हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?



घृणा और जुगुप्सा के मारे दो तीन दिन से संज्ञाशून्य होने जैसी स्थिति हो गयी है ! शर्मिंदगी, क्षोभ और गुस्से का यह आलम है कि लगता है मुँह खोला तो जैसे ज्वालामुखी फट पड़ेगा ! यह किस किस्म के समाज में हम रह रहे हैं जहाँ ना तो इंसानियत बची है, न दया माया ना ही मासूम बच्चों के प्रति ममता और करुणा का भाव ! इतना तो मान कर चलना ही होगा कि इस तरह की घृणित मानसिकता वाले लोग जानवर ही होते हैं ! अब चिंता इस बात की है कि प्रतिक्षण बढ़ने वाली जनसंख्या में ऐसे जानवर कितने पैदा हो रहे हैं और कहाँ कहाँ हो रहे हैं इस आँकड़े का निर्धारण कैसे हो ! समस्या का हल सिर्फ एक ही है कि इन जानवरों को इंसान बनाना होगा ! उसके लिये जो भी उपाय हो सकते हैं किये ही जाने चाहिये ! सबसे पहले पोर्न फ़िल्में और वीडियोज दिखाने वाले टी वी चैनल्स पर तत्काल बैन लगा दिया जाना चाहिये ! फिल्मों में दिखाये जाने बेहूदा आइटम सॉंग्स, अश्लील दृश्य व संवाद, जो आजकल फिल्म की सफलता की गारंटी माने जाते हैं, सैंसर बोर्ड द्वारा पास ही नहीं किये जाने चाहिये ! समाज का एक अभिन्न अंग होने के नाते महिलाओं की भी जिम्मेदारी होती है कि समाज में हर पल बढ़ते इस मानसिक प्रदूषण को रोकने के लिये कुछ कारगर उपाय करें ! इसलिये केवल खोखली शोहरत और धन कमाने के लिये अभिनेत्रियों व मॉडल्स को ऐसी फिल्मों व विज्ञापनों में काम करने से मना कर देना चाहिये जिन्हें देख कर समाज के लोगों की मानसिकता पर दुष्प्रभाव पड़ता हो ! स्त्री एक माँ भी होती है ! अपने बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोकने के लिये एक माँ हर संभव उपाय अपनाती है ! आज भारतीय समाज भी ऐसे ही निरंकुश, पथभ्रष्ट और संस्कारविहीन लोगों से भरता जा रहा है ! महिलाओं को माँ बन कर उन्हें सख्ती से रास्ते पर लाना होगा और इसके लिये सरकार को भी कुछ सख्त कदम उठा कर क़ानून कायदों को प्रभावी और समाजोपयोगी बनाना होगा ! पश्चिमी संस्कृति का जब और सारी बातों में अनुसरण किया जाता है तो इस बात में भी तो किया जाना चाहिये कि वहाँ की क़ानून व्यवस्था कितनी सख्त और पुख्ता है और उसका इम्प्लीमेंटेशन कितना त्वरित और असरदार होता है ! वहाँ किसी व्यक्ति के खिलाफ, बलात्कार तो बहुत बड़ी बात है, यदि ईव टीज़िंग की शिकायत भी दर्ज कर दी जाती है तो उसे सज़ा तो भुगतनी  ही पड़ती है उसके अलावा हमेशा के लिये उसका रिकॉर्ड खराब हो जाता है और उसे कहीं नौकरी नहीं मिलती ! हमारे देश में विरोध करने वालों की सहायता करने की बजाय पुलिसवाले उन पर हाथ उठाते हैं और उन्हें पैसे देकर मामला दबाने के लिये मजबूर करते हैं !
दामिनी वाला हादसा जब हुआ था तब भी मैंने इस विषय पर एक पोस्ट डाली थी और अपनी ओर से कुछ सुझाव दिये थे ! आज फिर उस आलेख का यह हिस्सा दोहरा रही हूँ ! दामिनी के साथ क्या हुआ, क्यों हुआ उसे दोहराना नहीं चाहती ! दोहराने से कोई फ़ायदा भी नहीं है ! हमारा सारा ध्यान इस बात पर केन्द्रित होना चाहिए कि जो हैवान उसके गुनहगार हैं उनके साथ क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए ! देश की धीमी न्याय प्रक्रिया पर हमें भरोसा नहीं है ! यहाँ कोर्ट में मुकदमे सालों तक चलते हैं और ऐसे खतरनाक अपराधी जमानत पर छूट कर फिर उसी तरह के जघन्य अपराधों में लिप्त होकर समाज के लिए खतरा बन कर बेख़ौफ़ घूमते रहते हैं !
