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सारी ब्लॉगर बिरादरी को सादर आमंत्रित कर रहे हैं सलीम भाई एक विशेष समारोह में 7 मई को
इसमें भाग लेने के लिए आ रही हैं देश की महान हस्तियां। पत्रकार से लेकर नेता और मौलाना तक हरेक वर्ग से विचारशील लोग आ रहे हैं। प्रमुख हस्तियों के नाम निम्न हैं-
![]() |
| अज़ीज़ बर्नी , एडिटर राष्ट्रीय सहारा उर्दू दिल्ली |
इस अवसर पर कुछ ब्लॉगर्स को सम्मानित भी किया जाएगा। सारी ब्लॉगर बिरादरी को सादर आमंत्रित कर रहे हैं सलीम भाई।
‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘ की विषय-वस्तु के संबंध में सभी ब्लॉगर्स से सलाह Advice
‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘ के संबंध में जब हम विचार करते हैं तो पाते हैं कि इसके दो संस्करण होने चाहिएं।
एक संक्षिप्त संस्करण और दूसरा विस्तृत
संक्षिप्त संस्करण में वह सब जानकारी होनी चाहिए जो एक अनाड़ी आदमी को ब्लॉग बनाने और पोस्ट लिखने के बारे में सारी ज़रूरी जानकारी दे, दूसरे ब्लॉग को पढ़कर उन पर कमेंट कैसे दिया जाए ?
इसकी जानकारी भी दी जाए।
उसे प्रेरणा देने के लिए उसे यह भी बताया जाए कि ब्लॉग बनाकर उसे क्या फ़ायदा होगा ?
और साथ ही उसे यह भी बताया जाए कि ब्लॉग बनाने वाले को किन बातों से बचना चाहिए ताकि वह किसी तरह का नुक्सान न उठाए ?
उसे बेनामी ब्लॉगर्स के बारे में भी बताया जाए ताकि वह ब्लॉग लेखन के बारे में ग़लत नज़रिया न बना बैठे।
अगर ब्लॉग बनाकर किसी तरह से उसे आमदनी हो सकती है, तो उसे उसकी जानकारी भी देनी चाहिए।
उसे उन साइट्स की जानकारी भी देनी चाहिए जहां वह ब्लॉग बना सकता है।
उसे उन एग्रीगेटर्स की जानकारी भी देनी चाहिए जहां वह अपना ब्लॉग रजिस्टर्ड कर सकता है।
उसे उन ब्लॉग की जानकारी भी देनी चाहिए, जहां उसे ज़रूरत के समय किसी भी तरह की मदद मिल सकती है।
मेरा ख़याल है कि इतनी जानकारी के बाद वह जैसे जैसे आगे बढ़ता जाएगा, खुद ही सीखता जाएगा।
विस्तृत संस्करण में इन बातों को छोड़ा भी जा सकता है और लिया भी जा सकता है। ले लिया जाए तो बेहतर है। जो जानकारी लाभकारी लगे उसे इसमें लिया जा सकता है।
गाईड छोटी हो या बड़ी, उसे किसी को ख़रीदने के लिए बाध्य न किया जाए और उसे नेट पर आम कर दिया जाए ताकि सभी उसका लाभ उठा सकें या अगर वे ख़रीदना चाहें तो उसे ख़रीदने से पहले उसकी गुणवत्ता को परख सकें। इसका विमोचन किसी हिंदी सेवक ब्लॉगर के हाथों से ही होना चाहिए न कि किसी वोटख़ोर नेता या सूदख़ोर पूंजीपति के हाथों से।
गाइड में इन दोनों से बचने की प्रेरणा भी देनी ज़रूरी है ताकि ब्लॉगिंग आज़ाद रह सके क्योंकि पत्रकारिता तो प्रायः बिक ही चुकी है। ब्लॉगिंग की आज़ादी को बचाने के लिए ज़रूरी है एक मनोहारी ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘।
हिंदी ब्लॉग जगत का हरेक ब्लॉगर इसके लिए लिख सकता है, इसके बारे में सलाह दे सकता है। हम चाहते हैं कि हम सब मिलकर तैयार करें ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘।
इसके लिए पहले हम सभी लोग इस गाइड की विषय-वस्तु पर सलाह कर लें और फिर यह तय कर लें कि कौन सा ब्लॉगर किस विषय पर लिखेगा ?
यह गाइड किसी एक-दो लोगों का नाम चमकाने की कोशिश बनकर नहीं रहनी चाहिए, यह हमारी कोशिश है।
आप सभी से सहयोग की अपील है।
‘अमेरिका का इंसाफ़‘ American Justice For Peace
आज प्रिय प्रवीण जी ने एक लेख लिखा :
ओसामा कैसे मरा ?, एक कल्पना
प्रिय प्रवीण जी ! सच क्या है ?
