Roshi: Roshi: ममता: "Roshi: ममता: 'माँ की ममता भी कितनी होती है अजीब यह ममता ही हमेशा बनती है बालक का नसीब जो बच्चे जन्मते ही खो बेथते है माँ का साथ उन बच...'"
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Roshi: Roshi: अदिति की कामयाबी पर
Roshi: Roshi: अदिति की कामयाबी पर: "Roshi: अदिति की कामयाबी पर: 'प्रिय बिटिया तुमने जो कर दिखाया वो था नामुमकिन पर हमारे दिए ,गए संस्कार ,प्यार ,आदर्शों पर चलकर कर दिखाया तुमन..."
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Roshi: मुख्यमंत्री
Roshi: मुख्यमंत्री: "(हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी के आने के उपलक्ष्य में)जिले में आज धूम है, शोर है, मुख्यमंत्री के आने का जोर है सभी सड़के, मोहल्ले रहे हैं..."
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Roshi: होली
Roshi: होली: "होली का त्यौहार आ रहा है , साथ में रंगों की बौछार ला रहा है लाल, पीले ,हरे, नीले रंगों का है अदभुत संसार हर रंग से हम देखते और खेल..."
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विश्व जल दिवस 22 मार्च 2011 पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का संदेश
विश्व जल दिवस
संसार इस समय जहां अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण में व्यस्त हैं वहीं पानी, खाद्य तथा ऊर्जा की पारस्परिक निर्भरता की चुनौतियों का सामना हमें करना पड़ रहा है। जल के बिना न तो हमारी प्रतिष्ठा बनती है और न गरीबी से हम छुटकारा पा सकते हैं। फिर भी शुद्ध पानी तक पहुंच और सैनिटेशन यानी साफ-सफाई, संबंधी सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य तक पहुंचने में बहुतेरे देश अभी पीछे हैं।
वर्षाजल संचयन पर संयुक्त अपील
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने सुरक्षित पेयजल की मानव अधिकार के रूप में पुष्टि की है।
अब ऐसा समय है 884 मिलियन और अधिक लोगों के लिए पर्याप्त मात्रा में पेयजल की जरूरत है और इसके लिये दुनिया की सरकारों को पेयजल की सुरक्षित, सुलभ और सस्ती नियमित आपूर्ति के प्रावधान में योगदान देना है। विश्व जल दिवस 2011 के अवसर पर, अधोहस्ताक्षरी संस्थाएं वर्षाजल की पुरजोर वकालत कर रही हैं, इन सबका मानना है कि जल संबंधी मौजूदा समस्याओं से निपटने में वर्षाजल को भी एक सशक्त साधन समझा जाए।
अब ऐसा समय है 884 मिलियन और अधिक लोगों के लिए पर्याप्त मात्रा में पेयजल की जरूरत है और इसके लिये दुनिया की सरकारों को पेयजल की सुरक्षित, सुलभ और सस्ती नियमित आपूर्ति के प्रावधान में योगदान देना है। विश्व जल दिवस 2011 के अवसर पर, अधोहस्ताक्षरी संस्थाएं वर्षाजल की पुरजोर वकालत कर रही हैं, इन सबका मानना है कि जल संबंधी मौजूदा समस्याओं से निपटने में वर्षाजल को भी एक सशक्त साधन समझा जाए।
गतिविधियां
वाटरएड और फोर्स का 'वाक फॉर वाटर'
'वाक फॉर वाटर' नामक रैली वाटरएड और फोर्स ने निकाली। इंडिया गेट से निकली रैली ने लगभग 5 किमी की दूरी पूरी की। जो इंडिया गेट से जल यात्रा निकली, वह राजपथ से होकर विजय चौक के पास समाप्त हुई। इसे 'वॉक फॉर वॉटर' नाम दिया गया। यह इस बात की प्रतीक थी कि देश में अभी लोगों को खासकर महिलाओं को कई जगहों पर 5 किमी से भी ज्यादा दूरी रोजाना पानी के लिए जाना पड़ता है
