दिल्ली गैंगरेप की शिकार लड़की की मौत से उपजे सवालों का हल

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  • Saturday, December 29, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
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  • दिल्ली गैंगरेप की शिकार लड़की आज मर गई. अल्लामा सैयद अब्दुल्लाह तारिक़ साहब के ख़ुत्बे हमेशा मौजूदा हालात में लोगों की सही रहनुमाई करते है, डा. नदीम साहब ने बताया कि कल जुमा से पहले अपने ख़ुत्बे में उन्होंने दिल्ली गैंगरेप की शिकार लड़की के साथ हुए बर्ताव की कड़ी निंदा की. इसी के साथ उन्होंने बताया कि आजकल इस तरह के जुर्म बढ़ते जा रहे है. दिल्ली के इस वाक़ये को मीडिया ने कवरेज ज़्यादा दिया तो यह ज़्यादा हाईलाइट हो गया वर्ना इस तरह के जुर्म पहले भी हुए हैं और आइंदा भी होते रहेंगे. दरिंदों ने बेशक घिनौना जुर्म किया है लेकिन अगर कोई यह कह दे कि लड़की सर्दी की रात में 9 बजे एक लड़के के साथ क्या कर रही थी तो सब लोग उसके पीछे पड़ जाएंगे. नई तालीम पा चुकी लड़कियों में से ज़्यादातर यह चाहती हैं कि वे अपनी मर्ज़ी से छोटे कपड़े पहनें, किसी भी वक्त किसी भी लड़के के साथ अपनी मर्ज़ी से जहां चाहें वहां घूमें और उनके साथ अपनी मर्ज़ी से जो चाहें, वह करें लेकिन कोई उन्हें न रोके और उनकी मर्ज़ी के खि़लाफ़ उनके साथ कुछ न किया जा. ऐसा होना मुमकिन नहीं है. पश्चिमी मुल्क जो विकसित हैं, वहां भी बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं हालांकि वहां हिफ़ाज़त के इंतेज़ाम भी हैं और सज़ाएं भी लेकिन यह सब काफ़ी नहीं है जब तक कि समाज के लोगों में अल्लाह पर ईमान न हो और उसकी मुक़र्रर की गई हदों की पाबंदी न की जाए. इस सिलसिले में सूरा ए अहज़ाब की 59, 60, 61वीं आयत में उम्दा हिदायतें दी गई हैं-
    ऐ नबी! अपनी पत्नि यों और अपनी बेटियों और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे अपने ऊपर अपनी चादरों का कुछ हिस्सा लटका लिया करें। इससे इस बात की अधिक सम्भावना है कि वे पहचान ली जाएँ और सताई न जाएँ। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है (59) यदि कपटाचारी और वे लोग जिनके दिलों में रोग है और मदीना में खलबली पैदा करनेवाली अफ़वाहें फैलाने से बाज़ न आएँ तो हम तुम्हें उनके विरुद्ध उभार खड़ा करेंगे। फिर वे उसमें तुम्हारे साथ थोड़ा ही रहने पाएँगे, (60) फिटकारे हुए होंगे। जहाँ कही पाए गए पकड़े जाएँगे और बुरी तरह जान से मारे जाएँगे (61)
    लड़कियां और औरतें इन हिदायतों की पाबंदी करें तो छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं बहुत कम रह जाएंगी और तब ऐसे मुजरिमों को शहर से निकालने के अलावा दीगर सख्त सज़ाएं भी दी जाती हैं और इस तरह समाज में सबको हिफ़ाज़त और सलामती मयस्सर आ जाती है.अल्लामा तारिक़ साहब का ख़ुत्बा और क़ुरआन की ये 3 आयतें हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है. दिल्ली गैंगरेप के बाद भी नोएडा और दिल्ली के आसपास बलात्कार और बलात्कार की कोशिशों के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं. इसका एक आसान हल यह भी है कि दुनिया के तमाम देशों को देखा जाए कि किस देश में सबसे कम बलात्कार की घटनाएं होती हैं और वहां की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक व्यवस्था क्या है ?उस व्यवस्था को अपना कर भी बलात्कार और दीगर गंभीर अपराधों से मुक्ति पाई जा सकती है.

    1 comments:

    महेन्द्र श्रीवास्तव said...

    बेटी दामिनी

    हम तुम्हें मरने ना देंगे
    जब तलक जिंदा कलम है

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