दर्द का अहसास अल्फाजों में पिरोकर जीवंत ब्लोगिंग क्र रही हैं हरकीरत हीर

दर्द का अहसास अल्फाजों में पिरोकर जीवंत ब्लोगिंग क्र रही हैं हरकीरत हीर

इक दर्द 
                                                       था सिने में ,
                                                      जिसे 
                                                      लफ्जों में पिरोती रही 
                                                      दिल के दहकते 
                                                      अंगारे लिए में ,
                                                      जिंदगी की 
                                                      सीडियां चढ़ती   रही 
                                                      कुछ माज़ियों की 
                                                      कतरनें थीं ,
                                                      कुछ रातों की बेकसी 
                                                      जख्मों के ताकों में 
                                                       में रातों को सोती रही ..................जी हाँ दोस्तों यह चंद लाइनें हकीक़त हैं हरकीरत कलसी हकीर उर्फ़ हरकीरत हीर की और इसी दर्द ने हरकीरत कलसी हकीर को हरकीरत हीर बना दिया हरकीरत जी के सीने में छुपे दर्द को जब जब इन्होने कागज़ के कलेजे पर उतारा है तब तब इन्होने हजारों हजार नहीं लाखों लोगों से दाद पायी है , हरकीरत हीर की कलम से निकले अलफ़ाज़ एक ऐसी सच्चाई ऐसे दर्द का हिस्सा होते हैं के हर कोई इसे अपना हाल , अपनी जिंदगी समझ कर इस गीत,गज़ल,लेख,का जीवंत अहसास करता है ,और बेसाख्ता उसके मुंह से हरकीरत जी के लिए, वाह निकल जाती है , 
बहन ,हरकीरत हीर आसाम में गोहाटी के सुन्दरपुर में रहती है ,,और शायद इनके अल्फाजों और इनके व्यवहार ने ही इनके रहने वाले इलाके को इनके सुन्दर अहसास की वजह से सुन्दरपुर का नाम दिया हो , बहन हरकीरत जी किसी भी रचना को अल्फाजों में ढाल कर पहले तराशती है,, फिर एक सुन्दर अंदाज़ में ब्लोगिंग कर उसे खूबसूरती से पेश करती हैं ,,,अपनी कई सच का सामना करने वाली,रचनाओं के कारण, बहन हरकीरत जी अनेकों बार ब्लोगिंग का विवाद रहीं, लेकिन सभी ने बाद में खुद की गलती का एहसास किया और हरकीरत हीर के अहसास इनके अल्फाजों को समर्थन दिया है .
ब्लोगिंग की दुनिया में नोव्म्बर २००८ से जोर आज़माइश कर रही हरकीरत जी ब्लोगिंग की दुनिया की जान हैं ब्लोगिग्न की दुनिया का अहसास हैं जिनके बगेर ब्लोगिंग का सब कुछ नीरस सा लगता है ब्लोगिंग बिना हरकीरत हीर की रचना के बिना नमक के आते के सामान लगने लगती है और फिर हरकीरत जी जब ब्लोगिगिन में आती है तो एक नया अंदाज़ नया अहसास नई जिंदगी का तराना देखकर सभी को सुखद अहसास होता है . 
बहन हरकीरत हीर जी को पूरानी फिल्म पाकीज़ा और मुगलेआज़म बहुत पसंद है इन्हें दर्द भरी कविताओं का  काव्य संकलन बहुत बहुत पसंद है अपने विचारों को जिंदगी देने के लियें अल्फाजों को जिस माला में पिरोकर ब्लोगिंग के जरिये यह आपके सामने हैं उसका नाम खुद के नाम से यानि हरकीरत "हीर"है और इसी नाम से इनकी ब्लोगिंग है हाल ही में इनकी रचनाये..तवायफ की इक रात , दर्द की मुस्कुराहटें , लोगों को काफी पसं आ रही है अपनी ब्लोगिंग २१ सितम्बर २००९ को हरकीरत जी ने एक खत इमरोज़ के नाम से शुरू की थी और फिर पत्थर होता इंसान , ख़ामोशी चीरते सवाल जेसी रचनाओं ने हरकीरत को साहित्य में एक नई पहचाना दी जो आज ब्लोगिंग की दुनिया में बहतरीन लिखने वाले साहित्यकारों में से प्रमुख हैं .हरकीरत जी के इस ब्लॉग के ४५१ अनुसरण करता है इनका  एक दूसरा ब्लॉग अनुवाद कार्य है जिसमें इन्होने एक नई विधा के तहत कुछ रचनाओं के अनुवाद किये हैं ,बहन हरकीरत जी ने पंजाबी में भी लिखा है और इनका एक ब्लॉग पंजाबी में जबकि कुछ सांझे ब्लॉग हिंदी और पंजाबी में भी चलते हैं , बहन हरकीरत जी की रचनाओं को पढो तो बस पढ़ते रहने और उसी में खो जाने को जी चाहता है इसीलियें तो हरकीरत हीर नहीं तो ब्लोगिंग केसी का नारा ब्लोगर्स की दुनिया में चल रहा है ..................... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
Read More...