भागलपुर वाले केस को आप लोग अभी तक भूले नहीं होंगे जिसमें बारह साल पहले एक ऐसी ही साहसी और बहादुर लड़की पर गुंडों ने प्रतिरोध करने पर एसिड डाल कर उसका चेहरा जला दिया था ! वह लड़की अभी तक न्याय के लिए प्रतीक्षा कर रही है और उसके गुनहगार सालों से जमानत पर छूट कर ऐशो आराम की ज़िंदगी बसर कर रहे हैं साथ ही अपने गुनाहों के सबूत मिटा रहे हैं !
मेरे विचार से ऐसे गुनहगारों को कोर्ट कचहरी के टेढ़े-मेढ़े रास्तों, वकीलों और जजों की लम्बी-लम्बी बहसों और हर रोज़ आगे बढ़ती मुकदमों की तारीखों की भूलभुलैया से निकाल कर सीधे समाज के हवाले कर देना चाहिए ! सर्व सम्मति से समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र से प्रबुद्ध व्यक्तियों की समिति बनानी चाहिए जिनमें प्राध्यापक, वकील, जज, कलाकार, गृहणियाँ, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, व्यापारी, साहित्यकार व अन्य सभी विधाओं से जुड़े लोग शामिल हों और सबकी राय से उचित फैसला किया जाना चाहिए और गुनहगारों को दंड भी सरे आम दिया जाना चाहिए ताकि बाकी सभी के लिए ऐसा फैसला सबक बन सके !
ऐसे अपराधियों के माता-पिता से पूछना चाहिए कि वे अपने ऐसे कुसंस्कारी और हैवान बेटों के लिए खुद क्या सज़ा तजवीज करते हैं ! अगर वे अपने बच्चों के लिए रहम की अपील करते हैं तो उनसे पूछना चाहिए की यदि उनकी अपनी बेटी के साथ ऐसी दुर्घटना हो जाती तो क्या वे उसके गुनहगारों के लिए भी रहम की अपील ही करते ? इतनी खराब परवरिश और इतने खराब संस्कार अपने बच्चों को देने के लिए स्वयम् उन्हें क्या सज़ा दी जानी चाहिए ? दामिनी, गुड़िया या इन दरिंदों की हवस का शिकार हुई उन जैसी अनेकों बच्चियों के गुनाहगारों पर कोल्ड ब्लडेड मर्डर का आरोप लगाया जाना चाहिए और उन्हें तुरंत कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिये !
लेकिन यह भी सच है कि हमारे आपके चाहने से क्या होगा ! होगा वही जो इस देश की धीमी गति से चलने वाली व्यवस्था में विधि सम्मत होगा ! मगर इतना तो हम कर ही सकते हैं कि इतने घटिया लोगों का पूरी तरह से सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाए ! सबसे ज्यादह आपत्ति तो मुझे इस बात पर है कि रिपोर्टिंग के वक्त ऐसे गुनाहगारों के चहरे क्यों छिपाए जाते हैं ! होना तो यह चाहिये कि जिन लोगों के ऊपर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं उनकी तस्वीरें, नाम, पता व सभी डिटेल हर रोज़ टी वी पर और अखबारों में दिखाए जाने चाहिए ताकि ऐसे लोगों से जनता सावधान रह सके ! समाज के आम लोगों के साथ घुलमिल कर रहने का इन्हें मौक़ा नहीं दिया जाना चाहिए ! यदि किरायेदार हैं तो इन्हें तुरंत घर से निकाल बाहर करना चाहिए और यदि मकान मालिक हैं तो ऐसा क़ानून बनाया जाना चाहिए कि इन्हें इनकी जायदाद से बेदखल किया जा सके ! जब तक कड़े और ठोस कदम नहीं उठाये जायेंगे ये मुख्य धारा में सबके बीच छिपे रहेंगे और मौक़ा पाते ही अपने घिनौने इरादों को अंजाम देते रहेंगे ! जब दंड कठोर होगा और परिवार के अन्य सदस्य भी इसकी चपेट में आयेंगे तो घर के लोग भी अपने बच्चों के चालचलन पर निगरानी रखेंगे और लगाम खींच कर रखेंगे ! यदि इन बातों पर ध्यान दिया जाएगा तो आशा कर सकते हैं कि ऐसी घटनाओं की आवृति में निश्चित रूप से कमी आ जाएगी ! 
दामिनी के गुनाहगारों को सज़ा देने में इतनी ढील ना बरती जाती तो शायद ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति इतनी अधिक नहीं होती और कई ‘गुड़ियाएँ’ इस दमन से बच गयी होतीं ! मेरी इच्छा है इस आलेख को सभी लोग पढ़ें और सभी प्रबुद्ध पाठकों का इसे समर्थन मिले ताकि इस दमन चक्र के खिलाफ उठने वाली आवाज़ इतनी बुलंद हो जाये कि नीति नियंताओं की नींद टूटे और वे किसी सार्थक निष्कर्ष पर पहुँच सकें !

