ब्लॉगर्स मीट वीकली (30) Sun & The Spirit

ब्लॉगर्स मीट वीकली(30)
सभी ब्लॉगर साथियों का ब्लॉगर्स मीट वीकली (30) में हार्दिक अभिनंदन है। जो लोग इस मीट में अपनी रचना देखना चाहते हैं वे हमें अपने लिंक भेज सकते हैं। उनका स्वागत है। लाभकारी लेखों को हिंदी पाठकों तक पहुंचाना ही हमारा ध्येय है।आप सभी आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप सभी का आशीर्वाद हमेशा इस मंच को मिलता रहे यही कामना है./आभार/

आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स

अनवर जमाल जी की रचनाएँ

डा. अयाज़ अहमद जी की रचना

तीन तलाक़ एक साथ देने वाले की पीठ पर कोड़े बरसाते थे इस्लामी ख़लीफ़ा

लगभग 20 हजार खवातीन के मजमे के बीच आलिम-ए-खवातीन ने दीन पर चलने और अल्लाह के हुक्म को मानने की नसीहत देते हुए कहा कि औरतों को शरीअत और इस्लाम के साये में ही जिंदगी बसर करना चाहिए। इसमें ही उनकी भलाई है

रमेश कुमार जैन " उर्फ़ " सिरफिरा "

हम तो चले तिहाड़ जेल दोस्तों ! क्या किसी व्यक्ति का पक्ष सिर्फ रिश्वत देने परही सुना जायेगा?

क्यासारी महिलाएं सच्ची हैऔर सारे पुरुष झूठे वअत्याचारी होते हैं?

क्या दिल्ली हाईकोर्ट के जज पूरी तरह से ईमानदार है ?


भारत देश की न्याय व्यवस्था ने मेरे परिवार के साथ हमेशा अन्याय किया है. आजतक इन्साफ मिला ही नहीं है और न भविष्य में किसी गरीब को देश की अदालतों से इंसाफ मिलने की उम्मीद है. महेंद्र भीष्म जी की रचना किन्नर समाज की पुरज़ोर पैरवी और शिनाख्तकिन्नर समाज पर बहुत कम लिखा गया है। और लगभग उपेक्षित ढंग से। लेकिन महेंद्र भीष्म का उपन्यास किन्नर कथा पूरी तरह किन्नर समाज पर केंद्रित है।

मंच के बाहर की पोस्ट

"मीठा-मीठा प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

महेश्वरी कनेरीजी की रचना

ये पत्र एक दुखी माँ के ह्रदय की पुकार है ,उन सभी बेटों के लिए जो अपने बूढ़े माँ बाप को अकेला छोड़ कर विदेश चले जाते हैं और पीछे मुड़ कर देखने की भी आवश्यकता नही समझते ……..

संगीताजी की रचना

अस्मिता

मुझसे मायने हर रिश्ते के , और मैं किसी की कुछ भी नहीं ....... प्रार्थनाएं, वंदन करती रही ,

राजेश कुमारीजी की रचना
बिखरे हुए हैं गेसू इस इन्तजार में
आये कोई झोंका हवा का
और संवार दे !
कुवंर कुसुमेश जी की रचना

बाल श्रमिक (दोहे)

ग़ाफ़िल की अमानत ब्लॉग पर

My Photo



याँ पे तो बिन बुलाये चले आइए जनाब!
खुश होइए भी और खुशी लुटाइए जनाब!!

ब्लॉग जगत में लिंक्स की चर्चा कई जगहों पर होती है लेकिन अपनी निष्पक्षता के लिए चर्चामंच जो मक़ाम रखता है, दूसरा कोई इसके आस पास भी नहीं है।
चन्द्र भूषण मिश्रा जी की आज की चर्चा में हमारी दो पोस्ट्स के लिंक भी हैं। दूसरे लिंक भी अच्छे हैं। आप देखिए कि मिश्रा जी ने कितनी मेहनत और कितनी निष्पक्षता से यह चर्चा सजाई है।

क़तई नहीं : सोमवारीय चर्चामंच-788

लिंक नं. 1-
Mushayera : मुझे तो मेरी जमीं, मेरा आसमान मिले, शायर- नीरज, प्रस्तुति- डॉ. अनवर जमाल
मेरा फोटो
_______________
18-
_______________
20-
कत्तई नहीं -रश्मि प्रभा!
31-
My Photo

ब्लॉग की ख़बरें पर

Hijab is the new symbol of woman’s liberation



How, Sara Bokker, a former actress, model, fitness instructor and activist gave up the glamorous Miami lifestyle for Islam and found true
वेद क़ुरआन ब्लॉग पर बताया जा रहा है कि

