाज के लिए एक सेफ़्टी वाल्व की तरह है तलाक़। तलाक़ का आदर्श तरीक़ा कुरआन में है। कुरआन की 65 वीं सूरह का नाम ही ‘सूरा ए तलाक़‘ है। तलाक़ का उससे अच्छा तरीक़ा दुनिया में किसी समाज के पास नहीं है। हिन्दू समाज में तलाक़ का कॉन्सेप्ट ही नहीं था। उसने इस्लाम से लिया है तलाक़ और पुनर्विवाह का सिद्धांत। इस्लाम को अंश रूप में स्वीकारने वाले समाज से हम यही कहते हैं कि इसे आप पूर्णरूपेण ग्रहण कीजिए। आपका मूल धर्म भी यही है।
तलाक़ का सही तरीक़ा क़ुरआन की सूरा ए तलाक़ में बता दिया गया है। एक साथ तीन तलाक़ देना क़ुरआन का तरीक़ा नहीं है। इस तरीक़े को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स. ने सख्त नापसंद फ़रमाया है और जो आदमी एक साथ तीन तलाक़ दिया करता था, इस्लामी ख़लीफ़ा इसे इस्लामी शरीअत के साथ खिलवाड़ मानते थे और इसे औरत का हक़ मारना समझते थे। ऐसे आदमी की पीठ पर कोड़े बरसाए जाते थे। लिहाज़ा इस्लामी ख़लीफ़ाओं के काल में तीन तलाक़ एक साथ देने की हिम्मत कोई न करता था। आज भी ऐसे लोगों की पीठ पर कोड़े बरसाए जाएं तो औरत के जज़्बात के साथ खिलवाड़ तुरंत रूक जाएगा।
औरत के जज़्बात का सबसे बड़ा रक्षक है क़ुरआन।
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किन्नर समाज की पुरज़ोर पैरवी और शिनाख्त

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ब्लॉगर्स मीट वीकली (29) cure for cancer

ब्लॉगर्स मीट वीकली (29)
सबसे पहले मेरे सारे ब्लोगर साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम/आप सभी का ब्लोगर्स मीट वीकली (२९)में स्वागत है /आप आइये और अपने संदेशों द्वारा हमें अनुग्रहित कीजिये /आप का आशीर्वाद इस मंच को हमेशा मिलता रहे यही कामना है /
आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स

अनवर जमालजी की रचनाएँ

करेक्ट करें कैटरैक्ट (मोतियाबिंद)मोतियाबिंद अंधेपन की एक बड़ी वजह है, लेकिन समय रहते अगर इसका इलाज करा लिया जाए, eye420.jpg कैंसर का इलाज आसान है cure for cancer


कैंसर का शुमार आज भी लाइलाज बीमारियों में होता है तो इसके पीछे सिर्फ़ पैसे की हवस है।पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि ‘अल्लाह ने जितनी भी बीमारियां पैदा की हैं उनकी शिफ़ा भी रखी है।‘ (भावार्थ हदीस)यह बात कैंसर के बारे में भी सही है।डा. हल्डा रेगर क्लार्क (Dr. Hulda Regehr Clark) एक नेचुरोपैथ हैं।उनकी किताब...
ब्लॉगर्स मीट वीकली (28) God in Ved & Quran

अयाज अहमदजी की रचनाएँ

जो लोग अकबर को महान कहने पर ऐतराज़ करते हैं वे भी यह मानते हैं कि हिंदू राजा महान होते हैं। एक महान हिंदू राजा में जो गुण होते हैं, उन गुणों को अकबर में देख लिया जाए कि वे गुण उसमें हैं कि नहीं, बात साफ़ हो जाएगी

सतयुग कैसे आएगा ? , पर एक बहस

इस्लाम की तरफ बढ़ते रुझान से और मुसलामानों की बढ़ती तादाद से 'सतयुग' का क्या सम्बन्ध है ?हमारी पिछली पोस्ट पर इस मौज़ू पर एक अच्छी चर्चा हुई है .

