क्वार्टर फाइनल में पहुंचा भारत

भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप का क्वार्टर फाइनल खेलेगी यह पहले से ही निश्चित था और नीदरलैंड से जीत के साथ ही इस बात की पुष्टि हो गई है . वैसे यह विश्व कप थ्री मैच कप है .जो टीम तीन मैच जीतेगी वह विश्व चैम्पियन होगी . पहला दौर विशेष अर्थ नहीं रखता है . विश्व कप के शुरू होने से पहले जिन आठ टीमों के दूसरे दौर में पहुंचने की संभावना थी आधा विश्व कप बीत जाने के बाद वही टीमें दूसरे दौर में पहुंचती लग रही हैं . कुछ रोमांचक मैच हुए हैं . आयरलैंड ने उलटफेर भी किया लेकिन अंतिम परिणाम में विशेष परिवर्तन नहीं आया है . पहले दौर की सारी माथापच्ची ग्रुप में स्थान निर्धारण के लिए है . स्थान निर्धारण भी महत्वपूर्ण होता अगर कोई कमजोर टीम दूसरे दौर में पहुंचती . क्रिकेट की पहली आठ टीमें मामूली अंतर की टीमें हैं जो अपना दिन होने पर किसी भी टीम को नाकों चने चबा सकती हैं . अब भारत को ही लो उसके लिए आस्ट्रेलिया , पाकिस्तान , श्रीलंका और न्यूजीलैंड में से कौन सी टीम ऐसी है जिससे वह आसानी से पार पा सकती है अर्थात ग्रुप में स्थान कोई भी हो क्वार्टर फाइनल आर-पार का ही होगा और इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं होगी . इस बात को ध्यान में रखते ही टीम को आगामी मैच खेलने चाहिए . 
     नीदरलैंड के खिलाफ भी टीम प्रयोगों के मूड में थी . मैं इसे बहुत अच्छा मानता हूँ . द.अफ्रीका और वेस्ट इंडीज से जीतना भी है , साथ-ही-साथ कुछ नया भी करना है ताकि क्वार्टर फाइनल से पहले सारे विकल्प आजमाए जा चुके हों . रैना को अंतिम एकादश में खिलाया जाना बाकी है . खुदा न करे नॉक आउट दौर में कोई बल्लेबाज़  अनफिट हो जाए . ऐसी स्थिति से बचने के लिए रैना का मैच खेले होना जरूरी है . इसी प्रकार अश्विन का भी प्रयोग होना चाहिए .सहवाग से भी अभी तक गेंदबाज़ी नहीं करवाई गई , उसे भी कुछ ओवर दिए जाने चाहिए . हरभजन को बाहर बैठाया जा सकता है  क्योंकि हरभजन पूरे रंग में नहीं और कई बार ब्रेक कारगर सिद्ध होता है . भले ही हरभजन को विकेट नहीं मिल रहे लेकिन वह किफायती गेंदबाज़ी कर रहा है . एकदिवसीय मैच में विकेट लेना जितना महत्वपूर्ण है , किफायती गेंदबाज़ी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है . ऐसे में हरभजन को निराश नहीं होना चाहिए अपितु क्वार्टर फाइनल हेतु मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए .
            चावला को जितने मौके मिलने चाहिए थे वे मिल चुके हैं . अब उसे बाहर बैठना ही होगा . द.अफ्रीका के खिलाफ नेहरा , मुनाफ , श्रीसंथ और अश्विन के साथ उतरा जा सकता है . जहीर एकमात्र विश्वसनीय गेंदबाज़ हैं अत: उनका प्रयोग सावधानी से करना होगा . 
         टीम को जहाँ खुद को जीत के ट्रैक पर बनाए रखना है वहीं आर-पार के मैच के लिए अपनी ताकत भी बचाकर रखनी है . उचित एकादश की तलाश भी जारी है . सात बल्लेबाज़ निश्चित हो चुके हैं , अंतिम चार गेंदबाजों का चयन होना शेष है . शायद टीम महत्वपूर्ण मुकाबलों में तीन तेज़ गेंदबाजों से ही उतरे क्योंकि सहवाग , युवराज और पठान 15 ओवर कर सकते हैं, ऐसे में स्पिनर के 25 ओवर बन गए , फिर मुख्य स्पिनर कोई करिश्मा भी नहीं कर पा रहे  अत: एक स्पिनर ही काफी है . कुल मिलाकर कांटे की टक्कर नजदीक है . टीम को घरेलू दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए एडी - चोटी का जोर लगाना ही होगा .
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ख्याल

आजकल


पंछियों ने चहचहाना क्यों छोड़ दी है आजकल,
शायद दरख़तो पर धमाकों की है गूंज आजकल।

होली के दिनों में भी बन्द है रंगों की फैक्ट्रियां,
रंगों की जगह खून की बढ़ी है मांग आजकल।

कभी बनारस, कभी बंगलौर तो कभी दिल्ली,
हर जगह धमाकों की बरसात है आजकल।

क्यों नहीं पसिजता है दिल उन आतंकियों का,
जिनके घरों में भी है किल्कारीयां आजकल।

खून पीना बन गया है फितरत सियासत का,
लोगों के गम भी पीने की जरूरत है इसे आजकल।

गैर मुल्की सियासत का हम हो जायें शिकार,
इसलिए हम सभी को बच के रहने की जरूरत है
आजकल।।

आज सुबह मैं सूरज को देख रहा थाअजीब कशिश थी उसके निकलने मेंमैंने उसे अपने कैमरे में कैद किया
फिर दिल में ख्याल आया की क्यूँ इंसान दुसरे इंसानों की ज़िन्दगी लेने पर अमादा हैआखिर कैसा उन्माद है यह
कैर हमे संभल के रहना है...

