ये हैं क्रिकेट के बद्तमीज़


मित्रों काफी दिनों से सोच रहा था कि ब्लाग जगत में खेलों की चर्चा बहुत ही कम हो रही है, जबकि देश का एक बडा तपका इससे जुड़ा हुआ है। इसलिए खेल और खिलाड़ियों के बारे में भी कुछ बात कर ली जाए। सच कहूं तो हिम्मत नहीं हो रही है, कि पता नहीं इस लेख को कितना समर्थन मिलेगा, लेकिन अब चर्चा करना जरूरी हो गया है, क्योंकि पानी सिर के ऊपर हो चुकाहै। बहरहाल छोटी छोटी सिर्फ दो चार बातें कर लेते हैं। बात खेल की हो तो इसकी शुरुआत क्रिकेट से होती है और क्रिकेट से ही खत्म हो जाती है। इसलिए मैं भी क्रिकेट पर ही ज्यादा बात करूंगा, लेकिन दूसरे खिलाड़ियों को यहां याद करना जरूरी है, जिन्होंने देश का नाम रोशन किया है।बैडमिंटन- सायना नेहवाल, गोपीचंद फुलेला, मुक्केबाजी- विजेन्दर सिंह, कुश्ती, डिस्कस थ्रो- कृष्णा पूनिया, एथलीट- आशीष कुमार, टेनिस- साइना मिर्जा, शूटिंग- गगन नारंग, अभिनव बिन्द्रा के साथ तमाम और लोग भी हैं, जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है। इनके प्रयासों को मैं सलाम करता हूं।
चलिए अब बात करते हैं भारतीय क्रिक्रेट और उसके बद्तमीज़ों की...। विश्वकप में जब भारत ने जीत हासिल की तो देश ने क्रिकेटरों को सिर पर बैठा लिया और कई दिन तक उनके जयकारे लगाए। क्रिकेटर जहां भी जाते उनके फैंस उन्हें घेर लेते। क्योंकि इस टीम ने देश का नाम रोशन किया था। लेकिन ये क्रिकेटर बद्तमीज़ होते जा रहे हैं। आज हालत ये हो गई है कि पैसे के लिए ये देश के मान सम्मान की भी चिंता नहीं करते। इसके लिए एक हद तक तो बीसीसीआई भी कम जिम्मेदार नहीं है। आइये देश को शर्मशार करने वाली कुछ घटनाओं की याद दिलाते हैं।
पिछले साल खेल में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए महेन्द्र सिंह धोनी और हरभजन सिंह को पदमश्री से सम्मानित करने का फैसला किया गया, लेकिन गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक धोनी और हरभजन ने राष्ट्रीय सम्मान पद्मश्री लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इसके बाद भी जब उनको पुरस्कार दिया गया तो वे इसे लेने नहीं पहुंचे। आपको हैरत होगी कि इन दोनों ने इस पुरस्कार को इतना असम्मानित किया कि इन्होंने अपना बायोडाटा तक गृहमंत्रालय को नहीं भेजा। यहां तक कि धोनी ने तीन महीने तक गृहमंत्रालय के फोन का जवाब तक नहीं दिया। सम्मान समारोह के कुछ दिन पहले हरभजन ने एसएमएस किया कि वो पद्मश्री लेने नहीं आ सकते, लेकिन धोनी ने तो आखिरी समय तक कोई जवाब नहीं दिया। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने जब इन दोनों को आठ-दस बार फोन किया तो इनके घरवालों से ये जवाब सुनने को मिला कि वो सो रहे हैं।
धोनी के बारे में एक और जानकारी दे दूं, पिछली बार उन्हें खेल जगत का सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड दिया गया। उस दौरान वे श्रीलंका में सीरीज खेल रहे थे। केंद्र सरकार ने उन्हें ऑफर दिया गया कि यदि वे आने को तैयार हों तो उनके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन धोनी से आने से मना कर दिया।

ये तो कुछ पुरानी बातें हैं। अभी टीम इंडिया इंगलैंड में टेस्ट सीरीज खेल रही है। टीम के सम्मान में लंदन में भारतीय उच्चायोग ने एक डिनर पार्टी का आयोजन किया। इसमें इंगलैंड के साथ ही दुनिया के दूसरे देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित किया गया था। प्रोटोकाल के अनुसार इस आयोजन मे शामिल होने से कोई इनकार नहीं कर सकता है। लेकिन बेहूदे क्रिकेटरों ने इस आयोजन में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। बाद में पता चला कि उच्चायोग के डिनर में जाने से क्रिकेटरों ने इस लिए इनकार किया कि धोनी की पत्नी के नाम वाले साक्षी फाउंडेशन का एक कार्यक्रम था। इसमें विश्वकप के दौरान जिस बल्ले से धोनी ने खेला था उसकी नीलामी थी। धोनी का बल्ला यहां 71 लाख रुपये में नीलाम हुआ। पैसा जब क्रिकेटरों के लिए देश से बडा हो जाए, तो हमें आपको इस पर जरूर सोचना चाहिए। सच तो ये है कि अगर बीसीसीआई ने समय रहते इन पर लगाम नहीं लगाया तो ये देश की साख को पैरों तले रौंद देंगे।
यहां आपको ये बताना जरूरी है देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न खिलाडियों को भी दिया जा सके, इसके लिए संविधान में संशोधन किया जा रहा है। देश भर से मांग उठ रही है कि सचिन तेंदुलकर को ये सम्मान मिलना चाहिए। इसके मद्देनजर सरकार इस सम्मान के प्रावधानों को बदलने भी जा रही है। लेकिन बडा सवाल ये कि क्रिकेट ये बदतमीज देश के सम्मान को कब तक ठोकर मारते रहेंगे।
बात खत्म करूं इसके पहले कल के मैच में हुई भारत की हार की चर्चा जरूरी है। खेल में हार जीत एक सामान्य बात है, होती रहती है, लेकिन इनके हास्यास्पद तर्क से कई सवाल खडे हो जाते हैं। टेस्ट मैंच में हार के बाद धोनी ने कहा कि वेस्टइंडीज के दौरे के बाद उनकी टीम को आराम नहीं मिला, जिसकी वजह से प्रदर्शन निराशाजनक रहा। अब धोनी से कौन पूछे कि विश्व कप के थकान भरे मैच के दो दिन बाद ही आईपीएल खेलने के समय ये शिकायत क्यों नहीं की। क्योंकि यहां उन्हें और खिलाडियों को पैसा दिख रहा था। इतना ही नहीं आईपीएल के बाद वेस्टइंडीज दौरे में तमाम खिलाडियों ने आराम के लिए टीम से नाम वापस ले लिया। अगर इन्हें देश की फिक्र होती तो ऐसा नहीं करते। आईपीएल में तो विरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर घायल होने के वाबजूद खेलते रहे।
खैर अब जरूरी हो गया है कि क्रिकेटरों पर लगाम लगाया जाए, क्योंकि देश के मान सम्मान से समझौता नहीं किया जाना चाहिए, चाहे वो कितना ही बडा खिलाडी क्यों ना हो। समय रहते ऐसा नहीं किया गया तो ये क्रिकेट के बद्तमीज देश की नाक कटवा देगें।
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राष्ट्र गान--किसकी जय गाथा