इस बारे में मीडिया तो हमारी कोई मदद करेगा नहीं क्योंकि वह झूठ बोलने वालों के हाथों में जो है। हमने उर्दू में एक लंबा धारावाहिक नॉवेल अब से 24 साल पहले पढ़ा था, उसका नाम था ‘देवता‘ और उसे लिखा था ‘मुहयुद्दीन नवाब‘ ने। यह लेखक भी पाकिस्तान के ही हैं। एक नॉवेल में 250 से लेकर 350 पृष्ठ होते थे और उसकी हमने 21 क़िस्तें तो पढ़ी हैं। उसमें इंटरनेशनल पॉलिटिक्स को अच्छी तरह समझाया गया है। उसके आधार पर अगर हम ‘ओसामा एनकाउंटर‘ को एक्सप्लेन करने की कोशिश करें तो वह कुछ यूं होगा कि
‘अमेरिका ने ओसामा को अफ़ग़ानिस्तान से बिल्कुल शुरूआती दौर में ही पकड़ लिया था। उसके गुर्दे फ़ेल थे। अपने बेटे की तरह वह भी समझ चुका था कि हथियार किसी समस्या का हल नहीं है। उसकी हथियार क्रांति का लाभ भी अमेरिका और यूरोप की हथियार बेचने वाली कंपनियों को ही मिल रहा था, मुस्लिम मुल्कों को नहीं। अमेरिका नहीं चाहता था कि ओसामा के आतंक को तिल से ताड़ बनाने में जो मेहनत उसने की है, उस पर ओसामा बिल्कुल पानी ही फेर दे और फ़िल्म ‘दादा‘ का सा कोई सीन क्रिएट हो। उसने ओसामा के लिए एक रिहाइश बनवाई और उसकी दीवारें इतनी ऊंची बनवा दीं कि कोई अंदर से बाहर जा न सके। यह कोठी ही उसके लिए जेल थी। उसके बीवी बच्चे उसके साथ थे और उन सब पर कमांडो तैनात थे। इसी कमरे में ओसामा के वीडियो अमेरिका शूट करता था और वही इन्हें सारी दुनिया में फैलाता था। इस तरह अमेरिका ही अलक़ायदा के नाम से दुनिया में आतंक फैला रहा था और ओसामा अपनी बीवी और बेटियों की इज़्ज़त की ख़ातिर अमेरिका की वीडियो फ़िल्मों में ‘एक्टिंग‘ कर रहा था। यहां तक कि डॉक्टरों ने बता दिया कि अब ओसामा केवल कुछ घंटों का ही मेहमान है।
आनन फ़ानन अमेरिकी सद्र को इत्तिला दी गई और उन्होंने ओसामा की मौत के परवाने पर हस्ताक्षर कर दिए। वहां से ओसामा पर तैनात कमांडोज़ को हुक्म दिया गया कि ‘किल हिम‘।
कमांडोज़ ने मृत्यु शय्या पर लेटे ओसामा के सिर में गोली मार दी और फिर बाद में आने वाले विशेषज्ञों ने उसका मेकअप करके मुठभेड़ में मरा हुआ सा रूप भी बना दिया। उसके फ़ोटो खींचे गए जैसे कि चांद पर जाने की झूठी फ़ोटोग्राफ़ी की गई थी। मुठभेड़ फ़र्ज़ी न लगे, इसके लिए दो-तीन और लोग भी मार दिए गए। जिस हैलीकॉप्टर में यह सब सामान ले जाया गया था, उसे सुबूत नष्ट करने के उद्देश्य से नष्ट कर दिया गया ताकि बाद में भी कोई खोजी सच का पता न लगा सके। तकनीकी ख़राबी आने के कारण क़ीमती हैलीकॉप्टर नष्ट करने का रिवाज कहीं भी नहीं है, हर जगह उसकी मरम्मत ही कराई जाती है।
ओसामा ज़िंदा भी अमेरिका के काम आया और उसकी मौत को भी अमेरिका ने भुना लिया है। यह है ‘अमेरिका का इंसाफ़‘, जिसे हरेक बुद्धिजीवी देख भी रहा है और समझ भी रहा है। जो भी एशिया के किसी भी क्षेत्र की मुक्ति के लिए पश्चिमी शक्तियों से लड़ा, उसके साथ उन्होंने यही किया है। ओसामा के मामले में दुनिया खुशनसीब है कि उसे पता चल गया कि वह अब नहीं रहा लेकिन सुभाषचंद्र बोस के बारे में हम इतना भी नहीं जान पाए। पाकिस्तानी हुक्मरां शुरू से ही उसके साथ हैं, जैसे कि हमारे हुक्मरां भी आजकल उसके ही साथ हैं। जो उसके साथ नहीं है, उस पर वह बम बरसा ही रहा है। बड़ा मुश्किल ज़माना है कि लोगों ने समझदारी यह समझ रखी है कि अपने होंठ सी लिए जाएं।
इंटरनेशनल पॉलिटिक्स के बारे में हम यही कह सकते हैं कि ‘जो दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता।‘
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/imagination.html
अमेरिकन स्क्रिप्ट, पाकिस्तानी संगीत, चालीस हीरो, एक विलेन, जोरदार प्रमोशन... क्या होगा बॉक्स आफिस पर
इस पर हमने लिखा कि
प्रिय प्रवीण जी ! सच क्या है ?
इस बारे में मीडिया तो हमारी कोई मदद करेगा नहीं क्योंकि वह झूठ बोलने वालों के हाथों में जो है। हमने उर्दू में एक लंबा धारावाहिक नॉवेल अब से 24 साल पहले पढ़ा था, उसका नाम था ‘देवता‘ और उसे लिखा था ‘मुहयुद्दीन नवाब‘ ने। यह लेखक भी पाकिस्तान के ही हैं। एक नॉवेल में 250 से लेकर 350 पृष्ठ होते थे और उसकी हमने 21 क़िस्तें तो पढ़ी हैं। उसमें इंटरनेशनल पॉलिटिक्स को अच्छी तरह समझाया गया है। उसके आधार पर अगर हम ‘ओसामा एनकाउंटर‘ को एक्सप्लेन करने की कोशिश करें तो वह कुछ यूं होगा कि
‘अमेरिका ने ओसामा को अफ़ग़ानिस्तान से बिल्कुल शुरूआती दौर में ही पकड़ लिया था। उसके गुर्दे फ़ेल थे। अपने बेटे की तरह वह भी समझ चुका था कि हथियार किसी समस्या का हल नहीं है। उसकी हथियार क्रांति का लाभ भी अमेरिका और यूरोप की हथियार बेचने वाली कंपनियों को ही मिल रहा था, मुस्लिम मुल्कों को नहीं। अमेरिका नहीं चाहता था कि ओसामा के आतंक को तिल से ताड़ बनाने में जो मेहनत उसने की है, उस पर ओसामा बिल्कुल पानी ही फेर दे और फ़िल्म ‘दादा‘ का सा कोई सीन क्रिएट हो। उसने ओसामा के लिए एक रिहाइश बनवाई और उसकी दीवारें इतनी ऊंची बनवा दीं कि कोई अंदर से बाहर जा न सके। यह कोठी ही उसके लिए जेल थी। उसके बीवी बच्चे उसके साथ थे और उन सब पर कमांडो तैनात थे। इसी कमरे में ओसामा के वीडियो अमेरिका शूट करता था और वही इन्हें सारी दुनिया में फैलाता था। इस तरह अमेरिका ही अलक़ायदा के नाम से दुनिया में आतंक फैला रहा था और ओसामा अपनी बीवी और बेटियों की इज़्ज़त की ख़ातिर अमेरिका की वीडियो फ़िल्मों में ‘एक्टिंग‘ कर रहा था। यहां तक कि डॉक्टरों ने बता दिया कि अब ओसामा केवल कुछ घंटों का ही मेहमान है।
