dahej mrityu v kanooni rukh

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  • Wednesday, February 16, 2011
  • by
  • Shalini Kaushik
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  • आज डॉ.अनवर जमाल जी के आग्रह पर मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट "दहेज़ मृत्यु व कानूनी रुख"आप के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ .ये लेख मैंने तीन भागों में लिखा था आज मैं इसका पहला भाग ही प्रस्तुत कर रही हूँ-
    भारतीय समाज का एक वीभत्स स्वरुप   दहेज़ के रूप में दिखाई देता है .न्यायालय और कानून इस सम्बन्ध में कठोर रुख रखते हैं.जो कि निम्नलिखित है:
      धारा ३०४-ख भारतीय दंड संहिता दहेज़ मृत्यु से सम्बंधित है-
    १-जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति ने या उसके पति के किसी नातेदार ने ,दहेज़ कि किसी मांग के लिए ,या उसके सम्बन्ध में ,उसके साथ क्रूरता कि थी या उसे तंग किया था वहाँ ऐसी मृत्यु को "दहेज़ मृत्यु "कहा जायेगा और ऐसा पति या नातेदार उसकी मृत्यु कारित करने वाला समझा जायेगा.
    २-जो कोई दहेज़ मृत्यु कारित करेगा वह कारावास से ,जिसकी अवधि सात वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगी ,दण्डित किया जायेगा .
      ये तो हुई अधिनियम की बात ,इसके साथ ही न्यायालय ने भी इस सम्बन्ध में कठोर रुख अपना रखा है
    पवन कुमार बनाम हरियाणा राज्य ऐ .आई .आर.१९९८ सु.कोर्ट में यह अभिनिर्धारित किया गया की दहेज़ के लिए करार किया जाना आवश्यक नहीं है .यदि विवाह के तुरंत पश्चात् वधु अथवा उसके माता पिता से रेफ्रीजेरेटर ,स्कूटर आदि की मांग की जाती है तो यह कहा जायेगा की यह विवाह से सम्बंधित है तथा इससे भा.दंड सहिंता के अंतर्गत "दहेज़ की मांग"का मामला गठित होगा.
    शांति बनाम हरियाणा राज्य ऐ.आई.आर.१९९१ सु.को.१२२६ के मामले में विनिश्चित किया गया की इस अपराध के लिए मिम्नालिखित तत्वों का होना आवश्यक है:-
    १-महिला की मृत्यु अप्राकृतिक दशा में जलने के कारण या शारीरिक चोट के कारण हुई हो.
    २-ऐसी मृत्यु मृतका के विवाह के सात वर्ष के अन्दर हुई हो .
    ३-मृतका को उसके पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा प्रताड़ित किया गया हो.
    ४-ऐसी प्रताड़ना दहेज़ की मांग को लेकर की जा रही हो.
       मृतका की मृत्यु होते ही उसके मायके वालों को कोई सूचना दिए बिना उसका शीघ्रता से दाह संस्कार कर देना एक ऐसी परिस्थिति है जो अप्राकृतिक मृत्यु के संदेह की पुष्टि के लिए एक उचित कारण मानी जा सकती है .
       अभी आगे और मेरी दूसरी पोस्ट में;

    4 comments:

    DR. ANWER JAMAL said...

    Thanks for such a nice post.

    अख़्तर खान 'अकेला' said...

    shalini bhn tthyatmk jankari ke liyen dhnyvaad. akhtar khan akela kota rasjthan

    DR. ANWER JAMAL said...

    अगर आपको ऐतराज़ न हो तो हम चाहते हैं की आपका नाम इस ब्लॉग के कानूनी सलाहकार मंडल में शामिल कर लिया जाये .

    शालिनी कौशिक said...

    yah mere liye samman ki baat hogi .dhanywad .

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