दुआओं में ज़रूर याद रखें
आपका....
एम अफसर खान सागर
09889807838
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आज मेरी जिंदगी का बीसवां काला दिवस हे

दोस्तों आज मेरी जिंदगी का अबिस्वान काला दिवस हे आज के  दिन ही में एक खतरनाक महिला के साथ बेड़ियों में जकड़ा गया था हंसी हंसी में में खुद उम्र केद की सजा मंज़ूर कर रहा हूँ यह में सपने में भी नहीं सोच पा रहा था मीठा लड्डू खाने के चक्कर में में धोखे में आ गया . 
१० मार्च १९९१ का वोह काला दिन मुझे मोत के मुंह में धकेलने , मेरी जिनगी उम्र भर के लियें केद करने के लियें लोग एकत्रित हुए नाचे गाये मुझे घोड़ी पर बिठाया गया और फिर हमें राजस्थान के ही नवाबों की नगरी टोंक ले जाया गया वहां एक रिजवाना नाम की खतरनाक एब्दार लडकी को मेरा इन्तिज़ार था जी हाँ इस महिला का नाम रिजवाना स्कुल का हे लेकिन अकिकी नाम रईसुन्निसा  रखा गया था निकाह इसीस नामा से हुआ मेरा भी निकाह अकिकी नाम अजहर से हुआ अब मेरा नाम तो अख्तर खान अकेला और जो मेरे साथ जेलर बना कर उम्र केद की सजा भुगताने के लियें भेजी गयी उसका नाम रिजवाना हमारे पास निकाहनामा अजहर और रईसुन्निसा का अब बताओ हम क्या करें खेर रस्मों के नाम पर मुझे उल्लू बनाया गया सालियों और सलेजों ने बेवकूफ बनाकर बीवी मुट्ठी खोल में तेरा गुलाम कहलवाया और बस तबसे आज तक में भुगत रहा हूँ . 
मेरी यह जो जेलर हे कहने को तो टोंक नवाब साहब की भतीजी हे माशा अल्लाह तीन भाई और चार  बहनें और हें सभी खतरनाक हे मेरी इस बर्बादी के बाद मेरे दो छोटे साले कमर और फर्रुख थे सो मेने भी उन्हें बर्बाद करने की ठानी जयपुर के हमारे साडू इकबाल खान साहब और सलेज रुखसाना ,टोंक के साडू बड़े दादा और रिसर्च ऑफिसर सलेज नादिरा ने मिल कर षड्यंत्र किया और साले कमर को एक खतरनाक सलज वफरा  से फंसा दिया बेचारे एक हंसते खेलते साले की बोलती बंद हे सलेज जादूगरनी हे हजारा पद्धति हें सो उन्होंने हमारे साले पर पढ़ कर फूंका अब वोह हुक्म के गुलाम हे मुझे लगा मेरे आंसू पोंछने वालों में अब एक और शामिल हो गये हें फिर दुसरा छोटा साला फर्रुख थे बस उनके खिलाफ भी षड्यंत्र रचा और उन्हें मिस यूनिवर्स तबस्सुम से उलझा दिया अब इस बेचारे की तो क्या कहूँ बस आप खुद ही समझ जाओ मेरे पास कहने के लियें अलफ़ाज़ नहीं हे बढ़े साले हें जिन्हें भय्या कहते हें बाहर पुरे टोंक में शेर समझे जाते हें लेकिन घर में हमारी सबसे बढ़ी सलेज अफशां के सामने उनकी घिग्घी बन जाती हे कुल मिला कर हम सभी साडू और साले बहनोई एक ही दर्द के मारे हें हमारे सास ससुर बाल ठाकरे और मुल्लानी जी हमारे इस हाल पर हमारा मजाक उडहाते रहते हें हम खामोश गर्दन झुकाए बेठे रहते हें . 

