ब्लॉगर्स मीट वीकली (31)
| आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स |
अनवर जमालजी की रचनाएँ |
अयाज अहमदजी की रचना |
मंच के बाहर की पोस्टएक किरण अब भी बाकी है........ (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्रीजी ‘मयंक')पिछले कई वर्षों से मैं दो-मंजिले पर रहता हूँ। मेरे कमरे में तीन रोशनदान हैं। उनमें जंगली कबूतर रहने लगे थे।कुमार राधारमण जी की रचनाशकर का हिसाबइस तरह जो लोग "मीठे केशौकीन" नहीं होते,वे भी अपने दिनभर के आहार में कई तरह सेशकर ले लेते हैं। सिर्फ कहने की बात रहती है कि"हम ज़्यादा मीठा नहींखाते।"कैलाश सी.शर्माजी की रचना घर की अलगनी के दो छोर जोड़े रहे दो दीवारों की दूरी, दूर हो कर भी बने रहेएक ही सूत्र के दो छोरसाधना वैदजी की रचना फागुन का मास तो हर बरस आता है , लाल, पीले, हरे, नीले आशा सक्सेनाजी की रचना दोशी कौन अर्श से ज़मीन तक वजूद है तेरा होता सुखद अहसास सानिध्य पा तेरा महेश्वरी कनेरीजी की रचना खाली पन्ने बहते अश्रु जल ने शायद सब अक्षर मिटा दिए हैं तभी तो जीवन की किताब के कुछ पन्ने खाली रह गए हैं रविकरजी की रचना मनमे अतीत की याद लिए फिरते हैनिज अंतर में उन्माद लिए फिरते हैं, उन्मादों में अवसाद लिए फिरते हैं, अंदर ही अन्दर झुलस रही है चाहें, मनमे अतीत की याद लिए फिरते है। संगीता स्वरुपजी की रचना उन्मादी प्रेमवन्दना जी की रचना उफनते समुद्र की लहरों सा उन्मादी प्रेम चाहता है पूर्ण समर्पण चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद जी की रचना मजाज़ की कविताअतुल श्रीवास्तवजी की रचना गर्व की बात है... हम उस देश में पैदा हुए, जिस देश की मिट्टी को माथे पर लगाया जाता है। गर्व की बात है..... हम उस देश में पैदा हुए, जिस देश के संत महात्माओं की सीखों से पूरी दुनिया रौशन है। चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िलजी "की रचना चौंकिए नहीं साहब! यह बलात्कार वैसा नहीं है जो आप समझ रहे हैं और डॉक्टर भी वो नहीं जिसे आप जान रहे हैं। यह शब्दों के साथ बलात्कार है और बलात्कारी हैं पी-एच.डी. उपाधिधारी डॉक्टर |
Mahesh Barmate आपके लिए कुछ लिंक भेज रहा हूँ.. इन्हें ब्लॉगर्स मीट में शामिल करियेगा... १ - इंडियन आइडल ६ में शामिल होयें - जानकारी २ - एप्पल आई फ़ोन के आई ओ एस ५ में हिंदी की-बोर्ड सक्रिय करें - |
भारतीय नारी सुकन्या के विचार आज कितने प्रासंगिक हैं ? Sukanyaऔरत का दूसरा विवाह होने के विषय में और पुत्र होने के विषय में सुकन्या के विचार क्या आज भी प्रासंगिक हैं ?‘आर्य भोजन‘ ब्लॉग पर कलौंजी-एक रामबांण दवा kalonji
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| ‘प्यारी मां‘ ब्लॉग पर अपनी बेटियों के सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से ‘मुशायरा‘ ब्लॉग पर |
ज़िन्दगी ख़ुद क्या ‘फ़ानी’ यह तो क्या कहिये मगर। मौत कहते हैं जिसे वो ज़िन्दगी का होश है॥ |


