सूफ़ियों का तरीक़ा ए तालीम What is Sufism Tasawwuf ? [English] Shaykh-ul-Islam Dr.Tahir-ul-Qadri 1/3

हज़रत ख्वाजा बाक़ी बिल्लाह रहमतुल्लाह अलैह (1563-1603) की आमद के साथ ही नक्शबंदी सिलसिला हिंदुस्तान में आया। नक्शबंदी सूफ़ियों की तालीम में हमने देखा है कि उनकी एक तवज्जो (शक्तिपात) से ही मुरीद के दिल से रब का नाम ‘अल्लाह अल्लाह‘ जारी हो जाता है यानि चाहे वह किसी से बात कर रहा हो या कुछ और ही सोच रहा हो या सो रहा हो लेकिन रब का नाम उसके दिल से लगातार जारी रहता है। जिसे अगर शैख़ चाहे तो मुरीद अपने कानों से भी सुन सकता है बल्कि पूरा मजमा उसके दिल से आने वाली आवाज़ को सुन सकता है। इसे ‘लतीफ़ा ए क़ल्ब का जारी होना‘ कहा जाता है। लतीफ़ अर्थात सूक्ष्म होने की वजह से इन्हें लतीफ़ा कहा जाता है। हिंदी में इन्हें चक्र कहा जाता है।
इसके बाद शैख़ की निगरानी में मुरीद एक के बाद एक चार लतीफ़ों से भी ज़िक्र करता है। ये भी अल्लाह के ज़िक्र से जारी हो जाते हैं। ये पांचों लतीफ़े इंसान के सीने में पाए जाते हैं। इस तरह सीने में पांच लतीफ़े अल्लाह के ज़िक्र से जारी हो जाते हैं। इन पांचों लतीफ़ों के नाम यह हैं-
1. लतीफ़ा ए क़ल्ब
2. लतीफ़ा ए रूह
3. लतीफ़ा ए सिर्र
4. लतीफ़ा ए ख़फ़ी
5. लतीफ़ा ए इख़्फ़ा


इसके बाद छठे लतीफ़े से ‘अल्लाह अल्लाह‘ का ज़िक्र किया जाता है। इस लतीफ़े का नाम है ‘लतीफ़ा ए उम्मुद्-दिमाग़‘। यह लतीफ़ा सिर के बीचों बीच होता है। इस तरह थोड़े ही दिन बाद बिना किसी भारी साधना के यह नाम शरीर के हरेक रोम से और ख़ून के हरेक क़तरे से जारी हो जाता है। इस ज़िक्र की ख़ासियत यह होती है कि ‘अल्लाह अल्लाह‘ की आवाज़ जब सुनाई देती है तो इस ज़िक्र में कोई गैप नहीं होता। यह ज़िक्र एक नाक़ाबिले बयान मसर्रत और आनंद से भर देता है। इसे ‘सुल्तानुल अज़्कार‘ कहते हैं और मुरीद इस मक़ाम को 3 माह से भी कम अवधि में पा लेता है।

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ब्लॉगर्स मीट वीकली (24) Happy New Year 2012

 वंदे ईश्वरम् !
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Wishing you and your Family a Very Happy & Prosperous
New Year 2012.
हे ईश्वर! मुझे वरदान दो
इस दुनिया की चकाचैंध को दिल से दूर कर दो
हे ईश्वर मझे वरदान दो
एक दिन दुनिया को त्यागना है
और तेरे सामने खड़ा होना है
हे ईश्वर! मुझे समझ दो
मेरे विश्वास को शक्ति दो
मेरे गलतियो को माफ़ कर दो
हे ईश्वर! मुझे वरदान दो

जीवन भर तेरी उपासना में लीन रहू
तेरे नाम के साथ जीवन का त्याग करूं
जीवन में हमेशा गरीबो, मजबूरो का साथ देता रहू
हे ईश्वर! मुझे वरदान दो

माता-पिता की सेवा करूं
अपने नबी के दिखाए पथ पर चलूं
उसी पर चलते-चलते ईश्वर से जा मिलूं
हे ईश्वर! मुझे वरदान दो