आजकल ब्लॉग जगत में एक अभियान छिड़ा हुआ है कि हमारा राष्ट्र गान जन गण मन अधिनायक जय है वास्तव में भारत माता या भारत वर्ष की महिमा को वर्णित नहीं करता अपितु महा कवि रवीन्द्र नाथ टैगोर ने यह गीत किंग जॉर्ज पंचम तथा इंग्लैण्ड की क्वीन के सम्मान में रचा था जिसे हम सभी लोग पिछले ६२-६३ सालों से अज्ञानतावश राष्ट्र गान का मान देते हुए गाते आ रहे हैं और अब यह समय आ गया है कि हमें अपनी भूल का सुधार कर लेना चाहिये और जन गण मन को हटा कर वंदे मातरम या सारे जहाँ से अच्छा गीत को राष्ट्र गान के रूप में स्थापित करने के अभियान को पुरजोर समर्थन देना चाहिये !

मुद्दा बड़ा संवेदनशील है और इसके साथ करोड़ों भारतीयों की भावनायें जुडी हुई हैं ! इसलिए यह आवश्यक है कि कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता के साथ विचार कर लिया जाये और सभी तथ्यों की भली प्रकार जाँच पड़ताल कर ली जाये !

आइये सबसे पहले इस गीत के शब्दों को भली प्रकार जाने और समझें ! विकीपीडिया पर इस गीत के पाँचों अंतरों का अंग्रेज़ी अनुवाद जो उपलब्ध है वह इस प्रकार है !

The lyrics of all 5 stanzas of the complete song "Jana Gana Mana"

The English translation below has been adapted from one posted by Sitansu Sekhar Mittra many years ago.[1]


Bengali Transcription

English Translation

Stanza 1:-


Jano Gano Mano Adhinaayako Jayo Hey,Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Panjaabo Sindhu Gujaraato Maraathaa,Draabiro Utkalo Bango
Bindhyo Himaachalo Jamunaa Gangaa, Uchchhalo Jalodhi Tarango
Tabo Shubho Naamey Jaagey, Tabo Shubho Aashisho Maagey
Gaahey Tabo Jayogaathaa
Jano Gano Mangalo Daayako, Jayo Hey Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey

Oh! the ruler of the minds of people, Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
Punjab, Sindh, Gujarat, Maharashtra,Dravida(South India), Orissa, and Bengal,
The Vindhya, the Himalayas, the Yamuna, the Ganges,and the oceans with foaming waves all around
Wake up listening to Your auspicious name, Ask for Your auspicious blessings,
And sing to Your glorious victory.
Oh! You who impart well being to the people!
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
Victory to You, victory to You, victory to You, Victory, Victory, Victory, Victory to You!
(refrain repeated five times)

Stanza 2:-


Ohoroho Tobo Aahbaano Prachaarito,Shuni Tabo Udaaro Baani
Hindu Bauddho Shikho Jaino,Parashiko Musholmaano Christaani
Purabo Pashchimo Aashey,Tabo Singhaasano Paashey
Premohaaro Hawye Gaanthaa
Jano Gano Oikyo Bidhaayako Jayo Hey,Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey

Your call is announced continuously,we heed Your gracious call
The Hindus, Buddhists, Sikhs, Jains, Parsees, Muslims, and Christians,
The East and the West come,to the side of Your throne
And weave the garland of love.
Oh! You who bring in the unity of the people!
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!

Stanza 3:-


Potono Abhbhudoy Bandhuro Ponthaa,Jugo Jugo Dhaabito Jaatri
Hey Chiro Saarothi, Tabo Ratha Chakrey Mukhorito Potho Dino Raatri
Daaruno Biplabo Maajhey,Tabo Shankhodhwoni Bajey
Sankato Dukkho Traataa
Jano Gano Potho Parichaayako,Jayo Hey Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey

The way of life is somber as it moves through ups and downs,But we, the pilgrims, have followed it through ages.
Oh! Eternal Charioteer, the wheels of your chariot echo day and night in the path
In the midst of fierce revolution, your conch shell sounds.
You save us from fear and misery
Oh! You who guide the people through tortuous path...
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!

