ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online

हाजी अब्दुल रहीम निःस्वार्थ सेवा की मिसाल .....हरीश सिंह

शिक्षक दिवस पर एक ख़ास रिपोर्ट  

ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) 
 सबसे पहले  हमारे ब्लॉगर्स साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम 
ईद का त्यौहार हंसी ख़ुशी संपन्न हुआ और शिक्षक दिवस आ पहुंचा और साथ ही ब्लॉगर्स मीट वीकली की 7 वीं महफ़िल भी।
अपने सभापति आदरणीय श्री रूपचंद शास्त्री मंयक जी का इस महफ़िल में स्वागत करते हैं और आप सभी हिंदी ब्लॉगर्स का भी दिल से स्वागत है।

आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स 
अनवर जमाल जी कहते हैं कि

धर्म को तो अंबेडकर जी ने भी नहीं नकारा, तब आप क्यों धर्म का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं ?

यह हिंदी ब्लॉगिंग है, यहां कोई भी ब्लॉगर कुछ भी कर सकता है लेकिन हक़ीक़त यह होती है कि वे दूसरों का तो क्या अपना भी भला नहीं कर सकते।

 फ़ित्रा वह रक़म है जो ग़रीबों को ईदुल्फित्र की नमाज़ से पहले अदा की जाती है

हिंदू मुस्लिम की मुहब्बत का ताजमहल है देवबंद

कुछ लोग कहते हैं कि धर्म नफ़रत फैलाता है और अपने अनुयायियों को संकीर्ण बनाता है लेकिन ईद के अवसर पर हर जगह यह धारण ध्वस्त होते देखी जा सकती है .

अन्ना के बारे में सबसे हटकर एक चिंतन अनवर जमाल जी

खुदा का शुक्र है फितरा और ईद की नमाज़ अदा हुई ...अख्तर खान "अकेलाजी"

हमारे देश के कुछ पदों पर बेठे लोग खुद को भगवान समझने लगे हैं

 और इनका इलाज है ...

सत्ता के इन भूखे भेडियों का टेटुआ दबाकर

आधी जीत के मायने.. महेंद्र श्रीवास्तव जी

ब्लॉगर्स मीट वीकली 6 की ख़ास बात अयाज अहमद जी

स्मरण करो सिया राम का ईं.प्रदीप कुमार साहनीव्यवस्थापक


  • शिखा कौशिक जी 

  • नेता और जूता - Shikha Kaushik
  •  और ...



  • ये पूछने का हक़ हर भारतीय मुसलमान को है !हिंदी ब्लोगिंग गाइड से   

    क्या है साझा ब्लॉग ? Hindi Blogging Guide (32)

      मंच के बाहर की पोस्ट्स

    दुनिया में गुणवत्ता व मापदंड वाले 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है

    डा. अयाज़ जी 

    और इनकी ही एक और पोस्ट

    इस्लामी हिजाब इस्तेमाल करने के कुछ तरीक़े (सानिया मिर्ज़ा हिजाब में)

         My Photo   

    अजान का वो स्वर सूना है  सत्यम शिवमजी

    कलम प्रदीप तिवारीजी

    ईद के दिन सभी मुस्कुराते रहें,अम्बरीश श्रीवास्तव 

     

    २६ अगस्त के आन्दोलन का एक और अनदेखा बलिदान
    नीरज द्विवेदीजी                                                                                                   My Photo 

    यादें एक छोटी सी प्रेम कहानी पल्लवी जी 

    क्यों भर आई आज ये आँखें  ? पी.के .शर्माजी 


    प्रेरणा शिक्षक से    आशाजी 



    शुभकामना हज़ार(कुण्डली)                                             







     कुँवर कुसुमेशजी                            My Photo

    My Photo

    माँ ...अब तुम बहुत याद आती हो...! अनुपमा त्रिपाठीजी       

    लेह(लद्दाख ) से चुमाथांग (हॉट स्प्रिंग)१४००० फीट की झलकियाँ  

    राजेश कुमारी जी 

      मेरा फोटो     
    वन्दनाजी
                                        तुम कभी मुझे मत चाहना
                                                              