कुछ प्रयास
विशेष लेख
जितना बचाएंगे उतना ही पाएंगे
Source:
दैनिक भास्कर, 18 मार्च 2011Author:
लेस्टर आर ब्राउनबर्बादी का एक बड़ा कारण यह है कि पानी बहुत सस्ता और आसानी से सुलभ है। कई देशों में सरकारी सब्सिडी के कारण पानी की कीमत बेहद कम है। इससे लोगों को लगता है कि पानी बहुतायत में उपलब्ध है, जबकि हकीकत उलटी है।
पिछली आधी सदी में विश्व ने जमीन की उत्पादकता तीन गुना बढ़ाने में सफलता हासिल की है। पानी के गंभीर संकट को देखते हुए पानी की उत्पादकता बढ़ाने की भी ठीक वैसी ही जरूरत है। चूंकि एक टन अनाज उत्पादन में 1000 टन पानी की जरूरत होती है और पानी का 70 फीसदी हिस्सा सिंचाई में खर्च होता है, इसलिए पानी की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि सिंचाई का कौशल बढ़ाया जाए। यानी कम पानी से अधिकाधिक सिंचाई की जाए।अभी होता यह है कि बांधों से नहरों के माध्यम से पानी छोड़ा जाता है, जो किसानों के खेतों तक पहुंचता है। जल परियोजनाओं के आंकड़े बताते हैं कि छोड़ा गया पानी शत-प्रतिशत खेतों तक नहीं पहुंचता। कुछ पानी रास्ते में भाप बनकर उड़ जाता है, कुछ जमीन में रिस जाता है और कुछ बर्बाद हो जाता है।
--
सिराज केसर
मो- 9211530510
hindi.indiawaterportal.org
http://twitter.com/hindiwater
http://groups.google.com/group/hindiwater
सिराज केसर
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छोटी छोटी बातों को,दिल से लगाना छोड़ दो
खुशी बिन
जीवन अधूरा
खुश रहना हो तो बोझ
दिल का दूर करो
जो पल रहा जहन में
बाहर निकालो
निरंतर पल रहे द्वेष को
कम करो
प्यार के रंगों से उसे
भर दो
छोटी छोटी बातों को
दिल से लगाना छोड़ दो
गलती हो जाए माफ़ी
मांग लो
बात बुरी किसी की लगे
माफ़ कर दो
प्यार से गले लगा लो
खुद भी जियो
औरों को जीने दो
21-03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
467—137-03-11
shukriya shukriyaa shukriyaa
दो दर्जन सेकड़ा पोस्टें पूरी
दोस्तों आपके आशीर्वाद ,आपके सहयोग आपके दिए गये होसले से कल मेरी दो दर्जन सेकड़ा यानी २४०० पोस्टें पूरी हो गयी हें और होली के रंगा रंग माहोल में जब मेरी यह पोस्टें पूरी हुईं तो मेरे एक मित्र ने मुझे फोन पर बधाई दी तब मुझे पता चला के मेरी पोस्टे २४०० हो गयी हें .
दोस्तों पोस्टें लिखना पोस्टों की संख्या तक पहुंचना कोई बढ़ी बात नहीं हे लेकिन इन दिनों मुझे ब्लोगिंग की दुनिया में बहुत कुछ देखने बहुत कुछ सीखने को मिला यहाँ मामूली से अपवादों को अगर छोड़ दिया जाये तो चारों तरफ प्यार की खुशबु प्यार की महक अपनापन और मदद का माहोल हे इस प्यार के माहोल को देख कर बस यहाँ से जाने को दिल ही नहीं करता हे . मेरी पहली पोस्ट ७ मार्च २०१० को जब लिखने की कोशिश की गयी तब मुझे नहीं लगा था के इस ब्लोगिंग की दुनिया में मुझे मेरे भाइयों का इतना प्यार इतना सम्मान मिलेगा लेकिन जहां अच्छे लोग होते हें वहां अपनापन होता हे टोका टाकी होती हे गलतियाँ और भूलें होती हें जिन्हें हमारे अपने ही इशारा करके सुधरवाने का प्रयास करते हें कई तो ऐसे होते हें के वोह बिना कहे भूल और गलतियों को