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एक नारी के रूप अनेक
कभी मात बन जनम ये देती,
कभी बहन बन दुलराती;
पत्नी बन कभी साथ निभाती,
कभी पुत्री बन इतराती;
कहने वाले अबला कहते,
पर भई इनका तेज तो देख;
काकी, दादी सब बनती ये,
एक नारी के रूप अनेक |
कभी शारदा बन गुण देती,
कभी लक्ष्मी बन धन देती;
कभी काली बन दुष्ट संहारती,
कभी सीता बन वर देती;
ममता भी ये, देवी भी ये,
नत करो सर इनको देख;
दुर्गा, चंडी सब बन जाती,
एक नारी के रूप अनेक |
कभी कृष्णा बन प्यास बुझाती,
यमुना बन निच्छल करती;
गंगा बन कभी पाप धुलाती,
सरयू बन निर्मल करती;
नदियाँ बन बहती जाती,
न रोक पाओगे बांध तो देख,
कावेरी भी, गोदावरी भी ये,
एक नारी के रूप अनेक |
कभी अश्रु बन नेत्र भिगोती,
कभी पुष्प बन मुस्काती;
कभी मेघ बन बरस हैं पड़ती,
कभी पवन बन उड़ जाती;
पल-पल व्याप्त कई रूप में ये,
न जीवन है बिन इनको देख;
जल भी ये, पावक भी ये,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले
आसमान की गोद में टिमटिमाते कई तारे
सितारों के बीच एक छवि तू बनाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
हँसा था तू, बात पुरानी हो चुकी,
यादों को आगोश में ले, संग उसके झिलमिलाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
खुशी के कुछ पल कभी आए तो थे,
यादों को ही तू अपने पलकों पे सजाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
मुस्कुराने का तुमने जो वादा है किया,
भूल के हर गम तू वो वादा बस निभाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
ज़माने की चोट से आँसू भी निकलते,
पर पानी में भींग के अस्कों को छुपाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
प्यार में है मजबूर तू, माना ये हमने,
आएँगी ख़ुद बहारें, खुशी के गीत गा ले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
याद रख तू, कोई तुझसे है जुडा,
अपनी नहीं तो उसकी, तू खैर तो मनाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
खोखली सबकी खुशियाँ, फ़िर तू क्यों ग़मगीन;
मुस्कुराना है रस्म, ये रस्म भी निभाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
तड़प तेरी मुझसे अब देखी नहीं जाती,
तड़प में भी थोडी-सी खुशी तू मिलाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
कहानी सिर्फ़ तेरी नहीं, हर एक की है,
अपनी ही बात तू ख़ुद को ही सुनाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
शिकवा गर तुझको है ज़माने से कोई,
दिल ही दिल में अपनी अलग दुनिया तू बसाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।
धर्म का अर्थ पता चल गया
भूखा था
किसी ने खाने को
दो रोटी दी
मेरी भूख मिटायी
प्यासा था
किसी ने पानी पिलाया
प्यास को बुझाया
दर्द से पीड़ित था
आँख से आंसूं निकल
रहे थे
किसी ने कंधे पर
हाथ रख कर सांत्वना दी
दर्द कम हुआ
बीमार था
किसी ने चिकित्सा कर
जान बचायी
आँखों से दिखता ना था
किसी ने हाथ पकड़
सड़क पार करायी
निरंतर सोचता था
धर्म क्या होता है ?
अब धर्म का अर्थ
पता चल गया
13-05-2011
848-55-05-11
आज लोग केवल अपने लालच और सहूलियत को जानते हैं
सफ़ेद पोशाक ज़ेबे तन है
जुबाँ पर जिनकी वतन वतन है
'असद' ये हुस्ने तज़ाद कैसा है ?
उन्हीं की जेबों में काला धन है
मुश्किल अल्फ़ाज़
ज़ेबे तन-तन पर सजी हुई
हुस्ने तज़ाद-विरोधाभास
जुबाँ पर जिनकी वतन वतन है
'असद' ये हुस्ने तज़ाद कैसा है ?
उन्हीं की जेबों में काला धन है
मुश्किल अल्फ़ाज़
ज़ेबे तन-तन पर सजी हुई
हुस्ने तज़ाद-विरोधाभास
आज लोग केवल अपने लालच और सहूलियत को जानते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए वे तरह तरह के लेबल अपनी हवस पर लगा लेते हैं जिसे इल्म की रौशनी में ही देखा जा सकता है।
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