ब्लॉगर्स मीट वीकली (23) Merry Christmas

वंदे ईश्वरम् !
सभी ब्लॉगर्स साथियों का स्वागत है।
मोहतरमा प्रेरणा अर्गल जी दो हफ़्ते के टूर पर हैं, सो खि़दमत बस हमें ही अंजाम देनी है और नेट की स्पीड बहुत कम है।
ख़ैर सबसे पहले ‘ईसा मसीह‘ के दिन की मुबारकबाद !
महापुरूष किसी एक इलाक़े या किसी एक नस्ल के लिए ही नहीं होते।
जो सच्चा है वह सबका है।
भाई दिलबाग़ विर्क जी की  कुंडलियां यही बताती हैं:
कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क


बहुरंगी ये तोहफे , बांटे सांता क्लॉज । यीशू के जन्म दिन की , याद दिलाए आज ।।याद दिलाए आज , मिली थी सच को सूली ।थी बहुत बड़ी बात, न थी घटना मामूली ।।सच कब है आसान , है तलवार ये नंगी ।पर सच से ही विर्क , बने जीवन बहुरंगी ।।

हमारी पोस्ट भी अरब-हिंद के दरम्यान प्यार की एक अजीबो-ग़रीब दलील पेश करती है।

अरब लोग केवल शून्य को ही भारत की देन नहीं मानते बल्कि वे सारे अंकों को ही भारत की देन मानते हैं इसीलिए उन्होंने गिनती के सभी अंकों को ‘हिन्दसा‘ का नाम दिया है


अजित जी ! आपकी पोस्ट 'शून्य में समृद्धि है…' निश्चय ही अच्छी है। आपने बताया है कि भारत ने शून्य की खोज की और अरबी भाषा में इसे सिफ़र कहा गया है। 



और अब देखिए इस सप्ताह इस मंच पर प्रकाशित लेख
प्रेरणा अर्गल जी

                                                                                 ब्लॉगर्स मीट वीकली (22) Ramayana


कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क


       अफजल- कसाब से कई , ठूंसे हमने जेल ।        फाँसी लटकाए नहीं , देश रहा है झेल ।।       देश रहा है झेल , किया खर्च करोड़ों में ।       पारा बनकर बैठ , ये गए हैं जोड़ों में ।।       कहे विर्क कविराय , मिले ऐसा इनको फल । ...


दफ्तर लगते दस बजे, औ ' आठ बजे स्कूल ।अजब नीति सरकार की , टेढ़े बहुत असूल  ।टेढ़े बहुत असूल , फ़िक्र ना मासूमों की ए.सी. में बैठकर , बात हो कानूनों की ।न सुनें हैं फरियाद , न दर्द जानते अफ़सरजमीं के साथ विर्क , कब जुड़ेंगे ये दफ्तर ?     

भारत देश की मांओं और बहनों के नाम एक अपील


मेरी बहनों/मांओं ! क्या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह आदि किसी के भाई और बेटे नहीं थें ? क्या भारत देश में देश पर कुर्बान होने वाले लड़के/लड़कियाँ मांओं ने पैदा करने बंद कर दिए हैं ? जो भविष्य में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और झाँसी की रानी आदि बन सकें. अगर पैदा किये है तब उन्हें कहाँ अपने...

मंच के बाहर की पोस्ट   

 ‘मुशायरा ब्लॉग‘ पर

मुझको अहसास का ऐसा घर चाहिए

पेशकश - Farhat Durrani

जिंदगी चाहिए मुझको मानी भरी,
चाहे कितनी भी हो मुख्तसर, चाहिए।

जिसमें रहकर सुकूं से गुजारा करूँ
मुझको अहसास का ऐसा घर चाहिए।

--कन्हैयालाल नंदन

सच-झूठ पर दोहे


कुँवर कुसुमेश

सच्चाई फुटपाथ पर, बैठी लहू-लुहान.
झूठ निरंतर बढ़ रहा,निर्भय सीना तान.