साजिद भाई का शुक्रिया कि उन्होंने इतनी अच्छी दुआ के साथ हमें नए साल की मुबारकबाद दी है।


मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे Happy New Year 2012

डा. अयाज़ अहमद 

वर्ष 2011 बस अब जा ही चुका है और वर्ष 2012 आपके सामने है।
हम आपके लिए शांति की कामना करते हैं।
मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे।
मालिक आपको ऐसी शांति दे, 
जो सदा आपके साथ बनी रहे।
वर्ष 2012 आपके लिए एक अवसर है, शांति पाने का।

HBFI  मंच की पोस्ट्स 

 अनवर जमाल की रचनाएँ 

सभी को नए साल २०१२ की मुबारकबाद


आप सभी को नए साल २०१२ की मुबारकबाद .मालिक हम सबको हर मुसीबत से बचाए और हरेक नेकी का रास्ता दिखाए ताकि हमारा अंजाम अच्छा हो.आमीन . 


अन्ना ख़ालिस देहाती आदमी हैं।

वे कांग्रेस को हराने के लिए कमर कस चुके हैं।
कोई दूसरा होता तो इस काम के लिए भी पैसे पकड़ लिए होते किसी से
लेकिन हमारे अन्ना यह काम बिल्कुल मुफ़्त कर देंगे,
बिल्कुल किसी हिंदी ब्लॉगर की तरह।

ब्लॉगर्स मीट वीकली (23) Merry Christmas


वंदे ईश्वरम् ! सभी ब्लॉगर्स साथियों का स्वागत है। मोहतरमा प्रेरणा अर्गल जी दो हफ़्ते के टूर पर हैं, सो खि़दमत बस हमें ही अंजाम देनी है

 

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिर्फिरा जी "की रचना 

क्या उसूलों पर चलने वालों का कोई घर नहीं होता है ?...


रश्मि प्रभा जी

तुम्हें याद रहे


जिसे नहीं रहना अब उसे लहरें अपने आगोश की पनाह देती हैं फिर मंथन मंथन मंथन और यादें बाहर रख जाती हैं कुछ मीठी कुछ खट्टी कुछ तीती कुछ ज़हरीली ....सिर्फ ज़हर क्यूँ उठाना ?अगर उठाना ही चाहते हो तो एक बार सागर को देखो
ई . प्रदीप कुमार साहनी

जियेंगे नए साल में, जिन्दगी तुझे फिर से,अश्कों को लेकर हम खुशियाँ उधार देंगे;काँटों से भी रण गर होता है तो हो ले,जीने का सलीका अब फिर सुधार देंगे | बहुत हो गया, बहुत सहा, बस, अब नहीं है होता,इस नैतिक गुलामी को तेरे मुँह पे मार देंगे;
दिलबाग विर्क जी

साहित्य सुरभि: हो मुबारिक साल नया

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी

झा जी कहिन: आओ बात करें ....१

Disha Verma

 
साथियो ! ब्लॉगर्स मीट वीकली की ताज़ा पोस्ट आधा तैयार हो चुकी थी कि अचानक नेट प्रॉब्लम करने लगा और फिर वक्त हो गया घर से निकलने का, अपने कर्तव्य की अदायगी के लिए। नेट की ज़िंदगी के बीच हमें यह भूल नहीं जाना चाहिए कि हमारे बाल-बच्चों का भी हम पर हक़ है और उनकी शिक्षा और उनकी परवरिश हमारे ही ज़िम्मे है।
अब लौटे हैं और देख रहे हैं,
मंच से बाहर की पोस्ट्स

दोस्तों! ब्लॉगों पर मंगल नववर्ष के चर्चा की ख़ुमारी छाई है।
‘‘आखर है एकै गिरा, ‘मंगल हो नववर्ष’,
सुख-समरिद्धी-शान्ति हो, छाये सब में हर्ष।’’
-चन्द्र भूषण मिश्र 'गाफ़िल'
सो
आप सब की खि़दमत में पेश है इन्हीं जज्बातों से लबरेज़, चर्चामंच की आज की पेशकश 
धन धान्य भरै, घर क्लेश मिटै (सोमवारीय चर्चामंच-746)
रचना का अलबेला अरमान 
(स्पेशल अपील - बुरा न मानो होली है वाले जज़्बात लेकर मेरी यह रचना पढ़ी जाए, तभी आप इसका लुत्फ़ ले सकेंगे।)