साधना वैद
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रेप और गैंगरेप के सिलसिले को कैसे रोकें ?


दिल्ली में एक 5 वर्षीय बच्ची के साथ रेप हुआ। उसे 4 दिनों से बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ रेप किया गया। उसके पेट से तेल की शीशी और मोमबत्ती निकली है। उसकी हालत गंभीर है। दिल्ली के बाहर के लोग दुखी हैं और दिल्ली के रहने वाले पुलिस से भिड़ रहे हैं। 3 अधिकारी निलंबित कर दिए गए हैं।
क्या इस बार लोग फिर सख्त क़ानून बनाने की मांग करेंगे ?
...लेकिन क़ानून तो पहले ही सख्त बनाया जा चुका है !
...तो फिर लोग अब क्या करेंगे ?
इस बच्ची से पहले भी एक नेपाली युवती के साथ गैंगरेप किया गया था। उससे पहले और भी हुए थे। उससे पहले दामिनी के साथ दरिंदगी का खेल खेला गया था। दामिनी कांड के हैवान जेल भी भेज दिए गए थे।
सख्त क़ानून के बाद भी रेप और गैंगरेप का सिलसिला थम नहीं रहा है। इससे यह बात तो सामने आ गई है कि महज़ सख्त सज़ाएं हैवानियत के इस नंगे नाच को नहीं रोक पाई हैं।
दिल्ली में बद्धिजीवी रहते हैं और दिल्ली से बाहर भी बुद्धिजीवी रहते हैं। सबकी अक्ल चकराई हुई है। जब सबकी अक्ल फ़ेल हो जाती है तभी उन्हें अपनी औक़ात का अहसास होता है कि हमारी भलाई हमारे अपने हाथ में नहीं है। अगर होती तो हम सब अपना भला कर चुके होते।
हमारा कल्याण वास्तव में परमेश्वर के हाथ में है और वह तब होता है जबकि इंसान ईश्वर के बताए अच्छे रास्ते पर चले और बुरे कामों से बचे।
ईश्वर, अल्लाह, गॉड और ख़ुदा यानि एक मालिक का ज़िक्र हरेक धर्म के मानने वाले करते हैं लेकिन उसके बताए रास्ते पर नहीं चलते। यही बिगाड़ की असल वजह है।
आज एक इंसान अपने आप को हिन्दू बताएगा और दूसरा मुसलिम और तीसरा ईसाई और चौथा पारसी लेकिन इनमें से अक्सर इंसान अपने मन की मर्ज़ी पर चलते हैं। इसे वे आज़ादी का नाम देते हैं। जब आदमी मन-मर्ज़ी पर चलने लगे तो मौज मस्ती उसकी ज़िंदगी का मक़सद होता है और उसके लिए वह ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाने में जुट जाता है। 