Stanza 4:-


Ghoro Timiro Ghono Nibiro,Nishithey Peerito Murchhito Deshey
Jagrato Chhilo Tabo Abicholo Mangalo,Noto Nayoney Animeshey
Duhswapney Aatankey,Rokkhaa Koriley Ankey
Snehamoyi Tumi Maataaa
Jano Gano Duhkho Trayako,Jayo Hey Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey

During the bleakest of nights,when the whole country was sick and in swoon
Wakeful remained Your incessant blessings,through Your lowered but winkless eyes
Through nightmares and fears,You protected us on Your lap
Oh Loving Mother
Oh! You who have removed the misery of the people...
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!

Stanza 5:-


Raatri Prabhatilo Udilo Rabichhabi, Purbo Udayo Giri Bhaaley
Gaahey Bihangamo Punyo Samirano, Nabo Jibano Rasho Dhaley
Tabo Karunaaruno Ragey,Nidrito Bhaarato Jagey
Tabo Chorone Noto Maatha
Jayo Jayo Jayo Hey, Jayo Rajeshwaro, Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey

The night is over, and the Sun has risen over the hills of the eastern horizon.
The birds are singing, and a gentle auspicious breeze is pouring the elixir of new life.
By the halo of Your compassion India that was asleep is now waking
On your feet we lay our heads
Victory, Victory, Victory be to You, the Supreme King, the dispenser of the destiny of India!

इस गीत की रचना दिसंबर १९११ में की गयी थी ! लगभग उसी समय जब किंग जॉर्ज पंचम का राज्याभिषेक हुआ था ! यह गीत सबसे पहली बार उस समय की इन्डियन नॅशनल कोंग्रेस के अधिवेशन के दूसरे दिन २६ दिसंबर को गाया गया था ! संयोग से उस दिन के एजेंडा में भारत आगमन पर जॉर्ज पंचम व क्वीन का स्वागत और सम्मान भी शामिल था ! इसीलिये यह भ्रांति फ़ैल गयी कि कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने यह गीत जॉर्ज पंचम के सम्मान में लिखा है और कविता में उद्धृत शब्द ‘अधिनायक एवं ‘भाग्यविधाता’ उनके लिये संबोधित हैं ! जबकि वास्विकता यह है कि उनकी शान में एक अन्य गीत ‘बादशाह हमारा’ दूसरे कवि श्री रामभुज चौधरी द्वारा उसी कार्यक्रम में गाया गया था ! ब्रिटिश इन्डियन प्रेस के अखबारों में इस कार्यक्रम की रिपोर्ट कुछ इस तरह छापी गयी !

"The Bengali poet Babu Rabindranath Tagore sang a song composed by him specially to welcome the Emperor." (Statesman, Dec. 28, 1911)
"The proceedings began with the singing by Babu Rabindranath Tagore of a song specially composed by him in honour of the Emperor." (Englishman, Dec. 28, 1911)
"When the proceedings of the Indian National Congress began on Wednesday 27th December 1911, a Bengali song in welcome of the Emperor was sung. A resolution welcoming the Emperor and Empress was also adopted unanimously." (Indian, Dec. 29, 1911)

नॅशनल इन्डियन प्रेस ने इस कार्यक्रम की रिपोर्ट अपने समाचार पत्रों में कुछ इस तरह से छापी !

"The proceedings of the Congress party session started with a prayer in Bengali to praise God (song of benediction). This was followed by a resolution expressing loyalty to King George V. Then another song was sung welcoming King George V." (Amrita Bazar Patrika, Dec.28,1911)
"The annual session of Congress began by singing a song composed by the great Bengali poet Babu Ravindranath Tagore. Then a resolution expressing loyalty to King George V was passed. A song paying a heartfelt homage to King George V was then sung by a group of boys and girls." (The Bengalee, Dec. 28, 1911)

यहाँ तक कि इन्डियन नॅशनल कोंग्रेस के वार्षिक अधिवेशन की दिसंबर १९११ की रिपोर्ट में इस कार्यक्रम के सन्दर्भ में यह लिखा गया था !

"On the first day of 28th annual session of the Congress, proceedings started after singing Vande Mataram. On the second day the work began after singing a patriotic song by Babu Ravindranath Tagore. Messages from well wishers were then read and a resolution was passed expressing loyalty to King George V. Afterwards the song composed for welcoming King George V and Queen Mary was sung."

परमपिता परमात्मा एवं अपनी मातृभूमि की स्तुति में रचित अपनी इस रचना पर छिड़े विवाद ने कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर को भी बहुत मर्माहत किया था ! १० नवंबर १९३७ को श्री पुलिन बिहारी दास को लिखे एक पत्र में उन्होंने अपनी पीड़ा को इस तरह व्यक्त किया था !

"A certain high official in His Majesty's service, who was also my friend, had requested that I write a song of felicitation towards the Emperor. The request simply amazed me. It caused a great stir in my heart. In response to that great mental turmoil, I pronounced the victory in Jana Gana Mana of that Bhagya Vidhata [ed. God of Destiny] of India who has from age after age held steadfast the reins of India's chariot through rise and fall, through the straight path and the curved. That Lord of Destiny, that Reader of the Collective Mind of India, that Perennial Guide, could never be George V, George VI, or any other George. Even my official friend understood this about the song. After all, even if his admiration for the crown was excessive, he was not lacking in simple common sense."

यह पत्र जो मौलिक रूप से बांग्ला में लिखा गया था श्री प्रभात कुमार मुखर्जी द्वारा रचित रवींद्र नाथ टैगोर की जीवनी ‘रवीन्द्रजीवनी’ के दूसरे वॉल्यूम के पेज ना. ३३९ पर उद्धृत है !