राजेश कुमारी जी 

कुछ कड़वी क्षणिकाएं



गैरों पे शक करता रहा 
दिल नासमझ निकला 
अपनी जमीं तो खींचने वाला 
कोई अपना ही निकला !

 साधना वैद जी की क़लम से

क्या राष्ट्रीय सम्मान भी छोटा या बड़ा माना जाना चाहिये ?

विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिये या अभूतपूर्व मुकाम हासिल करने के लिये सम्मानित किया जाना किसे अच्छा नहीं लगता ! बहुत प्रसन्नता होती है जब आपके कार्यों को और आपकी उपलब्धियों को सराहा जाता है और मान्यता मिलती है ! लेकिन इस प्रक्रिया के लिये भी क्या छोटी बड़ी लकीरें खींचना ज़रूरी है ?

और उनकी एक कविता भी देखिये

सपने


डा. टी. एस.  दराल जी पूछ रहे हैं

शनि देव को मनी क्यों चाहिए --एक सवाल !

शनिवार का दिन सड़कों पर थोडा सकूं का दिन होता है । ज्यादातर सरकारी कार्यालय इस दिन बंद होते हैं ।
लेकिन चौराहों पर इस दिन एक विशेष नज़ारा देखने को मिलता है । हर चौराहे पर दर्ज़नों बच्चे जय शनिदेव कहते हुए भीख मांगते नज़र आते हैं ।

और शनि देव का क्या महत्त्व है ?
डोंगे में तेल , त्रिशूल , नीम्बू और हरी मिर्च के पीछे क्या धारणा है ?
ये लोग कौन हैं जो शनि के नाम पर भीख मांगते हैं ?

शायद ज्ञानी लोग इन सवालों के ज़वाब दे पायें !

देखिए एक बढ़िया गर्मागर्म चर्चा 

आत्म-हत्या: इस्लामी दृष्टिकोण

इस समय पूरी दुनिया में दुर्भाग्य से आत्म-हत्या की मानसिकता बनती जा रही है। पश्चिमी देशों में सामाजिक व्यवस्था के बिखराव के कारण समय से आत्म-हत्या की मानसिकता बढ़ती जा रही है। भारत सरकार की तत्कालिन रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर एक घंटे...
आगे पढ़ें...
और इसी ब्लॉग पर एक आपतिजनक पोस्ट भी है 

यदा-यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भव्ति भारत:

                  जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब  धर्म के उत्थान और अधर्म के नाश के लिए में आता हूँ. कभी-कभी मैं सोचता हूँ की कब धर्म की हानि होगी और कब किशन कन्हैया जी...
'उच्चारण' ब्लॉग पर 

"चाँद और तारों की बातें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बात-बात में हो जाती हैं, देखो कितनी सारी बातें।
घर-परिवार, देश-दुनिया की, होतीं सबसे न्यारी बातें।।

अलविदा -2011

अलविदा कह के वो चल दिए, अब कभी न आऊंगा ये लफ्ज़ कह दिए। इक साल फिर से अलविदा कह दिया दोस्तों. एक नयी योजना के साथ 2011 आया था और अब फिर से हमने उन योजनाओं को अलविदा कह कर 2011 को अलविदा कर दिया। 2011 हर किसी के जीवन में ख़ुशी, ग़म, हंसी, आंसूं ददे गया। हम चाहते थे कि भाई महेश बारमाटे जी, माहेश्वरी कनेरी जी, अतुल श्रीवास्तव जी और इस ब्लॉगर्स मीट वीकली के नियमित पाठकों की पोस्ट्स के लिंक लगाए जाएं लेकिन रात के साढ़े बारह बज रहे हैं और उनके ब्लॉग तक पहुंचना इस समय मुश्किल है। सो अपने प्रिय पाठकों से क्षमा याचना करते हैं।
कृप्या नियमित रूप से अपने लिंक ईमेल के ज़रिये उपलब्ध करा दिया करें और जो लोग इस मंच के सदस्य हैं वे हफ़्ते में एक दो लेख यहां पब्लिश कर दिया करें ताकि हमें लिंक संकलन में अनावश्क दिक्क़त न उठानी पड़े।
सादर ,
धन्यवाद !
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कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क