हमारे शिक्षण संस्थान हमारे बच्चों को ज़्यादा ज़्याादा पैसा कमाने वाली मशीन में तब्दील कर चुके हैं। वे अपने मज़े के बारे में सोचते हैं। उन्हें दूसरों के जज़्बात से कोई वास्ता अब कम ही बचा है। जो अच्छा कमा रहे हैं वे मौज मस्ती में अपनी ज़िंदगी बिता रहे हैं। उनके हाथ में व्हिस्की और रम की बोतलें हैं। उनकी महफ़िलों में नाच रंग है और जेसिका लाल का मर्डर भी। जो लोग कमाने में पीछे रह गए हैं वे किसी का अपहरण कर लेते हैं। हर कोई मज़े ले लेना चाहता है।
ईश्वर अल्लाह को काल्पनिक ठहरा दिया गया है क्योंकि वह इन सब मज़ों से रोकता है। वह चरित्र निर्माण के लिए कहता है। वह बुरे कामों की सज़ा देने के लिए कहता है। 
इंसान के दिल से ईश्वर अल्लाह का डर जिसने निकाला वह दरअसल शैतान ही है। शैतान नेकी के बजाय शैतानी कामों को फलते फूलते देखना चाहता है और आज हर तरफ़ शैतानियत फल फूल रही है। लोग अलग अलग धर्मों का नाम लेते हैं लेकिन दरअसल वे शैतान के तरीक़े पर चल रहे हैं।
लोग परेशान आकर हल तलाश करना चाहते हैं तो उन्हें राह दिखाने के नाम पर फिर कोई शैतान सामने आ जाता है। वह समस्या का समाधान देने के बजाय उसे बढ़ाने के तरीक़े पर चलने के लिए कहता है।
रेप और गैंगरेप के पीछे मौज मस्ती की चाहत एक बड़ी वजह है। मन की अनियंत्रित भावनाएं आदमी से ग़लत काम करवाती हैं। ईश्वर से ईनाम पाने का लालच या उससे सज़ा पाने का डर इंसान को बुरे कामों से रोकता है। हर धर्म में ये बातें हैं। इनसे चरित्र निर्माण में सहायता मिलती है।
आधुनिक बुद्धिजीवियों ने चरित्र निर्माण में सहायता देने वाली हर चीज़ को बेकार क़रार दिया है और जब दुनिया बर्बाद हो चुकी है तो वे लोगों की भीड़ को लेकर पुलिस और नेताओं से भिड़ रहे हैं। 
पुलिस और नेता क्या करें ?
भुगतो अपने आधुनिक चिंतन का दुष्परिणाम !
हरेक रेप और गैंगरेप के पीछे हर वह आदमी अपराधी है, जिसने इंसान से उसकी ज़िंदगी का असली मक़सद छीना है और उसकी ज़िंदगी का मक़सद मौज मस्ती और धन संपत्ति में तरक्क़ी बना दिया है।
हर इंसान अपनी ज़िंदगी के मक़सद को पहचाने और जिस धर्म को वह ईश्वरीय मानता है उसके विधान का पालन करे तो यह समाज आज भी सुरक्षित हो सकता है। इस तरह जुर्म पहले से कम हो जाएंगे और उन मुजरिमों को सज़ा देकर समाज को बुरे तत्वों से पाक करना भी संभव हो जाएगा।
यह बड़ा काम है। इसमें हरे का सहयोग अपेक्षित है।
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निरामिष तड़पे ‘हलाल मीट‘ की लोकप्रियता देखकर