इस खतरनाक जेलर के बारे में में आपको बताऊं यह कोटा में उर्दू की लेक्चरार हें और बच्चों को पढाती हे इसलियें वाही लहजा वाही डांटने का अंदाज़ घर में चलता हे आप अंदाजा लगायें में किन हालातों में सांस ले रहा होउंगा मेरी बोलती बंद हे इसी उठा पटक में मेरे इस जेलर ने मूल के साथ तीन ब्याज दिए पहला लडका शाहरुख खान जो ट्वेल्थ का एक्जाम दे रहा हे आई आई टी की तय्यारी कर रहा हे अगर आपकी दुआ लग गयी तो उसका सेलेक्शन हो जाएगा , एक बच्ची जवेरिया नाइंथ में हे जबकि एक प्यारी  बिटिया सदफ अख्तर जो अभी फर्स्ट में पढ़ रही हे . 
जेलर जिसके हंटर से मेरी बोलती बंद हे उसकी जुबां कभी अगर चलती हे तो केंची से भी खतरनाक होती हे मोहल्ले और परिवारों में उसने जादू करके खुद को अच्छा साबित कर रखा हे मेरे पापा हाजी असगर अली खान को भी उसने वक्त पर खाना चाय नाश्ता दे कर पता रखा हे हमारी मम्मी रशीदा खानम हे बस इस जेलर की केंची के आगे उनकी तो बोलती बंद हे एक भाई परवेज़ खान जो सुधा अस्पताल में मेनेजर हे उसकी बीवी रूपी भी टोंक की हे इसलियें इनकी यूनियन जिंदाबाद हो रही हे और दोस्तों में अकेला पढ़ जाने से अख्तर खान अकेला हो गया हूँ और यह जेलर मुझ पर हावी हे अब मेरे लियें तो खुदा खेर करे हे ना मेरी दर्द भरी कहानी जो आज काला दिवस के दिन नई हो गयी हे . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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neta ji ke usool


भाइयो और बहनों एक बात साफ़ है
हम नेताओं के सात खून माफ़ हैं,
हम जो भी कह दे वही इन्साफ है ,
इसीलिए  हम घोटालों की जांच के खिलाफ हैं .
                                            शिखा कौशिक
                   http://netajikyakahtehain.blogspot.com/
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जाति प्रमाणपत्र, जाति प्रमाण्पत्र, जाति प्रमाणपत्र

जाति प्रमाणपत्र, जाति प्रमाण्पत्र, जाति प्रमाणपत्र  आखिर यह क्या मुसीबत बन गया हे सरकार और अधिकारीयों के लियें और इस मुसीबत से जनता को छुटकारा नहीं मिल पा रहा हे आखिर केसे मिले इस प्रमाणपत्र से जनता को छुटकारा में सोच ही रहा था के अचानक कोटा  के शहर काजी जनाब अनवार साहब का फोन आया उन्होंने  कहा के नगर विकास न्यास के अधिकारी वक्फ सम्पत्ति अधर शिला पर कुआ खोद कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना रहे हें इसलियें कलेक्टर से मिलना हे . 
कोटा में कलेक्टर जी एल गुप्ता वेसे तो आर ऐ एस हें लेकिन सरकार ने उन्हें सम्भागीय मुख्यालय जेसे जिले में कलेक्टर बना कर इज्जत बख्शी हे खेर शहर काजी साहब आये में और कुछ शहर के चुनिन्दा लोग कलेक्टर जी एल गुप्ता के पास फरियाद लेकर पहुंचे कलेक्टर ने अभिवादन किया और शिकायत सुन कर तुरंत नगर विकास न्यास सचिव को फोन कर इस कम को रोक देने के लियें कहा और निर्देश दिए के जब तक वार्ता से एक दुसरा पक्ष आपस में संतुष्ट न होजाए तब तक काम रोके रखना . कोटा कलेक्टर के यहाँ तबादले के बाद उनसे तकरार की यह पहली मुलाक़ात  थी इसलियें उन्होंने सीकर कलेक्ट्रेट के दोरान अल्पसंख्यकों  के लियें विशेष योजनाओं का काम गिनाया उन्होंने जयपुर में भी उनकी कार्यशेली के तोर तरीके बताये इसी दोरान कोटा में अल्पसंख्यकों की शिकायत और समस्याओं की बात चली . 
कोटा कलेक्टर को मेने बताया के कोटा में मुसलमान और अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र जारी करने में भी अधिकारी परेशान कर रहे हें , अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की ऋण योजनाओं में अधिकारी आवेदकों को परेशान कर रहे हें कलेक्टर ने अल्पसंख्यक प्रमाण पत्रों के मामले की शिकायत गोर से सुनी और फिर कहा के यह कहने की बात नहीं हे लेकिन में आप सभी को विश्वास दिलाता हूँ के अल्पसंख्यकों को यहाँ किसी भी तरह की परेशानी नहीं आएगी अगर आए तो में उसका निदान करूंगा खेर बहतरीन कसीदों के बाद हम वापस बहर आये कलेक्ट्रेट से नीचेव उतरे के एक जनाब जो अनजान से थे उसने मुझे रोका साथ में काजी साहब को सलाम किया और अपनी परेशानी बताने लगा . 
इन जनाब ने मुझे बताया के मेरा नाम जाहिद हे और में दीगोद तहसील जिला कोटा का रहने वाला हूँ मेरा सेलेक्शन मिलेट्री में हो गया हे और मिलेट्री में मुझ से सामान्य जाती का प्रमाणपत्र माँगा हे जो तहसीलदार साहब ने दें से इनकार कर दिया हे इसमामले में हमने कोटा कलेक्टर के नाम तहसीलदार साहब का पत्र भी लिया हे सामान्य जाति का होने का प्रमाणपत्र का सुन कर मुझे अजीब सा लगा आज तक आरक्षण के लियें जाती प्रमाणपत्रों की कहानी तो सुनी थी लेकिन इस तरह का प्रमाण पात्र  पहली बार माँगा गया था मेने सोचा के शायद आने वाले कल में यह बाबू राज लोगों से उनके नाम का प्रमाण्पत्र भी मांगने लगेगा खेर मिलेट्री में जोइनिंग की आखरी तारीख नजदीक थी इसलियें में इन सज्जन के साथ वापस कलेक्टर साहब के पास पहुंचा कलेक्टर साहब ने आवेदन देखा और कहा के वकील साहब यह तो कोई बात नहीं हुई सामान्य जाती का होने का प्रमाण पत्र बनाने का कोई प्रावधान नहीं हे तो केसे बना देंगे मेने पहले बनाया गया एक राजपूत भाई का प्रमाण्पत्र उन्हें बताया के साहब यह भी तो कोटा से ही जारी किया हुआ हे बीएस इस प्रमाणपत्र को देख कर कलेक्टर साहब ने आवेदन पत्र लिया उसकी पुष्ट पर आदेश किया और कहा के यह इस तरह का पहला और आखरी प्रमाण्पत्र हे इस को नज़ीर बताकर कोई दुसरा प्रमाण पत्र नहीं बनेगा में सोचने लगा के एक पल पहले तो यह कलेक्टर अल्पसंख्यकों के कितने बढ़े हितेषी बनने की कहानियाँ सुना रहे थे और दुसरे पल काम ले जाते ही यह जनाब बदल गये खेर यह तो होना ही था , लेकिन एक बात पर तो विचार करना ही पढ़ेगा के हर मामले में प्रमाणपत्र बनाने वाली इस सरकार ने कलेक्ट्रेट में प्रमाण्पत्र बनवाने वालों की भीढ़ जमा कर दी हे पैदा होने का प्रमाण पत्र, मरने का प्रमाण्पत्र ,जीने का प्रमाणपत्र , आय का प्रमाणपत्र ,जाति उप जाती आरक्षित जाति आदिवासी का प्रमाणपत्र , और अब खुद के जीवित होने का प्रमाण पत्र खुद के सामान्य जाति का सदस्य होने का प्रमाण पत्र यह सब व्यवस्था जनता को परेशान करने वाली ही हे और इससे अधिकारी भी अपना मूल काम छोड़ कर केवल प्रमाणपत्रों में लग जाते हें . 
मिलेट्री में सामान्य जाति के प्रमाणपत्र के जवाब में किसी ने कहा के शायद मिलेट्री में दूसरी जाति के लोगों को भर्ती नहीं करते इसीलियें सामान्य जाती का प्रमाणपत्र होना जरूरी हे इस पर मेरे साथ बेठे एक वकील साहब ने तमतमा कर खा के वाह और दुसरे मामलों में तो आरक्षण और देश के लियें मर मिटने के मामले में मिलेट्री में आरक्षण नहीं इन वकील साहब का कहना था के  भाई यह आरक्षण तो मिलेट्री में हों ही चाहिए ताकि सामान्य वर्ग के लोगों के साथ साथ आरक्षण का फायदा आमोज मस्ती लेने वाले लोग भी तो देश के लियें अपने जान देने वाले बने बात तो सामान्य थी लेकिन एक बहुत बढ़ा सवाल यही बात छोड़ गयी जिसका कोई जवाब मेरे पास नहीं था . अख्तर   खान अकेला कोटा राजस्थान
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लो मैं आया...