मुशायरा ब्लॉग

दल उभरता नहीं, संगठन के बिना


स्वर सँवरता नहीं, आचमन के बिना।
पग ठहरता नहीं, आगमन के बिना।।                                                  

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


 ब्लॉग जगत में ‘सायबर जर्नलिज़्म‘ का सूत्रपात
वर्ष 2011 में हमने ‘ब्लॉग की ख़बरें के नाम से एक ऐसे समाचार पत्र की शुरूआत की जो कि केवल सायबर जगत की ख़बरें देता है। इस तरह हमने एक नए पथ का निर्माण किया और फिर उसके बाद इसी पैटर्न पर हमारी टीम के एक सदस्य ने ‘भारतीय ब्लॉग समाचार‘ के नाम से एक ब्लॉग शुरू किया और अब ‘ब्लॉग बुलेटिन‘ के नाम से एक तीसरा समाचार पत्र भी वुजूद में आ चुका है। यह एक बड़ी उपलब्धि है।
साथ ही यह दुखद भी है कि ब्लॉग जगत में ‘सायबर जर्नलिज़्म‘ का सूत्रपात करने के हमारे कारनामे को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। हम इसे ब्लॉग जगत का भ्रष्टाचार शुमार करते हैं।
देखिए ‘ब्लॉग की ख़बरें‘
ब्लॉग जगत का सबसे पहला समाचार पत्र

सुशील गंगवार - मीडिया दलाल डाट.कॉम* लड़की - दारु - ड्रग्स का खुला कारोवार मेरी आखो के सामने चल रहा था इदर उधर वोदका , रम , बीयर , ब्रांडी , सिगरते के ... 
प्रमोद जोशी जी देश और दुनिया के अहवाल बता रहे हैं, देखिए

अंधेर नगरी का लोकतंत्र

नए साल का पहला दिन आराम का दिन था। आज काम का दिन है। हर नया साल चुनौतियों का साल होता है। पर हर साल की चुनौतियाँ गुणधर्म और प्रकृति में अनोखी होती हैं। हर दिन और हर क्षण पहले से फर्क होता है। पर जब हम समय का दायरा बढ़ाते हैं तो उन दायरों की प्रकृति भी परिभाषित होती है। पिछला साल दुनियाभर में स्वतः स्फूर्त जनांदोलनों का साल था।
साधना वैद जी ‘सुधिनामा‘ पर नए साल का स्वागत करते हुए मिलीं

है स्वागतम् ! सुस्वागतम् !

 इससे पहले की रचना में साधना जी ईश्वर को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही थीं कि विधाता ने मोक्ष को सात तालों में क्यों छिपा लिया है ?
जबकि हक़ीक़त यह है
कि ईश्वर ने हमें निष्पाप और मासूम पैदा किया है, उनकी रचना पर हमने अपने ब्लॉग ‘वेद क़ुरआन‘ पर चर्चा की है। इसे आप भी देखिए

मोक्ष के लिए आपको पुनर्जन्म और आवागमन में अंतर जानना होगा Salvation

यह पीड़ा केवल एक साधना जी की ही नहीं है बल्कि बहुत से मन इस पीड़ा से कराह रहे हैं .
भारतीय नागरिक भ्रष्टाचार पर अरण्य रोदन करते हुए मिले तो हमने उन्हें बताया कि भ्रष्टाचार का ख़ात्मा कैसे हो सकता है ?
दरअस्ल भातीय नागरिक जी ने ‘उच्चारण‘ ब्लॉग पर हमारा कमेंट देखकर हमें संबोधित करते हुए एक टिप्पणी कर दी थी। जिसे आप यहां देख सकते हैं और इस तरह आप आदरणीय रूपचंद शास्त्री जी की एक बेहतरीन रचना से रू ब रू भी हो जाएंगे।
मन-सुमन हमेशा खिले रहें,
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के,
हृदय हमेशा मिले रहें,