‘हलाल मीट‘   जर्मनी वालों को ख़ूब पसंद आया या यूं कहें कि बड़े शहरों में रहने वाले उनके एंकर  को ख़ूब भा गया। तभी उन्होंने आलू-केले के ब्लॉग को छोड़कर इसे चुन लिया।
‘हलाल मीट‘ जर्मनी के डायचे वेले ईनाम के लिए नामज़द किए गए ब्लॉगों में से एक है। यह अच्छा है। इसकी अच्छाई की एक वजह यह है कि इसके मजमूए में एक लेख मेरा भी है।
शाकाहार को बढ़ावा देने में नाकाम रहने वाले एक साहब को ‘हलाल मीट‘ शुरू से ही अखर रहा है। वह जगह जगह ऐसे तड़प कर बोल रहे हैं जैसे कि उनके गले में मछली का कांटा फंस गया हो, हालांकि वह मछली नहीं खाते. वह ‘निरामिष‘ हैं।
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नेपाली युवती के साथ गैंगरेप किया गया


क़ानून सख्त बन गया मगर औरत है आज भी नर्म निवाला :

नई दिल्ली।। आज सुबह साउथ दिल्ली के नानकपुरा गुरुद्वारे के पास फुटओवर ब्रिज के नीचे एक नेपाली युवती बदहवास हालत में पड़ी मिली। जिस्म पर अस्त-व्यस्त और थोड़े कपड़े। कई जगह चोट के निशान। करीब 20 साल की इस युवती को यूं पड़ा देख वहां राहगीरों का मजमा इकठ्ठा हो गया। लोगों ने पूछा तो युवती ने एक ईंट का टुकड़ा उठा कर सड़क पर लिखकर बताया कि उसके साथ 3 लोगों ने रेप किया है।
किसी ने पुलिस को कॉल करके इस सनसनीखेज मामले की सूचना दी। फौरन साउथ दिल्ली के कई सीनियर अफसर समेत लोकल पुलिस पहुंची। युवती ने बताया कि किडनैप करके उसके साथ गैंगरेप किया गया है। तुरंत युवती को अस्पताल ले जाया गया।

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दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है


 मिल-जुल कर किसी ढंग के ब्लोगर को जर्मनी भेजने पर इत्तेफ़ाक़ कर ले। अच्छा तो यही है.
ब्लोगिंग का माज़ी (इतिहास) लिखने वाले उसका वर्तमान ख़राब कर रहे हैं. यह देखना अच्छा नहीं लगता. 
शोहरत के लिए या किसी और मकसद के लिए आदमी वह सब कर गुज़रता है जो कि नहीं करना चाहिए.
रविन्द्र परभात जी किसी ब्लॉग को अच्छा कहें तो सही है लेकिन वे या उनके हमनवा दूसरे ब्लोगों को बकवास कहने का हक नहीं रखते. उन्हें भी बहुत लोग पसंद करते हैं। दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है .
ईनाम के लिए  नामित एक महिला ब्लोगर कि ईमेल ने तो उनके बारे में बहुत कुछ बिना कहे कह दिया है.
यह चर्चा हो रही है इस पोस्ट की-

Ravindra Prabhat के प्रचार के पीछे ख़ुद रवीन्द्र प्रभात ही निकले ?

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प्रमोशन के लिए नेवी ऑफिसर ने बीवी को किया सीनियरों के साथ सोने पर मजबूर ?

Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/india/south-india/navy-officers-wife-alleges-husband-forced-her-to-sleep-with-colleagues/articleshow/19488717.cms#gads

नेवी ऑफिसर की पत्नी ने लगाया यौन शोषण का आरोप

नेवी ऑफिसर की पत्नी ने लगाया यौन शोषण का आरोप

कोच्चि।। पहले ही करप्शन और घोटालों से दागदार भारतीय सेना के दामन पर इस बार गंभीर दाग लगा है। यौन शोषण का दाग। भारतीय नौसेना में तैनात एक लेफ्टिनेंट की पत्नी ने सीनियर ऑफिसरों पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। महिला ने कहा है कि यह सब उसके पति की रजामंदी से से हुआ। महिला की शिकायत के बाद कोच्चि पुलिस ने उसके पति सहित नेवी के 10 ऑफिसरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, नौसेना ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

हार्बर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत में महिला ने आरोप लगाए हैं कि पिछले 2 महीने से उसके पति ने प्रमोशन और कुछ अन्य फायदों के लिए अपने सीनियर्स के साथ सोने के लिए मजबूर किया। महिला का कहना था कि जब मैंने इन सबका विरोध किया तो मरे पति ने जमकर पिटाई की और घंटों कमरे में बंद रखा।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति सहित नौसेना के 10 ऑफिसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में आरोपियों ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लागई है। हाई कोर्ट ने पुलिस से इस मामले की विस्तृत जानकारी देने को कहा है।
  • नौसेना इन आरोपों से इनकार किया है। बयान में कहा गया है कि जिन ऑफिसरों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने अपनी-अपनी पत्नियों के साथ मिलकर इस कपल के निजी जीवन के मतभेद सुलझाने की कोशिश की थी, जो नाकाम रही। दुर्भाग्यवश महिला ने मदद करने वालों पर ही आरोप लगा दिए। नौसेना का कहना है कि इस मामले में वह पूरा सहयोग करेगी।
  • कॉमेंट्स :
siyasharan sharma , kaman bharatpur का कहना है :
11/04/2013 at 06:04 PM
एक नारी शादी के बाद अपने पति से प्यार,सहयोग,रक्षा,ओर स्वाभिमान चाहती है लेकिन जब असे नालायक पति को जीवन साथी बना लिया जाये तो नारी बेचारी क्या करे,नारी एक प्यार ओर ममता का फूल है जो पति ही नही वरण सम्पूर्ण समाज को प्यार ओर ममता देती है नारी मे एक प्राक्रतिक खुदा ने शारीरिक कमी दे दी लेकिन ए मर्द जाट इसे प्यार सरक्षण नही देती ओर नही इस नारी के स्वाभिमान की रक्षा ही करती है,नारी की इस शारीरिक कमी के करण ही शादी की रस्म रखी गयी लेकिन फिर भी डोलत के भूखे पति इस नारी की असमत को सारेबाज़ार बेच देते है बहुत ही शर्मनाक बात है एसा मर्द मर्द जाती पर ओर मानवता पर कलनक हैजय हिन्द
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rs, ptn का कहना है :11/04/2013 at 05:59 PM
यह सिर्फ सेना में ही नहीं, सारे सरकारी विभाग में लागू है।
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raajan, uttrakhand का कहना है :
11/04/2013 at 02:25 PM
.जब पहली बार पति ने किसी अफसर के पास भेजा था अरे तभी क्यों नही विद्रोह किया इसने............! तभी तो कहा हैं....................:- क्रिपनश्य वित्तं नृपस्य चित्तं मनोरथा च दुरजन मानवानां त्रिया चारित्रां पुरुषो भागम देवो ना जनशी कुतो मनुष्यं.................................!
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Raj, USA का कहना है :
11/04/2013 at 11:22 AM
सेना मे एसा होता है लकिन बहुत ही कम बाते बाहर आती हैं ..... ए तो बीवी ने आरोप लगाया है इस से पेहले कितनी बार तो खुद महीला सैनिक इस तरह का आरोप लगा चुकी हैं...... मगर ए हिन्दुस्तान है यहाँ कुत्च नही होता ...... एक अमेरिका है जहां बिल क्लिंटन को मोनिका के केस मे अदालत मे बुला लिया गया था दुनिया की सबसे पवरफुल सीट के आदमी को ...... हमारे देश मे तो अदालत सलमान खान तक को नही बुला पायी हर बार वकील बहाना लेके पहुंच जाते हैं .......
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Hat ke, .............. का कहना है :
11 Apr, 2013 11:20 AM
ये आपका अपना अनुभव है? सवाल ये है की आपके लिये क्या महत्यपूर्ण है- आपका करियर या आपकी इज़्ज़त? 