हर आशिक लिखता नहीं...


        दोस्तों जब मैं कॉलेज के फर्स्ट इयर में था, तब मैंने लेखन ले क्षेत्र में कदम ही न रखा था... साल २००७ की शुरुआत में या २००६ के अंत से मैंने लिखना शुरू किया होगा... और २००७ के मध्य तक मैं अपनी क्लास में मशहूर हो गया था... के कारण तो बस मेरा लेखन था और दूसरा सबसे महत्त्वपूर्ण कारण था मेरा लेखन का विषय. उस वक्त मैं अधिकांशतः प्यार से सम्बंधित लेख, कविता, शायरी वगैरह लिखता था. इसी कारण लोगों ने ये सोचना शुरू कर दिया कि महेश जरूर किसी से प्यार करता है तभी वो बस प्यार के बारे में ही लिखता है... और ये बात सुन कर मुझे हँसी आती थी. क्योंकि ये लेखन की कला मुझे भगवान की ओर से उपहार के रूप में मिली है और मुझे ही नहीं मेरे दोनों बड़े भाइयों को ये कला प्राप्त है. 
       और तब मैंने उनका ये भ्रम तोड़ने की मन में ठानी और फिर एक लेख लिख डाला. और आज मैं अपनी लेखों वाली नोट बुक से वही लेख आपके समक्ष प्रस्तुत करने आया हूँ. तो चलिए शुरू करता हूँ अपना लेख - 

      जैसा कि मैंने आपको बताया कि कुछ लोग ये सोचते हैं - "जो लोग 'प्यार' से सम्बंधित लेख, कवितायें या शायरियाँ लिखते हैं, वे भी किसी से मुहब्बत करते हैं या कभी न कभी उन्होंने भी किसी न किसी से प्यार जरूर किया होगा तभी तो इस बारे में इतना सोच पाते हैं". और हाँ ये विचार ज्यादातर किशोरों के मन में ही अक्सर आते हैं. पर मेरा मानना है कि ऐसा बिलकुल ही नहीं है, मेरा मतलब ये नहीं कि जो लोग प्यार - मुहब्बत से सम्बंधित लेख लिखते हैं वो किसी से भी प्यार नहीं करते, पर सभी एक से नहीं होते. ये तो बस लिखने वाले की सोच पर निर्भर करता है कि वह क्या महसूस कर रहा है, वह क्या लिखना चाहता है और उसने अपने आसपास क्या देखा जिस पर वो लिखना चाहता है. 
      हर व्यक्ति को उसके आसपास का वातावरण बहुत प्रभावित करता है. कभी - कभी हम (लेखक या कवि) किसी व्यक्ति से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि उनकी बातें या वे जो महसूस करते हैं उसी को स्वयं महसूस करके, अपने तथा उनके विचारों को अपनी कहानियों, कविताओं तथा लेखों में व्यक्त करते हैं. और हर लिखने वाले की दूरदृष्टि इतनी अच्छी होती है कि वे वह बात भी सोच लेते हैं जो आमतौर पर हर कोई नहीं सोच पाता. हम, लिखने वाले, तो किसी के भी विचारों, जिनसे हम अच्छी तरह वाकिफ हैं, को भी अपने लेखों, कविताओं में शामिल कर सकते हैं. कभी कभी हम किसी आशिक के दिल के हाल को ही बयान कर देते हैं तो कभी किसी निर्जीव वस्तु के दिल का हाल भी बता सकते हैं और अगर मन में कुछ न आया तो किसी alien (परगृह वासी)  की व्याख्या तक बखूबी कर सकते हैं जिसे हमने तक सपने में तक न देखा हो, ऐसी दुनिया की कल्पना कर सकते हैं जहां सिर्फ प्यार हो, खुशियाँ हो.. ऐसी दुनिया जिस पर आज के वैज्ञानिक जा कर बसने की सिर्फ परिकल्पना कर सकते हैं. पर हम लेखक / कवि लोग ऐसी दुनिया में जब चाहे कदम रख सकते हैं भले इंसान सच में वहाँ हजारों सालों बाद ही या शायद कभी भी कदम न रखे. 
और मेरी ये बात इन पंक्तियों से सार्थक होता है - 

जहां न पहुँचे रवि,
वहाँ पहुँचे कवि...