मंच के बाहर की पोस्ट

अयाज अहमदजी की रचना
विधवा समस्या इस बार की मीट का ख़ास टॉपिक था। वृंदावन में बहुत सी विधवाएं रहती हैं। जो निर्धन विधवाएं हैं, उनके मरने पर उनके शरीर को स्वीपर छोटे छोट पीस में काटकर थैलियों में भरकर फेंक देते हैं। अंतिम संस्कार क्यों नहीं हो पाता इन विधवाओं का ?
चंद्रमोलेश्वर प्रशादजी की रचना
प्लेटफ़ार्म के एक कोने में लकडी के छोटे से डिब्बे को स्टूल बना कर एक बारह-तेरह वर्ष का बालक बैठा था। उसके सामने एक और डिब्बा रखा था जिसपर एक व्यक्ति अपना पैर रखे हुए था। वह बालक बड़े मनोयोग से एक छोटी-सी डिब्बी से पालिश निकाल कर बडी नज़ाकत से जूते पर मल रहा था।

संगीता जी की रचना
तीरगी के दामन पर रोज उभरता है एक चेहरा,
खामोश सी आँखे सादगी में लिपटी नजर.........
कभी बुने थे उनने चाँद तारों व् बहारों से महकते हिंद के सपने,
देखे थे खुशहाली के ख़्वाब ,,देखे बुलंदियों के सपने...........
आम्रेन्द्र शुक्ला जी की रचना

"सीलती यादें "

मै हूँ
सृष्टि की एक
अद्भुत विडंबना
शायद इसीलिए
जो भी गुजरा पास से
कुछ खरोचें ही दे गया
पल्लवी जी ने दिल को झिंझोड़ने वाला मुददा उठाया है अपने ब्लॉग पर

ज़रा सोचिए...


मैंने कुछ दिन पहले एक पोस्ट देखी थी फ़ेसबुक पर जिसे देखकर मेरा मन बहुत खिन्न हो गया था। मैंने खुद भी उस पोस्ट को अपनी फेसबुक पर सांझा भी किया था। विषय था गरीब और भूखे बच्चों को खाना पहुंचाने वाली संस्था का प्रचार जिसे देखकर अच्छा भी लगा कि कोई संस्था तो है जिसने इस विषय में कुछ अच्छा सोचा फिर दूजे ही पहल यह भी लगा कि क्या यह संस्था सच में विश्वसनीय है?
'ब्लॉग की ख़बरें' पर देखिए

नारी स्वयं नारी के लिए संवेदनहीन क्यों ? NAARI





जागरण की वेबसाइट पर बेस्ट ब्लॉगर इस हफ़्ते



क्षत्रिय ममेरी फुफेरी बहनों से विवाह करते हैं Bal vivah


ये हैं जय और जिया... उम्र महज दो साल...रिश्ता, भावी पति-पत्नी...यह बात अलग है जय की मां मीना जिया के पिता राम की बहन है...यानी जय और जिया

सूफ़ियों की ज़िंदगी के गहरे राज़ Sufi world






देखिए हिंदी ब्लॉगिंग की एक रचनात्मक महा लेख माला सूफ़ियों के जीवन संघर्ष परमनोज कुमार जी की क़लम सेजाएं और सराहें सूफियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढाया.

1100 साल पहले हवा में उड़ा था अब्बास कासिम इब्ने फिरनास




अब्बास कासिम इब्न फिरनास बच्चों को यह पढाया जाता है कि विमान के आविष्कारक राईट बंधु थे। लेकिन राईट बंधु से लगभग हज़ार साल पहले ...
जनाब रूपचंद शास्त्री मयंक जी को जन्मदिन मुबारक हो !

"जन्मदिन है आज मेरा"

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

जन्मदिन का जश्न है केवल छलावा,
लोग कहते हैं अँधेरे को सवेरा।।
घट गया इक साल मेरी उम्र का,
लोग कहते जन्मदिन है आज मेरा।।

Kunwar Kusumesh

ज़हरीली गैसें (दोहे)



ज़हरीली गैसें करें,निर्मित हॉउस-ग्रीन.

उदृत होता जा रहा,ये भी तथ्य नवीन.

मुशायरा ब्लॉग पर देखिए
Ek Ghazal Hafeez Merathi ki - See- http://www।kanti.in/
साधना वैद जी सुधिनामा ब्लॉग पर

मध्यम वर्गीय मानसिकता और दहेज प्रथा

विडम्बना - एक तरफ बनाकर देवी, पूजते हैं हम नारी को; भक्ति भाव दर्शाते हैं, बरबस सर नवाते हैं; माँ शारदे के रूप में कभी ज्ञान की देवी बताते हैं, तो माँ दुर्गा के रूप मे...