पुन: १९ मार्च १९३९ के अपने एक पत्र में रवीन्द्र बाबू ने लिखा है –

"I should only insult myself if I cared to answer those who consider me capable of such unbounded stupidity as to sing in praise of George the Fourth or George the Fifth as the Eternal Charioteer leading the pilgrims on their journey through countless ages of the timeless history of mankind." (Purvasa, Phalgun, 1354, p738.)

स्वयं रवीन्द्रनाथ टैगोर के पत्रों के इन उद्धरणों के बाद मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता कि किसी भी तरह के संशय की कोई गुंजाइश अब बाकी रह गयी है ! जलियाँवाला बाग के नर संहार के बाद रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सम्मान में मिली अपनी ‘सर’ की उपाधि लौटा दी थी ! अपने देश की महिमा में उन्होंने बेमिसाल गीतों की रचना की है ! उनकी रचनाधर्मिता तथा उनके मंतव्यों को तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत करना और भ्रामक प्रचार करना किसी भी तरह से उचित नहीं है ! रवीन्द्रनाथ टैगोर हमारा मान हैं, हमारी शान हैं और भारत के आकाश के दैदीप्यमान ध्रुव तारे के समान हैं इसमें कोई दो राय हो ही नहीं सकतीं ! हम कभी उनके ॠण से उॠण नहीं हो सकेंगे !

जय भारत !

साधना वैद !
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मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले


आसमान की गोद में टिमटिमाते कई तारे
सितारों के बीच एक छवि तू बनाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

हँसा था तू, बात पुरानी हो चुकी,
यादों को आगोश में ले, संग उसके झिलमिलाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

खुशी के कुछ पल कभी आए तो थे,
यादों को ही तू अपने पलकों पे सजाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

मुस्कुराने का तुमने जो वादा है किया,
भूल के हर गम तू वो वादा बस निभाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

ज़माने की चोट से आँसू भी निकलते,
पर पानी में भींग के अस्कों को छुपाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

प्यार में है मजबूर तू, माना ये हमने,
आएँगी ख़ुद बहारें, खुशी के गीत गा ले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

याद रख तू, कोई तुझसे है जुडा,
अपनी नहीं तो उसकी, तू खैर तो मनाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

खोखली सबकी खुशियाँ, फ़िर तू क्यों ग़मगीन;
मुस्कुराना है रस्म, ये रस्म भी निभाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

तड़प तेरी मुझसे अब देखी नहीं जाती,
तड़प में भी थोडी-सी खुशी तू मिलाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

कहानी सिर्फ़ तेरी नहीं, हर एक की है,
अपनी ही बात तू ख़ुद को ही सुनाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

शिकवा गर तुझको है ज़माने से कोई,
दिल ही दिल में अपनी अलग दुनिया तू बसाले,
मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले।

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‘ब्लॉगर्स मीट वीकली‘ (2) Love For All

श्री रूपचंद शास्त्री ‘मयंक‘
सभी हिंदी भाषियों को प्रेरणा अर्गल का  प्रणाम और सलाम !
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सभी ब्लॉगर्स का हार्दिक स्वागत है। सबसे पहले हम अपने सभापति आदरणीय  रूपचंद शास्त्री मयंक जी का हार्दिक अभिनंदन करते हैं और उन्हें फूल पेश करते हैं, जिनके सान्निध्य में ही यह अद्भुत कल्पना साकार हो सकी है कि  ब्लॉगर्स मीट ब्लॉग पर आयोजित हुआ करे ताकि सारी दुनिया के कोने कोने से ब्लॉगर्स एक मंच पर जमा हो सकें और विश्व को सही दिशा देने के अपने विचार आपस में साझा कर सकें। ब्लॉगर्स मीट वीकली की पहली महफ़िल में आदरणीय शास्त्री जी का संबोधन इस कोण से एक अलग ही महत्व रखता है। इसमें बिना किसी भेदभाव के हरेक आय और हरेक आयु के ब्लॉगर्स सम्मानपूर्वक शामिल हो सकते हैं। ब्लॉग पर आयोजित होने वाली मीट में वे ब्लॉगर्स भी आ सकती हैं / आ सकते हैं जो कि किसी वजह से अजनबियों से रू ब रू नहीं होना चाहते।

ब्लॉगर्स मीट वीकली : एक ऐतिहासिक आयोजन 

प्रेरणा अर्गल 
आदरणीय शास्त्री जी एक ऐसे साहित्यकार हैं जिनका साहित्य न केवल साहित्य के मानकों पर खरा उतरता है बल्कि उसमें समाज के लिए सकारात्मक संदेश भी होता है। उनकी रचनाओं को देखकर साहित्य सृजन के बारीक पहलुओं को भी सहज ही समझा जा सकता है। प्रस्तुत रचना इसी का एक उदाहरण है- 
(1)
बेटे-बेटी में करो, समता का व्यवहार।
बेटी ही संसार की, होती सिरजनहार।।
होती सिरजनहार, स्रजन को सदा सँवारा।
जिसने ममता को उर में जीवन भर धारा।।
कह 'मयंक' दामन में कँटक रही समेटे।
बेटी माता बनकर जनती बेटी-बेटे।।

(2) 
हरे-भरे हों पेड़ सब, छाया दें घनघोर।
उपवन में हँसते सुमन, सबको करें विभोर।।
सबको करें विभोर, प्रदूषण हर लेते हैं।
कंकड़-पत्थर खाकर, मीठे फल देते हैं।।
कह 'मयंक' आचरण, विचार साफ-सुथरे हों।
उपवन के सारे, पादप नित हरे-भरे हों।।


हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल एक ऐसा मंच है जहां हरेक नया और पुराना ब्लॉगर अपने हरेक तरह के विचार को साझा कर सकता है। इसी सिलसिले में जो लेख इस सप्ताह फ़ोरम के मंच पर पेश किए गए हैं, वे आपके सामने रखे जा रहे हैं ताकि आप भी उन्हें देख लें और अपनी राय से हम सबको अवगत करा सकें।

चूहे का आंदोलन

वरिष्ठ पत्रकार श्री महेन्द्र श्रीवास्तव जी के लेख पर एक बहस 

A Dialogue

Hindi Blogging Guide (21) 

हरेक समस्या का अंत आप कर सकते हैं तुरंत  

Easy Solution

 गौरवशाली हिंदी मंच के नए पुराने साथियो से

एक विनम्र विनती Hope

प्लीज.. भगवा को बख्श दो बाबा

खतरनाक होते हैं सोते हुए लोग 

 Police Opinion - अविनाश वाचस्‍पति

        Hindi Blogging Guide (19) 

         -महेंद्र श्रीवास्तवजी 

और अंत में मेरी   

यह कैसी निराली रीत

-प्रस्तुति : प्रेरणा अर्गल


प्रेरणा जी के शुक्रिया के साथ सभी बहनो और भाईयो को अनवर जमाल का सलाम , ओउम् शांति !मुशायरा::: नॉन-स्टॉप में  इब्ने सफ़ी की ग़ज़ल - Anwer Jamal



गिर रहा है तो किसी और तरह ख़ुद को संभाल
हाथ यूं  भी  तो  न  फैले  कि  बने  दस्ते  सवाल

 
 

पेश है आपके लिए हमारा चयन हिंदी के कुछ मशहूर चिठ्ठों से

 

 दो लेखकों की रचनाएं परिकल्पना महोत्सव से

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डॉ. रूपचंद्र शास्त्री “मयंक” की दो बाल कविताएँ

“रेंग रही हैं बहुत गिजाई” छम-छम वर्षा आई। रेंग रही हैं बहुत गिजाई।। पेड़ों की जड़ के ऊपर भी, कच्ची...
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चुगलखोरी नहीं आसान, इतना समझ लीजै

Written by Shefali Pandey| July 22, 2011 | 
व्यंग्य, साथियों ...

बाबा-सूट!!

रतन सिंह शेख़ावत जी बता रहे हैं अपनी क्षत्रिय जाति का इतिहास
और भारत भूषण जी भी नहीं भूले हैं कि क्या कहा था बाल गंगाधर तिलक ने ?
ख़ुशी की बात है कि ‘हिंदी साहित्य संगम‘ जल्दी ही एक नई वेबसाइट पर दिखेगा।
 ...और अब पेश हैं हिंदी ब्लॉग जगत की कुछ जानी पहचानी शख्सियतों के क़लम का शाहकार . ये शाहकार ऐसे ब्लॉगर्स के दिमाग़ों की देन हैं जिन पर हिंदी ब्लॉग जगत को नाज़ है और लेखों की गुणवत्ता के लिए इन महानुभावों का नाम ही काफ़ी है।
समय के अभाव में हम इन लेखों को ढंग से सजा न सके लेकिन इससे भी मन में एक जिज्ञासा और उत्सुकता का आविर्भाव ही होता है कि देखें इस लिंक रूपी इस सीप में ज्ञान का कौन सा मोती छिपा है ?

http://jindagikerang.blogspot.com/ जिन्दगी के रंग.
http://swasthya-sukh.blogspot.com/ स्वास्थ्य-सुख.
http://najariya.blogspot.com/ नजरिया.

 प्रस्तुतकर्ता : सुशील बाकलीवाल
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http://ret-ke-mahal-hindi.blogspot.com/2011/07/blog-post_25.html

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http://ret-ke-mahal-hindi.blogspot.com/2011/07/blog-post_30.html 

सादर, सधन्यवाद
शिल्पा मेहता

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http://trishakant.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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 http://meghnet.blogspot.com/2011/07/blog-post_26.html

भारत  भूषण

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दिनेश रविकर 
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 अनामिका घातक
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आदरणीय  जमाल  साहब ! आपका  मेल  मिला , मैं  पूरा  पहाड़  ही  भेज  देता  हूँ  संजीवनी  मिले  तो  ले  लें , इसकी  पहचान  आपको  बेहतर  होगी , आशा  है  ज़रुरत  की  चीजें  आप  को  मिल  जाएँगी  मेरी  ओर  से  थोडा  कष्ट  सह  लेंगे , मुझे  उम्मीद  है .
आपका  मित्र ,
अरूण कुमार झा
www.drishtipatpatrika.blogspot.com,
www.drishtipat.com,
09471760495, ०९०३११९७५५३७

अब एक शेरो-शायरी की नई साईट पर हम आपको लिए चलते हैं। यहां आपकों कई दीगर शायरों के साथ परवीन शाकिर की शायरी भी मिलेगी। वह कह रही हैं कि  

अब कौन से मौसम से कोई आस लगाए
बरसात में भी याद जब न उनको हम आए
मिटटी की महक साँस की ख़ुशबू  में उतर कर
भीगे हुए  सब्ज़े की तराई में बुलाए

ये लेख हमें हमारी फ़रमाइश पर भेजे गए हैं जिससे इन लोगों का सहयोग सिद्ध होता है। हमें मिलकर सोचना है और मिलकर ही किसी बेहतर नतीजे पर पहुंचना है और यह मिलन तमाम अंतर और मतभेद के बावजूद होना है। संकीर्णताएं देर तक हिंदी ब्लॉगर्स को आपसी मिलन और प्रेम व्यवहार से रोक नहीं पाएंगी।
ऐसी हमें आशा भी है और हमें ऐसा ही विश्वास भी है। 