       बस इसी कारण, एक लेखक या कवि किसी भी विषय पर जब चाहे लिख सकता है, चाहे वो विषय "प्यार" ही क्यों न हो ? और ये सब लिखने के लिए उसे प्यार करना जरूरी भी नहीं होता. वैसे मेरी माने तो कोई भी किसी भी विषय पर लिख सकता है, जैसे मैंने लिखने की शुरुआत की.
      अगर आपको भी लगता है कि प्यार को describe करने के लिए प्यार करना जरूरी है तो ये विचार अपने मन से निकाल ही दें तो बेहतर होगा, क्योंकि हर प्यार करने वाला लेखक, कवि या शायर नहीं होता.

      अब समझता हूँ कि शायद आपको मेरी बात समझ में आ ही गई होगी और आप इससे सहमत भी होंगे. और यदि कोई बात, फिर भी समझ में न आये, तो मैं हूँ न ... हर दम आपके ही लिए...

- आपका 
महेश बारमाटे "माही"

ज़रा यहाँ भी नज़र डालें... 

पञ्च-शील : गौतम बुद्ध की शिक्षाएं : 
http://meri-mahfil.blogspot.com/2011/04/blog-post_25.html


क्या आज ५५ साल बाद भी भारत में जातिवाद ख़त्म हुआ है ?
http://meri-mahfil.blogspot.com/2011/04/blog-post_17.html

F.A.L.T.U.
Read More...

इसे हमारी वाणी ने हॉट में आने के बावुजूद हटा दिया . उसने अन्याय किया , Virtual Corruption


यह एक पोस्ट है जो सच को उजागर करती है . इसीलिए इसे हमारी वाणी ने हॉट में आने के बावुजूद हटा दिया . उसने अन्याय किया , आप इसका विरोध करें हमारी वाणी के ब्लॉग पर जाकर. धन्यवाद.
 दिमाग़ हल्का हुआ तो पेट ने भी हल्का होने की ख्वाहिश ज़ाहिर की। लिहाज़ा हम अपने किचन गार्डन की तरफ़ चल दिए। एक शौचालय यहां भी बना हुआ है। यहां पूरी तरह प्राइवेसी है। दरअस्ल हम बचपन से ही योगी स्वभाव के आदमी हैं।
योग की सबसे अच्छी शिक्षक ‘मां‘ होती है। योग में सबसे पहले शौच और आसन की सिद्धि करनी अनिवार्य है। अगर मनुष्य यम-नियम का पाबंद नहीं है, उसका अंतःकरण पवित्र नहीं है, वह धैर्यपूर्वक एक आसन में स्थिर नहीं हो सकता तो उसे योग की सिद्धि कभी हो ही नहीं सकती। वह मां ही तो है जो बच्चे को सबसे पहले पॉटी करना सिखाती है, उसे पॉटी के लिए बैठना सिखाती है, उसे पवित्र रहना सिखाती है। योग की प्राथमिक शिक्षा यहीं से शुरू हो जाती है। हरेक इंसान का पहला गुरू उसकी मां होती है। इंसान बड़ा होता है तो उसे अपना अभ्यास भी बढ़ा देना चाहिए। अब उसे कोशिश करनी चाहिए कि शरीर की तरह उसके मन में भी गंदे विचार जमा न होने पाएं। लेकिन इंसान अपने मन को निर्मल बनाने पर ध्यान ही नहीं देता। हम जब भी शौच के लिए जाएं तभी हम अपने मन को भी बुरे विचारों से पाक करने की कोशिश करें। इस तरह एक ही समय में हमें दो लाभ हो सकते हैं। इस समय शरीर खुद को साफ़ करने में जितना समय लेता है, उतने समय में हम कोई और काम तो कर ही नहीं सकते। लिहाज़ा उतने समय में हमें अपने मन को ही टटोल लेना चाहिए कि हमारे मन में कोई बुरा विचार तो नहीं आ गया है। हम नाहक़ किसी को सता तो नहीं रहे हैं ?
किसी का कोई हक़ तो हमने नहीं मार लिया है ?    
अगर हम ढंग से शौच करना ही सीख लें तो हमारी मां और बहनों की आर्थिक स्थिति ठीक हो जाएगी, मां अपने घर में और बहनें अपनी ससुराल में खुश ही रहेंगी। हमें शौच करना भी आज तक ढंग से नहीं आया इसीलिए आज मां अपने घर में ही उपेक्षित है और बहनें अपनी ससुराल में भाई की राह तक रही हैं और कभी वे मायके आ भी जाती हैं तो उन्हें यही अहसास बार बार दिलाया जाता है कि ब्याह के बाद अब तेरा यहां कुछ नहीं है। यह एक बुराई है जो हर घर में आम है। कमज़ोर का हक़ मारकर कोई समाज कभी खुशहाल नहीं हो सकता। लिहाज़ा हम भी आज तक खुशहाल न हो पाए। आज हमारे समाज में कन्या को गर्भ में ही मार दिया जाता है और जिन्हें मार नहीं पाते तो उनकी ज़िंदगी मरने से बदतर कर दी जाती है।
बदन की पाकी के साथ दिल को भी पाक करना चाहिए। जितनी देर में हमने किचन गार्डन पार किया उतनी ही देर में यह सब ख़याल तेज़ी से आकर चले गए। हम शौचालय में दाखि़ल होकर ‘शौचासन‘ में बैठ गए। यह आसन मन को बड़ा प्रफुल्लित करता है। इसे बच्चे से लेकर बूढ़ा तक हरेक कर सकता है, यहां तक कि किसी भी रोग का रोगी और गर्भवती स्त्रियां भी निःशंक होकर इस आसन को कर सकती हैं। 
और बताएं की हमारी वाणी ने इस पोस्ट को आज हित होने के बावुजूद क्यों हटा दिया अपने बोर्ड से ?
यह है खुला Virtual Corruption. 
Read More...

