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एक इंजिनियर की आत्मकथा

इंजिनीयर्स डे पर "मोक्षगुंडम विश्वेस्वरैया", जिनके जन तिथि पर ये मनाया जाता है, को सादर नमन |
पेश है मेरी एक रचना |

मैं एक इंजिनियर हूँ,
जिंदगी के हर एक क्षेत्र में, कभी जूनियर तो कभी सीनियर हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

बचपन से लेके आज तक,
पढ़ाई से कभी रिश्ता न गया,
किताबों और कंप्यूटर में घुसा, कहने को मैं superior हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

चार साल वो कॉलेज के,
मस्ती में ही उड़ते गए,
कंपनी दर कंपनी रगड़ता हुआ, मैं अजीब creature हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

माँ-बाप के हरेक सपने,
पुरा किया पर साथ न रहा,
सब कुछ पाकर भी खोया हुआ, बहता हुआ मैं river हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

प्यार दोस्ती भी खूब किया,
शादी-बच्चे भी संभाला है,
जिम्मेदारी से भागा नही, मैं ख़ुद अपना career हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

पैसों की तो कमी न हुई,
पर परिवार संग रह न पाया,
भाग-दौड़ में भागता हुआ, चलता हुआ मैं timer हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

हर एक रूप जिंदगी का,
देखा है मैंने करीब से,
हर कष्टों को झेला मैंने, हर प्रॉब्लम से मैं familiar हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

बुढ़ा हुआ तब पीछे देखा,
हाथ में कुछ न साथ में कुछ,
भटक-भटक के रुक सा गया, पड़ा हुआ एक furniture हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ |

मौत की घड़ी जब पास है आई,
पाने को कुछ न खोने को कुछ,
सबकी ही तरह रवाना होता, आसमान के मैं near हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ |

(ये एक आम इंजिनियर के मन की उस समय की सोच है जब वो पुरी जिंदगी बिताने के बाद मरने के कगार पर होता है। वो एक मध्यम वर्गीय परिवार से होके भी एक इंजिनियर तो बन जाता है पर जिंदगी भर वो 'आम' ही रह जाता है। )


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कृपया ध्यान दें... (Attentions Please)

 हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड के फेसबुक ग्रुप के सम्मानित सदस्यों कृपया मेरी बात ध्यान से सुनें...

कृपया हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड के फेसबुक ग्रुप पे श्री नीरज मित्तल जी  द्वारा लिखे गए पोस्ट के जैसे पोस्ट न लिखें... अगर आप अपने ब्लॉग का कोई लिंक यहाँ साझा करना चाहते हैं तो बेशक करें, पर अगर आपके लेख मे हिन्दी ब्लॉगिंग से संबन्धित कोई नयी - पुरानी जानकारी हो तो बहुत ही अच्छा होगा। अन्यथा आपके पोस्ट के संग आपको भी इस ग्रुप से निष्काषित कर दिया जाएगा... 
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नीरज जी की लिखी हुई पोस्ट है - 

‎.. each and every hindu organisation is working for their prosperity
not .for the country , not..for the religion
hindus doesn't have FIRE 4 THIER RELIGION.....
insecurity element is very much...
savarkar analyise why we become GULAM for 1000 YEARS
even english peoples r teaching us ...HOW TO WORSHIP LORD KRSNA.....what a tragady...??
see ISKON......i like their approach towards krsna
foreigners understand our culture more than we do
pure bhakti.com is a notable site
because some egoistic personalities creates a lot of problems....somewhere we lost the scientific & analytic attitude of our rishies....& we r still paying 4 it
what rearch work is done by these dirty org. to explore hinduism in a pleasant way
is their any site on google in hindi language 4 sanatan dharma
only english sites r open when we want to find something on hinduism
vese hum hindi hindi chillatain karte rehten hain
what is your opinion ...???
PLEASE FORGIVE ME ....I CAN NOT SEE SUCH A DURDASHA OF OF OUR VEDIC WISDOM.....

please read ESSAYS ON GITA ( BY: SRI AUROBINDO)

