भारत की ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ परंपरा-हरि मोहन

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  • Saturday, April 19, 2014
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
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  • लिव इन रिलेशनशिप भारतीय समाज में हमेशा चर्चा का विषय रहा है। सामाजिक रूप से इसे आज भी स्वीकार नहीं किया जाता है। स्त्री का शादी के बगैर पुरुष के साथ रहना सामाजिक दृष्टि से पाप समझा जाता है। घर-परिवार और समाज में लिव इन रिलेशनशिप की बात उठाते ही इसे पश्चिमी देशों की नकल कह कर दरकिनार कर दिया जाता है।

    समाजिक ढांचा आज भी यहीं मानता है कि जोड़ियां स्वर्ग से बनकर आती हैं। समाज में गहरी जड़ें जमा चुका यह बह्म सत्य शायद ही कभी टूट पाए! लेकिन, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारतीय समाज में लिव इन रिलेशनशिप( सहजीवन) से मिलती-जुलती परंपरा काफी पुराने वक्त से चली आ रही है। यह आज भी उसी रूप में समाज में विद्यमान है।

    लिव इन रिलेशनशिप से मिलने-जुलने वाली यह परंपरा राजस्थान में आज भी कायम है। इस प्रथा का नाम है ‘नाता प्रथा’। राजस्थान की इस इस प्रथा के मुताबिक, कोई शादीशुदा पुरुष या महिला अगर किसी दूसरे पुरुष और महिला के साथ  अपनी इच्छा से रहना चाहती है तो वो अपने पति या पत्नी से तलाक लेकर रह सकती है। इसके लिए उन्हें एक निश्चित राशि चुकानी पड़ती है।

    इस प्रथा में महिला और पुरुष के बच्चों और दूसरे मुद्दों का निपटारा पंचायत करती है। उन्हीं के निर्णय के हिसाब से तय किया जाता है कि बच्चे किसके साथ रहेंगे। ये इसलिए किया जाता है कि ताकि बाद में महिला या पुरुष के बिच किसी चीज़ को लेकर मतभेद न हो। वो अपनी जिंदगी अपनी पंसद के व्यक्ति या स्त्री के साथ आराम से काट सके।

    राजस्थान में इस प्रथा का चलन ब्राह्मण, राजपूत और जैन को छोड़कर बाकी की जातियों में देखा जा सकता है। गुर्जरों में यह परंपरा यहां खासकर लोकप्रिय है। इस प्रथा से यहां के पुरुष और महिलाओं को तलाक के कानूनी झंझटों से छुटकारा तो मिलता ही है साथ  ही में अपनी पसंद का जीवन साथी के साथ रहने का हक भी मिल जाता है।

    हालांकि, बदलते वक्त के साथ इस प्रथा में भी कई विसंगतियां आई हैं। इसका स्वरूप भी बदला है। कई बार तो इस प्रथा की आड़ में महिलाओं को दलालों के हाथों बेचने का घिनौना खेल भी खेला जाता है।

    कलर्स चैनल के बहुचर्चित सीरियल ‘बालिका वधू’ में भी इस प्रथा को दिखाया गया है। इस नाटक में आनंदी की सहेली फूली का विवाह इसी नाती प्रथा के तहत उसके देवर के साथ होता है। इस नाटक में दिखाया गया है कि कैसे यह नाता प्रथा जो उजड़ चुके लोगों को फिर से सामाजिक रूप में जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है।

    अगर किसी स्त्री या पुरुष को किसी दूसरे स्त्री या पुरुष से प्यार है तो नाता प्रथा उसके लिए बेहतर विकल्प है। घर वाले अगर किसी लड़की की जबर्दस्ती कहीं और शादी करवा भी देते हैं तो वो लड़की नाता प्रथा का यूज अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए कर सकती है।

    इसके लिए उसे निश्चित रकम चुकानी पड़ती है। शादी के बाद भी अगर कोई स्त्री किसी दूसरे पुरुष से प्यार करने लगती है और उसके साथ रहना चाहती है तो वो नाता प्रथा के तहत उसके साथ अपनी इच्छा से रह सकती है।
    साभार : http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/How-to-choose-candidate-for-the-PM-of-India/entry/%E0%A4%AD-%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95-live-in-relationship-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B01

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