सृष्टि वृक्ष का मूल परमात्मा है जो कि जगत का सूर्य है Sun & The Spirit


आत्मा के रहस्य को न जानने की वजह से ही एक तरफ़ तो परमात्मा की पूजा-उपासना शुरू हो गई और दूसरी तरफ़ लौकिक सूर्य को पूजा जाने लगा।
‘सूर्य आत्मा जगतस्थुषश्च‘ ऋग्वेद 1,125,1 में ‘जगत की आत्मा‘ को सूर्य बताया गया है लेकिन वहां लोगों ने समझा कि सूर्य को जगत की आत्मा कहा जा रहा है।
मुशायरा ब्लॉग पर

मुझे तो मेरी जमीं, मेरा आसमान मिले


ये चाह कब है मुझे सब-का-सब जहान मिले,
मुझे तो मेरी जमीं, मेरा आसमान मिले।

कमी नहीं है सजावट की इन मकानों में,
सुकून भी तो कभी इनके दरमियान मिले।


प्यारी मां ब्लॉग पर

उकसावे पर बेटे की हत्या को हत्या नहीं माना कोर्ट ने

पति की मौत के बाद पूवाम्मल ने बहू-बेटे पर अपने साथ रहने के लिए दबाव डाला। लेकिन जब देवेन्द्रन ने उसकी अपील नहीं सुनी तो पूवाम्मल को गुस्सा आ गया और उसने 23 अक्तूबर 2007 को उस पर कुल्हाड़ी से वार किया। बाद में उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और आत्महत्या की कोशिश में खुद को घायल कर लिया।

हाई कोर्ट के मुताबिक इस मामले में पूवाम्मल की ओर से कोई सोची-समझी चाल नहीं थी। उसने गुस्से में अचानक कुल्हाड़ी उठाई। यह स्थिति उसके बेटे ने पैदा की थी। घटना के बाद उसकी पहली प्रतिक्रिया खुद को मारने की थी।

नारी स्वयं नारी के लिए संवेदनहीन क्यों ?

किसी महिला के लगातार अनेक पुत्रियाँ हो जाती हैं तो उसका अपमान भी शुरू हो जाता है .एक प्रकार पुत्री के रूपमें महिला के आने पर एक मां के रूप में महिला को शिकार बनाया जाता है . मजेदार बात यह है ,उस मां के रूप में महिला का अपमान करने वालों में परिवार की महिलाएं यानि सास ,ननद ,जेठानी इत्यादि ही सबसे आगे होती हैं .
आर्य भोजन ब्लॉग पर

जिनके बाल झड़ते हों ,वे कच्चे पालक का सेवन करें




पथरी के रोगियों को केवल पालक की सब्जी नहीं खाना चाहिए | पालक और हरी पते वाली मेथी मिलाकर साग बनाकर खाने से पथरी नहीं बनती है |
अतः पालक खाएं और शरीर में ख़ून बढाएं।


सुधिनामा
ब्लॉग पर साधना वैद जी

तुम मिले जग मिल गया


कर्नाटक के मंत्री कि नेमप्लेट!!

मनोज कुमार जी का
सूफ़ी दर्शन-1 -
सूफ़ीमत की आधारशिला दो चीज़ों पर रखी हैं – 1. ईश-प्रेम और 2. परमात्मा का सानिध्य।
तसव्वुफ़ सदाचरण का नाम है। एक स्रष्टा के प्रति सदाचरण, दूसरा सृष्टि के प्रति सदाचरण। स्रष्टा के प्रति सदाचरण का अर्थ यह है कि बन्दा (दास, भक्त) उसके फैसले पर राज़ी हो, उसके किसी फैसले पर उसे कोई शिकायत पैदा न हो,
Read More...

हम तो चले तिहाड़ जेल दोस्तों !