हम उनकी बात से सहमत हैं।
सबसे बड़ा शुभ काम यह है कि बंदा अपनी बग़ावत से बाज़ आ जाए और वह अपने रब के सामने समर्पण कर दे। ऐसा करते ही वह स्वर्गिक शांति का अनुभव करेगा।  
महेंद्र श्रीवास्तव जी ने एक आवाज़ लगाई है जिस पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए ताकि हिंदी ब्लॉगिंग मात्र मनोरंजन तक ही सीमित न रहे और जो ब्लॉगर रचनात्मक काम कर रहे हैं उनमें समान मुददों पर सहयोग का माद्दा बढ़े। तब कोई गंभीर ब्लॉगर यह नहीं कहेगा कि

हां ब्लागर होने पर मैं हूं शर्मिंदा ...

बडा सवाल ये है कि क्या हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं ?

एक आवाज़ रमेश कुमार जैन ‘सिरफिरा‘ जी ने भी लगाई है और ऐसी लगाई है कि जवाब देते नहीं बन रहा है उनसे, जिनसे वह पूछ रहे हैं कि

आप मुझे "बकवास" शब्द की परिभाषा बताएं ?

 

ZEAL: मेरा तुमसे मतभेद है मनभेद नहीं 
@दिव्या श्रीवास्तव जी, आप खुद इसका कितना पालन करती है ? आप एक बुध्दिजीवी वर्ग से आती है यानि आप एक डाक्टर है. अपनी असभ्य भाषा खुद देखें. दिव्या श्रीवास्तव जी, लगता है आप हमसे नाराज है. जो देशहित और समाज हित के हमारे लिंकों बार-बार हटा देती हैं. क्या आप स्वयं भारत देश के प्रति ईमानदार है ? 
  • फ़ेसबुक और ब्लॉगर.कॉम पर जितने भी ग्रुप रमेश की पकड़ में थे, सब जगह यही आवाज़ गूंजती हुई दिख रही थी।
  • धन्य है ब्लॉग जगत जहां सच्चे लोग भी हैं।
वर्ष 2011 में यह भी एक उपलब्धि है कि नवभारत टाइम्स ने अपने पाठकों के लिए ‘अपना ब्लॉग‘ बनाने की सुविधा दे दी। अगर आपने वहां अभी ब्लॉग नहीं बनाया है तो ज़रूर बनाएं। आपको अच्छे पाठक मिलेंगे और बड़ी संख्या में मिलेंगे। जब आप वहां जाएं हमारा ब्लॉग ‘बुनियाद‘ भी आपको वहीं नज़र आएगा। जिसमें हमारे 141 लेख पब्लिश हो चुके हैं।

वर्ष 2011 की एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि 
दुनिया की पहली हिंदी ब्लॉगिंग गाइड वुजूद में आई है और बेहतरीन सलाहियत के मालिकों की कोशिशों से यह हरेक के लिए मुफ़्त उपलब्ध है। इसका ज़िक्र भी बस हम या हमारे महेश जी ही कर देते हैं और अगर हम भी न करें तो कोई यहां ज़िक्र करने वाला भी नहीं है।

हिंदी ब्लॉगिंग गाइड Hindi Blogging Guide

हिंदी ब्लॉगिंग गाइड Hindi Blogging Guide इस तरह की मानसिकता रचनात्मक काम करने वालों को हतोत्साहित करती है।
अच्छा है कि इस तरह की प्रवृत्ति को कम किया जाए और रचनात्मक काम करने वालों की सराहना मुक्त कंठ से की जाए।

महापुरूषों के इतिहास को जानना और उन्हें उचित सम्मान देना भी हमारे लिए ज़रूरी है। आज उन्हीं की वजह से हमें नेकी और बदी की तमीज़ है। इस संदर्भ में

श्री कृष्ण जी को इल्ज़ाम न दो

 

अख़तर ख़ान अकेला जी, रविकर जी और ऐसे ही कुछ और ब्लॉगर्स के लिंक देने की ख्वाहिश दिल में ही रह जाएगी। रात के नौ बज रहे हैं और पोस्ट अभी भी नामुकम्मल ही लग रही है। बहुत से नाम ज़हन में आ रहे हैं लेकिन फिर एक नाम ज़हन में आया
‘प्यारी मां‘ का।

स्त्री शरीर की एक कुदरती प्रक्रिया है मासिक धर्म - *Disclaimer - *यहाँ दी गयी जानकारी केवल शैक्षिक एवं सूचना के प्रसार हेतु है. यह जानकारी किसी भी तरह से चिकित्सीय परामर्श या व्यवसायिक चिकित्सा स्व... 