इस पर मेरा कमेन्ट रहा - 

आप बोल रहे हैं कि हम हिन्दी-हिन्दी चिल्लाते रहते हैं, पर कुछ भी जब हिन्दुत्व (आपके अनुसार hinduism) के बारे मे खोजना होता है, इंग्लिश मे ही है...
और दूसरी तरफ आप एक वैबसाइट purehindi.com का भी विज्ञापन कर रहे हैं, जिसमे लिखी सारी बातें इंगलिश मे ही हैं...
अब आप ही बोलें कि आप क्या कर रहे हैं ? हिन्दी को बढ़ावा दे रहे हैं या हिन्दुत्व को या हमारे प्यारे भारत की राजभाषा - हिन्दी को ?
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हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के प्रमुख प्रचारक होने के नाते मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि कृपया हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के फेसबुक ग्रुप को हिंदी लेखन व हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड या हिंदी ब्लॉग्गिंग को बढ़ावा देने में उपयोग करें, ना कि इसे धार्मिक अखाड़ा बनाने के लिए...

धन्यवाद 

महेश बारमाटे "माही"
हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड टीम
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नोट - अगर आपको मेरे किसी भी शब्द या वाक्य का बुरा लगा हो तो कृपया मुझे जरूर बताएं... मैं आपकी बात पर गौर जरूर करूँगा.. 
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यह पोस्ट मैंने हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के फेसबुक ग्रुप पे भी डाली है, लिंक है - 
http://www.facebook.com/groups/hindi.blogging.guide/doc/?id=160049814069267
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एक नारी के रूप अनेक




कभी मात बन जनम ये देती,
कभी बहन बन दुलराती;
पत्नी बन कभी साथ निभाती,
कभी पुत्री बन इतराती;

कहने वाले अबला कहते,
पर भई इनका तेज तो देख;
काकी, दादी सब बनती ये,
एक नारी के रूप अनेक |

कभी शारदा बन गुण देती,
कभी लक्ष्मी बन धन देती;
कभी काली बन दुष्ट संहारती,
कभी सीता बन वर देती;

ममता भी ये, देवी भी ये,
नत करो सर इनको देख;
दुर्गा, चंडी सब बन जाती,
एक नारी के रूप अनेक |

कभी कृष्णा बन प्यास बुझाती,
यमुना बन निच्छल करती;
गंगा बन कभी पाप धुलाती,
सरयू बन निर्मल करती;

नदियाँ बन बहती जाती,
न रोक पाओगे बांध तो देख,
कावेरी भी, गोदावरी भी ये,
एक नारी के रूप अनेक |

कभी अश्रु बन नेत्र भिगोती,
कभी पुष्प बन मुस्काती;
कभी मेघ बन बरस हैं पड़ती,
कभी पवन बन उड़ जाती;

पल-पल व्याप्त कई रूप में ये,
न जीवन है बिन इनको देख;
जल भी ये, पावक भी ये,
एक नारी के रूप अनेक |

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मुस्कुरा दिया करना


जिन्दगी रुठी भी रही तो शिकवा नहीं कोई,
बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना;
घाव भर जायेंगे देख कर ही तुझको,
जब पास तेरे आऊँ खिलखिला दिया करना ।

वर्षों की थकान यूँ ही मिट जायेगी,
नींद बनकर थोड़ा सुला दिया करना;
कभी-भी मन जब काठ बन जाये,
इतना एहसान करना,रुला दिया करना ।

समझ न पाऊँ गर दुनिया की रीत,
हौले से बस थोड़ा समझा दिया करना;
नफरत भरी दुनिया में झुलस जाऊँ थोड़ा,
द्वेष की आग को बुझा दिया करना ।

भाग तो रहा हूँ मंजिल की खोज में,
बैठ जाऊँ थककर, उठा दिया करना;
भाग-दौड़ की दुनिया में,जब भागता ही जाऊँ,
प्यार की छाँव में बिठा दिया करना ।

भुल जाऊँ हर जख्म, भुल जाऊँ हर गम,
सर पर बस हाथ फिरा दिया करना;
जुड़ा है तुझसे,हर श्वास, हर खुशियाँ,
बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना ।

www.pradip13m.blogspot.com
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हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड से सम्बंधित लेख मेरी नज़र में... (भाग १)

आज हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड श्रंखला की यह तीसरी कड़ी लिख रहा हूँ... 
आज कुछ भी लिखने से पहले बस यही कहना चाहूँगा कि... 