    आसमान की चाहत  कैलाश.c .शर्माजी जी                                                                   

    औचित्य रश्मि प्रभा जी                                                    

    समय मीनाक्षी पंतजी की रचना                                        

    ख़्वाबों में मत तराशबबलीजी                                         

    शिक्षक सम्‍मान सूची   शिक्षक  दिवस के उपलक्ष्य में  अदमिन्जी

    My Photoचुप्पी' डायन खाए जात है....दिव्या जी                                  

    और देखिए उनकी एक और रचना
     

    प्रेम के सांचे     

    इंटरनेट के अपराधियों को सज़ा मिलना चाहिए .............अब क्रमवार कम्प्यूटर और इंटरनेट के बारे में जानकारी पढिय  http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/09/blog-post.htmlअख्तर  खान "अकेला जी"

    मेरा फोटो



    किसका मकान ? सुनील कुमारजी                          

    शादी - एक संस्था या उससे आगे भी कुछ  ? बता रहीं हैं  रचनाजी                                                       


    मेरा फोटो
    प्रेरणा अर्गल 

                                                                                            

    अब  मेरी  रचना सन्नाटा



    दोस्तो ! यह ख़ुशी की बात है कि बहुत जल्दी प्रेरणा जी ने एक सुंदर प्रस्तुति के लिए ज़रूरी सभी बातें सीख ली हैं, नए ब्लॉगर्स के लिए यह एक मिसाल है और हमारे हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल का यह एक ‘गुडवर्क‘ भी है।
    नए ब्लॉगर्स को सिखाना पुराने ब्लॉगर्स की नैतिक ज़िम्मेदारी है, इसके बिना हिंदी ब्लॉगिंग का विकास असंभव है।
    प्रेरणा जी की चर्चा एक दम परफ़ैक्ट है।
    अब हमारे लिए ख़ास कुछ बचा नहीं है, 

    सो हम कुछ लिंक ऐसे पेश करते हैं जिन तक प्रेरणा जी समय के अभाव की वजह से नहीं पहुंच सकी हैं।
    सबसे पहले एक ख़ुशख़बरी !
    हमारा गूगल एडसेंस अकाउंट क्रिएट हो गया है और उसमें 1.35 डॉलर भी आ गए हैं और वह भी महज़ 7 लोगों द्वारा विज्ञापन देखे जाने पर।
    अगर आपकी कोई वेबसाइट या ब्लॉग अंग्रेज़ी में है तो आपका अकाउंट मंज़ूर हो जाएगा और तब आपको इंटरनेट से आय भी होने लगेगी।
    नए ब्लॉगर्स को हिंदी ब्लॉगिंग से जोड़ने के मक़सद से यह तजर्बा करके देखा जो कि सफल रहा है।
    इसके लिए जनाब मासूम साहब का बहुत बहुत शुक्रिया !
    देखिए वह वेबसाइट जिस पर हमारे अकाउंट का कोड लगाकर देखा गया है।

    Islamic Peace Mission


    ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ से एक ख़बर

    1200 हिट्स नवभारत टाइम्स की साइट पर

    कट्टरपंथी कौन होता है ?

    हमारा संवाद नवभारत टाइम्स की साइट पर
    दो पोस्ट्स पर ये कुछ कमेंट्स हमने अलग अलग लोगों के सवालों जवाब में दिए हैं। रिकॉर्ड रखने की ग़र्ज़ से इन्हें एक पोस्ट की शक्ल दी जा रही है। नीचे पोस्ट्स के लिंक भी दिये जा रहे हैं ताकि पूरा विवरण आप वहां देख सकें।

    टिप्पणी में लिंक बनाने का तरीक़ा देखिए हिंदी ब्लॉगिंग गाइड में

    और एक ख़ास लेख शांति की अपील के साथ

    तर्क मज़बूत और शैली शालीन रखें ब्लॉगर्स

    नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर यह नियम है कि एक ब्लॉगर की पोस्ट का नंबर 3 बाद ही आता है लेकिन हमारी 3 पोस्ट्स 1 दिन में पब्लिश की गई हैं और ऐसा 2 बार हो चुका है बल्कि एक बार तो 1 घंटे के अंदर ही 3 पोस्ट्स पब्लिश कर दी गईं। यह एक रिकॉर्ड है।
    इस वक्त भी हमारी 3 पोस्ट नभाटा की सुपरहिट और सबसे चर्चित पोस्ट्स के कॉलम में देखी जा सकती हैं।
    क्लिक कीजिये यह लिंक