...
पीस पार्टी का दमदार आग़ाज़ - वैसे तो कई पार्टियाँ को दशकों और सदियों पुरानी भी हैं, को उत्तर प्रदेश के इस विधान सभा चुनाव में कुछ नम्बर पाने के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है ...

ब्लॉग संसद पर डा. अयाज़ अहमद
मीडिया, सीबीआई और अदालत कौन ख़रीद पाया है ? - इनके बिकने का इल्ज़ाम वही लगाता है जो कि ख़ुद इन्हें न ख़रीद पाया हो, जो भी इनके बिकने का इल्ज़ाम लगाता है, वह देश के क़ानून से लोगों का भरोसा उठाने का काम कर...

महान संस्कृति, घटिया रिवाज Great Indian Culture - भारत के लोग चाहें तो अपने सिर पर गुलाबी रंग का बड़ा सा साफा बांधे यह कहते हुए शान से घूम सकते हैं कि वे एक महान संस्कृति के रक्षक हैं, पर संयुक्त राष्ट्र क...
यज्ञ हो तो हिंसा कैसे ।। वेद विशेष ।। पर एक संवाद भाई अनुराग शर्मा जी से - यज्ञ हो तो हिंसा कैसे ।। वेद विशेष ।। पर एक संवाद भाई अनुराग शर्मा जी से 1. Smart Indian - स्मार्ट इंडियनDec 5, 2011 09:11 PM @ डॉ. जमाल, ...
वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है Mohammad in Ved Upanishad & Quran Hadees - पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश अरबी माह रबी-उल- अव्वल में हुई थी और रबी उल अव्वल के महीने में ही उनकी वफ़ात हुई। इस माह की12 तार...
कान्ति मासिक एक लाजवाब पत्रिका है जिसे देखकर आपको एक अलग ही लुत्फ़ आएगा। फ़रवरी का ताज़ा अंक आप देख सकते हैं इस लिंक पर ...
http://kanti.in/



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अब...मेरी माँ को कौन दिलासा देगा ?