हजारों ख्वाहिशों को संग लिए,
मन में फिर एक उमंग लिए,
एक बार फिर चल पड़ा है माही
के मंजिल मुझे पुकार रही है...

तो चलो शुरू किया जाए...

आज सबसे पहले आपको बताना चाहूँगा कि हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के अपडेट्स आप फेसबुक (Facebook), लिंक्ड इन (LinkedIn) तथा गूगल ग्रुप्स के साथ - साथ अब ऑरकुट (Orkut) पे भी पा सकते हैं...

जी हाँ, हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड अब ऑरकुट में भी उपलब्ध है...
तो आज ही सदस्य बनें - ऑरकुट में हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड की कम्युनिटी के 
या 
या 
ऊपर दिए गए लिंक में से किसी भी लिंक पे क्लिक कर के हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के सदस्य बनें... तथा अपने मित्रों को भी शामिल करें...

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चलो अब आते हैं इस चरण के अगले पड़ाव पर... मेरा मतलब है 


हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के लेख व उनकी समीक्षा 

कुछ समझ में नहीं आ रहा कि हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के लेखों की समीक्षा की शुरूआत कहाँ से की जाए ? क्योंकि इसके लिए तो लेख अप्रेल २०११ से ही लिखे जाने लगे थे जब से इसके बारे में घोषणा की गयी थी. पर अब लगता है कि इसकी शुरुआत वहीँ से किया जाए जहाँ से इस विचार की उत्पत्ति हुई...
  • शुरुआत होती है उस लेख से जिसे मैंने २९ अप्रेल २०११ को लिखा और ब्लॉग जगत को कुछ सुझाव दे डाले. यह लेख मैंने वर्तमान में हिंदी ब्लॉग्गिंग को ज्यादा बढ़ावा न मिल पाने की वजह से दिए थे, चूंकि  मैं ब्लॉग्गिंग में नया ही था तो सारे दिग्गज ब्लॉगर को मेरे इस प्रयास से अपनी कुर्सी हिलती हुई दिखाई देने लगी. (क्षमा चाहूँगा यदि किसी को मेरे किसी भी वाक्य से बुरा लगा हो तो). बस फिर क्या था, मेरे उस लेख को मेरे ब्लॉग पे पहली बार १२ कमेंट्स मिले (जिसमे मेरे कमेंट्स भी शामिल हैं) और हिंदी ब्लॉगर फोरम इंटरनेशनल में ९ कमेंट्स मिले. जो मेरे प्रयास से खुश नहीं थे उन्होंने मेरी एक बात को लेकर झगडा सा शुरू कर दिया और जो मेरी बात से सहमत थे उनमे थे - डॉ. अनवर जमाल खान जी, अख्तर खान "अकेला" जी, डॉ. श्याम गुप्ता जी, रोहित जी, विवेक रंजन श्रीवास्तव जी, और कृति जी.. और जो मेरी बात से सहमत नहीं थे उनके नाम ना ही बताऊँ तो बेहतर होगा. अब आप जानना चाहेंगे कि आखिर मैंने ऐसा क्या लिखा कि सभी (खास तौर पे जबलपुरिया) ब्लोगरों को अच्छा नहीं लगा और उनको अपनी कुर्सी हिलने का आभास हुआ? तो लीजिए ये लिंक 

सुझाव : Blogging के बेहतर कल के लिए
  •  इसी लेख के बाद डॉ. अनवर जमाल जी ने हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के प्रकाशन की योजना बनायीं और इसकी घोषणा उन्होंने "ब्लॉग की ख़बरें" ब्लॉग पर. कृपया लिंक देखें - 