    http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/BUNIYAD/

    कामकाजी औरतों का क्लासिफ़िकेशन The classification of working women

    नफ़्स से जिहाद करना सबसे ज़्यादा मुश्किल है

     आदमी अपने नफ़्स की ख्वाहिश की पैरवी करता है और हक़ को छोड़ देता है या दीन में से भी वह उतनी ही बात मानता है जो उसके नफ़्स को ख़ुशगवार लगती है। नागवार और भारी लगने वाली बातों को आदमी छोड़ देता है।
    नमाज़ का हुक्म सबसे अव्वल है इस्लाम में और लोगों के हक़ अदा करने पर भी बहुत ज़ोर है लेकिन नफ़्स तो बिना क़ाबू किए क़ाबू हो नहीं सकता और इसे क़ाबू करना इंसान के लिए सबसे नागवार काम है।
    कमेंट्स गार्डन में भी कुछ जानकारी से लबालब भरी हुई पोस्ट्स देखी जा सकती हैं

    राम मंदिर के बारे में सही नज़रिया क्या है ?

    नफ़रत दिल में रखने के बाद आप किसी भी सच्चाई को नहीं समझ सकते

     दुनिया की पहली हिंदी ब्लॉगिंग गाइड

    ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘ Hindi Blogging Guide

     चन्द्र भूषण मिश्र 'ग़ाफिल'  

    वो जमाना और था अब ये जमाना और है।

    वो तराना और था अब ये तराना और है॥

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    भाई ख़ुशदीप जी की पोस्ट पढ़कर
    दुख हुआ कि इरोम शर्मिला 10 साल से एक ऐसी मांग के लिए अनशन कर रही है जिसे हमारे देश के प्रधानमंत्री भी एक जायज़ मांग मानते हैं और उससे भी ज़्यादा दुखद बात यह है कि शर्मिला की आवाज़ को बाबा रामदेव और अन्ना की आवाज़ जैसी तवज्जो नहीं दी गई।

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    श्रमजीवी महिलाओं को लेकर कानूनी जागरूकता.

    और  एक  आलेख - खुशबु गोयल 

    प्रस्तुति-शालिनी कौशिक

    समाज के लिए अभिशाप बनता नशा‏

    आखिर वे कौन से कारण है, जिससे प्रभावित होकर नवयुवतियां नशाखोरी जैसी कुप्रवृत्तियों का शिकार होती जा रही हैं ?

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    'आकुल' जी ने  एक ब्लॉग का लिंक भेजा है:

    वर्ग पहेली का आनंद लें

    ब्लॉग: सान्निध्य
    भेजें: ज्ञान सामर्थ्‍य 1 - हि‍न्‍दी वर्गपहेली
    लिंक: http://saannidhya.blogspot.com/2011/09/1.html  

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     आज माहेश्वरी कनेरी जी का ब्लॉग देखा तो उनकी उपलब्धियों का पता चला,
    सचमुच बहुत कम लेखक यहां तक पहुंच पाते हैं,
    उनके विचार भी मन को झिंझोड़ते हैं।

    अभिव्यंजना

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      सुशीला जी की ईद 

    ( प्रेमचंद जी की पूरी कहानी  बहुत मुख्तसर अल्फ़ाज़ में )



    ईद पर बरबस, आज याद आ गई "ईदगाह"
    हामिद और उसकी दादी की; अनूठी गाथा 

    अपनी बूढ़ी दादी की वो आँखों का तारा था
    बहुत सलोना, बड़ा ही प्यारा औ न्यारा था 

    बूढ़ी दादी जतन से चूल्हे पे बनाती रोटियाँ 
    बिना चिमटे वो अक्सर जलाती उंगलियाँ 

    ईद का त्यौहार आया, घर-घर खुशियाँ लाया 
    तोहफ़ों की सौगात लिए मीठी सेवइयां लाया 

    बच्चे उत्साह से डोलते, गली-गली चहकते थे 
    नए कपड़े, मेला, ईदी ! उनके चेहरे दमकते थे

    तीन पैसे की दौलत लिए, हामिद चला मेले में 
    झूमता, नाचता-गाता; शामिल लोगों के रेले में

    मेले की चकाचौंध भैया, खूब हामिद को ललचाने लगी
    झूले, खिलौने, मिठाई से जा उसकी नज़र टकराने लगी 

    चरखी आई किलके बच्चे! हाथी-घोड़ों पर झूल रहे  
    वह दूर खड़ा; ख़याल और ही उसके मन में तैर रहे 

    सिपाही, भिश्ती, वकील; सब उसको खींच रहे 
    तीन पैसे मगर, मजबूती से मुट्ठी में भींच रहे 