बहुरंगी ये तोहफे , बांटे सांता क्लॉज ।
यीशू के जन्म दिन की , याद दिलाए आज ।।
याद दिलाए आज , मिली थी सच को सूली ।
थी बहुत बड़ी बात, न थी घटना मामूली ।।
सच कब है आसान , है तलवार ये नंगी ।
पर सच से ही विर्क , बने जीवन बहुरंगी ।।


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ता एक संयुक्त ब्लॉग.... .....*साहित्य प्रेमी संघ*:->साहित्य पुष्पों की खुशबु फैला

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कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क


       अफजल- कसाब से कई , ठूंसे हमने जेल ।
       फाँसी लटकाए नहीं , देश रहा है झेल ।।
       देश रहा है झेल , किया खर्च करोड़ों में ।
       पारा बनकर बैठ , ये गए हैं जोड़ों में ।।
       कहे विर्क कविराय , मिले ऐसा इनको फल ।
       फिर भारत की तरफ , न देखे कोई अफजल ।।

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अरब लोग केवल शून्य को ही भारत की देन नहीं मानते बल्कि वे सारे अंकों को ही भारत की देन मानते हैं इसीलिए उन्होंने गिनती के सभी अंकों को ‘हिन्दसा‘ का नाम दिया है

अजित जी ! आपकी पोस्ट 'शून्य में समृद्धि है…' निश्चय ही अच्छी है।
आपने बताया है कि भारत ने शून्य की खोज की और अरबी भाषा में इसे सिफ़र कहा गया है।
यह सही है।
अब हम आपको बताते हैं कि अरब लोग केवल शून्य को ही भारत की देन नहीं मानते बल्कि वे सारे अंकों को ही भारत की देन मानते हैं इसीलिए उन्होंने गिनती के सभी अंकों को ‘हिन्दसा‘ का नाम दिया है।
भारतीय दर्शन ने ईश्वर के नाम-रूप-गुण के साथ ही सृष्टि रहस्य पर विचार किया और उसके सभी संभावित पक्षों पर बात की है।
पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भारतीय ज्ञान की तारीफ़ करते हुए कहा है कि
‘मुझे हिन्द की तरफ़ से रब्बानी ख़ुश्बूएं (अर्थात दिव्य ज्ञान की सुगंध) आती हैं।
आप शब्दों पर ग़ौर करने वाले आदमी हैं।
इसीलिए ‘हिन्दसा‘ शब्द आपके सुपुर्द किया जाता है।

शुक्रिया !
अजित वडनेरकर जी अपनी पोस्ट में कहते हैं कि-
भारतीयों की ही तरह गणित और खगोलशास्त्र में अरब के विद्वानों की भी गहन रुचि थी। भारतीय विद्वानों की शून्य खोज का जब अरबों को पता चला तो उन्होंने अरबी भाषा में इसके मायने तलाशे। उन्हें मिला सिफ्र (sifr) जिसका मतलब भी रिक्त ही होता है। बारहवीं तेरहवीं सदी के आसपास योरप को जब दाशमिक प्रणाली का पता चला तो अरबी के सिफ्र ने यहां दो रूप ले लिए। पुरानी फ्रेंच में इसे शिफ्रे ( chiffre ) के रूप में जगह मिली जबकि अंग्रेजी में आने से पहले इसका लैटिनीकरण हुआ। पुरानी लैटिन में सिफ्र ने जे़फिरम का रूप लिया। बाद में यही zephirum या zephyrum > zeuero> zepiro> zero छोटा होकर ज़ीरो बन गया। बाद में फ्रेंच के रास्ते से अरबी के cifra को cifre के रूप में एक नए लफ्ज सिफर के रूप में जगह मिल गई। गौरतलब है कि हिंदी में हम अंग्रेजी के सिफ़र cipher का उच्चारण करते हैं न कि अरबी, उर्दू के सिफ्र का। वैसे सिफ्र की व्युत्पत्ति सेमिटिक धातु sfr से भी मानी जाती है जिसका मतलब होता है उत्कीर्ण करना, लिखना, अंकन करना, गणितीय गणना आदि। 
पूरी पोस्ट देखें-
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भारत देश की मांओं और बहनों के नाम एक अपील