सुधार देते हें और शायद ब्लोगिंग की इस दुनिया का में पहला ऐसा खुशनसीब ब्लोगर हूँ जिसे सभी साथियों का बढों का छोटों का बहनों का प्यार मिला हे अपनापन मिला हे टिप्पणियाँ चाहे गिनती की मिली हों लेकिन जो भी मिली हे दिल से मिली हे केवल संख्या बढाने के लियें टिप्पणी अगर ले भी लो तो वोह बेकार हें लेकिन मेरे पास जो टिप्पणियाँ आई हें वोह अनमोल हें , मुझे हर कदम पर मेरे अपनों का मार्गदर्शन प्यार और अपनापन मिला हे और इसी लियें इस काँटों भरी राह को मेने सबसे तेज़ स्पीड ब्लोगर की गाडी चला कर बिना किसी दुर्घटना के पार की हे मेरे साथी ,मेरे भाई ,मेरी बहने सभी तो हें जो चाहते हें के में एक अच्छा ब्लोगर बनू और इसीलियें वक्त बा वक्त मुझे सभी के सुझाव सभी की तकनीक सीखने को मिली हालांकि कुछ ऐसे भी हें जिन्होंने मेरे ब्लॉग को पलट कर भी नहीं देखा ऐसा साबित करने का प्रयास किया हे लेकिन शुक्र हे खुदा का उन्होंने भी मुझे कमसेकम अपनेपन से तो दूर नहीं किया वोह मेरे ब्लॉग के प्रशंसक नहीं टिप्पणीकार नहीं लेकिन रीडर तो रहे हें और मुझे इसीलियें गर्व हे के में इस ब्लोगिंग की दुनिया का २४०० पोस्ट लिखने के मुकाम पर पहुंचने वाला ब्लोगर हूँ और इस ब्लोगिंग की दुनिया का सदस्य हूँ जहां प्यार और अपनेपन की छटा बिखरी पढ़ी हे में ब्लोगिंग की इस दुनिया का कर्जदार था कर्जदार हूँ और कर्जदार रहूंगा शुक्रिया महरबानी ..........................में तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल , लोग बढ़ते गये और कारवां बनता गया बस यह कारवां बना रहे यह प्यार यह आशीर्वाद बना रहे इसी दुआ इसी उम्मीद के साथ आपका नोसिखियाँ सबसे ज़्यादा गलतियाँ करने वाला ब्लोगर ................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
shukriya shukriyaa shukriyaa
दो दर्जन सेकड़ा पोस्टें पूरी
दोस्तों आपके आशीर्वाद ,आपके सहयोग आपके दिए गये होसले से कल मेरी दो दर्जन सेकड़ा यानी २४०० पोस्टें पूरी हो गयी हें और होली के रंगा रंग माहोल में जब मेरी यह पोस्टें पूरी हुईं तो मेरे एक मित्र ने मुझे फोन पर बधाई दी तब मुझे पता चला के मेरी पोस्टे २४०० हो गयी हें .
दोस्तों पोस्टें लिखना पोस्टों की संख्या तक पहुंचना कोई बढ़ी बात नहीं हे लेकिन इन दिनों मुझे ब्लोगिंग की दुनिया में बहुत कुछ देखने बहुत कुछ सीखने को मिला यहाँ मामूली से अपवादों को अगर छोड़ दिया जाये तो चारों तरफ प्यार की खुशबु प्यार की महक अपनापन और मदद का माहोल हे इस प्यार के माहोल को देख कर बस यहाँ से जाने को दिल ही नहीं करता हे . मेरी पहली पोस्ट ७ मार्च २०१० को जब लिखने की कोशिश की गयी तब मुझे नहीं लगा था के इस ब्लोगिंग की दुनिया में मुझे मेरे भाइयों का इतना प्यार इतना सम्मान मिलेगा लेकिन जहां अच्छे लोग होते हें वहां अपनापन होता हे टोका टाकी होती हे गलतियाँ और भूलें होती हें जिन्हें हमारे अपने ही इशारा करके सुधरवाने का प्रयास करते हें कई तो ऐसे होते हें के वोह बिना कहे भूल और गलतियों को सुधार देते हें और शायद ब्लोगिंग की इस दुनिया का में पहला ऐसा खुशनसीब ब्लोगर हूँ जिसे सभी साथियों का बढों का छोटों का बहनों का प्यार मिला हे अपनापन मिला हे टिप्पणियाँ चाहे गिनती की मिली