आनन फ़ानन अमेरिकी सद्र को इत्तिला दी गई और उन्होंने ओसामा की मौत के परवाने पर हस्ताक्षर कर दिए। वहां से ओसामा पर तैनात कमांडोज़ को हुक्म दिया गया कि ‘किल हिम‘।
कमांडोज़ ने मृत्यु शय्या पर लेटे ओसामा के सिर में गोली मार दी और फिर बाद में आने वाले विशेषज्ञों ने उसका मेकअप करके मुठभेड़ में मरा हुआ सा रूप भी बना दिया। उसके फ़ोटो खींचे गए जैसे कि चांद पर जाने की झूठी फ़ोटोग्राफ़ी की गई थी। मुठभेड़ फ़र्ज़ी न लगे, इसके लिए दो-तीन और लोग भी मार दिए गए। जिस हैलीकॉप्टर में यह सब सामान ले जाया गया था, उसे सुबूत नष्ट करने के उद्देश्य से नष्ट कर दिया गया ताकि बाद में भी कोई खोजी सच का पता न लगा सके। तकनीकी ख़राबी आने के कारण क़ीमती हैलीकॉप्टर नष्ट करने का रिवाज कहीं भी नहीं है, हर जगह उसकी मरम्मत ही कराई जाती है।
ओसामा ज़िंदा भी अमेरिका के काम आया और उसकी मौत को भी अमेरिका ने भुना लिया है। यह है ‘अमेरिका का इंसाफ़‘, जिसे हरेक बुद्धिजीवी देख भी रहा है और समझ भी रहा है। जो भी एशिया के किसी भी क्षेत्र की मुक्ति के लिए पश्चिमी शक्तियों से लड़ा, उसके साथ उन्होंने यही किया है। ओसामा के मामले में दुनिया खुशनसीब है कि उसे पता चल गया कि वह अब नहीं रहा लेकिन सुभाषचंद्र बोस के बारे में हम इतना भी नहीं जान पाए। पाकिस्तानी हुक्मरां शुरू से ही उसके साथ हैं, जैसे कि हमारे हुक्मरां भी आजकल उसके ही साथ हैं। जो उसके साथ नहीं है, उस पर वह बम बरसा ही रहा है। बड़ा मुश्किल ज़माना है कि लोगों ने समझदारी यह समझ रखी है कि अपने होंठ सी लिए जाएं।
इंटरनेशनल पॉलिटिक्स के बारे में हम यही कह सकते हैं कि ‘जो दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता।‘
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/imagination.html
पूरी पॉलिटिक्स को समझने के लिए भी कनफ्यूज होना बहुत जरूरी है Confusing
(व्यंग्य) आलोक पुराणिक
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लादेन से जुड़े तमाम प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार हैं :सवाल- लादेन को क्यों मारा गया? लादेन तो पाकिस्तान का दोस्त था। अमेरिका भी पाकिस्तान का दोस्त है। फिर दोस्त के दोस्त को क्यों मारा?
जवाब- पाकिस्तान लादेन का दोस्त था। पर इसका मतलब यह नहीं कि पाकिस्तान अमेरिका का भी दोस्त है। मतलब वैसे तो पाकिस्तान अमेरिका का दोस्त है, पर वैसे नहीं भी है। लादेन पाकिस्तान का दोस्त था, पर वैसे नहीं भी था।
सवाल- थोड़ा-सा और क्लियर कीजिए, अब कौन किसके साथ है? आईएसआई सीआईए के साथ है, या वह लादेन के साथ थी? पाकिस्तान की आर्मी अमेरिकन आर्मी के साथ है, या वह लादेन के साथ थी? जरदारी लादेन के साथ थे, या वह अमेरिका के साथ थे?
जवाब- जरदारी कहां किसके साथ हैं, यह बात तो खुद जरदारी को नहीं पता। अलबत्ता आईएसआई यूं तो अमेरिका के साथ है, पर वैसे तालिबान के साथ भी है, जो लादेन के साथ थे। लादेन यूं आईएसआई के साथ था, पर वह सीआईए के साथ नहीं था। सीआईए यूं पाकिस्तान के साथ थी, पर यूं नहीं भी थी..।
सवाल- साफ-साफ बताइए। कनफ्यूज न कीजिए।
जवाब- देखिए, अमेरिकन पॉलिसी को आप बिना कनफ्यूज हुए समझ नहीं सकते। पाकिस्तान की पूरी पॉलिटिक्स को समझने के लिए भी कनफ्यूज होना बहुत जरूरी है।
सवाल- लादेन को अब क्यों मारा गया?
जवाब- बिल्कुल सही सवाल। अब तो लादेन वीडियो फिल्मों के प्रोड्यूसर हो गए थे। हर महीने दो महीने पर एक नया वीडियो जारी कर देते थे। अब तक तो उनका इस क्षेत्र में प्रमोशन हो जाना चाहिए था।
सवाल- तीन पत्नियों के साथ आराम से रह रहे थे लादेन, यह खबर गलत नहीं लगती क्या?
जवाब- इस पूरे मसले पर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लादेन तीन पत्नियों के साथ भी आराम से कैसे रह रहे थे। इंडिया में एक ही पत्नी के साथ रहना मुश्किल है। लादेन को मरने से पहले इसका खुलासा करना चाहिए था। क्या पता, खुलासा किया भी हो, बाद में सामने आए।
जवाब- पाकिस्तान लादेन का दोस्त था। पर इसका मतलब यह नहीं कि पाकिस्तान अमेरिका का भी दोस्त है। मतलब वैसे तो पाकिस्तान अमेरिका का दोस्त है, पर वैसे नहीं भी है। लादेन पाकिस्तान का दोस्त था, पर वैसे नहीं भी था।
सवाल- थोड़ा-सा और क्लियर कीजिए, अब कौन किसके साथ है? आईएसआई सीआईए के साथ है, या वह लादेन के साथ थी? पाकिस्तान की आर्मी अमेरिकन आर्मी के साथ है, या वह लादेन के साथ थी? जरदारी लादेन के साथ थे, या वह अमेरिका के साथ थे?
जवाब- जरदारी कहां किसके साथ हैं, यह बात तो खुद जरदारी को नहीं पता। अलबत्ता आईएसआई यूं तो अमेरिका के साथ है, पर वैसे तालिबान के साथ भी है, जो लादेन के साथ थे। लादेन यूं आईएसआई के साथ था, पर वह सीआईए के साथ नहीं था। सीआईए यूं पाकिस्तान के साथ थी, पर यूं नहीं भी थी..।
सवाल- साफ-साफ बताइए। कनफ्यूज न कीजिए।
जवाब- देखिए, अमेरिकन पॉलिसी को आप बिना कनफ्यूज हुए समझ नहीं सकते। पाकिस्तान की पूरी पॉलिटिक्स को समझने के लिए भी कनफ्यूज होना बहुत जरूरी है।
सवाल- लादेन को अब क्यों मारा गया?
जवाब- बिल्कुल सही सवाल। अब तो लादेन वीडियो फिल्मों के प्रोड्यूसर हो गए थे। हर महीने दो महीने पर एक नया वीडियो जारी कर देते थे। अब तक तो उनका इस क्षेत्र में प्रमोशन हो जाना चाहिए था।
सवाल- तीन पत्नियों के साथ आराम से रह रहे थे लादेन, यह खबर गलत नहीं लगती क्या?