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पाठकों की राय के बाद अब आप हमारी राय पढ़ें .
बात चाहे सच ही क्यों न होलेफ्टिनेंट की पत्नी ने ने १० लोगों पर इल्ज़ाम  लगाकर अपना केस कमज़ोर कर लिया है.  
हमने एक केस में यही नुकसान उठाया है. 
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डा. अनवर जमाल को सराहा गया जर्मनी में



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क़ाबिले क़द्र भाई ख़ुशदीप की पोस्ट के ज़रिये ब्लॉगर्स को पता चला कि दुनिया की 14 ज़बानों में 4 हज़ार से ज़्यादा ब्लॉग्स में से जब हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ 10 ब्लॉग चुने गए तो जर्मनी वालों ने उनमें डा. अनवर जमाल के ब्लॉग ‘औरत की हक़ीक़त‘ को भी चुना।
फ़ोलो करने लायक़ 10 ब्लॉग में ‘हलाल मीट‘ को देखकर यह यक़ीन हो गया कि चुनाव करने वाले किसी गुट से ताल्लुक़ नहीं रखते। इस ब्लॉग का संचालनकर्ता कौन है ?, यह तक क्लियर नहीं है लेकिन फिर भी इसे इज़्ज़त बख्शी गई। 
राजनीति, विज्ञान और समाज पर लिखने वाले दूसरे ब्लॉग भी इसमें शामिल हैं। उन सबकी लिस्ट भाई ख़ुशदीप के ब्लॉग से कॉपी की जा रही है। 
कौन-कौन से ब्लॉग इन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए नामांकित हुए हैं...

हिंदी का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग...

अन्ना हज़ारे


आधारभूत ब्रह्मांड
विज्ञान

हिंदी में फॉलो करने लायक बेहतरीन ब्लॉग...


कोई भी हिन्दी ब्लॉगर ईनाम पाये लेकिन वह जर्मनी जाए और वहां हिन्दी का नाम रौशन करे। इसके लिए अपने पसंद के ब्लॉग को वोट दीजिए। पसंद का ब्लॉग न हो तो उनमें पढ़कर किसी को पसंद कीजिए। इस तरह के ईनाम देने का मक़सद यही होता है कि जिस ब्लॉग को नफ़रत या घटिया राजनीति के चलते पीछे धकेलने की कोशिश की गई हो। उसकी बेहतरी को मन्ज़रे आम पर क़ुबूल किया जाए और यहां तो आलमी सतह पर तसलीम किया गया है कि डा. अनवर जमाल हिन्दी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर्स में से एक हैं।
डा. अनवर जमाल समेत चुने गए सभी हिन्दी ब्लॉगरों को मुबारकबाद, सिर्फ़ इसलिए कि इस चुनाव में गुटबाज़ी और धांधली नहीं है।
‘औरत की हक़ीक़त‘ ब्लॉग पर कुल 21 पोस्ट्स देखी जा रही हैं। उनके 50 से ज़्यादा ब्लॉग्स में इस पर सबसे कम एक्टिविटी देखी गई है। अगर उनके एक्टिव ब्लॉग्स ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ या ‘वेद क़ुरआन‘ या‘बुनियाद‘ वग़ैरह में से किसी को नॉमिनेट किया जाता तो ज़्यादा अच्छा रहता। 
बहरहाल हिन्दी ब्लॉगर्स की आवाज़ दुनिया के दूसरे कोने तक जा रही है। डा. अनवर जमाल के ज्ञान से दुनिया नफ़ा उठा रही है। यह एक अच्छा बदलाव है। यह एक अच्छी शुरूआत है।
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अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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