 आज में सरकार से इस पोस्ट के माध्यम से पूछना/जानना  चाहता हूँ कि अगर एक सभ्य ईमानदार व्यक्ति दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को रिश्वत नहीं दें तो क्या वो अधिकारी मात्र एक महिला के कहने से बिना सबूतों के ही गम्भीर आरोप लगाकर मामला दर्ज कर सकता है ? क्या किसी व्यक्ति का पक्ष सिर्फ रिश्वत देने पर ही सुना जायेगा? क्या सारी महिलाएं सच्ची है और सारे पुरुष झूठे व अत्याचारी होते हैं? 
मेरा भारत देश की न्याय व्यवस्था से विश्वास ही उठ गया है. अब आप मुझे बेशक मेरे खिलाफ झूठी एफ.आई.आर के संदर्भ में फांसी की सजा दे दें. मैं वोट की राजनीति खेलने वाले देश में अपनी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में "अपील" या "दया याचिका" भी नहीं लगाऊंगा. भारत देश की न्याय व्यवस्था अफजल गुरु और कसाब जैसे अपराधी के अधिकारों की रक्षा करती है. यहाँ संविधान की धाराओं का लाभ सिर्फ अमीरों व राजनीतिकों मिलता है या दिया जाता है. जिनके पास वकीलों की मोटी-मोटी फ़ीस देने के लिए और संबंधित अधिकारियों को मैनेज करने के लिए लाखों-करोड़ों रूपये है. गरीबों को "न्याय" देना न्याय व्यवस्था के बस में ही नहीं है. मुझे आज भारत देश की न्याय व्यवस्था की कार्य शैली पर बहुत अफ़सोस हो रहा है. न्याय व्यवस्था की अब तक की कार्यशैली के कारण भविष्य में मुझे न्याय मिलने की उम्मीद भी नहीं है. अपने खिलाफ दर्ज केस के संदर्भ में बस इतना ही कहना है कि -
१. हाँ, मैंने बिना दहेज लिये ही कोर्ट मैरिज करके बहुत बड़ा अपराध किया है.
२. हाँ, मैंने कोर्ट मैरिज करके अपने माता-पिता का दिल दुखाकर भी बहुत बड़ा अपराध किया है.
३. हाँ, मैंने अपनी पत्नी की बड़ी-बड़ी गलती पर उसको माफ़ करके बहुत बड़ा अपराध किया है.
४. हाँ, मैंने अपनी पत्नी को मारने के उद्देश्य से कभी भी ना छूकर बहुत बड़ा अपराध किया है.
५. हाँ, मैंने गरीब होते हुए भी भारत देश की न्याय व्यवस्था से "न्याय" की उम्मीद करने का अपराध किया है. 
 तिहाड़ जेल में हमारे पास न मोबाईल होगा और न फेसबुक होगी. तब मेरे पास क्या होगा, यह जानने के लिए नीचे लिखा पत्र देखें.
Read More...

क्या दिल्ली हाईकोर्ट के जज पूरी तरह से ईमानदार है ?