हिंदी ब्लॉग्गिंग का भविष्य रौशन करेगी : "हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड"

http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/04/blog-post_7407.html

  • फिर इस श्रंखला में मैंने कुछ और लेख लिखे जिनमे से प्रमुख हैं - 
    • हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड की रूप रेखा
    • http://hbfint.blogspot.com/2011/05/blog-post_5220.html
    • http://meri-mahfil.blogspot.com/2011/05/blog-post_26.html
    • चूंकि अधिकाँश ब्लॉगर ने इसे पढ़ा और अपने विचार व्यक्त किये जिससे यह प्रतीत होता है कि हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड की रूपरेखा सभी को पसंद आई और इसी कारण चर्चामंच ब्लॉग पर भी २८ मई २०११ को इसे प्रस्तुत किया गया. यह रूपरेखा मेरे व डॉ. अनवर जमाल खान जी के दोनों के आपसी विचारों का संगम है, जिसे हमने भली भांति जांचा व परखा है. और इसी रूपरेखा के तहत हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड का प्रकाशन किया जा रहा है. चूंकि अभी भी इसमें कुछ बदलाव किये जा रहे हैं पर रूपरेखा की मुख्य सामग्री बदली नहीं गई है.
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आगे पढ़ें - हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड से सम्बंधित लेख मेरी नज़र में... (भाग २)
पिछले लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें -

  1. हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड : एक नया अध्याय 
  2. हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड : एक नया अध्याय  (भाग २)
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 - महेश बारमाटे "माही"
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एक सोच और एक सुझाव


      जब से मैं इस ब्लॉग्गिंग की दुनिया में आया हूँ, तब से मैंने पाया है कि लगभग हर प्रदेश या शहर विशेष के चंद चिट्ठाकारों (Bloggers) ने मिल कर एक ब्लॉग असोसिएशन बना लिया या फिर किसी स्थान विशेष पर निश्चित समय पर पहुँच के एक छोटी सी संगोष्ठी या सम्मलेन का आयोजन कर डाला. सम्मलेन में कुछ लोगों को उनके हिंदी ब्लॉग्गिंग क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए कुछ पुरुस्कार भी दिए गए और फिर हिंदी ब्लॉग्गिंग के सुन्दर भविष्य पर थोड़ा चिंतन व मनन के पश्चात् उस समारोह का सारा सारांश समाचार के रूप में चित्रों समेत किसी ब्लॉग विशेष पे सजा दिया जाता है. 
    डरिये मत, मैं ऐसे किसी भी समारोह या असोसिएशन के खिलाफ नहीं हूँ, बल्कि मैं यह बताना चाहता हूँ कि इस साहित्य जगत में एक शहर ऐसा भी है जहां से साहित्य के अनमोल हीरे निकले और उन्होंने हिंदी साहित्य को गगनचुम्बी ऊंचाइयों तक पहुँचाया. उनमे से कुछ अनमोल हीरों के नाम मैं लेना चाहूँगा - "श्री हरिशंकर परसाई जी, सुभद्रा कुमारी चौहान जी, द्वारका प्रसाद मिश्र जी, भवानी प्रसाद मिश्र जी ... " और न जाने कितने हीरों का शहर है ये...
अब शायद आप भी समझ गए होंगे कि मैं किस शहर की बात कर रहा हूँ ?
जी हाँ ! मैं जबलपुर शहर की बात ही कर रहा हूँ...

जबलपुर शहर ! आह ! 
     जिसका नाम लेते ही कभी पवित्र पावनी माँ नर्मदा के घाटों का रमणीय दृश्य जेहन में उतर आता है, तो कभी रानी दुर्गावती के बलिदान की गाथा आँखों के सामने घटित होने लगती है और तो कभी सुभद्रा कुमारी चौहान जी के स्वर "खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी" कानो में गूंजने लगते हैं, जो हर पल एक नया जोश भर देते हैं.
      और आपको शायद न मालूम हो पर एक बात जो कुछ महीने पहले ही मुझे पता चली थी वो ये कि राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जी कि अस्थियाँ, जबलपुर में नर्मदा नदी के तिलवारा घाट में विसर्जित की गयी थी और उसी के बाद तिलवारा घाट के समीप ही गाँधी भवन का निर्माण किया गया. (यह बात मुझे मध्यप्रदेश टूरिज्म के फेसबुक पेज से प्राप्त हुई).

