कुंडलिया ----- दिलबाग विर्क

Posted on
  • Monday, April 18, 2011
  • by
  • Dilbag Virk
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  • बुराई रही जीत है  , अच्छाई की हार
    सब पासे उल्टे पड़े ,कलयुग की है मार .
    कलयुग की है मार ,रावण राम पे भारी
    हार रहा है धर्म , जीतती दुनियादारी .
    बुराइयां छोड़कर  , तुम सीखना अच्छाई 
    कहत ' विर्क ' कविराय  , जगत से मिटे बुराई .

                          * * * * *  

    1 comments:

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