‘हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल‘ की स्थापना का उद्देश्य Welcome


एक आम ब्लॉगर  की तरह मैं भी यहां कुछ अरमान लेकर आया था। हिंदी ब्लॉगिंग का मतलब मैं यही समझता था कि हम अपने विचार दूसरों के साथ शेयर करें और दूसरों के लेख पढ़कर हम लाभ उठाएं लेकिन धीरे-धीरे यह सच्चाई सामने आई कि जिन लोगों को लिखने का ख़ाक पता नहीं है वे यहां बड़े ब्लॉगर बने बैठे हैं और ब्लॉगर्स के चक्रवर्ती सम्राट बनने के चक्कर में हैं। मैंने तुरंत से ही उनकी मुख़ालिफ़त शुरू कर दी तो उन्होंने मेरे धर्म को कोसना शुरू कर दिया और मुझे एक और लड़ाई में उलझा दिया। ताकि मुझ पर अन्य धर्मों का विरोधी होने का ठप्पा लगाया जा सके जिससे नए ब्लॉगर्स मेरी बात पर कान ही न धरें। धीरे-धीरे मैंने ऐसे सभी लोगों के होश ठिकाने लगा दिए और कुछ जगहों पर खुद को पीछे हटा लिया ताकि मैं फ़ालतू में इन बड़े ब्लॉगर्स की साज़िश का शिकार न बनूं। मैं चाहूं तो मैं भी ख़ामोश रह सकता हूं लेकिन मुझसे अन्याय होता देखकर चुप रहा ही नहीं जाता। इस बार मैं देख रहा हूं कि औरत को सरेआम नंगा करने वाले हिंदी व्यंग्यकार अपने यार-दोस्तों की टीम को सम्मानित कर रहे हैं और खुद भी सम्मानित हो रहे हैं। 
एक मशहूर एग्रीकटर की लगभग पूरी टीम को ही अहाने-बहाने से ऑबलाइज  किया जा रहा है। इस तरह औरत के सतीत्व और स्त्रीत्व को अपमानित करने वाले ये लोग तमाशेबाज़ी करके हिंदी ब्लॉग जगत में अपना नाम ऊंचा करने की फ़िराक़ में हैं। अगर ये लोग कामयाब हो गए तो नेकी-बदी और सम्मान-अपमान का पैमाना और उसकी तमीज़ ही ख़त्म हो जाएगी। इस क्राइसिस से बचाने के लिए मुझे अकेले ही आवाज़ उठानी पड़ी वर्ना ऐसा नहीं है कि मैं जोड़-तोड़ करके एक अदद सम्मान हासिल न कर सकता था। ऐसे जुगाड़ और ऐसी तकनीक मुझे भी आती है लेकिन सम्मान मेरा मक़सद नहीं है , मेरा मक़सद तो सत्य है। जो भी काम हो उसमें ईमानदारी और पारदर्शिता हो। अगर इन्होंने कोई सूची जारी कर ही दी थी तो अब पुरस्कार भी उसी के अनुरूप बांटे जाने चाहिएं थे और अगर श्रेष्ठ व्यंग्यकार को अपने द्वारा नंगा फ़ोटो लगाने पर कोई अफ़सोस है तो समस्त हिंदी ब्लॉगर्स से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांग लेते तो बात ख़त्म हो जाती। दूसरी बातों को हम भी नज़रअंदाज़ कर देते। 
कार्यक्रम तो इनका होकर रहेगा क्योंकि इन्होंने एक लंबे अर्से से गुटबाज़ी करके एक नेटवर्क बना लिया है लेकिन इनका मज़ा तो ख़राब कर ही दिया जाएगा। जब ये लोग सम्मान सभा में सजकर बैठे हों तब भी इनकी एक नज़र आपकी पोस्ट पर रहनी चाहिए। इससे आइंदा इन पर दबाव बनेगा और ये इस बार की तरह हिंदी ब्लागर्स को मूर्ख बनाकर उन्हें अपमानित करने का साहस नहीं कर पाएंगे।
हमारे अंदर किसी भी मुद्दे पर कितनी भी असहमति क्यों न हो ? लेकिन हमें इनके चैधरीपने के सपने को चकनाचूर करने के लिए आपस में एकजुट होना ही पड़ेगा। जितने भी नए ब्लॉगर्स हैं, जितने ब्लॉगर्स भी गुटबाज़ी से दूर हैं उन्हें एकजुट करने के उद्देश्य से ही ‘हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल‘ की स्थापना की गई है। जो लोग इस संघर्ष में मेरे साथ आना चाहते हैं यदि वे फ़ोरम में शामिल होना चाहें तो उनका स्वागत है।
http://hbfint.blogspot.com/
-----------------------
Read More...