दोस्तों ! एक बार जरा मेरी जगह अपने-आपको रखकर सोचो और पढ़ो कि-एक पुलिस अधिकारी रिश्वत न मिलने पर या मिलने पर या सिफारिश के कारण अपने कार्य के नैतिक फर्जों की अनदेखी करते हुए मात्र एक महिला के झूठे आरोपों(बिना ठोस सबूतों और अपने विवेक का प्रयोग न करें) के चलते हुए किसी भी सभ्य, ईमानदार व्यक्ति के खिलाफ झूठा केस दर्ज कर देता है. फिर सरकार द्वारा महिला को उपलब्ध सरकारी वकील, जांच अधिकारी, जज आदि को मुहँ मांगी रिश्वत न मिले. इसलिए सिर्फ जमानत देने से इंकार कर देता है. उसके बाद क्या एक सभ्य व्यक्ति द्वारा देश की राष्ट्रपति और दिल्ली हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की मांग करना अनुचित है. एक गरीब आदमी कहाँ से दिल्ली हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के अपनी याचिका लगाने के लिए पैसा लेकर आए ? क्या वो किसी का गला काटना शुरू कर दें ? क्या एक पुलिस अधिकारी या सरकारी वकील या जांच अधिकारी या जज की गलती की सजा गरीब को मिलनी चाहिए ? हमारे भारत देश में यह कैसी न्याय व्यवस्था है ? क्या हमारे देश में दीमक की तरह फैले भ्रष्टचार ने हमारी न्याय व्यवस्था को खोखला नहीं कर दिया है ? क्या आज हमारी अव्यवस्थित न्याय प्रणाली सभ्य व्यक्तियों को भी अपराधी बनने के लिए मजबूर नहीं कर रही है ? इसका जीता-जागता उदाहरण मेरा "सच का सामना" ब्लॉग है और मेरे द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट को लिखा पत्र (नीचे) देखें. क्या दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत सभी जज पूरी तरह से देश और देश की जनता के प्रति ईमानदार है ? मेरे पत्र को देखे और उसके साथ स्पीड पोस्ट(http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/06/blog-post_18.html) की रसीद को देखें. मेरे द्वारा 137 दस्तावेजों के साथ 15 फोटो वाला 760 ग्राम का पैकेट 13/06/2011 को भेजने के बाद भी आज तक संज्ञान नहीं लिया या यह कहूँ देश के राजस्व की उन्हें कोई चिंता नहीं है. उनको सिर्फ अपनी सैलरी लेने तक का ही मतलब है. क्या देश की अदालतों में भेदभाव नहीं नीति नहीं अपनाई जाती है. अगर मेरे जैसा ही अगर किसी महिला ने एक पेज का भी एक पत्र दिल्ली हाईकोर्ट में लिख दिया होता तो दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ न्यायादिश के साथ अन्य जज भी उसके पत्र पर संज्ञान लेकर वाहवाही लूटने में लग जाते है, इसके अनेकों उदाहरण अख़बारों में आ चुके है. क्या भारत देश में एक सभ्य ईमानदार व्यक्ति की कोई इज्जत नहीं ? 
भारत देश की न्याय व्यवस्था ने मेरे परिवार के साथ हमेशा अन्याय किया है. आजतक इन्साफ मिला ही नहीं है और न भविष्य में किसी गरीब को देश की अदालतों से इंसाफ मिलने की उम्मीद है.
मेरे प्रेम-विवाह करने से पहले और बाद के जीवन में आये उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा पत्नी और सुसरालियों के फर्जी केस दर्ज करने वाले अधिकारी और रिश्वत मांगते सरकारी वकील,पुलिस अधिकारी के अलावा धोखा देते वकीलों की कार्यशैली,भ्रष्ट व अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है "सच का सामना"आज के हालतों से अवगत करने का एक प्रयास में इन्टरनेट संस्करण जिसे भविष्य में उपन्यास का रूप प्रदान किया जायेगा.
1. एक आत्मकथा-"सच का सामना"
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post.html
2. मैं देशप्रेम में "सिरफिरा" था, "सिरफिरा" हूँ और "सिरफिरा" रहूँगा
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/03/blog-post_14.html
3. मैंने अपनी माँ का बहुत दिल दुखाया है
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post.html
4. मेरी आखिरी लड़ाई जीवन और मौत की बीच होगी
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_22.html
5. प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html
6. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post.html
7. मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_12.html
8.कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_13.html
9. एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है कि-
मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा
ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें.
http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/06/blog-post_18.html
10. भगवान महावीर स्वामी की शरण में गया हूँ
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/09/blog-post.html
11. मेरी लम्बी जुल्फों का कल "नाई" मालिक होगा.
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/11/blog-post.html
12.सरकार और उसके अधिकारी सच बोलने वालों को गोली मारना चाहते हैं.
http://sach-ka-saamana.blogspot.in/2011/11/blog-post_02.html
13.मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर एक प्रश्नचिन्ह है
http://rksirfiraa.blogspot.in/2011/06/blog-post.html
Read More...

तीन तलाक़ एक साथ देने वाले की पीठ पर कोड़े बरसाते थे इस्लामी ख़लीफ़ा

भोपाल। ताजुल मसाजिद परिसर में आयोजित दो दिनी 12वें खवातीन इज्तिमा (औरतों का सम्मेलन) का रविवार को समापन हो गया। लगभग 20 हजार खवातीन के मजमे के बीच आलिम-ए-खवातीन ने दीन पर चलने और अल्लाह के हुक्म को मानने की नसीहत देते हुए कहा कि औरतों को शरीअत और इस्लाम के साये में ही जिंदगी बसर करना चाहिए। इसमें ही उनकी भलाई है।
आखिरी और दूसरे दिन का आगाज मोहतरमा अकीका साहिबा के दर्से कुरआन से हुआ। इसके बाद मोहतरमा निदा साहिबा ने ‘आजादी ए निस्वां, फरेब और नारा’ पर कहा कि आवारगी को औरत की आजादी का नाम दिया जा रहा है। आजादी का ये अर्थ किसी भी तरह से कुबूल नहीं किया जा सकता कि औरत बेबाकी से मर्दो के साथ घुल मिल जाये। व्यावासायिक कारोबार के लिए उसके हुस्नों जमाल को इस्तेमाल किया जाये। आर्थिक उन्नति के नाम पर शैक्षणिक संस्थाओं में बेहयाई और सेक्स को बढ़ावा दिया जाये। मोहतरमा अनीसा साहिबा ने कहा कि इस्लामिक शिक्षा की रोशनी में औरत का लिबास ऐसा होना चाहिए कि उसका बदन पूरी तरह ढंका रहे। घर से बाहर निकलें तो अपनी ‘जीनत’ जेबर, कपड़े और चेहरा आदि को छुपा लेना चाहिए।