मेरी बहनों/मांओं ! क्या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह आदि किसी के भाई और बेटे नहीं थें ?
क्या भारत देश में देश पर कुर्बान होने वाले लड़के/लड़कियाँ मांओं ने पैदा करने बंद कर दिए हैं ? जो भविष्य में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और झाँसी की रानी आदि बन सकें. अगर पैदा किये है तब उन्हें कहाँ अपने आँचल की छाँव में छुपाए बैठी हो ? 
उन्हें निकालो ! अपने आँचल की छाँव से भारत देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करके देश को "सोने की चिड़िया" बनाकर "रामराज्य" लाने के लिए देश को आज उनकी जरूरत है.  मौत एक अटल सत्य है. इसका डर निकालकर भारत देश के प्रति अपना प्रेम और ईमानदारी दिखाए. क्या तुमने देश पर कुर्बान होने के लिए बेटे/बेटियां पैदा नहीं की. अपने स्वार्थ के लिए पैदा किये है. क्या तुमको मौत से डर लगता है कि कहीं मेरे बेटे/बेटी को कुछ हो गया तो मेरी कोख सूनी हो जायेगी और फिर मुझे रोटी कौन खिलाएगा. क्या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आदि की मांओं की कोख सूनी नहीं हुई, उन्हें आज तक कौन रोटी खिलता है ? क्या उनकी मांएं स्वार्थी थी ?
पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें : भारत देश की मांओं और बहनों के नाम एक अपील
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कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क


दफ्तर लगते दस बजे, औ ' आठ बजे स्कूल ।
अजब नीति सरकार की , टेढ़े बहुत असूल  ।
टेढ़े बहुत असूल , फ़िक्र ना मासूमों की 
ए.सी. में बैठकर , बात हो कानूनों की ।
न सुनें हैं फरियाद , न दर्द जानते अफ़सर
जमीं के साथ विर्क , कब जुड़ेंगे ये दफ्तर ?
                  
                                         दिलबाग विर्क 

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ब्लॉगर्स मीट वीकली (22) Ramayana

                                                

                                 ब्लॉगर्स मीट वीकली (22)
सबसे पहले मेरे सारे ब्लॉगर साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम /आप  सभी का स्वागत करती हूँ /और निवेदन करती हूँ की इस मंच पर पधारें और अपने अनमोल सन्देश देकर हमारा उत्साह  बढायें /आभार 

आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स 

 अनवर जमाल जी की रचनाएँ 

अख्तर  खान  "अकेला जी "   की रचनाएँ

अयाज अहमद जी की रचना 

मंच के बाहर की पोस्ट   

रत्नेश कुमार मौर्याजी की रचना चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को ‘डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011


अशोक कुमार शुक्ल जी की रचना 


 तय तो यह था... विनम्र श्रद्वांजलि

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी की रचना 
"नारी की व्यथा "

राजेश कुमारीजी की रचना 
 पर का बोझ


नीरज द्विवेदी जी की रचना 
 अब उठो भारत
 
मोनिका शर्माजी की रचना 
धन-बल को मिलने वाला मान है भ्रष्टाचार की जड़ .... !

ऍन .बी .नजील जी की रचना 
या खुदा! बस उनको अदा बख्श दे|

 पी.सी.गोदियाल "परचेत" जी की रचना 

वाट जोहता हूँ नई भोर की !