लघु कथा ----- दिलबाग विर्क


              जानवर                      
अनजान गली में से गुजरते समय एक कुत्ते को बैठे देखकर हमारे कदम ठिठके .थोडा संभलकर पास से निकलने की सोची .जानवर है , क्या भरोसा कब टांग पकड़ ले . हम दोनों ने यही सोचा .
" आदमी भी तो एक जानवर है , सभ्य जानवर ."-मैंने अपने दोस्त से कहा .
" हाँ , जानवर तो है ,लेकिन सभ्य नहीं , बल्कि सभ्य होने के बाबजूद भी .'- मेरे मित्र ने दार्शनिक अंदाज़ से कहा .
" वो कैसे ?"-मैंने हैरानी से पूछा .
" आदमी सभ्य है ,इसमें कोई शक नहीं , लेकिन वह जानवर भी है . जानवर की तरह वह कभी भी हमला कर सकता है आपके सामान पर , आपकी जान पर व आपकी इज्जत पर ... तभी तो घर से बाहर आकर हम अनजान आदमियों से ऐसे ही सचेत रहते हैं जैसे हम अभी इस कुत्ते के पास से गुजरते समय थे ."-उसने बात स्पष्ट की .
               उसकी बात पर जब मैंने गौर किया तो समाचार पत्रों ,टी.वी.चैनलों पर दिखाए जाने वाले दुष्कर्म ,लूट-मार भरे समाचार मेरी आँखों के सामने घूम गए . मुझे भी यकीन आ गया उसकी बात पर .वास्तव में आदमी जानवर ही तो है ,सभ्य होने के बाबजूद भी .

                       * * * * *   साहित्य सुरभि 
Read More...

शब्द अभिव्यक्ति बन जाते हैं और यकीनन यह शब्द ही मेरा सुकून हैं .............रश्मि प्रभा

ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ......जो चलते हैं हमारे साथ, ....... वक़्त निकालकर बैठते हैं वटवृक्ष के नीचे , सुनाते हैं अपनी दास्ताँ उसकी छाया में ।
लगाते हैं एक पौधा उम्मीदों की ज़मीन पर और उसकी जड़ों को मजबूती देते हैं ,करते हैं भावनाओं का सिंचन उर्वर शब्दों की क्यारी में और हमारी बौद्धिक यात्रा का आरम्भ करते हैं....
आप सभी का स्वागत है इस यात्रा में कवियित्री रश्मि प्रभा के साथ .....                            बहन रश्मि प्रभा एक काम काजी महिला हैं और अपने दिल में दर्द,जज्बात,बुलंद इरादों के साथ अल्फाजों की जादूगरी ,कर जो शब्द यात्रा  पर चलती हैं ,उससे जो साहित्य ,जो रचना ,जो कविता, जो लेख, जो क्षणिका, बनती है ,बस पढ़ते ही दिल से वाह निकल जाती है, और इंसान खुद बा खुद अपने जज्बातों में खो जाता है बस साहित्य इसी का नाम है ,और यह कमाल करने में बहन रश्मि प्रभा को महारत हांसिल है इसीलियें आज यह ब्लोगिंग की खुसूसी साहित्यकारों  में विशिष्ठ स्थान रखती हैं और ब्लोगिंग की महारथी बन सांझा ब्लोगों की सांझीदार सलाहकार अध्यक्ष बनी हैं . 
बिहार की राजधानी पटना में जन्म लेकर पली,बढ़ीं, और फिर वहीँ एक व्यवसायिक कामकाजी महिला के साथ साथ अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ मन के अहसास को शब्दों के जरिये ब्लोगिंग पर उकेर रही हैं ,रश्मि प्रभा जी मई २००७ से ब्लोगिग्न की दुनिया में जोर आज़माइश कर रही हैं और आज हालात यह हैं के बहन रश्मि प्रभा को ब्लोगिंग क्वीन के नाम से भी जाना जाने लगा है , कविपंत की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की सोभाग्य्वती बेटी रश्मि प्रभा का नाम करण  विख्यात  साहित्यकार स्वर्गीय श्रीमती सुमित्रा नन्दन पन्त ने किया ,और बस बहन रश्मि ने जब से होश सम्भाला अपने जज्बात,, मन की बातों को अल्फाजों की माला में पिरोकर, कागज़ के कलेजे पर, उकेरना प्रारम्भ किया और इन्हें दाद पर दाद मिलती रही , रश्मि प्रभा जी कहती हैं ........के शब्दों की विरासत मुझे मिली है उनका कहना है के अगर शब्द की धनी में ना होती तो मेरा मन,मेरे विचार , मेरे अन्दर दम तोड़ देते वोह  कहती हैं के मेरा मन जहां तक जाता है मेरे शब्द उसकी अभिव्यक्ति बन जाते हैं वोह गर्व से कहती हैं यकीनन यह शब्द ही मेरा सुकून हैं ......
एक अच्छी कामकाजी महिला , एक अच्छी बेटी के साथ साथ रश्मि प्रभा एक अच्छी गृहणी भी हैं यह पूजा पाठ पर विश्वास करती हैं इन्हें पढने लिखने के अलावा घर की सजावट करना भी पसंद है यह अपने मन को और अपने दिमाग को सोच सोच कर भावुक बना देती है और इन भावनाओं से जो अलफ़ाज़ निकलते हैं वही आज हमारे सामने खुबसूरत रचनाओं के रूप में सामने पेश किये गये हैं .
नज्मों की सोगात ..........वटवृक्ष  ......मेरी भावनाएं ........क्षणिकाएं ........खिलोने वाला घर सहित कई दर्जन ब्लोगों की सांझेदार रश्मि प्रभा ब्लोगिंग की दुनिया में कई सांझा ब्लॉग के प्रबन्धक अध्यक्ष भी हैं .२१ जून २००७ का वोह ऐतिहासिक यादगार दिन जब रश्मि प्रभा जी इंटरनेट पर आयीं अपना पहला ब्लॉग लिखा और अंग्रेजी में अपने यादगार फोटुओं के ...साथ... सोने की साइकिल चांदी की सीट आओ चलें डार्लिंग चलें लव स्ट्रीट  ...लिखा फिर अंग्रेजी में ही दुसरा तीसरा छोटा ब्लॉग लिखा बस उसके बाद हिंदी शुरू हुई और फिर २८ अक्तूबर  २००७ को ..सिट्रेला की जमीन ....में अपने भाव इस तरह से बिखेरे के सभी लोग भाव विभोर हो गये .
मेरी भावनाए....ब्लॉग में रश्मि जी खुद के अहसास को अल्फाजों में ढाल कर एक ऐसी जिंदगी देती हैं के वोह लोगों के दिलों पर जाकर सीधे ऐसी जगह बनाते हैं के वहां से हटने का अनाम ही नहीं लेते अपने भावनाओं में माँ बताओ तो वाली रचना जब रश्मि जी लिखती है तो यकीन मानिये एक छोटे बच्चे के मन की गुदगुदी जो वोह सोचता है उसे लिख डालती हैं , इनकी रचना आज  भी में यही चाहती हूँ ,, जीवन क्रम , चुप तो रहो , जाने दो किस किस की तारीफ़ करूं मुझे अगर लिखते लिखते कई साल भी गुज़र जाये तो इनकी प्रशंसा और रचनाओं के भाव की सुगंध खत्म नहीं हो सकती इनका ब्लॉग  खिलोने वालों का घर जिसमें बच्चों की भावनाए उनके खेल उनके जज्बात उकेर कर रख दिए हैं .. बचपन से लेकर बुढापे तक का अहसास अपने अल्फाजों में उकेरने वाली बहन रश्मि प्रभा जो जीवंत साहित्यकार हैं और शायद एक अभिमन्यु  की तरह से ही इन्होने साहित्यकार माँ के गर्भ में साहित्य का पाठ पढ़ा हो इसीलियें तो साहित्य के चक्रव्यूह का घेरा बहन रश्मि आज तोड़ कर लोगों को भाईचारा,सद्भावना ,प्रेम भाव ,एकता की सीख दे रही हैं .. हैं ना बहन रश्मि ब्लोगिंग क्वीन ...अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
Read More...