आपके दोस्त एम अफसर खान सागर का नया अवतार....




आदाब

सभी को एम अफसर खान सागर का सलाम
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भाई ये ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत खोकर ख़ार खाए बैठे हैं Loosers

आपको यह जानकार खुशी होगी कि ब्लॉगजगत के मार्गदर्शन का ठेका जिन लोगों के पास है वे शराबी हैं चाहे घोर हों या अघोर.
शराब पीने से सच बोलने का साहस ऐसे आदमियों में पैदा होता है , जो बुज़दिल होते हैं और ये लोग अनादि काल से ऐसे 'सत्य की खोज' में लगे हैं जो आज तक तो इन्हें मिला नहीं 'अनवरत' सफ़र के बाद भी , जबकि यह सफ़र भी उड़नखटोले पर किया गया . शराबखोरी को इनके लिए हरगिज़ ऐब न समझा जाये यह तो इनकी साधना का अंग है सदा से .
ऐसे सत्यपिपासुओं के विरूद्ध मैं आपका साथ बिलकुल न दूंगा . मैंने पहले भी आपका साथ देने की गलती की थी तो जनाब मिश्रा जी ने शस्त्र के साथ शास्त्र भी धारण कर लिए थे . हमने तो उसी वक़्त उनसे माफी मांग कर अपना फंद कटा लिया था . अब वही गलती आप कर रहे हैं . भाई ये ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत खोकर ख़ार खाए बैठे हैं . इन्हें नाहक़ मत छेड़ो , कहीं की रंजिश कहीं निकाल बैठेंगे और फिर आपका महिला सशक्तिकरण आन्दोलन अधूरा ही रह जायेगा और आपकी पत्नी डायरेक्ट कुंवारी से विधवा हो जायेगी . देखो , मैंने आपको इतना डराया है , अब आप या तो डर जाओ या फिर डरने की एक्टिंग ही कर लो . हमेशा सन्नी देवल बनना ठीक नहीं , अमरीश पुरी ज़रूर मरा है लेकिन उसकी आत्मा आज भी शराबी ब्लॉगर्स की खोपड़ियों पर डंका बजा रही है .
लो यह पढो :
औरत की हक़ीक़त

मनु और मुहम्मद की दण्ड व्यवस्था वास्तव में ईश्वर की ओर से है

ISLAM: The Pioneer of Education & Modern Sciences
Lucknow Bloggers' Association लख़नऊ ब्‍लॉगर्स असोसिएशन: 'शराबी ब्लॉगर्स' को धोबी पिछाड़ मारने का सुअवसर
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आज का प्रेरक वाक्य....डा श्याम गुप्त.....