हों लेकिन जो भी मिली हे दिल से मिली हे केवल संख्या बढाने के लियें टिप्पणी अगर ले भी लो तो वोह बेकार हें लेकिन मेरे पास जो टिप्पणियाँ आई हें वोह अनमोल हें , मुझे हर कदम पर मेरे अपनों का मार्गदर्शन प्यार और अपनापन मिला हे और इसी लियें इस काँटों भरी राह को मेने सबसे तेज़ स्पीड ब्लोगर की गाडी चला कर बिना किसी दुर्घटना के पार की हे मेरे साथी ,मेरे भाई ,मेरी बहने सभी तो हें जो चाहते हें के में एक अच्छा ब्लोगर बनू और इसीलियें वक्त बा वक्त मुझे सभी के सुझाव सभी की तकनीक सीखने को मिली हालांकि कुछ ऐसे भी हें जिन्होंने मेरे ब्लॉग को पलट कर भी नहीं देखा ऐसा साबित करने का प्रयास किया हे लेकिन शुक्र हे खुदा का उन्होंने भी मुझे कमसेकम अपनेपन से तो दूर नहीं किया वोह मेरे ब्लॉग के प्रशंसक नहीं टिप्पणीकार नहीं लेकिन रीडर तो रहे हें और मुझे इसीलियें गर्व हे के में इस ब्लोगिंग की दुनिया का २४०० पोस्ट लिखने के मुकाम पर पहुंचने वाला ब्लोगर हूँ और इस ब्लोगिंग की दुनिया का सदस्य हूँ जहां प्यार और अपनेपन की छटा बिखरी पढ़ी हे में ब्लोगिंग की इस दुनिया का कर्जदार था कर्जदार हूँ और कर्जदार रहूंगा शुक्रिया महरबानी ..........................में तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल , लोग बढ़ते गये और कारवां बनता गया बस यह कारवां बना रहे यह प्यार यह आशीर्वाद बना रहे इसी दुआ इसी उम्मीद के साथ आपका नोसिखियाँ सबसे ज़्यादा गलतियाँ करने वाला ब्लोगर ................. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
यह वही पत्थर हें ...........
यह वही
पत्थर हें
जिन्हें मेने
कल
लोगों को
ठोकरों से
बचाने के लियें
हटाये थे
आज देख लो
उन लोगों ने ही
वही पत्थर
ना जाने क्यूँ
मेरे घर पर
बरसाए हें .
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
डॉक्टर अनवर की धमाकेदार की वापसी शायद जल्दी होगी
डॉक्टर अनवर जमाल भाई ब्लॉग की दुनिया से मध्यान्तर कर एक दम ला पता हो गये लेकिन उनके यूँ अचानक गायब हो जाने से ब्लोगिंग की दुनिया ही खामोश हो गयी हे और ब्लोगिंग की दुनिया को उनकी कमी अखरने लगी हे इसलियें सभी कहते हे ऐ भाई तुम खान भी हो जिस काम में भी लगे हो जल्दी फिर से इस दुनिया में चले आओ आ रहे हो ना . दोस्तों अनवर भाई जो ब्लोगिंग का कुछ तो हुनर रखते हें इसलियें ब्लोगिंग की दुनिया में वोह ऐ इ आई ओ यु याने अंग्रेजी के वोविल्स हें जिनके बगेर विश्व में कोई भी जानदार या बेजान चीज़ का नाम नहीं बनता हे इसलियें ब्लॉग से यूँ व्लोगिंग की दुनिया के वोविल्स का अचानक चला जाना ब्लोगिंग को बेजान कर गया हे अब तो शायद जो भी काम थे जो भी रुके हुए मामले थे वोह सब डॉक्टर साहब ने कर डाले होंगे पढना लिखना वायरस मारना दिखाना छुपाना मरम्मत करना आराम करना या जो भी कुछ हे वोह सब कल चुके होंगे . इसीलियें भाई अनवर अब तो वापस से चले आओ हम जानते हें भाई अनवर की वापसी यूँ सादगी से नहीं होगी कुछ ना कुछ धमाके से होगी इसलियें भाई दिल थाम के बेठे हें और इन्तिज़ार में हें अनवर भाई की वापसी के , आ रहे हो न अनवर भाई . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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