अपनी साहित्यकार माँ को समर्पित एक बेटी है साधना वेद

    कहते हैं माँ के पैर के नीचे जन्नत होती है , और माँ के लालन पालन से ही उसकी गोद में पलने वाला बचपन अपना भविष्य तय करता है , अपनी माँ को दुनिया में सबसे ज़्यादा प्यार करने वाली साधना वेद प्रथम महिला आदर्श बेटी ब्लोगर हैं जिन्होंने अपनी माँ के साहित्य को एक डायरी के माध्यम से एक ब्लॉग के माध्यम से दुनिया में प्रसिद्ध कर दिया है .


जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे है अपनी माँ के प्रति साधक बनी एक बेटी साधना वेद की, जिनका जन्म प्यार की इमारत ,सातवें अजूबे ,ताजमहल के शहर, आगरा में हुआ है ,बहन साधना वेद ,यूँ तो वर्ष २००८ से ब्लोगिंग की दुनिया में धूम मचा रही हैं ,लेकिन इनके विशेष ब्लॉग उन्मना unmana   और सुधिनमा sudhinama में जिंदगी का हर सच भर कर रख दिया है .हिंदी ब्लोगिंग में अपने माँ और बाबूजी की यादगार स्म्रतियों के साथ ब्लोगिंग करने वाली पहली भारतीय महिला साधना वेद जी को संगीत सुनना, लेखन कार्य करना और अध्ययन करना बहुत अच्छा  लगता है .
साधना जी का कहना है के वास्तव में, हमारे दुखों का कारण, हमारी चुप्पी है ,हम अपने आसपास, घटित होने वाली, अवांछनीय गतिविधियों के प्रति जिस तरह से खामोश रहकर, तटस्थ रहते हैं, इसी के कारण अपराधियों के होसले बुलद होते हैं ,अपराध सहते रहने की लोगों की खामोशी की आदत का खिमियाज़ा आज देश और समाज को सहना पढ़ रहा है , समाज के अध्ययन में काफी लम्बी साधना करने के बाद ,समाज के बिगाड़ का यह मूलमंत्र बहना साधना जी के हाथ लगा है ,जो शत प्रतिशत नंगा सच है अगर हम हमारे आसपास किसी भी गलत काम का विरोध करना शुरू करदे, उसे सहना छोड़ दें, तो निश्चित तोर पर बुरे लोगों के होसले पस्त होंगे ,और बुराई सच्चाई से हार जायेगी लेकिन इस मन्त्र पर कोई भी अमल नहीं करता है, इसीलियें बहन साधना ने दुखी मन से इस सच को उजागर कर डाला है . 
साहित्य के लिए समाज का दर्द, और समझ चाहिए, इस सच्चाई को बहन साधना यूँ समझाती हैं ,वोह कहती हैं के ना दिल में जख्म ना आँखों में ख्वाब, की किरने, फिर किस गुमान पर ,इतने दीवान लिख डाले ,,,,,बात साफ़ है के लेखन और अच्छे लेखन के लिए एक दर्द एक अनुभव की जरूरत है ....वोह बहतरीन गज़ल बहतरीन साहित्य के लियें कहती हैं के,, तमाम उम्र ,जब इस दर्द को जिया मेने, तब कहीं जाके, यह छोटी सी गजल लिखी है मेने .,,,.