अब हमें भी पता नहीं कितने दिन जेल की सलाखों को पकड़कर खड़ा रहना होगा, क्योंकि हमारे देश में कानून पूंजीपतियों, राजनीतिज्ञों और महिलाओं की बाप की जागीर बन गया है.
लो दोस्तों, हमारा आपका बस थोड़े से ही दिनों का साथ था. मैं अक्सर कहता था कि देशप्रेम में पागल और सिरफिरे लोगों का स्वागत फ़िलहाल "जेल" में किया जाता है. अब हम तो जेल में जा रहे हैं. हम अपनी पत्नी के द्वारा धारा 498A और 406 के तहत दर्ज करवाए झूठे केसों (एफ.आई.आर नं. 138/2010 थाना-मोतीनगर,दिल्ली) में आठ फरवरी को तीस हजारी के कमरे नं. 138 में आत्मसमपर्ण कर रहे हैं. पुलिस के पास सबूत नहीं थें. इसलिए आज तक मुझे गिरफ्तार नहीं किया था. अब केस दर्ज हुए लगभग दो साल हो चुके है. अब कोर्ट का वारंट पुलिस लेकर आई थीं. कल संयोगवश घर पर नहीं था. तब वारंट देकर चली गई. कोर्ट का सम्मान करना मेरा फर्ज है. पिछले नौ महीने से बिलकुल बेरोजगार बैठा हूँ और सारा काम भी लगभग चार साल से बंद था. बिना वकील के ही जज को अपनी गिरफ्तारी दे रहा हूँ. जेल जाने की तारीख निश्चित है मगर भष्ट और अव्यवस्था के कारण वापिस का कोई पता नहीं है. 
मेरी गिरफ्तारी का वारण्ट
अपनी हिम्मत तो रखे हुए हूँ लेकिन विधवा माँ को हिम्मत रखने वाले शब्द नहीं बोल पा रहा हूँ. उसके लिए कहाँ से वो शब्द लेकर आऊ जो उसको दिलासा दें ? माँ तो कसूरवार बेटे का सदमा सहन नहीं कर पाती है फिर वेकसुर बेटे के लिए जेल जाने का सदमा कैसे सहन करें, कल से मम्मी से ठीक से खाना भी नहीं खाया जा रहा है. क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा है ? कल (चार फरवरी) ही मेरे पिताजी की चौथी पुण्यतिथि थीं. जब पुलिस आई थीं, तब काफी परेशान हो गई थीं. हर रोज थोड़ी देर बैठकर माँ-बेटा अपना दुःख दर्द कह लेते थें.एक-दूसरे को दिलासा दे लेते थें और हिम्मत बढ़ा दिया करते थें. अब......मेरी माँ को कौन दिलासा देगा और हिम्मत बढ़ेगा ?  
मेरे खिलाफ झूठ और बिना सबूतों के दर्ज एफ.आई.आर. जिसमें मेरे नाम के साथ ही मेरे बड़े भाइयों के साथ ही मेरी भाभी का नाम भी दर्ज किया गया है. हमारे देश के कानूनों में एक औरत को अपने सुसराल वालों का झूठा नाम लिखवाने की अनुमति मिली हुई है.मगर एक पत्रकार को किसी महिला की पहचान उजागर करने की मनाही है. इसलिए मैंने अपनी पत्नी का नाम व पता इस एफ.आई.आर. से हटा दिया है.
आज कुछ लड़कियाँ और उसके परिजन धारा 498A और 406 को लेकर इसका दुरूपयोग कर रही है. हमारे देश के अन्धिकाश भोगविलास की वस्तुओं के लालच में और डरपोक पुलिस अधिकारी व जज इनका कुछ नहीं बिगाड पाते हैं क्योंकि यह हमारे देश के सफेदपोश नेताओं के गुलाम बनकर रह गए हैं. इनका जमीर मर चुका है. यह अपने कार्य के नैतिक फर्ज भूलकर सिर्फ सैलरी लेने वाले जोकर बनकर रह गए हैं. असली पीड़ित लड़कियाँ तो न्याय प्राप्त करने के लिए दर-दर ठोकर खा रही हैं. 
मेरी जमानत तीन बार ख़ारिज हो चुकी है और अश्लील वीडियो फिल्म बनाने का और दहेज का सामान (स्त्रीधन) न लोटने के झूठे आरोपों के कारण जमानत नहीं मिल रही हैं. उत्तमनगर थाने, थाना बिंदापुर और मोतीनगर आदि से लेकर थाना कीर्ति नगर, दिल्ली के वोमंस सैल, सरकारी वकील, जांच अधिकारी, जज को रिश्वत न दे पाने के कारण झूठे सबूतों के आधार पर केस भी दर्ज हो गए और दर्ज केस में मुझे जमानत नहीं मिली. आँखों के अंधे-बहरे जज और पुलिस अधिकारी बिना सबूत मामला दर्ज करते है और जमानत नहीं देते हैं. 
दोस्तों ! बस दुआ करना कि मेरी विधवा माँ का स्वास्थ्य ठीक रहे.जब तक मुझे जेल में रहना पड़े. 72 साल की है, घर के कार्य के सिवाय कुछ नहीं करती है. मेरे बाद में मेरे बड़े भाई के पास रहेगी. लेकिन बड़ा भाई अपने काम पर सवेरे छह बजे चला जाता है और रात को दस बजे आता हैं. खर्च की चिंता नहीं है मगर मानसिक रूप से दिलासा देने की जरूरत है. मेरी मम्मी अनपढ़ है. ज्यादा जानकारी नहीं है. इसलिए ज्यादा डरी हुई है. आप मिलने आने का कष्ट मत उठाये फोन करें, तब बता देना कि आपके बेटे के दोस्त बोल रहे हैं.मेरी मम्मी हिंदी ही समझती है. आपके सहयोग और प्यार के लिए धन्यवाद
दोस्तों ! अगर आपके पास समय हो तो कभी-कभी मेरी माँ के पास मेरा ही एक अन्य फोन नं. 9868566374 पर बात कर लेना और दिलासा देने के साथ ही हिम्मत भी दे देना. आप ज्यादा जानकारी के लिए मेरे ब्लोगों की सभी पोस्टें और मेरी फेसबुक की "वाल" पढ़ें/देखें-www.sach-ka-saamana.blogspot.com (आत्मकथा)
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गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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