जवाब- इस पूरे मसले पर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लादेन तीन पत्नियों के साथ भी आराम से कैसे रह रहे थे। इंडिया में एक ही पत्नी के साथ रहना मुश्किल है। लादेन को मरने से पहले इसका खुलासा करना चाहिए था। क्या पता, खुलासा किया भी हो, बाद में सामने आए।
कुछ और प्रश्न : हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड के लिए
नमस्ते दोस्तों तथा सम्मानीय ब्लोगर्स... !
लो आज फिर मेरे मन में कुछ और प्रश्न हैं उठने लगे...
के ढूंढ रहा है दिल जवाब, के इस आग को बुझाऊं कैसे ?
मुझे ख़ुशी है कि आप लोगो ने मेरे पिछले पोस्ट में मेरे सवालों का भली तरह से मुझे जवाब दिया. पर फिर भी लगता है कि कुछ लोगों को मेरे सवालों का जवाब देने में कोई दिलचस्पी नहीं... इसीलिए आज कोई सवाल पूछने से पहले मैं बताना चाहता हूँ कि अभी कुछ दिन पहले मेरे एक लेख सुझाव : ब्लॉग्गिंग के बेहतर कल के लिए में मैंने कुछ ऐसे सुझाव इस ब्लॉग्गिंग जगत को दे डाले जिनको पढने के बाद कुछ दिग्गज ब्लोगरों की सुलग उठी (क्षमा चाहूँगा क्योंकि अभी मुझे कोई और शब्द नहीं सूझा) और उन्होंने मुझे बच्चा समझ के डांटते हुए कुछ कमेंट्स भी कर डाले... मुझे उनके डांटने पर फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उनकी डांट में मेरे लिए कुछ सीख ही थी. पर वहाँ कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने मेरे सुझावों को पढ़ा और उनकी महत्ता को समझते हुए मेरा साथ देने का वादा कर डाला... मुझे सबसे ज्यादा ख़ुशी इस बात की हुई के डॉ. अनवर जमाल खान जी ने मेरे सुझावों को पढने के बाद एक "हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड" नामक एक पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा कर दी और उस पुस्तक की रूप रेखा तैयार करने का कार्यभार मुझे तथा उस लेख को पढने वाले हर शख्स को सौंप दिया...
हालाँकि इतना बड़ा काम जब मुझे मिला तो थोड़ी घबराहट भी हुई पर मेरी ख़ुशी ने उस घबराहट को दिल पे हावी ना होने दिया... और इसी हेतु आज कल मैं शोध कर रहा हूँ कि इस "हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड" में अगर कुछ हुआ तो आखिर क्या - क्या होगा?
इसी कारण मैंने अपने पिछले पोस्ट "कुछ सवाल : हिंदी ब्लॉग जगत से" में कुछ ऐसे सवाल पूछे जिनको जानना जरूरी तो नहीं पर मेरे हिसाब से ये सवाल हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड में अपनी महत्ता जरूर रखेंगे. और जब मैं उनके जवाब के साथ कोई लेख लिखूँगा तो चाहूँगा कि नए ब्लोगर्स को हिंदी ब्लॉग्गिंग का इतिहास और वर्तमान दोनों पता होने चाहिए ताकि वे नए भविष्य का निर्माण कर सकें और ऐसा कोई लेख मैं हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड में जरूर शामिल करना चाहूँगा... अतः कृपया मेरा साथ दें ताकि दुनिया की पहली हिंदी ब्लॉग्गिंग गाइड, हर नवोदित तथा पुराने ब्लॉगर के हर सवाल का जवाब देने में सक्षम हो... और आप लोग निश्चिन्त रहें कि अगर इस गाइड में मेरे लेख होंगे तो भी उन लेखों में आपके द्वारा दिए गए कमेंट्स का ही ज़िक्र होगा... मैं लिखूँगा आपकी जुबानी, क्योंकि मैं तो आज भी सीख रहा हूँ और चाहता हूँ कि आप अपना थोड़ा सा समय निकाल के मेरा साथ दें.
मैं आज आपसे बस आपके विचार चाहता हूँ...
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रोज़ सुलगने से अच्छा है धूं धूं कर जल जाने दो ....शायद यह मेरी पहली और आखरी विवादित पोस्ट हो
रोज़ सुलगने से अच्छा है धूं धूं कर जल जाने दो ....शायद यह मेरी पहली और आखरी विवादित पोस्ट हो
रोज़ सुलगने से अच्छा है धूं धूं कर जल जाने दो ....पढने में यह कथन बहुत, बहुत बहतरीन, और मधुर लगते है, हम समझते हैं के खुद को उंचा उठाने के लिए किसी दुसरे को नीचा गिरा दो, हम ऊपर उठ जायेंगे ,हम खुद अपने मुंह मिया मिट्ठू बन कर, सोचते हैं के हम धार्मिक है , हम राष्ट्रभक्त है ,हम धर्म निरपेक्ष है और हम उदार है ,किसी को भी गाली बक कर, या नीचा दिखा कर, कभी कोई महान नहीं हुआ है ,ऐसे लोगों को हमारे धर्म पुराणों में ,राक्षस ही कहा गया है, यह सब काम किसी धर्म से जुड़े लोगों के नहीं थे बलके रावण,कोरव , कंस , फिरओन जेसे ना जाने कितने लोग थे जो राक्षस थे और उन्हें इश्वर ने सुधार का अवसर दिया कई वाणिया भेजीं लेकिन उनका अंत सबके सामने है, खुदा करे हम ऐसे राक्षस जो सो कोल्ड यानी खुद अपने मुंह मिया मिट्ठू राष्ट्रवादी,इमानदार,चरित्रवान,धर्मप्रेमी और उदार पुरुष ना बने ,क्योंकि इस युग में ऐसे राक्षस बनने से तो मोंत बहतर है ................