प्यारी मां ब्लॉग के लिंक के साथ ही इस चर्चा को विराम देते हैं।
हरेक नारी ब्लॉगर को सम्मान देने का यही तरीक़ा हमें उचित लगा।
मां ख़ुश है तो उसकी औलाद भी ख़ुश हो ही जाएगी,
चाहे वे नर हों या नारी !
सभी साहिबान का शुक्रिया कि आप लोग आते हैं और इस मीट को पसंद करते हैं।
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साहित्य सुरभि: हो मुबारिक साल नया

साहित्य सुरभि: हो मुबारिक साल नया: नव जीवन की आस ले , आया है नव वर्ष माहौल बने शान्ति का , फैले हर-सू हर्ष । फैले हर - सू हर्ष , यही कोशिश हो सबकी सुधरें कुछ ह...
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मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे Happy New Year 2012

एक पैग़ाम ईमेल से हमें मिला तो गोया कि हमें शब्द मिल गए नए साल की मुबारकबाद देने के लिए .

[Blog News] मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे Happy 2012

  
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DR. ANWER JAMAL 

<eshvani@gmail.com>
Sat, Dec 31, 2011 at 10:56 AM
To: ayazdbd@gmail.com
वर्ष 2011 बस अब जा ही चुका है और वर्ष 2012 आपके सामने है।
हम आपके लिए शांति की कामना करते हैं।
मालिक आप सबको शांति के ख़ज़ाने से भर दे।
मालिक आपको ऐसी शांति दे,
जो सदा आपके साथ बनी रहे।
वर्ष 2012 आपके लिए एक अवसर है, शांति पाने का।

नए साल के मुबारक मौक़े पर हमारी तरफ़ आपके लिए एक अमूल्य भेंट है,
जो शांति को तुरंत उपलब्ध कराती है।

विभिन्‍न प्रकार की नमाज और उन्हें पढने का तरीका namaz ka tariqa


लाखों हिन्‍दी जानने वाले हमारे भाईयों-बहनों को अरबी न समझने के कारण नमाज़
पढने में दिक्‍कत होती है, उनकी परेशानी को देखते हुये, पेश है ऐसी किताब जो नमाज विषय पर हिन्‍दी में सभी जानकारी देती है .
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‘बांझ औरत प्रसूता की वेदना को क्या समझेगी ?‘- Anna Hajare

अन्ना ने कहा-‘बांझ औरत प्रसूता की वेदना को क्या समझेगी ?‘

अन्ना तो अन्ना हैं।
अन्ना ख़ालिस देहाती आदमी हैं।
वे भी शहरी लोगों की तरह आगा पीछा सोचा किये होते तो बस कर लेते क्रांति ?
किसी पार्टी से मोटा माल पकड़कर वे भी मौज मारते।
जितने लोग सभ्य और सुशील हैं, जो शिक्षा में उनसे ज़्यादा हैं,
वे कर लें आंदोलन !
बांझ औरत प्रसव की पीड़ा नहीं जानती ,
यह सच है और यह भी सच है कि बच्चों को जन्म देने वाली मांएं यह नहीं जानतीं कि बांझ रह जाने वाली औरत की पीड़ा क्या होती है ?
ख़ैर, इस समय अन्ना का मूड बुरी तरह ख़राब है,
वे कांग्रेस को हराने के लिए कमर कस चुके हैं।
कोई दूसरा होता तो इस काम के लिए भी पैसे पकड़ लिए होते किसी से
लेकिन हमारे अन्ना यह काम बिल्कुल मुफ़्त कर देंगे,
बिल्कुल किसी हिंदी ब्लॉगर की तरह।