             भारतवर्ष का धर्म उसके पुत्रों से नहीं , उसकी संस्कारवान कन्याओं से ठहरा हुआ है | यदि भारत की रमणियाँ अपना धर्म छोड़ देतीं तो अब तक भारत नष्ट होगया होता |
                                         ---महर्षि दयानंद सरस्वती .....
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महिला दिवस महिला दिवस चारों तरफ महिला दिवस

महिला दिवस महिला दिवस चारों तरफ महिला दिवस हे न अजीब दास्ताँ जिस देश में म्हिअओं को पूजना चाहिए वहां महिलाओं को न्याय के लियें भटकना पढ़ता हे उनको अपने परिजनों की सुरक्षा का मोहताज रहा पढ़ता हे और जो इस मर्यादा का उल्न्न्घन करती हे वोह महिलाएं समाज में तिरस्कृत हो जाती हें .
एक दिन के लियें मुझे गुजरात सुरत जाना पढ़ा में ब्लोगिंग की दुनिया से मिस्टर इंडिया हो गया और कोटा जब पहुंचा तो य्हना महिला दिवस मनाया जा रहा था अखबार महिलाओं के फोटू छाप रहे थे सरकार बीएस में मुफ्त यात्रा करा रही थी और मेरे ब्लोगर भाई महिलाओं के प्रति अपने सच्चे अच्छे कडवे मीठे अनुभव बाटने में लगे थे सब एक दुसरे को टिप्पणियाँ  दे रहे थे बढियाँ दे रहे थे चर्चा में महिला दिवस की ख़ास भूमिका थी , मेने मेरा ब्लॉग खोला तो बस तकनीकी परेशानी थी मेने डोक्टर अनवर जमाल साहब से गुजारिश की तो जनाब वोह भी महिला वर्ष को आदर्श दिवस मना रहे थे उनका जवाब था में तो पत्नी के घुटनों में दर्द हे उनकी पिंडलिया दाब रहा हूँ उनकी सेवा कर रहा हूँ , जमाल  भाई का सुझाव था के भाई यह काम मासूम भाई खूबी से अंजाम दे सकते हें अभी इन जनाब ने एक ब्लोगर बहन के ब्लॉग की मरम्मत की हे  मेने मासूम भाई को महिला दिवस पर महिलाओं के सहयोग के लियें मुबारकबाद दी और फिरे मेरे लियें मदद की दरख्वास्त की दो मिनट बाद उन्होंने जरूरी जानकारिया चाहीं महिला दिवस था इसलियें थोड़ी देर बाद मुझे भी अपनी पत्नी की सेवा करा थी सो में भी जमाल भाई की तरह नकल करने लगा और फिर नींद आ गयी सुबह उठा ब्लॉग खोला तो ब्लॉग एक आदर्श ब्लॉग बन चुका था मेरी पोस्ट मेरे डेश बोर्ड पर नहीं आ रही थी फेस बुक पर नहीं प्रकाशित हो रही थे सो मेने इस सूधार के लियें भी मासूम भाई से गुज़ारिश की थी मासूम भाई की इस महरबानी के बाद मेरा ब्लॉग तो सुधर गया लेकिन टाइपिंग का टाइटल शीर्षक ट्रांसलेट नहीं हो रहा हे में अंग्रेजी में टाइप करता हूँ जो हिंदी में ट्रांसलेट होता हे इसलियें में फ़िक्र मंद हो गया में भी भारतीय हो गया नुगरा हो गया और सोचा के अगर मासूम भाई को शुक्रिया कहा तो परम्परा बदनाम हो जायेगी यहाँ की परम्परा हो गयी हे के काम करवाओ और भूल जाओ सो मेने भी नुगरा बनने की कोशिश की हे मासूम भाई को जानबूझ कर धन्यवाद नहीं दिया और धन्यवाद क्यूँ दूँ उन्होंने अपने भाई का काम क्या हे कोई अहसान थोड़े ही किया हे बस यही में सोचता रहा अब मासूम भाई सी ब्लॉग को डेश बोर्ड पर लेन की कोशिशों में लगे हें इंशा अल्लाह इसमें भी कामयाब होंगे में मक्खन नहीं लगा रहा लेकिन मसूब भाई के सहयोग पत्नी प्रेमी जमाल भाई के सुझाव से मेरा ब्लॉग हो सकता हे कुछ दिनों में लोगों द्वारा पढ़ा जाने लगे समझा जाने लगे और इस ब्लॉग को भी लोग ब्लॉग की श्रेणी में मानने लगे लेकिन यह सब मासूम भाई के ही हाथ में हे हम तो कर चले अपना ब्लॉग मासूम भाई के हवाले साथियों .................. . 
खेर अब देश में महिलाओं के सम्मान  और महिला दिवस की बात करते हें यहाँ राष्ट्रपति, लोकसभा की सभापति , राज्यपाल , देश की मुखिया यु पी ऐ पार्टी की अध्यक्ष महिला हे फिर भी यह वर्ष जिस हिसाब से मनाया गया श्रम की बात रही हे यहाँ मेरे इस देश में महिला जननी हे पुरुष हो चाहे महिला मान की गोद में पलता हे बढ़ी बहन और छोटी बहनों से तकरार के साथ बढा होता हे कभी रूठना  कभी मनाना होता हे और फिर उसे बीवी के पल्लू में बाँध दिया जाता हे तो फिर जब महिला से शुरू होकर पुरुष की कहानी महिला तक ही खत्म हो जाती हे तो फिर काहे का महिला वर्ष यहाँ सीता जी पर ज़ुल्म करने वाले रावण की हत्या हुई लेकिन महिला केकयी और मंथरा को कोई सजा नहीं मिली, द्रोपदी का चीर हरन करने वालों को खत्म करने के लियें महाभारत रची गयी , आदम हव्वा का कहना मानने पर जन्नत से निकाले गये , इन्सान का पहला कत्ल हाबुल और काबुल का महिला के लियें हुआ शिवजी को काबू में करने के लियें पार्वती का सहारा लिया गया सत्यवान के लियें महिला सावित्री ने भगवान  को धोखा दिया होली का करिश्मा सब जानते हें जानकी ने कृष्ण को जन्म दिया मरियम हो चाहे बीवी खदीजा सभी की ताकत विस्श्व जानता हे सभी धर्मग्रंथ और इतिहास महिलाओं की ताकत के किस्से से भरे पढ़े हें घर हो चाहे देश हो सभी जगह महिला का ही तो राज हे बस महिला को थोडा बदलने की जरूरत हे वोह अगर मर्यादा में रहेगी तो फिर देश समाज और विश्व मर्यादित हो जाएगा महिला अगर विज्ञापनों में फिल्मों में कुछ रुपयों के लियें नग्न प्रदर्शन बंद कर दे तो फिर महिलाओं का सम्मान बढ़ेगा महिला अगर चंद रुपयों के खातिर जिस्मफरोशी  बंद कर दे तो पुरुष अपनी पत्नियों से अलग नहीं होंगे , महिलाएं अगर पर पुरुषों को लिफ्ट नहीं दें और शादी शुदा मर्दों से विवाह नहीं रचाएं तो महिला बदनाम नहीं होगी महिला सास महिला नन्द अगर बहू को ठीक तरह से रखेगी तो घर में झगड़े नहीं होंगे माँ अपने बच्चे को दूध पिलाएगी पोडर का दूध नहीं पिलाएगी तो बच्चों में ताकत होगी दिमाग होगा , पत्नी अगर अपने पति को बहतरीन व्यंजन बना कर खिलाएगी तो पति और सभी घरवाले उसके गुलाम  रहेंगे लेकिन जरा सोचों क्या ऐसा सम्भव हे इस लियें अब इस महिला दिवस का कोई लाभ नहीं इसे महिला दिवस से महिला शुद्धिकरण वर्ष में बदल कर महिलाओं में सूधार के लियें भी अभियान चलाना होगा में मेरी बहनों और आंटी ब्लोगर्स से निवेदन करूंगा प्लीज़ इसे अन्यथा ना लें इस पर चिन्तन करने और सोचें के क्या महिला के बगेर कोई भी समाज सुरक्षित हे महिला के बगेर किसी समाज का कोई अस्तित्व नहीं अबू हनीफा जो मुस्लिम खलीफा थे वोह एक महिला के पिता थे और अबू हनीफा को हनीफा के पिता के रूप में पहचान मिली थे सभी धर्म ग्रन्थों में महिलाओं के लिए मार्ग  निर्देशन दिए हें महिलाएं अगर उनका दो प्रतिशत भी पालन कर लेट तो शायद देश और विश्व की तस्वीर ही अलग होगी . .    अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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jay ho ![part-3]