    सोहन हलवा, गुलाबजामुन और रेवड़ियाँ
    हामिद को लुभाएँ, खट्टी-मीठी गोलियाँ

    पर अपना संयम, हामिद हर्गिज नहीं गँवाता है
    मिठाइयों के नुकसान, मन ही मन दोहराता है 

    लोहे की दूकान ,चिमटे पे निगाह उसकी ठहर गई 
    जली उंगलियाँ दादी की, ज़हन में उसके तैर गई

    पाँच पैसे का चिमटा, जेब में उसकी कुल पैसे तीन 
    थी ग़ुरबत बहुत मगर, कभी ना माना खुद को दीन

    भारी दिल, भारी क़दमों से;  हामिद आगे बढ़ लिया
    बोहनी का समय, सौदा तीन पैसे में तय कर लिया

    कंधे पर चिमटे को उसने रखा बड़े ही नाज़ से
    ज्यों सिपाही की बंदूक हो चला बड़ी ही शान से

    नासमझी का उसकी; किया दोस्तों ने खूब उपहास
    हामिद भी चतुर बड़ा था,किया उनसे खूब परिहास 

    मिट्टी के खिलौने, टूट-फूट मिट्टी में ही मिल जाते 
    मेरा चिमटा रुस्तमे-हिंद ! इसकी शान कहाँ पाते 

    घर लौटते ही दादी ने, उसे गोद में खींच लिया 
    देख हाथ में चिमटा! अपने सिर को पीट लिया

    लौटा मेले से भूखा-प्यासा, तू कैसा अहमक है 
    चिमटा लाकर क्यों दादी को देता तोहमत है ?

    सहमा-सा हामिद बोला-तू अपना हाथ जलाती थी 
    बूढ़ा मन हुआ गदगद, अश्रु-धार ना रोके रूकती थी

    बूढ़ी अमीना हाथ उठा , दुआएँ देती जाती थी
    अपने नन्हे हामिद की, बलाएँ लेती जाती थी |
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      भारत भूषण जी पूछते हैं कि

    हिंदी अधिकारी-उर्फ़-तेरा क्या होगा कालिया

    786 के अंक को आधार बनाकर पं. दयानंद शास्त्री जी ने भविष्यवाणी की है कि 
    'हिंदू धर्म और इस्लाम का मधुर मिलन लाज़िमी है।'
    पंडित जी, आपके मुंह में घी शक्कर !

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    "शिक्षक दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

     

    आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद।
    गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।।

    सर्वपल्ली को आज हम, करते नमन हजार।
    जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।।

    धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात।
    आओ सब मिल कर करें, अध्यापक की बात।।

    जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान।
    घटा आज क्यों देश में, शिक्षक का सम्मान।।

    अध्यापक दिन पर सभी, गुरुवर करें विचार।
    बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।।

    छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज।
    तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।। 
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    घर बैठे जौनपुर की सैर कर सकते हैं आप जनाब मासूम साहब की वेबसाइट के ज़रिये
    नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर सलीम ख़ान साहब की पोस्ट्स भी लोकप्रियता का शिखर छू रही हैं। उनका नाम उनका टैग भी है। देखिए 

    खुरचहा पतियों से बचाने का कोई उपाय है?

    "खुरचहे" क़िस्म के वे पति होते हैं जो पत्नी के हर काम में कोई न कोई ग़लती निकालते रहते हैं

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    राजेंद्र स्वर्णकार जी का संदेश
    नाहक़ मत रखिए यहां कभी किसी से बैर !
    सब बंदे अल्लाह के, कौन यहां पर ग़ैर ! ?
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    नेता और जूता - Shikha Kaushik


    उतरा मेरा प्लेन तो
    जनता उछल रही ,
    भाषण मेरा सुनने को
    वो थी मचल रही ,
    मोबाईल केमरा से     
    फोटो रहे थे खीच ,
    प्यासी जनता बहा पसीना 
    धरती रही थी सीच,
    मैं ज्यों ही स्टेज पर 
    देने लगा भाषण,
    तब     घटी  घटना  ;
    पर मैं हूँ विलक्षण ,
    तेजी से  एक जूता 
    मेरी तरफ आया ,
    मैंने भी अपनी फुर्ती का 
    कमाल दिखाया ,
    कर लिया जूते को
    जल्दी से   मैंने कैच ,
    तालियाँ बजी ,मैं 
    जीत गया मैच .
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    हमारे देश के कुछ पदों पर बेठे लोग खुद को भगवान समझने लगे हैं