दोस्तों, मेरी यह कोरी बकवास ,उबाऊ जरुर लग रही होगी ,लेकिन कुछ दिन पहले हल्ला बोल के नाम से बने एक ब्लॉग के, मेरे अपने प्यारे भाई का संदेश, जब मुझे मिला ,तो में गद गद हो उठा ,और एक राष्ट्रप्रेमी के नाते में इस ब्लॉग पर गया ,पता चला के अनुभवी और राष्ट्रीयता सोच रखने वाले मेरे भाई मदन शर्मा ,विश्वजीत .अजयसिंह इस ब्लॉग के सहयोगी है इस ब्लॉग के मालिक कोन है, मुझे पता नहीं ,लेकिन साइबर इन्वेस्टिगेशन ट्रिक से मेने किस आई डी से यह ब्लॉग बनाया गया है और चलाया जा रहा है ,पता लगाया ,तो में खुश हुआ ,मेरे अपने एक भाई का यह ब्लॉग है ,में जानता हूँ के इस ब्लॉग को तय्यार करने के पहले ,उनकी भावना राष्ट्रवाद का भाव पैदा करना था, और धर्म की शिक्षा को जन जन तक पहुंचाना था ,लेकिन मुझे मेरे भाई भटकाव लगा और इसीलियें कुछ कडवे मीठे अनुभव में इस विवादित पोस्ट के माध्यम से बाँटने निकल पढ़ा , मेरे भाई अगर हर हिन्दू अच्छा होता तो देश में ऐ राजा जी का टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला नहीं होता ,निर्दोषों की हत्या नहीं होती , निर्दोषों की हत्या करने के लियें धार्मिक स्थलों पर बम नहीं फेंके जाते ,गाँधी की हत्या हिन्दू के हाथों नहीं होती ,राजीव गाँधी की हत्या हिन्दू के नाते नहीं होती अभी हाल ही में जो फोजी जासूस मेरे हिन्दू भाई पकड़े गए है वोह हिन्दू नहीं होते ,तो दोस्तों मुसलमान भी अगर दूध के धुले होते तो देश में नफरत का माहोल नहीं प्यार का माहोल होता आज बुरे हिन्दू समाज में भी है तो मुस्लिम समाज में भी है मुझे बताओ कसाब का समर्थन करने कोन आया , मुझे बताओ देश के आज़ादी से अब तक खरबों रूपये के घोटाले ,किस धर्म से जुड़े लोगों ने किये ,देश में मिलावट जमाखोरी कोन कर रहा है, देश का सबसे बढ़ा कत्ल खाना मेरे किस हिन्दू भाई का है ,मुझे बताओ कोन लोग है जो देश के राष्ट्रगान जन गन मन को गाने से इनकार करते है,,कोन लोग है जो इस राष्ट्रगान से पहले अपना गान गाते है , मुझे बताओ ,कोन लोग है जो तिरंगे से ज्यादा अपने झंडे को अहमियत देते हैं अगर आपको पता नहीं है तो जरा सोचो चिंतन करो खुद समझ में आ जाएगा ...
मेरे भाई अगर आपको तिरंगे से ज्यादा दुसरे रंग के झंडे से प्यार है तो आप ना तो हिन्दुस्तानी है और ना ही हिन्दू या मुसलमान है.अगर आप देश के राष्ट्रगान से ज्यादा किसी दुसरे गायन को तरजीह देते है तो आप चाहे हिन्दू हो चाहे मुसलमान कभी इंसान नहीं हो सकते, अगर आप देश के संविधान से ज्यादा किसी अपने नियम कायदे को तरजीह देते हो, संविधान के खिलाफ अपने भाइयों में नफरत का ज़हर घोलते हो तो फिर जनाब आप या में कोई भी चाहे हिन्दू हो चाहे मुसलमान हों, इन्सान नहीं हो सकते हम ,तो बस राक्षस जो रावण,फिरओंन ,कंस,कोरवों के कोई वंशजों में सो हो सकते हैं ऐसे राक्षस लोग कुरान और गीता पढने वाले हिन्दू और मुसलमान कभी नहीं हो सकते ....मेरे भाई जरा तलाश करो एक भी मुसलमान ,जो कुरान के कायदे पर चलता हुआ सो फीसदी मिल जाए, मेरे भाइयों जाओ तलाश करो और लाओ ऐसा एक हिन्दू भाई जिसके आचरण में गीता भरी हुई हो ,जो सच्चा हिन्दू मुसलमान हो ...में जब भी अपने गिरेबान में झाँक कर देखता हूँ तब में स्वीकार करता हूँ के में अब तक कुरान की हिदायतों के अनुसार सच्चा मुसलमान नहीं बन सका और शर्म से मेरा सर झुक जाता है ...लेकिन दोस्तों मुझे गर्व है के में जब भी खुद को देश के कायदे कानून संविधान की पालना में झाँक कर देखता हूँ ,तो खुद को एक सच्चा देशभक्त मानता हूँ ,,जरा आप भी खुद अपने आपको, अपने ,अपने धर्म के आयने में धर्मग्रन्थों के निर्देशों की पालना में ,देखो और खुद को ,सुधारने का प्रयास करो क्यों जानवर बनते हो जरा इंसान तो बन लो यारों ....
दोस्तों हल्ला बोल एक हिदू ब्लॉग बनाने का प्रयास किया लेकिन उसमे महाभारत की धुन गीता की याद दिलाती है, गीता की शिक्षा की याद दिलाती है ,इस ब्लॉग पर मर्यादित पुरुषोत्तम भगवान राम की तस्वीर याद दिलाती है के एक शक्तिशाली व्यक्ति जिसकी पत्नी का कोई अपहरण करके ले गया ,वोह अगर चाहते तो एक मिनट में प्रलय बाण छोड़कर सभी को तबाह कर सकते थे ,लेकिन वोह मर्यादा पुरुषोत्तम थे, उन्होंने अपने पुत्र,पति,भाई होने का धर्म निभाया ,तो दुश्मन से भी मर्यादित आचरण से युद्ध किया, देश के शासन में उन्होंने खुद को मर्यादित रख कर ,पत्नी और बच्चों को वनवास दिया ,आज तुम्हारे या मुझ में ऐसा मर्यादित आचरण है अगर हम इस मर्यादित आचरण को त्याग कर एक दुसरे पर कीचड़ उछालते है ,तो थू है हम पर ,,,हम मर्यादा पुरुषात्तम भगवान राम के आचरण का अगर थोड़ा हिस्सा भी ग्रहण कर लें तो जनाब यह देश तो वेसे ही सुधर जाएगा .....