मुकेश कुमार तिवारीजी की रचना 
 कुछ रिश्तों के बहाने से
 मेरा फोटो
 ऋता शेखर 'मधु' जी देवानंदजी को अनोखे ढंग से श्रद्धांजलि दे रही हैं 

खोया खोया चाँद- हाइगा में

फ़िल्म-जगत के सदाबहार हीरो 'देव आनंद' जी को विनम्र श्रद्धांजलि

संगीता स्वरुपजी की रचना 
रतन सिंह शेखावतजी की रचना 
हमारी भूलें : आहार व्यवहार की अपवित्रता - १
समीर  लाल "  समीरजी "  की रचना 

पत्थर दिल इंसान..

.StonesThrow (1).

सुरेश शर्माजी " कार्टूनिस्ट" 

हाजिर जवाब ...

कुवर कुशुमेश्जी की रचना 

प्रशासन के जूता तले दब चला है पूरा देश,
लूट रहें ये ब्यूरोक्रेट्स भ़ी धर रक्षक क़ा भेष |
धर रक्षक क़ा भेष, नेताओं की मिली-भगत से,
देश को भ़ी किए बदनाम खूब सारे जगत से |
कह 'मोमिन' देशवासी अब तो अलख जगाओ,
भ्रष्टाचार के इन लफंगों को उठ - मार भगाओ |

कुमार राधारमण जी 

संजीवनी बूटी है गेहूं का जवारा

गेहूँ के जवारों में रोग निरोधक व रोग निवारक शक्ति पाई जाती है। कई आहार शास्त्री इसे रक्त बनाने वाला प्राकृतिक परमाणु कहते हैं। गेहूँ के जवारों की प्रकृति क्षारीय होती है, इसीलिए ये पाचन संस्थान व रक्त द्वारा आसानी से अधिशोषित हो जाते हैं। ... इसका नियमित सेवन करने से शरीर में थकान तो आती ही नहीं है।

जानिए ‘अल्लाहु अकबर‘ का अर्थ 

स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य जी ने बताया है कि क़ुरआन में जिहाद की हक़ीक़त क्या है और उनका आदेश किन आयतों में है और उन आयतों का संदर्भ-प्रसंग और अर्थ क्या है ?

Al-Risala Forum International

image





किसी भी विद्वान और विशेषकर वकील को अपने किसी भी मामले में सफल होने के लिए उसे अपने लक्ष्य को नही भूलना चाहिए। सबसे अच्छा रास्ता वही होता है, जिससे लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। किसी भी रमणीय सुन्दर रास्ते को अच्छा नही कहा जा सकता यदि वह लक्ष्य तक नही पहुंचाता है।
साधना  वैद जी 

सपने



रफ्ता-रफ्ता सारे सपने पलकों पर ही सो गये ,
कुछ टूटे कुछ आँसू बन कर ग़म का दरिया हो गये !
 
 "उच्चारण भी थम जाता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रिश्तों-नातों को ठुकरा कर,
पंछी इक दिन उड़ जाता है।।
जब धड़कन रुकने लगती है,
उच्चारण भी थम जाता है।।
इस्लाम धर्म पर वीडियो 

Shankaracharya speaks about इस्लाम

मनोज कुमार जी बता रहे हैं कि

सूफ़ियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढ़ाया अंक-१

images (69)भक्ति और प्रेम की भावना पर आधारित जिस पंथ ने इसलाम धर्म में लोकप्रियता प्राप्त की उसे सूफ़ी पंथ कहते हैं। सूफ़ी संप्रदाय का उदय इसलाम के उदय के साथ ही हुआ, किन्तु एक आन्दोलन के रूप में इसलाम की नीतिगत ढांचे के तहत इसे मध्य काल में बहुत लोकप्रियता मिली। 
...वह व्यक्ति जो प्रेम के वास्ते मुसफ़्फ़ा होता है साफ़ी है और जो व्यक्ति ईश्वर के प्रेम में डूबा हो, वही सूफ़ी होता है।
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गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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    14 years ago

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