ब्लॉग जगत में महिला चिट्ठाकारों की संख्या दिनोदिन बढ़ रही है .आशा है कि सभी महिला चिट्ठाकार अपने सार्थक लेखन से चिट्ठाजगत को ऐसे ही समृद्ध करती रहेंगी -

''आओ करें वंदना उस देवी की
जिसकी नूतन दीपशिखा ने जग-चमकाया .

आज देख 'asha ' का 'savita'
'ada' -'sada' हैं अति 'mudita ',
उधर 'purnima' बिखराती 'jyotsna'
'deepti'पूर्ण हो रही है 'meena',
'kshama' -'anupma' करती हैं चिट्ठों की 'archna'
'meenakshi'-'' के चिट्ठें 'divya'-'nirmala',
'शिखा'-'शालिनी' की है कामना दूर सभी भय हो ,
बढें सफलता -पथ  पर  हम 
   '''नारी की जय हो !'' 
[कविता में वर्णित महिला चिट्ठाकारों के ब्लॉग पर जाकर उन्हें उत्साह वर्धन करें .हम प्रोफाइल पर जाकर चिट्ठाकार द्वारा बनाये   गए ब्लॉग में से किसी भी एक ब्लॉग का लिंक यहाँ दे रहें हैं .यदि कोई त्रुटि रह जाये तो हम क्षमाप्रार्थी   है .इसे अन्यथा न लें .हमारा उदेश्य महिला चिट्ठाकारों के नाम से चिट्ठाजगत को परिचित कराना मात्र है .जो भी त्रुटि हो टिप्पणी के माध्यम से बताएं .]
 लेखिका-shikha kaushik
सहायिका- shalini kaushik .