हम कांपते हांथो से अगर यह लिखते है के में हिन्दू हूँ में शाश्वत हूँ एक में ही सच हूँ जो लोग मेरा विरोध करते है वोह दुश्मन है धर्म के दुश्मनों का विनाश करना मेरा मकसद है तब यह सब पढ़कर मेरे जेसे लोग मन ही मन मुस्कुराते है वोह सोचते हैं के देश में हिन्दू धर्म नहीं संस्क्रती है इतिहास गवाह है और सुप्रीमकोर्ट ने भी कहा है के यहा कोई भी किसी भी धर्म से जुडा व्यक्ति रह रहा है वोह हिन्दू है और हिन्दू सिन्धु घाटी के पास की एक सभ्यता है जिसे अंग्रेजों ने उच्चारण बिगाड़ कर सिन्धु को हिन्दू कर दिया ...धर्म तो सनातन है धर्म तो इस्लाम है मुस्लिम धर्म नहीं मुस्लिम तो इस्लाम को मानने वाले इस्लाम को जानने वाले लोग है और जो लोग इस्लाम धर्म का अनुसरण करते हैं वोह मोमिन है, तो दोस्तों धर्म के चक्कर में हम ना पढ़े ,अपना खून निकाल कर देखे अपनी गीता अपना कुरान निकाल कर देखे कोई भी धर्म जमाखोरी करने ,मिलावट करने, बेईमानी करने ,निर्दोषों की हत्या करने ,अराजकता फेलाने ,एक दुसरे से अभद्रता करने एक दुसरे को नीचा दिखाने, कडवा बोलने ,भ्रस्ताचार फेलाने की इजाज़त नहीं देता, हर धर्म अपनी नेतिक शिक्षा से लोगों को बांधता है और ऐसे में अगर में किसी दुसरे के धर्म को बुरा बताकर उसे ललकारता हूँ उसे मानने वालों को फटकारता हूँ, तो मुझसे बढ़ा राक्षस मुझसे बढ़ा अधर्मी कोई और दुसरा हो ही नहीं सकता यानी कोई भी धार्मिक व्यक्ति अगर किसी दुसरे के धर्मे और उसके मानने वालों के सम्मान को ठेस पहुंचाता है तो वोह इंसान नहीं जानवर है धार्मिक नहीं अधर्मी है शायद आप सभी मेरी बात से मुताफ्फिक होंगे ...............एक ब्लॉग पर अगर यह लिखा जाये के देश भक्त हिन्दू ब्लोगरों का सांझा मंच तो लाओ एक हिन्दू एक मुसलमान जो धर्म के सो फीसदी नियमों पर चल रहा हो ,तो तलाश कर ले आओ , जाओ एक भी देशभक्त जिसने देश के कभी किसी कानून का उलंग्घन नहीं किया हो ,जिसने देश में कोई अपराध होते वक्त इसकी सूचना एक अच्छे नागरिक की तरह सरकार तक पहुंचाई है, अपना अपराध करे तो कोई बात ,नहीं दुसरा अपराध करे तो गद्दारी है यह दोहरे मापदंड ही है जो हमारे देश को बर्बाद करने पर तुले हैं हमारी नफरत पाकिस्तान से हो सकती है लेकिन सभी मुसलमानों से हम नफरत करते है तो क्या हम खुद को मर्यादित पुरुषोत्तम भगवान राम के अनुसरण करता कह सकते है हम खुद सोच लें के हमारे ब्लॉग भारत हिदू महासभा के कुल १८ फोलोव्र्स है जबकि हल्ला बोल जो बहुत बहुत मर्यादित है भगवान पुरुषोत्तम राम की सुन्दर तस्वीर के दर्शन और फिर महाभारत की कहानी की झंकार उसमें शामिल है लेकिन इसके फोलोवार्स ५६ है जो मुस्लिम भाई किसी के धर्म को बुरा लिखते हैं उनके टिप्पणीकार गुस्से में हिन्दू भाई ज़्यादा होते है को भी मुसलमान उसको समर्थन नहीं देता है तो जनाब यह है राष्ट्रीयता ,जहां बुराई का तिरस्कार किया जा रहा है ,बुरे का बहिष्कार किया जा रहा है ,अरे यारों गद्दार तुम में भी हैं गद्दार हम में भी है ,लेकिन हम एक दुसरे को नीचा दिखाने की जगह इस मुल्क के बारे में सोचे इस देश के बारे में सोचे तुम्हे और हमे इस नासमझी की लड़ाई उलझाकर जो लोग देश लूट रहे है , जासूसी कर रहे है ,गद्दारी कर रहे है वोह हममे से हों चाहे तुममे से हो गला पकड़ कर उसे बेनकाब करो और विश्व के एक अकेले हिदुवादी संस्क्रती के रक्षक मेरे इस हिन्दुस्तान को बचा लो यारों .............मुझे गर्व है मेरे भाई मदन जी शर्मा ,विश्वजीत ,और अजयसिंह पर मुझे गर्व है मेरे हल्ला बोल ब्लॉग बनाने वालों पर मुझे गर्व है भारत हिद महासभा ब्लॉग चलाने वालों पर जो देश को एक नई राष्ट्रीयता की दिशा देना चाहते है और उन्होंने किसी सनातन धर्म या इस्लाम धर्म के लोगों को नहीं पुकारा उन्होंने तो राष्ट्रवाद के लियें राष्ट्रीयता के लियें , मेरे भारत को महान बनाने के लियें, मिली जुली गंगा जमना संस्क्रती के हिन्दू संस्क्रती से जुड़े हिन्दू,मुस्लिम,सिख,इसाई,जेन सभी लोगों को पुकारा है और हम सब पूर्व में लिखित शर्त्तों के तहत आप लोगों के साथ हैं ...............अरे यारों कुछ नहीं धरा है मारकाट नफरत में आगे बढो एक दुसरे गले मिल जाओ खुशहाली लाओ आपका स्वागत है भाइयों क्यों ऐसा करोगे ना प्लीज़ प्लीज़ ....... .अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
'सबको राम-राम' कहकर वापस आ जायेंगे खुशदीप जी The Prophecy
हालांकि ख़बर तो कुछ यूं बननी चाहिए थी कि खुशदीप जी ने छोड़ दी है हिंदी ब्लॉगिंग। लेकिन यह एक झूठी बात होती। आदमी आवेश में आकर ग़लत फ़ैसले ले ही लेता है और फिर जब उसे अहसास होता है कि वह गुस्से में आकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार बैठा है तो वह अपने फ़ैसले से पलट जाता है और कहता है कि उसने अमुक आदमी के समझाने पर या अमुक कारण से अपना विचार बदल दिया है। तब भी वह स्वीकार नहीं करता कि उसका फ़ैसला ग़लत था। जल्दी ही आप खुशदीप जी के बारे में भी ऐसा ही होता देखेंगे।
इस विषय में ज़्यादा जानकारी के लिए आप देख सकते हैं:
कुछ सवाल : हिंदी ब्लॉग जगत से
नमस्कार सभी सम्मानीय ब्लोगर्स...