हम अपने मेहरबान दाता पालनहार का शुक्र अदा करते हैं कि इतनी कम मुद्दत में ही उसने इस मंच को असंख्य पाठकों के बीच इतना ज़्यादा लोकप्रिय बना दिया है कि आज इसकी पाठक संख्या का ग्राफ़ अपने शिखर पर है और पाठकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हिंदी ब्लॉगिंग गाइड भी इस मंच के विशेष आकर्षणों में से एक है।

 कल चाँद नज़र आएगा और
 रमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो जाएगा, जो हमें अपने अंदर संयम और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है और ये गुण सभी के लिए फ़ायदेमंद हैं।
यह महीना दुआ का महीना भी है। दुआ हर समय की जा सकती है लेकिन इस महीने में दूसरे महीनों से बढ़कर दुआ करनी चाहिए। जहां हरेक कर्म की सीमा समाप्त हो जाती है, दुआ तब भी काम देती है।
भक्ति में शक्ति है और भक्ति में शक्ति केवल प्रार्थना के माध्यम से ही प्रकट होती है। हम सब मन, बुद्धि और आत्मा से शक्तिशाली हों और सत्यपथ पर चलने में हम एक-दूसरे पर बढ़ जाने की कोशिश करें।

 
इसी कामना के साथ,
आपका भाई अनवर जमाल आप सभी का शुक्रगुजार है और  ब्लॉगर्स मीट वीकली की इस दूसरी महफ़िल को अब तमाम करता है।
शुभ दिवस  
अनवार अहमद और स्वामी श्री लक्ष्मी शंकराचार्य जी के साथ अनवर जमाल
लखनऊ में
और  सोचिये  कि  

 साऊथ अफ्रीका में बलात्कार भारत से ज़्यादा क्यों  होते हैं?

लेकिन हकीक़त यह है कि

हरेक समस्या का अंत आप कर सकते हैं तुरंत  

 

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रमज़ान का पवित्र महीना और उसकी बरकतें


रमज़ान महीने का स्वागत कैसे करें ?