    दोस्तों विश्व में जो भी जन्मा इंसान है वोह भगवान नहीं है और सच यह है के भगवान से गलतियाँ नहीं होतीं लेकिन इंसान गलतियों का पुतला होता है और इंसान से अगर गलती हो तो उसकी गलती सद्भाविक है या जानबूझ कर की गयी गलती है इसका पता लगाकर दोषी व्यक्ति को सज़ा देने से ही समाज में इमानदारी और सुरक्षा का संतुलन बन सकेगा .लेकिन दोस्तों विश्व की धरती पर एक हमारा देश हमारा हिंदुस्तान ऐसा है जहां कुछ ख़ास पदों पर बेठे लोगों ने खुद को भगवान समझ लिया है इन इंसानों ने सोच लिया है के वोह तो भगवान है और वोह गलती नहीं करते अगर गलतियाँ वोह कर भी ले तो यह तो उनका हक है और इसीलियें इसके लियें ना तो उनके खिलाफ जांच हो सकती है और ना ही इसका उन्हें दंड दिया जाना चाहिए .....तानाशाही और साम्न्त्वदिता का यह बुखार किसी एक को नहीं प्रधानमन्त्री जी ..राष्ट्रपति जी ..जज साहिबान .सी वी सी के आयुक्त ..सांसद महोदय ..मंत्री महोदय ..अधिकारी महोदय सहित कई पदों पर बेठे लोग खुद को खुदा समझ बेठे हैं और वोह खुद की करतूतों की जांच के बारे में सहमत नहीं हो रहे हैं ......हमारे देश में यह लोग जनता के रूपये से अपने चड्डी से लेकर खाने के सामन खरीदते हैं इनके घर का खर्चा एशो आराम जनता के पेसे से आता हैं इनको पद पर बिठाने के पहले इन्हें सपथ दिलवाई जाती है और यह लोग इसी शपथ को तोड़ कर जब अपराध करते हैं तो इनका कोई कुछ नहीं बिगड़ सके इसलियें इनके खिलाफ बन्ने वाले कानूनों का यह विरोध करते हैं ........दोस्तों आप सभी जानते हैं अन्ना की भ्रष्ट लोगों को सजा दिलवाने की लड़ाई अभी सिर्फ शुरू हुई है और सरकार और चोर लोगों ने अपनी कलाई करतूतें शुरू कर दी हैं .....देश में आई पी सी और दुसरे कई कानून बने है जिसमे आम आदमी द्वारा किये गए अपराध के लियें उन्हें सजा देने का प्रावधान है और इन्हीं कानूनों में सभी दुसरे प्रभावशाली लोगों को भी दंडित करने का प्रावधान है लेकिन उन्हें विशेष दर्जा देकर उनके खिलाफ कार्यवाही के पहले सरकार से इजाजत जरूरी बताई है और देश के लाखों ऐसे मामले है के सरकार ने बेईमान भ्रष्ट लोगों के खिलाफ प्रमाणित अपराध होने के बाद भी उक्द्मे की अनुमति नहीं दी है ऐसे में अगर यह शर्त हटा कर आम आदमी को सीधे किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति चाहे वोह आम आदमी हो चाहे वोह प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति या जज हो उसके खिलाफ परिवाद पेश कर कार्यवाही का मोका दिया जाए तो सभी लोगों में कानून का डर रहेगा और वोह भी अपना कम जनहित में ठीक तरह से करेंगे वरना पकड़े जाने पर उन्हें दंडित और लज्जित तो होना ही पढ़ेगा ....अब रहा सवाल झूंठे परिवाद पेश करने का तो हर मुकदमे में प्रसंज्ञान ,,चार्ज की स्टेज पर सुनवाई होती है अगर सबूत नहीं होंगे तो ऐसे लोग बरी हो जायेंगे और बरी होने पर मेलिशियास प्रोसिक्यूशन और मानहानि सहित क्षतिपूर्ति मामलों में ऐसे झूंठे परिवाद पेश करने वाले को भी दंडित करवाया जा सकेगा तो फिर यह पहल आज ही कर सभी कानूनों में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा पेश करने के पहले सरकार या अधिकारी से स्वीक्रति की पाबंदी है या कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा पेश करने के पहले जो प्रोटेक्शन एक्ट बनाया गया है उस क्लोज़ को अगर हटा दिया जाए तो देश आज से ही स्वर्ग हो जाएगा आखिर यह कोनसा कानून है के देश की सवा करोड़ जनता में से कुछ ऊँचे पदों पर बेठे लोग उस कानून से मुक्त हो ऐसे कानून तो सिर्फ गुलामी और समंवादिता वाले जालिमों द्वारा ही बनाये जाते हैं ................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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    धर्म को तो अंबेडकर जी ने भी नहीं नकारा, तब आप क्यों धर्म का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं ?

