लोग विपरीत विचार सामने आते ही या तो पलायन का रूख़ इख्तियार कर लेते हैं या फिर फ़र्ज़ी आईडी से अपमानजनक टिप्पणियां करने लगते हैं ताकि विपरीत विचार वाले का हौसला तोड़ा जा सके। यह प्रक्रिया विचार विमर्श के अनुकूल नहीं है। जो लोग विचार विमर्श का दंभ भरते हैं वे भी ऐसी असभ्य टिप्पणियां प्रकाशित करते देखे जाते हैं।
जब हौसला नहीं है विपरीत विचार को सहन करने का तो फिर ब्लॉगिंग जैसे खुले मंच पर ये लोग आते ही क्यों हैं ?
सुज्ञ जी कहते हैं कि
जब हौसला नहीं है विपरीत विचार को सहन करने का तो फिर ब्लॉगिंग जैसे खुले मंच पर ये लोग आते ही क्यों हैं ?
सुज्ञ जी कहते हैं कि
मुझे आश्चर्य होता है कि जब हमनें ब्लॉग रूपी ‘खुला प्रतिक्रियात्मक मंच’ चुना है तो अब परस्पर विपरित विचारों से क्षोभ क्यों? यह मंच ही विचारों के आदान प्रदान का है। मात्र जानकारी अथवा सूचनाएं ही संग्रह करने का नहीं। आपकी कोई भी विचारधारा इतनी सुदृढ नहीं हो सकती कि उस पर प्रतितर्क ही न आए।हम उनके कथन से सहमत हैं .
इस पर हमारा कहना यह है कि
ब्लॉगिंग में विचार देना और तर्क-प्रतितर्क करना अच्छी बात है लेकिन यह पढ़े लिखे और सभ्य लोगों का मंच है। इसलिए भाषा शैली में सभ्यता और शालीनता ज़रूर होनी चाहिए। इससे एक अच्छा माहौल बनेगा, किसी भी विचार विमर्श के लिए ऐसा माहौल बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।
इस मुददे पर आपके विचार भी आमंत्रित हैं।