आज मैं यहाँ किसी भी प्रकार का सुझाव या किसी ब्लॉगर पर टिप्पणी करने नहीं आया हूँ... आज तो बस मैं अपने दिल में उठ रहे कुछ सवालों का जवाब मांगने आया हूँ इस ब्लॉग जगत से... आशा है कि मुझे मेरे सवालों का सार्थक व उचित उत्तर जरूर मिलेगा... तो शुरू करते हैं - - ब्लागस्पाट.कॉम या ब्लॉगर.कॉम ने हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में लिखने की सुविधा का प्रारंभ कब किया ?
- क्या आपको पता है कि हिंदी लेखन की सुविधा के पीछे गूगल व ब्लॉगर.कॉम के किस व्यक्ति का हाथ था ?
- हिंदी जगत में सबसे पहला ब्लॉग किसका था ? (कृपया संक्षेप में मुझे उनके बारे में तथा उनके ब्लॉग के बारे में बताएं...)
- हिंदी ब्लॉग जगत की पहले क्रांति (अगर कोई थी) तो उसका जिक्र भी मुझसे करें...
- हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर से आपका क्या अभिप्राय है ?
- हिंदी ब्लॉग जगत के पहले हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर के बारे में मुझे कुछ जानकारी चाहिए जैसे कि पहला हिंदी ब्लॉग एग्रीगेटर कोनसा है, वह किसका व्यक्ति के द्वारा बनाया गया और कब, उनका उद्देश्य तथा वर्तमान में प्रचलित सभी ब्लॉग एग्रीगेटर्स के नाम व पते इत्यादि.
- हिंदी ब्लॉग जगत के सबसे लोकप्रिय ब्लोग्गर्स के नाम व उनके ब्लोग्स पते मुझे बताएं...
- पहला ब्लॉग जो केवल भारतीय महिलाओं के लिए बनाया गया तथा किसने बनाया ?
- पहला ब्लॉग जो केवल किसी अभी भावक द्वारा उनके पुत्र या पुत्री के नाम से बनाया गया तथा किसने बनाया ?
- और ऐसे ब्लोग्स तथा ब्लॉग एग्ग्रीगेटर का नाम भी बताएं जो अब बंद हो गए हों, अगर आपको कारण पता हो तो वह भी बताएं.
- और अगर कोई और सूचना आप मुझे बताना चाहें तो वह भी बताएं...
मैं ये सब जानकारी इसीलिए चाहता हूँ क्योंकि आपके द्वारा दी गई जानकारियों के फलस्वरूप मैं एक पोस्ट लिख कर ये पूरी जानकारी मेरे जैसे उत्सुक ब्लोगर्स तक पहुंचा पाऊं...
आशा है कि मुझे बहुत जल्द सारे सवालों का उत्तर मिल जायेगा वैसे भी मैं इन्टरनेट पे अपने इन सवालों का जवाब तो ढूंढ ही रहा हूँ... मैं आप सबका आभारी रहूँगा...
अगर आपको लगता है कि आपके पास जो जानकारी है वो यहाँ कमेन्ट पे देने पर ज्यादा लम्बी होगी तो आप मुझे ईमेल भी कर सकते हैं...
मेरा ईमेल है - mbarmate@gmail.com
अगर आप मेरे सवालों के जवाब मुझे ईमेल के द्वारा दें तो मुझे ज्यादा ख़ुशी होगी...
धन्यवाद
- महेश बारमाटे "माही"
यदि आप लड़की के पिता हें तो शर्मा जी वाली भूल मत कीजियेगा (एक अनुरोध)---ARSHAD ALI
आज शर्मा जी चाय की दुकान पर नहीं आये .कल हीं बतला रहे थे की बेटी के ससुराल जाना है,शादी को एक वर्ष भी नहीं गुजरा और लेन-देन को लेकर ससुराल वालों की प्रताड़ना शुरू हो गयी.शायद कुछ समझौता करना पड़े.कोई रास्ता तो निकलना होग अन्यथा बेटी को कुछ दिनों के लिए बिदाई करवा लूँगा.
मुझे याद है शर्मा जी अपनी बच्ची की शादी तय करके आये थे तो बहुत प्रशन्न थे.चाय सूदुकते हुए पूछने पर उन्होंने बतलाया की लड़का इंजिनियर है,एक नामी कंपनी में अच्छे पैसे पर जॉब करता है परिवार भी पढ़ा लिखा है. लेन-देन के बिषय में प्रश्न करने शर्मा जी थोड़े खीजे-खीजे से दिखे.कहने लगे लड़की वालों पर तो लेन-देन का बोझ होता हीं है.
मुझे थोडा आश्चर्य हुआ कयोंकि कभी शर्मा जी ने हीं कहा था,जिस घर में लेन-देन के आधार पर शादी के बात होती हो उस घर में बेटी नहीं ब्याहुंगा .मै मन हीं मन शर्मा जी की दल-बदल निति के कारणों पर मंथन प्रारंभ करना चाहा तो,शर्मा जी ने फैली चुप्पी को तोड़ते हुए कहा,जनाब मै आपके अन्दर के उथल पुथल को अनुभव कर रहा हूँ.
आप यही प्रश्न करना चाहते हें न की मै लेन-देन प्रथा को क्यों बढ़ावा दे रहा हूँ.
मै हामी भरते हुए उन्हें सुनने के लिए तैयार हो गया.
आपको तो मेरी सुलेखा के बिषय में जानकारी तो है हीं उसके जन्म से अब तक मुझे उसके पिता होने का गर्व रहा है .उसके बी .ऐड होने के बाद से एक अच्छा वर तलाश रहा हूँ और यह तलाश अन्य लड़की वालों को भी होता है,फलस्वरूप अच्छे लड़के की खरीद का चलन अपने समाज का प्रचलन हो गया है.परन्तु मैंने लेन-देन पर सहमती नए जोड़े का घर बसाने के उद्देश्य से किया है.इसे अपनी बच्ची के घर बसाने में मेरे द्वारा अंशतः आर्थिक सहयोग माना जाए न की ये समझा जाए की मैंने पैसे की बल पर अपनी बच्ची की शादी कर रहा हूँ.मैंने शर्मा जी पूछा,क्या लेन-देन आपकी सहमती से तय हुआ है अन्यथा आपपर एक दबाव डाला गया है.यदि बच्ची की शादी से सम्बंधित आर्थिक लेन -देन में आपकी इच्छा सम्मलित है तो इस बिषय पर मुझे भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए .परन्तु यदि यह एक दबाव है तो मै आपको पुनः चिंतन करने का आग्रह करूँगा.