    नफ़रत किसी समस्या का हल नहीं होती
    आज एक भाई का लेख पढ़ा जो वास्तव में एक ग़ैर मुस्लिम भाई हैं लेकिन दावा करते हैं कि उन्होंने देवबंद के मदरसे से क़ुरआन और हदीस की तालीम हासिल की है और उनका हाल यह है कि इस्लाम की पारिभाषिक शब्दावली को भी ठीक से नहीं लिख सकते।
    एक पोस्ट में उन्होंने वाक़या ए मैराज पर ऐतराज़ जताया है और पैग़ंबर साहब स. को सताने वाले ज़ालिमों को सत्य का पुजारी घोषित कर दिया है।
    यह हिंदी ब्लॉगिंग है, यहां कोई भी ब्लॉगर कुछ भी कर सकता है लेकिन हक़ीक़त यह होती है कि वे दूसरों का तो क्या अपना भी भला नहीं कर सकते। जो सत्य को असत्य कह दे नफ़रत की वजह से, उसका भला तब तक हो भी नहीं सकता जब तक कि वह नफ़रत को दिल से निकाल न दे।
    हमने उनसे कहा कि
    एस. प्रेम जी ! आपके लहजे से इस्लाम और इस्लाम के पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद साहब सल्ल. के लिए कितनी घोर घृणा टपक रही है, इसे हरेक पाठक पहली ही नज़र में जान लेता है।
    इस तरह घृणा दिल में रखने के बाद आप किसी भी सच्चाई को नहीं समझ सकते।
    मैराज हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पेश आई। उसे बेशक आपने नहीं देखा और आप क़ुबूल भी कर सकते हैं और इंकार भी कर सकते हैं लेकिन हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अरब समाज में बिना सूद क़र्ज़ के लेन देन की व्यवस्था की जो कि आज भी दुनिया के सबसे विकसित देश अपने नागरिकों के लिए नहीं कर पाए हैं।
    उन्होंने लड़कियों के जीवित गाड़े जाने की प्रथा का पूरी तरह ख़ात्मा कर दिया।
    लोगों को ग़ुलाम आज़ाद करने की प्रेरणा दी।
    ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का हक़ मालदारों के माल में मुक़र्रर किया जिसे मुसलमान आज उनके जाने के लगभग 1400 साल बाद भी निभा रहा है।
    इस तरह के बहुत से काम उनके जीवन में देखे जा सकते हैं।
    इन कामों को दुनिया के जिस चिंतक ने भी देखा, उसी ने सराहा।
    लेकिन आपने इन सब कामों को नज़रअंदाज़ कर दिया।
    जैसे ये काम कुछ भी हैसियत न रखते हों।
    ऐसा काम वही आदमी करता है जिसके दिल में कूट कूट कर नफ़रत भरी हो और जिसे सत्य की तलाश न हो।
    जिन लोगों ने मुहम्मद साहब को उनके शहर में तरह तरह से तकलीफ़ें बिना बात दीं और फिर मक्का से निकाल दिया, उन्हें आपने सत्य का पुजारी घोषित कर दिया ?
    अगर ये सत्य के पुजारी थे तो फिर ये सत्य से क्यों फिर गए और थोड़े दिन बाद ही मुसलमान हो गए। पूरा मक्का ही मुसलमान हो गया और आज तक वहां मुसलमान ही हैं और आज भी वहां बिना सूद के ही लेन देन होता है और ज़कात का सिस्टम आज भी क़ायम है।
    आप ख़ुद को ज़्यादा लायक़ समझते हैं तो इससे बेहतर व्यवस्था इस देश में या कम से कम अपने गांव देहात में ही स्थापित करके दिखाएं।
    मालिक आप पर दया करे,