ब्लॉगर इस या उस पार्टी को हराने के लिए लिख रहा है बिल्कुल मुफ़्त,
जबकि अख़बार और चैनल वाले मोटा माल पकड़ रहे हैं।

कम से कम कोई एग्रीगेटर ही पकड़ ले इनसे कुछ।
आमदनी का मौक़ा है,
ऐसे में अन्ना बनकर काम नहीं चलता,
बस अन्ना को ही अन्ना रहने दो
और ख़ुद मौक़े से लाभ उठाओ।

नया साल आ गया है,
नए मौक़े लेकर आया है,

सबको नव वर्ष की शुभकामनाएं।
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****नए साल में****


जियेंगे नए साल में, जिन्दगी तुझे फिर से,
अश्कों को लेकर हम खुशियाँ उधार देंगे;
काँटों से भी रण गर होता है तो हो ले,
जीने का सलीका अब फिर सुधार देंगे |

बहुत हो गया, बहुत सहा, बस, अब नहीं है होता,
इस नैतिक गुलामी को तेरे मुँह पे मार देंगे;
माना तुम बलशील हो. अडिग हो मेरु जैसे,
पर तेरे हर चोट पे अब, हम भी वार देंगे |

सोच लिया नववर्ष को खुशनुमा है बनाना,
गत वर्ष का आडंब यहाँ अब उतार देंगे;
करेंगे वही जो हुकुम ह्रदय से मिलेगा,
खुद भी उबरेंगे और सबको उबार देंगे |

सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें |
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तुम्हें याद रहे



जिसे नहीं रहना अब
उसे लहरें अपने आगोश की पनाह देती हैं
फिर मंथन मंथन मंथन
और यादें बाहर रख जाती हैं
कुछ मीठी कुछ खट्टी कुछ तीती कुछ ज़हरीली ....
सिर्फ ज़हर क्यूँ उठाना ?
अगर उठाना ही चाहते हो
तो एक बार सागर को देखो
ज़हर को तो उसने पी लिया
जो लौटा गया है-
वह सीख है
कि तुम्हें याद रहे
ज़हरीले लोग कौन थे !
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साहित्य सुरभि: अग़ज़ल - 31

साहित्य सुरभि: अग़ज़ल - 31: ऐसे लगता है जैसे यह जिन्दगी देवदासी है बाँट दी हैं सब खुशियाँ, मेरे पास सिर्फ उदासी है । बड़े अरमानों से देखा था तेरी ...
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झा जी कहिन: आओ बात करें ............१

झा जी कहिन: आओ बात करें ............१
कठिनाई तो यह है कि जनता की जागृति अल्पायु होती है और फिर ज़िंदगी उसी ढर्रे पर चलने लगती है.... कुत्ते की दुम टेढी की टेढी :)
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सभी को नए साल २०१२ की मुबारकबाद

आप सभी को नए साल २०१२ की मुबारकबाद .
मालिक हम सबको हर मुसीबत से बचाए और हरेक नेकी का रास्ता दिखाए ताकि हमारा अंजाम अच्छा हो.
आमीन .

अब कुछ अच्छे संदेसे

Something in your smile which speaks to me,
Something in your voice which sings to me,
Something in your eyes which says to me,
That you are the dearest to me.
“Happy New Year”


Another day, another month, another year.
Another smile, another tear, another winter.
A summer too, But there will never be another you!
Wishing a very HAPPY N BLESSED New Year to You!!


We will open the new book.
Its pages are blank.
We are going to put words on them ourselves.
The book is called Opportunity
and
its first chapter is New Year's Day.


When the mid-nite bell rings tonight..
Let it signify new and better things for you,
Let it signify a realisation of all things you wish for,
Wishing you a very...very...very prosperous new year.