शर्मा जी लम्बी साँस भरते हुए बहुत भाऊक होकर कहने लगे,समाज के रीती रिवाजों में जहाँ कई अच्छी प्रथाओं ने भारत के संस्कृति को एक ऊंचाई दी है वहीँ कुछ प्रथाओं से बुराइयों का जन्म भी हुआ है.मुझे भी नहीं पता की मैंने लड़के वालों की मांग ख़ुशी से,मज़बूरी में या एक अच्छे लड़के के हाँथ से निकल जाने की डर में दे रहा हूँ.परन्तु एक बात तो सच की मुझे भी डर लगता है,ऐसे लोगों से जो लड़की के गुणों को देखने से पहले लड़की वालों से एक टुक लेन- देन की बात करना ज़रूरी समझते हें. रहा सवाल पुनः चिंतन की तो अंत तक मै हाँथ मलता रह जाऊँगा.
दस-बारह लाख खर्च करने के बाद भी लड़की सुखी रहे तो मै गंगा नहा लूँगा.
मैंने शर्मा जी को सहानुभूति स्पर्श देते हुए इतना हीं कह पाया की आप चिंता ना करें सब कुछ अच्छा रहेगा.
आज मै यही सोंचता हूँ की उस दिन के शर्मा जी ज्यादा मजबुर थे या आज कल के शर्मा जी.
चिंतन उसी समय कर लिया गया होता तो शायद आज पुनःचिंतन की आवश्यकता नहीं होती
क्यों चिंतन की आवश्यकता नहीं लगती आप सभी लड़की वालों को .
--अरशद अली ---
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मुझे याद है शर्मा जी अपनी बच्ची की शादी तय करके आये थे तो बहुत प्रशन्न थे.चाय सूदुकते हुए पूछने पर उन्होंने बतलाया की लड़का इंजिनियर है,एक नामी कंपनी में अच्छे पैसे पर जॉब करता है परिवार भी पढ़ा लिखा है. लेन-देन के बिषय में प्रश्न करने शर्मा जी थोड़े खीजे-खीजे से दिखे.कहने लगे लड़की वालों पर तो लेन-देन का बोझ होता हीं है.
मुझे थोडा आश्चर्य हुआ कयोंकि कभी शर्मा जी ने हीं कहा था,जिस घर में लेन-देन के आधार पर शादी के बात होती हो उस घर में बेटी नहीं ब्याहुंगा .मै मन हीं मन शर्मा जी की दल-बदल निति के कारणों पर मंथन प्रारंभ करना चाहा तो,शर्मा जी ने फैली चुप्पी को तोड़ते हुए कहा,जनाब मै आपके अन्दर के उथल पुथल को अनुभव कर रहा हूँ.
आप यही प्रश्न करना चाहते हें न की मै लेन-देन प्रथा को क्यों बढ़ावा दे रहा हूँ.
मै हामी भरते हुए उन्हें सुनने के लिए तैयार हो गया.
आपको तो मेरी सुलेखा के बिषय में जानकारी तो है हीं उसके जन्म से अब तक मुझे उसके पिता होने का गर्व रहा है .उसके बी .ऐड होने के बाद से एक अच्छा वर तलाश रहा हूँ और यह तलाश अन्य लड़की वालों को भी होता है,फलस्वरूप अच्छे लड़के की खरीद का चलन अपने समाज का प्रचलन हो गया है.परन्तु मैंने लेन-देन पर सहमती नए जोड़े का घर बसाने के उद्देश्य से किया है.इसे अपनी बच्ची के घर बसाने में मेरे द्वारा अंशतः आर्थिक सहयोग माना जाए न की ये समझा जाए की मैंने पैसे की बल पर अपनी बच्ची की शादी कर रहा हूँ.मैंने शर्मा जी पूछा,क्या लेन-देन आपकी सहमती से तय हुआ है अन्यथा आपपर एक दबाव डाला गया है.यदि बच्ची की शादी से सम्बंधित आर्थिक लेन -देन में आपकी इच्छा सम्मलित है तो इस बिषय पर मुझे भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए .परन्तु यदि यह एक दबाव है तो मै आपको पुनः चिंतन करने का आग्रह करूँगा.
शर्मा जी लम्बी साँस भरते हुए बहुत भाऊक होकर कहने लगे,समाज के रीती रिवाजों में जहाँ कई अच्छी प्रथाओं ने भारत के संस्कृति को एक ऊंचाई दी है वहीँ कुछ प्रथाओं से बुराइयों का जन्म भी हुआ है.मुझे भी नहीं पता की मैंने लड़के वालों की मांग ख़ुशी से,मज़बूरी में या एक अच्छे लड़के के हाँथ से निकल जाने की डर में दे रहा हूँ.परन्तु एक बात तो सच की मुझे भी डर लगता है,ऐसे लोगों से जो लड़की के गुणों को देखने से पहले लड़की वालों से एक टुक लेन- देन की बात करना ज़रूरी समझते हें. रहा सवाल पुनः चिंतन की तो अंत तक मै हाँथ मलता रह जाऊँगा.
दस-बारह लाख खर्च करने के बाद भी लड़की सुखी रहे तो मै गंगा नहा लूँगा.
मैंने शर्मा जी को सहानुभूति स्पर्श देते हुए इतना हीं कह पाया की आप चिंता ना करें सब कुछ अच्छा रहेगा.
आज मै यही सोंचता हूँ की उस दिन के शर्मा जी ज्यादा मजबुर थे या आज कल के शर्मा जी.
चिंतन उसी समय कर लिया गया होता तो शायद आज पुनःचिंतन की आवश्यकता नहीं होती
क्यों चिंतन की आवश्यकता नहीं लगती आप सभी लड़की वालों को .
--अरशद अली ---
धर्म...एक ही...डा श्याम गुप्त...
धर्म एक ही होता है , वह -
जो- सबको धारण करता ।
सबको अपना बना, जीव का-
वह लालन पालन करता ॥
सबको एक समान समझना,
सबकी ही सेवा करना ।
सबकी सम्मति से ही चलना,
अडिग सत्य पर ही रहना ॥
जीव मत्र से प्रेम करेंसब-
यह मानव धर्म बताता ।
जीने की हो यही धारणा,
यह जीवन धर्म कहाता ॥
सिन्धु सरस्वती तीरे जब ,
यह गाथा गयी सुनायी ।
प्रज़ा वहां पर रहती थी -
जो,वह हिन्दू कहलायी ॥
जहां मुहम्मद ने ये बातें,
थीं अपनों को समझायीं ।
जिन लोगों ने समझीं, वो-
सब बने मुसलमां भाई ॥
इन्हीं विचारों का मन्थन -
जब, ईशा ने फ़ैलाया ।
उनका आदर जो करता,
वह ,ईसाई कहलाया ॥
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,
मानव ही रहा बनाता ।
देश काल सुविधानुसार,
वह जीवन मर्म सजाता ॥
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