प्रत्येक मुस्लिम के लिए उचित है कि आने वाले पवित्र और पुण्य वाले महीने में ज़्यादा से ज़्यादा नेकी और पुण्य के कार्य करे, कोई समय नष्ट न करे, बल्कि रमज़ान महीने के एक एक पल को महत्वपूर्ण समझते हुए फर्ज़ नमाज़ को उसके असल समय में अदा करें, तरावीह और नफली नमाज़ें ज़्यादा से ज़्यादा पढ़े, बेकार के गपशप में समय बर्बाद न किया जाए, अल्लाह तआला की इबादत के साथ लोगों के कल्याण और भलाई का कर्म ज़्यादा से ज़्यादा किया जाए, पुण्य और भलाई के कार्य में बढ़ चढ़ कर भाग लिया जाए, ताकि जन्नत प्राप्त हो सके, अल्लाह तआला ने इसी की ओर उत्साहित किया है, ” जो लोग दूसरों पर बाज़ी ले जाना चाहते हों, वे इस चीज़ को प्राप्त करने में बाज़ी ले जाने का प्रयास करें।” (सूरः अल-मुतफ्फिफीनः 26)
इस महीने का स्वागत निम्नलिखित तरिके से हम कर सकते हैं।
ताकि हम अधिक से अधिक पुण्य के कर्म कर के अपने झोली को नेकियों से भर सकें।
(1) सब से पहले अल्लाह का शुक्र और तारीफ और हम्दो सना के माध्यम से स्वागत करें कि जिसने हमें यह मुबारक महीने की बरकतों को प्राप्त करने का मौका दिया और फिर इस महीने का स्वागत खूशी के साथ करें, एक दुसरे को इस महीने की बरकतों को प्राप्त करने के लिए उभारें, एक दूसरों को दुआ दी जाए, रमज़ान की खुशखबरी दी जाए। जैसा कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने साथियों को शुभ खबर देते हुए फरमाया है ” तुम्हारे पास रमज़ान का महीना आया है, यह बरकत वाला महीना है, अल्लाह तआला की रहमतें तुम्हें इस महीने में ढ़ाप लेंगी, वह रहमतें उतारता है, पापों को मिटाता है और दुआ स्वीकार करता है और इस महीने में तुम लोगों का आपस में इबादतों में बढ़ चढ़ कर भाग लेने को देखता है, तो फरिश्तों के पास तुम्हारी तारीफ और प्रशंसा बयान करता है, तो तुम अल्लाह तआला को अच्छे कार्ये करके दिखाओ, निःसन्देह बदबख्त वह है जो इस महीने की रहमतों से वंचित रहे। ” ( अल–तबरानी)
(2)
इन्सान को अल्लाह तआला ने ऐसा बनाया ही है कि उस से भूल चुक, गलती, अपराध और पाप के कार्य हो जाता है, परन्तु सब से अच्छा मानव वह है जो अपने गलती और पाप के कार्य पर शर्मिन्दा हो, अल्लाह से तौबा और माफी माँगता हो, उस पाप के पश्चाताप के लिए बेकरार हो और रमज़ान का महीना ही तो माफी का महीना है, गुनाहों और जहन्नम (नरक) से मुक्ति का महीना है, अल्लाह तआला ने गुनाहों से तौबा करने का हमें आज्ञा भी दिया है और तौबा करने वाले सफलपूर्वक होंगे जैसा कि अल्लाह का कथन है, ” ऐ ईमानवालों, तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, आशा है कि सफलता प्राप्त करोगे। ” (सूरा अन्नूरः 31)
अल्लाह तआला हदीस कुद्सी में फरमाता है, ” ऐ इनसानों ! तू जब तक मुझे पुकारता रहेगा और मुझ से उम्मीद रखेगा, मैं तुझे बख्शता रहूंगा, चाहि तू किसी हालत में हो और मुझे कुछ परवाह न होगी, ऐ इनसानों ! यदि तेरे गुनाह आसमान की ऊंचाई तक पहुंच जाए और तू मुझ से क्षमा की प्रार्थना करोगे तो मैं तुझे क्षमा कर दूंगा, ऐ इनसानों! यदि तुम मेरे पास धरती के बराबर अपराध ले कर आऐ और तुमने मेरे साथ किसी को शरीक न किया है, तो धरती के बराबर मैं तुझे माफी दे दुंगा।” (सुनन तिर्मिज़ीः सही हदीस)
अल्लाह तआला बहुत ज़्यादा माफ करने वाला और बहुत ज़्यादा कृपयालु है, यदि बन्दा सच्चे हृदय के साथ अल्लाह की ओर लौटता है तो अल्लाह उस बन्दे से खुश होता है और रमज़ान का महीना ही माफी का महीना है, रहमतों, बरकतों, जहन्नम से मुक्ति और जन्नत में प्रवेश होने का महीना है, इसी लिए इस पवित्र महीने में रो रो कर अल्लाह से माफी मांगी जाए। अपने गुनाहों से बख्शीश तलब की जाए, ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह से दुआ की जाए। अल्लाह तआला माफी से उस के झोली को भर देगा,
(3)
आप पुख्ता इरादा कर लें कि इस पवित्र महीने में ज़्यादा से ज़्यादा पुण्य का काम करेंगे, इस पूरे महीने का रोज़ा रखेंगे, नमाज़ों और अल्लाह के ज़िक्रो अज़्कार, तिलावते कुरआन में अपना पुरा समय लगाऐंगे, लोगों की भलाई और कल्याण के कार्य मे भाग लेंगे, गरीबों और मिस्किनों की सहायता करेंगे, बुराईयों और गुनाहों और पापों से दूर रहेंगे, गाली गुलूच, गीबत, ईर्श्या और लड़ाइ और झगड़ा से दूर रहेंगे, तब ही किसी मानव का रोज़ा स्वीकारित होगा जैसा अबू हुरैरा (रज़ी अल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि अल्लाह तआला फरमाता है ” मानव के प्रत्येक कर्म का बदला मिलता है, सिवाए रोज़े के तो बैशक रोज़ा मेरे लिए है और रोज़ा का बदला मैं दुंगा, रोज़ा ढ़ाल है और जब तुम में से कोई रोज़े की हालत में हो तो बुरा विचार दिलो दिमाग में न लाऐ और न ही चिखे चिल्लाऐ, यदि कोई उस से गाली गुलूच करे या लड़ाई झकड़ा करे तो वह इस से दूर रहे और उत्तर दे कि मैं रोज़े से हूँ। (सही बुखारी)
(4)
रमज़ान के महीने के समय को मुनज़्ज़म करले कि फजर की नमाज़ से पहले उठकर सेहरी खना है फिर नमाज़ पढ़ कर कुरआन की तिलावत करना है दिन रात के समय को विभिन्न कार्यों, इबादतो और ज़रूरी कामों में बांट दें ताकि समय नष्ट न हो और पुरे समय का सही उपयोग हो सके। बेकार की गप शप से दूर रहा जाए। ताकि पूरा रमज़ान का महीना इबादतों में बीते।
(5) रमज़ान के महीने के अहकाम को सिखा जाए, रमज़ान में किन चीज़ो के करने से रोज़ा खराब हो जाता है ? किन चीज़ो के करने से कुछ नही होता ? कौन सा काम और इबादतें करना चाहिये और कैसे करन चाहिये ?, कौन सा काम रोज़े की हालात में नहीं करना चाहिये ?, रमज़ान में कौन सा कार्य अल्लाह को सब से ज़्यादा प्रिय है? रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रमज़ान का महीना कैसे गुज़ारते थे ? इन सब चीज़ों का ज्ञान लेना ज़रूरी है। ताकि रमज़ान महीने को अच्छे तरीके से गुज़ारा जाए, रमज़ान महीने की बरकतों और रहमतों को प्राप्त किया जा सके।
(6)
रमज़ान में लोगों के लेन देन को अदा कर किया जाए क्यों कि लोगों के हुकूक और अधिकार को पूरा करना अनिवार्य है, किसी के लिए हृदय में दुश्मनी, कीना कपट, हसद, जलन न रखा जाए क्यों कि ऐसे लोगों की माफी नहीं है, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया, बन्दों के कर्म सोमवार और शुक्रवार को अल्लाह के पास पेश किये जाते हैं, तो अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल हर उस बन्दे को माफ कर देता है जो अल्लाह के साथ शिर्क न किया हो सिवाए उस मानव को जिस के और उस के भाई के बीच कीना कपट और दुशमनी हो तो कहा जाता है, इन दोनों को छोड़ दो यहाँ तक कि दोनो सुलह सफाई करले, इन दोनों को छोड़ दो यहाँ तक कि दोनो सुलह सफाई करले। ” (सही मुस्लिम)
अल्लाह तआला से दुआ है कि हमे इस बरकत और नेकियों वाले महीने में अपने दामन को बुराईयों से बचाने और जन्नत में जाने वाले कार्य करने की शक्ति प्रदान करे। आमीन….. या रब्बल आलमीन।
Source : http://ipcblogger.net/nawaz/?p=292 
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चूहे का आंदोलन

आजकल तरह तरह के लोग सामने आ रहे हैं। इनमें से कोई लोगों को राजनैतिक मार्गदर्शन दे रहा है और कोई धार्मिक और कोई कह रहा है कि इस दुनिया को केवल आध्यात्मिकता के आधार पर ही सुंदर बनाया जा सकता है और कुछ नास्तिक भी इसी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर का हाल ख़ुद ख़राब है। इनकी हालत बयान करने के लिए एक लतीफ़ा काफ़ी है-   

एक चीता सिगरेट का सुट्टा लगाने ही वाला था की अचानक एक चूहा वहां आया और बोला :

" मेरे भाई छोड़ दो नशा , आओ मेरे साथ भागो देखो ये जंगल कितना खुबसूरत है , आओ मेरे साथ दुनिया देखो "
चीते ने एक लम्हा सोचा फिर चूहे के साथ दौड़ने लगा .