      आज मैं जान गया हूँ कि जबलपुर को उपेक्षा की दृष्टी से देखना खुद को उपेक्षित करना है. और जो इन्सान खुद की नज़रों से गिर जाए तो उसका कुछ भी नहीं हो सकता. 
       पिछले छः महीनो में मैंने जाना कि हिंदी ब्लॉग्गिंग जगत में जबलपुर भी अपनी साख बना रहा है, जिसमे से कुछ ब्लॉगर तो आज सारे ब्लॉग जगत में अच्छी तरह जाने जाते हैं. उनमे से एक हैं - श्री समीर लाल उर्फ़ उड़न तस्तरी जी... आज हर कोई उनको भली भांति जानता है.

       अब मुद्दे की बात की जाए तो ज्यादा बेहतर होगा. मैंने पाया कि साहित्य से जुड़े लगभग हर शहर में हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन का आयोजन किया जाता या जा रहा है. पर आज तक मैंने जबलपुर में ऐसे किसी सम्मलेन का आयोजन नहीं देखा जहाँ विशेषतः जबलपुर के हिंदी चिट्ठाकारों को आमंत्रित किया गया हो और हिंदी ब्लॉग्गिंग के बेहतर भविष्य के लिए कोई चिंतन किया गया हो... शायद मैं गलत हो सकता हूँ क्योंकि ब्लॉग्गिंग के क्षेत्र में मैं अभी भी नया ही हूँ. 

        अतएव मैं सारे जबलपुर वासियों से ये अनुरोध करना चाहता हूँ कि एक ऐसी ही कोई नयी पहल की जाये जिसमे केवल जबलपुर शहर या मध्यप्रदेश के हिंदी ब्लॉग्गिंग जगत के दिग्गज व नवोदित ब्लॉगर शामिल हों.  क्योंकि जबलपुर का निवासी होने के नाते मैं चाहता हूँ कि ब्लॉग्गिंग जगत में बस एक दो ही हीरे जबलपुर से न हों बल्कि हम जबलपुरवासियों की वजह से सारे हिंदी ब्लॉग्गिंग जगत का आसमान चमक उठे..

       अगर आज आप में से किसी भी जबलपुरवासी का विचार ऐसी किसी संगोष्ठी के आयोजन करने का हो तो कृपया मेरे निम्न विचार या सुझावों को अपने विचारों में शामिल जरुर करें -
  1. पहला ये कि ये संगोष्ठी या सम्मलेन समारोह केवल जबलपुर में ही आयोजित किया जाए.
  2. अगर आपका विचार जबलपुर की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का हो तो बेहतर ये होगा कि सारे ब्लॉग जगत को पता चले कि जबलपुर में ऐसा कोई आयोजन हो रहा है.
  3. सम्मान प्रदान करने वाला शख्स कोई ब्लॉगर, या साहित्यकार ही हो कोई नेता या राजनीति से सम्बंधित व्यक्ति न हो क्योंकि साहित्यकारों और ब्लागरों के मन को केवल ब्लॉगर ही जान सकते हैं कोई नेता नहीं. 
  4. इस संगोष्ठी में उन साहित्यकारों को भी बुलाया जाए जो इन्टरनेट की पर्याप्त जानकारी न होने के कारण अपना ब्लॉग नहीं बना पते या उसे ज्यादा लोकप्रिय नहीं कर पाते. 
  5. अगर संगोष्ठी का आयोजन छोटे लेवल में भी करना चाह रहे हों तो भी कम से कम हिंदी ब्लॉग्गिंग जगत को सूचित करें ताकि सारे जबलपुरिया हिंदी ब्लॉगर ये जान सकें कि जबलपुर में अब भी वो जोश बाकी है जो अब इन्टरनेट पर छाने को तैयार है.

      और अगर मेरी बात से कोई भी ब्लॉगर या साहित्यकार सहमत न हो या कोई भी शंका हो या सुझाव हो तो कृपया मुझे बताएं...

        क्योंकि आज मैं इतना सक्षम नहीं कि ऐसा कोई आयोजन अकेले ही करा सकूँ. पर वादा है मेरा कि आज नहीं तो कल ऐसा कोई आयोजन जबलपुर में जरूर होगा जब भी मैं (आर्थिक रूप से) सक्षम हो जाऊँगा. 