Like birds, let us, leave behind what we don’t need to carry…
GRUDGES, SADNESS, PAIN, FEAR and REGRETS.
Life is beautiful.. Enjoy it.
HAPPY NEW YEAR


Beauty..
Freshness..
Dreams..
Truth..
Imagination..
Feeling..
Faith..
Trust..
This is begining of a new year!
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अन्ना हज़ारे के साथ खड़े हैं हमारे मौलाना शमऊन क़ासमी

अन्ना हज़ारे के साथ हम हैं लेकिन आज उनके साथ अपने दोस्त मौलाना शमऊन क़ासमी साहब को भी खड़े देखा। अन्ना के साथ उनका फ़ोटो आज के उर्दू अख़बार ‘राष्ट्रीय सहारा‘ में मुखपृष्ठ पर ही है। हमने उन्हें फ़ोन मिलाया तो मालूम हुआ कि फ़ोटो उनका ही है और कल वह मुम्बई से दिल्ली आ रहे हैं। हमने कहा कि जब आप दिल्ली आ रहे हैं तो पहले हमसे मिलिएगा, बिजनौर बाद में जाइयेगा।
उन्होंने कहा कि ठीक है, हम पहले आपके पास ही आएंगे।
मौलाना शमऊन क़ासमी हमारे 25 साल पुराने दोस्त हैं। दावती शऊर के हामिल हैं और इसी के साथ वह सियासत में भी सरगर्म रहते हैं। ऊंची पहुंच के लोगों से उनकी अच्छी जान पहचान है। उनके परिचितों का और उनसे मुहब्बत करने वालों का दायरा इतना बड़ा है कि एक बार हमने उनके साथ सफ़र किया तो उनकी जान-पहचान के जितने लोग मिले और अलग अलग शहरों में मिले, उन्हें देखकर हमें सचमुच ताज्जुब हुआ।
दारूल उलूम देवबंद के मोहतमिम हज़रत मौलाना मरग़ूबुर्-रहमान साहब रहमतुल्लाह अलैह भी बिजनौर के ही रहने वाले थे। एक बार उनके घर भी हम मौलाना के साथ ही गए थे। हज़रत मौलाना मरग़ूबुर्-रहमान साहब शमऊन साहब से ख़ास ताल्लुक़ रखते थे। जब वह दारूल उलूम देवबंद में पढ़ रहे थे तो वह हज़रत मौलाना के साथ उनके दस्तरख्वान पर ही खाना तनावुल फ़रमाते थे।
बहरहाल अन्ना के साथ हमारे दोस्त खड़े हैं। यह आज की ख़बर है और हम तो खड़े ही हैं, चाहे उनके साथ फ़ोटो में हम मौजूद न हों।
देश अन्ना के साथ खड़े हैं लेकिन लोग यहां भी राजनीतिक हित साधने से बाज़ नहीं आ रहे हैं और एक जन-आंदोलन को भी विवादित बना देना चाहते हैं।
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क्या उसूलों पर चलने वालों का कोई घर नहीं होता है ?...

दोस्तों, क्या आप इस विचार से सहमत है कि-अपने उसूलों(सिद्धांतों) पर चलने वालों का कोई घर* नहीं होता है, उनके तो मंदिर बनाये जाते हैं. क्या देश व समाज और परिवार के प्रति ईमानदारी का उसूल एक बेमानी-सी एक वस्तु है ?
*आवश्कता से अधिक धन-दौलत का अपार, भोगविलास की वस्तुओं का जमावड़ा, वैसे आवश्कता हमारे खुद द्वारा बड़ी बनाई जाती हैं. जिसके कारण धोखा, लालच और मोह जैसी प्रवृतियाँ जन्म लेती हैं. इस कारण से हम अनैतिक कार्यों में लीन रहते हैं. मेरे विचार में अगर जिसके पास "संतोष' धन है, उसके लिए आवश्कता से अधिक भोग-विलास की यह भौतिकी वस्तुएं बेमानी है. उसके लिए सारा देश ही उसका अपना घर है.
दोस्तों, अपनी पत्रकारिता और लेखन के प्रति कुछ शब्दों में अपनी बात कहकर रोकता हूँ. मैं पहले प्रिंट मीडिया में भी कहता आया हूँ और इन्टरनेट जगत पर कह रहा हूँ कि-मुझे मरना मंजूर है,बिकना मंजूर नहीं.जो मुझे खरीद सकें, वो चांदी के कागज अब तक बनें नहीं.
दोस्तों-गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे. 

पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें: क्या उसूलों पर चलने वालों का कोई घर नहीं होता है ?
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अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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