आगे एक हाथी अफीम पी रहा था , चूहा फिर बोला ,
" हाथी मेरे भाई छोड़ दो नशा , आओ मेरे साथ भागो , देखो ये जंगल कितना खुबसूरत है , आओ मेरे साथ दुनिया देखो "
हाथी भी साथ दौड़ने लगा .

आगे शेर व्हिस्की पीने की तैयारी कर रहा था , चूहे ने उसे भी वही कहा .
शेर ने ग्लास साइड पर रखा और चूहे को 5- 6 थप्पड़ मारे .

हाथी बोला , " अरे ये तो तुम्हे ज़िन्दगी की तरफ ले जा रहा है , क्यों मार रहे हो इस बेचारे को ?"
शेर बोला , " यह कमीना पिछली बार भी भांग पी कर मुझे 3 घंटे जंगल मै घुमाता रहा "
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वरिष्ठ पत्रकार श्री महेन्द्र श्रीवास्तव जी के लेख पर एक बहस A Dialogue

नीरज द्विवेदी
आदरणीय नीरज द्विवेदी जी ! आप एक दिन पहले तक हमारी इज़्ज़त करते थे लेकिन हमने बाबा के खि़लाफ़ एक पोस्ट यहां पेश कर दी है, इसलिए अब आप हमारी इज़्ज़त नहीं करेंगे। कोई बात नहीं है। हम आपकी इज़्ज़त बदस्तूर करते रहेंगे।
यह सर्वमान्य तथ्य है कि हिन्दू, मुस्लिम और अन्य समुदायों को धार्मिक और राजनीतिक मार्गदर्शन देने वालों में कुछ लोग भ्रष्ट भी हैं और यह भी सच है कि उनके पीछे भारी भीड़ है।
ग़लत लोगों का मार्गदर्शन हमेशा समस्याओं को बढ़ाता है कभी उन्हें हल नहीं करता और न ही हल कर सकता है।
इन लोगों से बहुत से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हुए होते हैं और इनके खि़लाफ़ लिखने का अंजाम सदैव ही बुरा होता है। आप तो सिर्फ़ हमारी इज़्ज़त न करने की ही धमकी दे रहे हैं, इस काम में तो जान तक चली जाया करती है।
इस सबके बावजूद आप यह जान लें कि हम यहां नाम और इज़्ज़त कमाने नहीं आए हैं बल्कि सत्य की गवाही देने आए हैं।
सत्य का तक़ाज़ा है कि अपने अनुसंधान में हमने इस जीवन और इस जगत में जो कुछ सच पाया है , उसे आप सबके सामने रख दें और मर जाएं, बस।
पिछले दिनों दारूल उलूम देवबंद में भारी उथल-पुथल मची और मौलाना वस्तानवी को हटा दिया गया। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने मोदी की तारीफ़ करने का जुर्म किया है।
हमने तथ्यों का विश्लेषण किया तो पाया कि मदनी ख़ानदान केवल अपने निजी स्वार्थ के लिए मौलाना वस्तानवी को अपनी गंदी राजनीति का शिकार बना रहा है।
हमने मौलाना वस्तानवी का समर्थन किया और मदनी ख़ानदान की निंदा और आलोचना की हालांकि मौलाना वस्तानवी के मुक़ाबले मदनी ख़ानदान के पीछे मुसलमानों की भारी भीड़ है और जब वे पढ़ेंगे कि 
हमने मदनी ख़ानदान के दो सुपर मौलानाओं को ‘राहज़न‘ बताया है तो वे भी हमारी इज़्ज़त करना निश्चित ही छोड़ देंगे।
कोई क्या छोड़ता है और क्या पकड़ता है ?
इससे हमें कोई मतलब नहीं है। हमें तो यह देखना है कि हम सच कहते रहें और प्यार करते रहें, सबसे। इकतरफ़ा, बिना किसी बदले की उम्मीद के। नेक काम का बदला तो सिर्फ़ मालिक ही देता है भाई।
आप योग की मूल आत्मा को जानिए और देखिए कि उसका ज्ञान पात्र व्यक्तियों को हमारे ऋषियों ने सदा ही निःशुल्क दिया है। आग, पानी, हवा और मिट्टी की तरह जो चीज़ आज तक मुफ़्त थी, उसकी शिक्षा देने के लिए भी जो आदमी मोटी फ़ीस वसूलता है वह योग की महान परंपरा को कलंकित करने का दोषी है और यह दोष इतना खुला हुआ है कि इससे इन्कार मुमकिन ही नहीं है लेकिन सत्य को देखता वही है जो भावनाओं में बहने के बजाय निष्पक्ष होकर विचार करता है।
इसके बावजूद बाबा की मांगे जायज़ थीं। यह बात सही है और यह बात भी सही है कि सोते हुए लोगों पर लाठियां बरसाना सरासर ज़ुल्म है।
देखिए हमारा एक लेख, जहां नीरज द्विवेदी जी से हमारा संवाद चल रहा है
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गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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