और अंत में...

मत छुपा खुद को अंधियारे में माही
के सारा जहां तेरी चमक देखने को बेकरार बैठा है...
तुझे भी पता है कि चमक से तेरी चमक उठेगा आसमां का हर तारा
अब तू ही बता के ये बेवजह इंतज़ार कैसा है ?

महेश बारमाटे "माही"
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सुझाव : Blogging के बेहतर कल के लिए

आज नवोदित ब्लोगर्स की क्या स्तिथि है इस नवोदित, विकास शील ब्लॉग जगत में ?

मुझे ब्लॉग जगत में आये ज्यादा वक्त न गुजरा होगा, और मैं भी इसके रंग में रंगने लगा. अपनी पोस्ट को बढ़ावा देने मैंने भी कई एग्रीगेटर का सहारा लेना शुरू कर दिया. आखिर हर नया ब्लौगर यही तो चाहता है कि उसकी पोस्ट को सब पढ़ें और वो मशहूर हो जाए. और इसी कारण मैंने भी बहुत प्रयत्न किये ताकि मैं भी लोगों की नज़रों में आ जाऊँ... और देखो मैं अपने उद्देश्य में थोडा ही सही सफल तो हो ही रहा हूँ. पर इस ब्लाग जगत में इतनी जल्दी नाम पा लेना सबके बस की बात नहीं. मैंने भी करीब एक साल से ज्यादा का लम्बा इंतजार किया.  और आज न जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि मैंने तो अपने मुकाम की पहली सीढ़ी तो पा ली पर क्या और भी लोगों को मेरी ही तरह सफलता मिली ? ये इंसानी फितरत है कि अगर कोई नया काम वो करने जाए तो सबसे पहली उसकी मनोकमाना यही रहती है कि अगले दिन ही उसे अपने उस काम का सही फल और वह भी बड़ी अच्छी तादाद में मिले. इसी बीच मैंने अपने २३वेन जन्मदिन पे एक फिल्म देखी F.A.L.T.U. फिल्म की कहानी बहुत अच्छी लगी मुझे... Don't worry मैं आपको फिल्म की स्टोरी नहीं सुनाने वाला, मैं तो बस इतना कहना चाहता हूँ कि इस फिल्म को देखने के बाद मुझे realize हुआ कि हमारा education system कितना लापरवाह है, आज हर कोई इंजिनियर, डॉक्टर इत्यादि बनना चाह रहा है. क्योंकि हमारे schools में ये कभी नहीं सिखाया जाता कि बेटा तेरे अन्दर ये प्रतिभा है और तू इस ओर भी थोड़ा ध्यान दे. और इसी कारण अक्सर नवयुवक लेखन को कॉलेज में या उसके बाद ही अपनाते हैं. 
डॉक्टर, इंजिनियर तो आज हर कोई बन रहा है और आप शायद ना मानें जहां मैं रहता हूँ उस बिल्डिंग में ६ इंजिनियर रहते हैं. और उन ६ में से केवल दो ही ऐसे हैं जो कवितायें लिखते हैं, और उन दो में से एक मैं भी हूँ जो कविता के साथ साथ लेख, कहैं इत्यादि भी लिखता हूँ. यहाँ मैं अपनी बधाई नहीं कर रहा. बस इतना कहना चाहता हूँ कि मैं जिस शहर (जबलपुर) में रहता हूँ वो आज भी पूरी तरह से जागरूक नहीं. यहाँ के लोग अपने बच्चों को इंजिनियर तो बनाना चाहते हैं पर लेखक या कवि नहीं. चाहे उनके बच्चे में कितनी भी प्रतिभाएं क्यों न छिपी हों... यहाँ मैं सिर्फ लेखन के क्षेत्र विशेष की बात इसीलिए कर रहा हूँ क्योंकि ये क्षेत्र ही मेरे हिसाब से ज्यादा अछूता है आज. आज लोग दूसरे देश के लोगों की किताबें पढ़ते हैं, उनकी किताबों को दूसरों को पढने की प्रेणना देते हैं, बड़े शायरों की शायरियों को SMS में एक दूसरे को भेजते हैं पर कोई ये नहीं चाहता कि वो भी कुछ लिखे. अपना या अपने प्रियजन का नाम दुनिया के सामने साबित करें.