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अबला को बला ना समझो,बल उसका कभी ना भूलो




अबला को
बला ना समझो
बल उसका कभी ना भूलो
यादें अपनी ताज़ा कर लो
इतिहास उठा कर देख लो
निर्बल उसे कभी ना मानो
अपने को बल को,अपना ना
समझो
माँ के दूध का नतीजा
समझो
अब अपनी आँखें खोलो
माँ के दूध
की लाज रख लो
नारी की रक्षा करो
सम्मान से उसे देखो
निरंतर ख्याल उसका रखो
उचित स्थान उसे दे दो
गलती अब तो सुधार लो
 
08—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर

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एक मदरसा जहां जन्नत का सा नजारा हे

जी हाँ दोस्तों एक मदरसा जिसका नाम आते ही लोग नाक और भोंव सिकोड़ने लगते हें वोह सोचते हें टूटी फूटी बिल्डिंग पुराने खयालात के लोग , टूटी फूटी कुर्सियां और फटी किताबें जहां हे वही मदरसा हे , मदरसे के लियें सोचा जाता हे के यहाँ शिक्षा के नाम पर केवल लूट केवल राष्ट्र द्रोहिता और कट्टर पंथी सिखाई जाती हे लेकिन बोहरा समाज के धर्म गुरु आदरणीय सय्यदना बुरहानुद्दीन साहब के निर्देशों पर गुजरात के सुरत में एक ऐसा नायाब मदरसा हे जो शायद भारत में तो क्या एशिया में बलके पुरे विश्व में अपनी तरह का एक अनूठा मदरसा हे इस मदरसे का नाम महाद अल जाहरा रखा गया हे ।
कोटा के बोहरा समाज से जुड़े कई लोग और यहाँ के मुस्लिमों में भाईचारे का जो रिश्ता हे उसी रिश्ते के तहत इस जन्नत के नजारे को दिखाने के लियें बोहरा समाज से जुड़े आदरणीय अकबर भाई ,अब्बास भाई, मंसूर भाई , सफदर भाई ,अब्बास अली सहित समाज से जुड़े लोगों ने मुस्लिम भाइयों से पेशकश की पहले तो सभी लोगों ने सोचा कोई क्यूँ वक्त अपना बर्बाद करे न जाने कहां जायेंगे फिर सोचा के कुरान हिफ्ज़ करने का आधुनिक मदरसा हे हो सकता हे कुछ न्य मिल जाए , सो इसी मिजाज़ से कोटा से शहर काजी अनवार अहमद ,में अख्तर खान अकेला,जाकिर हुसैन रिज़वी ,शेख वकील साहब, नायब काजी जुबेर अहमद साहब ,लियाकत अली साहब , खलील इंजीनियर साहब को न्योता मिला बोहरा समाज के अनुशासन के तहत सभी के नाम वगेरा पहले हेड ऑफिस मुबई भेजे गये वहां जांच हुई और फिर सभी को जाने की विधिवत स्वीक्रति मिली ।
६ मार्च की शाम सभी लोगों को बोहरा समाज के अकबर भाई अब्बास भाई ,सफदर भाई ,मंसूर भाई और अब्बास अली साहब ने अलग अलग स्थानों से साथ लिया और फिर शुरू हुई महमान नवाजी की पराकाष्ठा ,खेर दुसरे दिन ७ मार्च को सुबह सभी लोग सुरत पहुंचे नहा धो कर सभी लोग पहले सूरत स्थित बोहरा समाज के मुख्य कार्यालय पहुंचे वहां इनके महा प्रबन्धक महोदय ने सभी का स्वागत किया ख़ुशी ज़ाहिर की और फिर गाइड की हेसियत से वहां के जानकारों को साथ रवाना कर दिया सबसे पहले हमने बोहरा समाज की सबसे बढ़ी और नायाब खुबसुरत मस्जिद जहां आदरणीय सयदना साहब की सम्भावित सोवीं सालगिरह की तय्यरियाँ चल रही थी वोह मस्जिद देखी इसी अहाते में मजारात थे मस्जिद के बारे में में अलग से विवरण लिखूंगा क्योंकि यह खुद एक मिसाल मस्जिद हे जिसमें विश्व के इस्लामिक देशों की संस्क्रती और पहचान को जिंदा कर दिया गया हे बस इसीलियें इसके लियिएँ अलग से पोस्ट लिखने का मन हे ।