अपनी माँ ,और बाबूजी की यादों में खोयी एक प्यारी सी बिटिया कब साहित्यकार बन गयी, उन्हें पता ही नहीं चला और जब वोह लिखने लगी तो अपनी माँ की डायरी जिसमें जर्रे से लेकर आफताब तक यानी मोसम सर्दी गर्मी,बसंत, त्यौहार, होली ,दीवाली, जज्बात ,दुःख ,दर्द, जीने का एक  फलसफा, गरीबी, अमीरी ,सामाजिक रीतिरिवाज प्यार मोहब्बत हर मुद्दे  पर जीवंत अक्षर उकेर कर ,साधना जी की माँ श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना किरण ने साहित्य की दुनिया में कभी न खत्म होने वाली सुगंध बिखेर दी है और इस सुगन्ध को अपनी माँ की डायरी में से बहन साधना ने अपने ब्लॉग के माध्यम से उन्मना में हम तक पहुंचाया है ऐसी लेखनी ऐसा साहित्य जो जिंदगी के जर्रे का अहसास कराता है ,वोह सिर्फ और सिर्फ साधना बहन की माँ का ही लिखा है , बहन साधना ने वर्ष २००८ से ब्लोगिग्न में सुधिनामा में भी संवेदनशील साहित्य ,रचनाएँ लिखी हैं पहले साधना जी ने अंग्रेजी में लिखा ,फिर हिंदी में जो लिखना शुरू किया तो सभी साहित्यकारों पर इनकी रचनाये भारी पढने लगी और इन्हें जब मुक्त कंठ से दाद मिली तो इन्होने कभी गरीबी , कभी महंगाई ,कभी भ्रस्टाचार, कभी मोसम के मिजाज़ तो कभी आज के बिगड़े हालातों पर ब्लोगिंग  की और इनके ब्लॉग आज अधिकम पढने वाले ब्लोगों में  शामिल हैं, एक भावुक और संवेदन शील, महिला ब्लोगर ने अकेले इतना जखीरा इकट्ठा कर परोस दिया है के पढने वालो से समेटे नहीं सिमट रहा है इनके ब्लॉग उन्मना के ६९ तो सुधिनामा के ७७ फोलोवर्स हैं जो हजारों हजार टिप्पणी से साधना बहन को दाद देते रहे हैं . इनकी रचना में जनता की आवाज़ हे ,गरीबी का दर्द है ,रिश्तों की आस है इनकी सबसे बहतरीन रचना माँ का एहसास आज भी लोग पढ़ कर अपने बचपन में खो जाते हैं इस रचना की खासियत यह के माँ अपनी ममता और बच्चे अपने बचपन की यादों को ताज़ा करने लगते हैं ऐसी ब्लोगर बहन जो कई दर्जन सांझा ब्लोगों में शामिल होकर ब्लोगिंग का मन बढ़ा रही हैं उन्हें सलाम ..................................... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
Read More...

अभियान

जुड़ कर संघर्ष करें...



आइए, भारत को भ्रष्टाचार मुक्त करने का प्रयास करें। सहयोग सुझाव दें और साथ चलें इस मुहीम में। आज जो मुल्क के हालात हैं उन्हे आप नहीं समझेंगें तो कौन समझेगा? अब वक्त आन पडा है युवाओं को भ्रष्टाचार के इस महाभारत में कूदने का। तलाश है अर्जुन का। समय है आपका। तो बढ़ाइए हाथ, लड़ीये जंग, छेड़िये अभियान अनवरत भ्रष्टाचार के खिलाफ। आप नहीं चेतेंगे, तो कौन आयेगा आगे?
तो
शुरू करिये नया जंग....

पी जे अब्दुल कलम सर के शब्दों में...
खुद सोचो कि क्या दे सकते हो?

http://youthbrigadeac.blogspot.com

अपने विचार मेल करें...
youthbrigadeac@gmail.com

जुड़ें और इस संघर्ष में साथ दें...
join.ybac@gmail.com


Read More...

Read Qur'an in Hindi

Read Qur'an in Hindi
Translation

Followers

Wievers

join india

गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

Check Page Rank of your blog

This page rank checking tool is powered by Page Rank Checker service

Promote Your Blog

Hindu Rituals and Practices

Technical Help

  • - कहीं भी अपनी भाषा में टंकण (Typing) करें - Google Input Toolsप्रयोगकर्ता को मात्र अंग्रेजी वर्णों में लिखना है जिसप्रकार से वह शब्द बोला जाता है और गूगल इन...
    14 years ago

हिन्दी लिखने के लिए

Transliteration by Microsoft

Host

Host
Prerna Argal, Host : Bloggers' Meet Weekly, प्रत्येक सोमवार
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Popular Posts Weekly

Popular Posts

हिंदी ब्लॉगिंग गाइड Hindi Blogging Guide

हिंदी ब्लॉगिंग गाइड Hindi Blogging Guide
नए ब्लॉगर मैदान में आएंगे तो हिंदी ब्लॉगिंग को एक नई ऊर्जा मिलेगी।
Powered by Blogger.
 
Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.