और इसीलिए आज मैं ब्लॉग जगत के बड़े बड़े दिग्गजों को कुछ सुझाव देना चाहता हूँ. और वो सुझाव कुछ इस तरह हैं - 

  • आज भी हमारे देश के ऐसे कई शहर व गाँव हैं जहाँ इन्टरनेट तो हर कोई जनता है पर वो ब्लॉग्गिंग या लेखन के प्रति जागरूक नहीं हैं, बहुत से लोगों को ब्लॉग्गिंग के बारे में जानकारी ही नहीं है. इसीलिए मेरा सुझाव है कि 
  1. सारे देश में हिंदी लेखन, हिंदी क्रियेटिव राइटिंग तथा हिंदी ब्लॉग्गिंग के लिए हर छोटे - बड़े  शहर, कस्बे तथा गाँव के सभी छोटे बड़े स्कूल व कॉलेज में छोटे छोटे Workshops तथा सेमीनार आयोजित करना चाहिए.
  2.  छोटे व बड़े स्तर पर हिंदी लेखन सम्बंधित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए.
  3. हर प्रतियोगी व वर्कशॉप में आने वाले प्रतिभागी को अखिल भारतीय स्तर का प्रमाण पात्र दिया जाए.
  4. अगर हो सके तो प्रोत्साहन राशि का भी इन्तेजाम किया जाए.
  5.  और वर्ष में एक बार इन अलग अलग स्थानों से चुने गए शीर्ष प्रतियोगियों को हिंदी साहित्य लेखन जगत की सम्मानित  हस्तियों द्वारा सम्मानित भी किया जाए.
  6. और एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाए जिसमे उन प्रतिभागियों की ही लिखी गई रचनाएं हों. 

  • अब बात आती है इन सबमे लगने वाले धन की. तो उसके लिए भी मेरे पास सुझाव है कि जो वोर्क्शोप या प्रतियोगिता आयोजित की जाए उनमे भाग लेने वाले प्रतिभागियों से ही कुछ राशि ली जाए और उन पर ही खर्च किया जाए.
  • हमारे देश में लाखों स्वयं सेवी संस्थाएँ हैं, इस हेतु उनकी भी मदद ली जाए...
ऐसा नहीं है कि ये काम मैं अकेला शुरू नहीं कर सकता, पर इस काम के लिए मुझे समय - समय पर सही मार्गदर्शन करने वालों की जरूरत होगी. सभी आयोजनों के लिए धन राशि की भी आवश्यकता होगी. और सबसे महत्वपूर्ण समय की भी आवश्यकता भी होगी. चूंकि मैं अभी एक बेरोजगार नौजवान व नवोदित ब्लोगर हूँ तो मेरे लिए सब कुछ कर पाना थोड़ा नामुमकिन सा लगता है... 
और जहाँ तक मैं समझता हूँ कि हिंदी ब्लॉगर जगत के वरिष्ठ ब्लौगर पूरी तरह से इस कार्य हेतु सक्षम हैं, तो कृप्या कर मेरे इस सुझाव को आप सारे हिंदी ब्लॉगर जगत के हर फोरम, हर ब्लॉगर असोसिएशन इत्यादि के सामने प्रस्तुत करें और मेरी सोच को आगे तक पंहुचने का कष्ट करें...



मैं नहीं चाहता कि ब्लॉग जगत के नवोदित सितारे तथा कुछ गुमनाम नौजवान कवि व लेखकों की रचनाएँ बस उनकी डायरी तक ही सीमित रह जाए... और हाँ एक और बात इस कार्य में कृपया भ्रष्टाचार व भ्रष्ट लोगों की मदद लेने के बारे में सोचे ही न, चाहे वो कितना भी बड़ा नेता हो या कोई दिग्गज ब्लोग्गर...

धन्यवाद !

अधिक जानकारी के लिए मुझसे संपर्क करें - 

महेश बारमाटे "माही"

और मेरे ब्लॉग को फौलो कर के मेरा हौसला बढायें... 


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