निकाह और तलाक का हक पर कनाडा से आए इकबाल मसूद नदवी ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिये जो हुक्म दिये हैं उनका उद्देश्य समाज में रिश्ते-नाते वजूद में लाना है। शरीके हयात के चुनाव में भी यह नसीहत दी गई है कि पैसा और खूबसूरती से ज्यादा सलाहित और चरित्र को महत्व दिया जाये। शादी के बाद पति-पत्नी में निभती नहीं है तो इस्लामिक तलाक का विकल्प खुला हुआ है, ताकि जिंदगी बोझ न बने, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि तलाक देने के जो तरीके शरीयत में बताये गये हैं यदि तमाम कोशिशें नाकाम हो जाती हैं तो आखिरी फैसला तलाक का है। तलाक के बाद दूसरी शादी को इस्लाम मान्यता देता है। हैदराबाद से तशरीफ लाईं नासिरा खानम ने शाम को नेकी पर कायम रहने और शरीयत और इस्लाम के हिसाब से जिंदगी गुजर करने की दुआ करते हुए मौजूद ख्वातीन हजरात को नसीहत दी। इस इज्तिमा में तकरीबन 20 हजार महिलाएं शामिल हुईं।
पूरी रिपोर्ट इस लिंक पर देखें-

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

एक मुश्त तीन तलाक़ देना ‘बिदअत‘ है, गुनाह है, तलाक़ का मिसयूज़ है। यह कमी मुस्लिम समाज की है न कि इस्लाम की। अल्लाह की नज़र में जायज़ चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद तलाक़ है। जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं, बहुत से अलग-अलग मिज़ाजों के लोगों के सामने बहुत तरह की समस्याएं आती हैं। जब दोनों का साथ रहना मुमकिन हो और दोनों तरफ़ के लोगों के समझाने के बाद भी वे साथ रहने के लिए तैयार न हों तो फिर समाज के लिए एक सेफ़्टी वाल्व की तरह है तलाक़। तलाक़ का आदर्श तरीक़ा कुरआन में है। कुरआन की 65 वीं सूरह का नाम ही ‘सूरा ए तलाक़‘ है। तलाक़ का उससे अच्छा तरीक़ा दुनिया में किसी समाज के पास नहीं है। हिन्दू समाज में तलाक़ का कॉन्सेप्ट ही नहीं था। उसने इस्लाम से लिया है तलाक़ और पुनर्विवाह का सिद्धांत। इस्लाम को अंश रूप में स्वीकारने वाले समाज से हम यही कहते हैं कि इसे आप पूर्णरूपेण ग्रहण कीजिए। आपका मूल धर्म भी यही है।
तलाक़ का सही तरीक़ा क़ुरआन की सूरा ए तलाक़ में बता दिया गया है। एक साथ तीन तलाक़ देना क़ुरआन का तरीक़ा नहीं है। इस तरीक़े को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स. ने सख्त नापसंद फ़रमाया है और जो आदमी एक साथ तीन तलाक़ दिया करता था, इस्लामी ख़लीफ़ा इसे इस्लामी शरीअत के साथ खिलवाड़ मानते थे और इसे औरत का हक़ मारना समझते थे। ऐसे आदमी की पीठ पर कोड़े बरसाए जाते थे। लिहाज़ा इस्लामी ख़लीफ़ाओं के काल में तीन तलाक़ एक साथ देने की हिम्मत कोई न करता था। आज भी ऐसे लोगों की पीठ पर कोड़े बरसाए जाएं तो औरत के जज़्बात के साथ खिलवाड़ तुरंत रूक जाएगा।
औरत के जज़्बात का सबसे बड़ा रक्षक है क़ुरआन।
Read More...

Read Qur'an in Hindi

Read Qur'an in Hindi
Translation

Followers

Wievers

join india

गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

Check Page Rank of your blog

This page rank checking tool is powered by Page Rank Checker service

Promote Your Blog

Hindu Rituals and Practices

Technical Help

  • - कहीं भी अपनी भाषा में टंकण (Typing) करें - Google Input Toolsप्रयोगकर्ता को मात्र अंग्रेजी वर्णों में लिखना है जिसप्रकार से वह शब्द बोला जाता है और गूगल इन...
    14 years ago

हिन्दी लिखने के लिए

Transliteration by Microsoft

Host

Host
Prerna Argal, Host : Bloggers' Meet Weekly, प्रत्येक सोमवार
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Popular Posts Weekly

Popular Posts

हिंदी ब्लॉगिंग गाइड Hindi Blogging Guide

हिंदी ब्लॉगिंग गाइड Hindi Blogging Guide
नए ब्लॉगर मैदान में आएंगे तो हिंदी ब्लॉगिंग को एक नई ऊर्जा मिलेगी।
Powered by Blogger.
 
Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.