ग़ज़लगंगा.dg: खता क्या है मेरी इतना बता दे

Posted on
  • Friday, March 30, 2012
  • by
  • devendra gautam
  • in
  • खता क्या है मेरी इतना बता दे.
    फिर इसके बाद जो चाहे सजा दे.

    अगर जिन्दा हूं तो जीने दे मुझको
    अगर मुर्दा हूं तो कांधा लगा दे.

    हरेक जानिब है चट्टानों का घेरा
    निकलने का कोई तो रास्ता दे.

    न शोहरत चाहिए मुझको न दौलत
    तू मेरा नाम मिट्टी में मिला दे.

    अब अपने दिल के दरवाज़े लगाकर
    हमारे नाम की तख्ती हटा दे.

    जरा आगे निकल आने दे मुझको 
    मेरी रफ़्तार थोड़ी सी बढ़ा दे.

    ठिकाना चाहिए हमको भी गौतम
    ज़मीं गर वो नहीं देता, खला दे. 

    ---देवेंद्र गौतम 

    ग़ज़लगंगा.dg: खता क्या है मेरी इतना बता दे:

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    2 comments:

    Rajesh Kumari said...

    bahut achchi ghazal likhi hai Gautam ji aabhar.

    sangita said...

    sundar gajal hae gotamji .meri nai post par aapke vichr saadar aamantrit haen .dhanyavad.

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