हमें यहाँ से मदरसे में ले जाया गया फुल साउंड फ्रूफ, वातानुकूलित इंटीरियर डेकोरेशन में सर्व श्रेष्ठ इस मदरसे को देख कर हम सभी लोगों की आँखें चकाचोंध हो गयी सात सितारा होटल की सभी सुख सुविधाओं वाले अनुशासित इस मदरसे को देख कर हम चोंक गये ओरएक दुसरे की बगलें झाँकने लगे हमें एक कमरे में सुरक्षित तरीके से जूते उतरवाए गये फिर हम भवन में अंदर गये नीचे से उपर तक कालीन से सजा यह मदरसा जहां एक इको साउंड वाला एके बढा होल जिसमें खुबसुरत अंदाज़ में कुरान की आयतें लिखी गयी थी साथ ही वहां एक आकर्षक मंजर देने के लियें हरे भरे पेड़ गमले और वहां से नजारा देखने के लियें रोशन दान उपर महिलाओं के बेठने की पर्देदार खुबसूरत व्यवस्था और सय्यदना साहब की बैठक, छत पर कुरान की सूरतों की संख्या के अनुरूप ११४ किनारे बनाये गये थे जो एक कुरानी माहोल का एहसास करा रहे थे कुछ बच्चे कुरान हिफ्ज़ कर रहे थे इस इको साउंड में मदरसे के बहतरीन हाफ़िज़ ने खुबसुरत आयत में कुरान की तिलावत सुनाई फिर कोटा के नायब काजी जनाब जुबेर साहब से भी इस माहोले में कुरान की तिलावत सुनी गयी ,
आगे इस मदरसे की खुबसुरत बिल्डिंग में सजे संवरे छोटे छोटे कमरे जहां कुछ गिनती के छात्र ही बेठ कर कुरान सीख सकते हें ऐसा इसलियें क्या गया के कम बच्चों पर टीचर सही ध्यान दे सकेगा , कहते हें के मंजर अच्छा हो तो याद जल्दी होता हे और घंटों पढने पर भी आदमी बोर नहीं होता थकता नहीं हे बस इसी नजरिये को देखते हुए इस मदरसे में प्राक्रतिक सोंदर्य की छटा बिखेरने के लियें सूरज की रौशनी एक खुबसुरत गार्डन जिसमें घांस पोधे और पेढ़ छोटी सी नहर उसमें तेरती रंग बिरंगी मछलिया और चह चहाती चिड़ियें, माहोल को खुशनुमा बना रहे थे गाइड ने कहा के इस माहोल में बच्चों को जल्दी याद होता हे और जो चाहे वोह यहाँ बेठ कर इस खुशनुमा माहोल में अपना सबक याद कर सकता हे ।
इतना सब प्राक्रतिक सोंदर्य दिखाने के बाद हमें आधुनिकता की तरफ ले जाया गया बेसमेंट में अंदर बने भवन में कई कमरे थे जहां आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित स्टूडियो पहला स्टूडियो जहां बच्चों की आवाज़ जाँची जाती हे दुसरा स्टूडियो जहां प्राक्रतिक रूप से मटके में आवाज़ से पढना सिखाया जाता हे तीसरा स्टूडियों जहां बच्चे को आयने के सामने खड़ा कर खुद अपने अंदाज़ में सबक सीखने का हुनर सिखाया जाता हे वहीं ऐसे उपकरण जिन्हें कान में लगा कर खुद की आवाज़ फ्रीक्वेंसी और उतार चढाव खुद मास्टर बन कर बच्चा सीखता हे , आगे खुबसुरत स्टूडियो जो शायद भारत सरकार के आकाशवाणी स्टूडियो से भी आधुनिक साज सज्जा वाले बनाये गये थे ।
कुरान की तिलावत और कुरान हिफ्ज़ करने के इस अंदाज़ को जब हमने जांचा परखा तो हमने इस मदरसे में बच्चों की संख्या जानना चाहा तो हमें बताया गया के यहाँ ८५० लडके लडकियाँ हे जिनमें ३०० के लगभग लडकिया हें इतना सब खुबसुरत और आधुनिक नजारा देखने के बाद घंटों के इस सफर में हमें जरा भी थकान नहीं हुई हमारी आँखें यह मंजर देख कर खुली की खुली रह गयी और खुद बा खुद दिल से वाह निकलने लगी हमारे साथ गये बोहरा समाज के लोगों ने बताया के वोह सुरत तो कई बार आए हें लेकिन उन्हें यह सब नजदीक से देखने का पहली बार अवसर मिला हे हमारे साथ वोह भी गद गद थे हम सोचते रहे के अगर संकल्प हो अनुशासन हो विश्वास हो टीम भाव हो तो क्या कुछ नहीं किया जा सकता एक ऐसा मदरसा जहां स्वर्ग जेसा नजारा और आधुनिक उपकरण बढ़ी बढ़ी युनिवर्सिटियों को मात देने के लियें काफी था ...................... दोस्तों यह नजारा खत्म नहीं हुआ इसके बाद जन्नत के इस नजारे में पढाई , अनुशासन का जो संगम हे उसका अगली पोस्ट में में विवरण दे सकूंगा बस इस मंजर को देख कर हम तो अब्बास भाई,अकबर भाई, मंजूर भाई ,सफदर भाई ओर अब्बास अली सहित सभी बोहरा समाज के ऋणी हो गये हम सय्यादना साहब के प्रति भी आभारी हो गये । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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