    आमीन !
    ...............................
    राम मंदिर के बारे में सही नज़रिया क्या है ?
    1. जनाब ए आली चुन्नू साहब ! लेखक का दिल ख़ुश हो जाता है जबकि उसके लेख को गहराई से पढ़ ले कोई और आपने हमारा दिल सचमुच ख़ुश कर दिया है और इस ख़ुशी में हम ‘राम मंदिर‘ बनाने लिए भी तैयार हैं और उसमें तन-धन लगाने के लिए भी क्योंकि मन तो पहले से ही लगा हुआ है।
    इस बात को हम आज नहीं कह रहे हैं बल्कि जब अयोध्या पर हाई कोर्ट का फ़ैसला भी नहीं आया था हमने तभी कह दिया था कि
    ‘हम चाहते कि अयोध्या में बने राम मंदिर‘
    लेकिन  पहले यह तो जान लीजिये कि 'राम' और रामचंद्र में अंतर क्या है ?
     औरमंदिर किस राम का बनना चाहिए ?
    2. दूसरी बात यह है कि मंगोल अब की बात हैं और श्री रामचंद्र जी को हुए 12 लाख 96 हज़ार साल हो चुके हैं एकॉर्डिंग टू पंडितीय कैलकुलेशन, सो आपको पता होना चाहिए कि ऐसे में मंगोल ख़ुद श्री रामचंद्र जी के ही वंशज हुए।
    ............................
    महासभाई मानसिकता के लोग मुसलमानों में केवल कमियां ही क्यों देखते हैं ?
    भाई चुन्नू साहब ! ज़रा ध्यान दीजिए कि हम ऊपर अपने लेख में कह चुके हैं कि मुसलमानों को तौबा करके सुधर जाना चाहिए और सभी लोगों के साथ भलाई का बर्ताव करना चाहिए।
    ऐसे में आपका ऐतराज़ जायज़ नहीं है।
    ...और साथ ही हमने यह भी कहा है कि मुसलमानों को चाहिए कि वे गुनाह से तौबा करके नेकी का जीवन जिएं।

    इस तरह की अच्छी बातों से भरी हुई पोस्ट पर भी आपका ऐतराज़ जताना तो यह बताता है कि एक मुसलमान चाहे कितना ही अच्छा और सही लिख ले लेकिन आप जैसे महासभाई मानसिकता के लोग हमेशा उसमें केवल कमियां ही देखेंगे ?
    ......................
    मुसलमानों पर ऐतराज़ के चक्कर में नशे की हिमायत
    चुन्नू भाई साहब ! आप मांस का औचित्य सिद्ध करते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन आप नशे को भी समाज का अभिन्न अंग बताएं तो हमें आपत्ति है।
    नशे से कितने घर तबाह और बर्बाद हैं , अगर आप इस पर एक नज़र डाल लें तो आप कहते कि हां नशा समाज के लिए वर्जित होना चाहिए जैसे कि इस्लाम में है।
    ....................
    ‘शराबन तहूरा‘ अर्थात पवित्र पेय
    आपने ख़ुद ही कह दिया है कि जन्नत की शराब दुनिया की शराब से भिन्न होगी।
    दरअस्ल पूरा नाम ‘शराबन तहूरा‘ अर्थात पवित्र पेय है। अरबी में शराब हरेक पीने वाली चीज़ के लिए आता है जैसे कि हिंदी में पेय हरेक पीने वाली चीज़ को कहा जाता है। इसके साथ ‘तहूरा‘ शब्द और बढ़ा दिया गया , जिससे किसी को भी ग़लतफ़हमी न रहे लेकिन इसके बावजूद आप ख़ुद तो ग़लतफ़हमी में हों या न हों लेकिन दूसरों को ग़लतफ़हमी में डाल रहे हैं।
    पेय पदार्थ को अरबी में 'शराब' कहते हैं और 'तहूरा' का अर्थ पवित्र होता है। हमारा रब जन्नत में 'शराबन तहूरा' अर्थात पवित्र पेय पिलाएगा। इसमें ऐतराज़ कैसा ?

    .....................
    मुसलमानों पर बेवजह ऐतराज़ क्यों ?
    भाई चुन्नू जी ! हमारी समझ में यही नहीं आता कि जब मुसलमान ख़ुद को श्री रामचंद्र जी से नहीं जोड़ते थे तब आप जैसे लोग कहते थे कि मुसलमानों को चाहिए कि वे श्री रामचंद्र जी को अपना पूर्वज मान लें और अब जब हमने मानना शुरू कर दिया है तो आपका फ़र्ज़ था कि आप हमारा हौसला बढ़ाते लेकिन अब आप ऐतराज़ कर रहे हैं कि हम ख़ुद को श्री रामचंद्र जी का वंशज क्यों बता रहे हैं ?
    आखि़र आप लोग कन्फ़्यूज़ क्यों हैं ?
    आपको पता क्यों नहीं है कि आप मुसलमानों को किस रूप में देखना चाहते हैं ?

    धर्म को तो अंबेडकर जी ने भी नहीं नकारा, तब आप क्यों धर्म का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं ?
    भाई विनोद हौसलेवाला जी ! धर्म के नाम पर लोगों का शोषण किया गया, उनकी इज़्ज़त लूटी गई और आज भी ये सब धर्म के नाम पर चल रहा है लेकिन आपको जानना चाहिए कि यह सब ‘धर्म के नाम पर किया गया‘, न कि धर्म के अनुसार किया गया।
    विरोध पाखंड और ज़ुल्म का किया जाना चाहिए जिसे अधर्म कहा जाता है जबकि आप विरोध कर रहे हैं ‘धर्म‘ का ।

    धर्म का विरोध तो कभी बाबा साहब अंबेडकर ने भी नहीं किया।
    उन्होंने हिन्दू धर्म की कुरीतियों के विरूद्ध आवाज़ उठाई और जब देखा कि इसे सुधारना संभव नहीं है तो उन्होंने उसका त्याग करके बौद्ध मत ग्रहण कर लिया।
    इसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रचार किया।
    आपकी भाषा में कहा जाय तो उन्होंने ‘बौद्ध धर्म की पीपड़ी बजाई‘।

    क्या आप बाबा साहब के लिए ऐसे शब्द बोल सकते हैं।
    अगर नहीं बोल सकते तो फिर आप दूसरों के महापुरूषों के लिए भी खिल्ली उड़ाने वाले शब्द न बोलें।
    --------------------
    तर्क कीजिए लेकिन शालीनता से
    भाई विनोद हौसलेवाला जी ! आपने अंशु जी के लेख का हवाला तारीख़ के साथ दिया है। यह तरीक़ा पत्र पत्रिकाओं में चलता है नेट पर नहीं। लिंक बनाने का तरीक़ा हमारी एक पोस्ट में सिखाया गया है जिसका लिंक इस पोस्ट में दिया हुआ है।
    अंशु जी ने सवाल रामचंद्र जी के बारे में किया और नाम अल्लाह का भी ले दिया।
    रामचंद्र जी के बारे में जवाब तलब पहले आप उनसे कर लीजिए जो उनका मंदिर बनाने की मुहिम छेड़कर अरबों रूपया डकार गए हैं और अल्लाह के बारे में कोई ऐतराज़ हो तो सवाल अलग से कर लीजिए।
    इंशा अल्लाह आपको जवाब दिया जाएगा।

    प्लीज़ चीज़ों को गड्डमड्ड मत कीजिए।
    हमने अपील की है कि शालीनता के साथ अपने तर्क पेश करें।
    आपने तर्क तो पेश किया लेकिन शालीनता भूल गए ?
    जो कि पोस्ट का शीर्षक भी है।
     यह लिंक देखें :
    Read More...

    सत्ता के इन भूखे भेडियों का टेटुआ दबाकर

    मुर्दों के
    इस देश में
    रहने वाले हम लोग
    आखिर
    किस सुबह
    किस आज़ादी की
    बात कर रहे हैं
    यह सत्ता के
    भूखे भेडिये हैं
    देख लो
    यह ज़िंदा लोगों की लाशों से
    बलात्कार ..अत्याचार कर रहे हैं
    इन लाशों के मांस को
    नोच नोच कर खा रहे हैं
    हाँ
    अँगरेज़ चले गए
    ओलादें छोड़ गए
    इसलियें यह कहा रहे हैं
    और गुर्रा रहे हैं
    हो सके तो इन्हें रोक लो
    मेरे वतन को लोगों
    तुम जो बने हो ज़िंदा लाश
    जरा उठो
    सत्ता के इन भूखे भेडियों का टेटुआ दबाकर
    इनके जबड़ों से
    चमकता सूरज
    मेरे देश को छुडा कर
    आज़ाद करा लो
    ताके तुम्हे हमें एक बार फिर मिले
    सुबह सवेरा एक नये आज़ादी का बसेरा ....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
    Read More...

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