श्यामल सुमन का एक ही पैगाम ..गर्व से कहो हम ब्लोगर हैं

                                                               

झलक

बेबस है जिन्दगी और मदहोश है ज़माना
इक ओर बहते आंसू इक ओर है तराना

लौ थरथरा रही है बस तेल की कमी से
उसपर हवा के झोंके है दीप को बचाना

मन्दिर को जोड़ते जो मस्जिद वही बनाते
मालिक है एक फिर भी जारी लहू बहाना

मजहब का नाम लेकर चलती यहाँ सियासत
रोटी बड़ी या मजहब हमको ज़रा बताना

मरने से पहले मरते सौ बार हम जहाँ में
चाहत बिना भी सच का पड़ता गला दबाना

अबतक नहीं सुने तो आगे भी न सुनोगे
मेरी कब्र पर पढ़ोगे वही मरसिया पुराना

होते हैं रंग कितने उपवन के हर सुमन के
है काम बागवां का हर पल उसे सजाना..........श्यामल किशोर झा की यह रचना झलक इनके ब्लॉग की तरफ आपको आकर्षित करने के लियें काफी है .
 जी हां दोस्तों साहित्यकार श्यामल सुमन का एक ही पैगाम ..गर्व से कहो हम ब्लोगर हैं , जो पुरे हिंदुस्तान में फेल रहा है , श्यामल सुमन वेसे तो एक ब्लोगर हैं लेकिन अपनी रचनाओं से यह विचारों को तराश कर जनता के सामने जिस अंदाज़ में रख रहे हैं उसने इनके अन्दर की श्यामल से खुशबूदार सुमन के बारे में लोगों को बता दिया है , श्यामल जी वेसे तो श्यामल किशोर झा के नाम से जाने जाते हैं लेकिन कवि और साहित्यकार की दुनिया में अब यह श्यामल सुमन हो गए हैं ,
भाई श्यामल जी ब्लोगर को कहते हैं के गर्व से कहो के हम ब्लोगर हैं , यानि श्यामल जी ब्लोगर होना एक गर्व की बात मानते हैं और यह सही बात भी है क्योंकि इंटरनेट की दुनिया में देश विदेश में अपनी बात को मुफ्त में पहुँचने का यह एक ऐसा खुबसूरत जरिया है जिसका सदुपयोग किया जाए तो दुनिया ही स्वर्ग बन जाए और इसीलियें भाई श्यामल ब्लोगर होने पर गर्व करते हैं और दूसरों से भी यही अपेक्षा करते है के वोह खुद  भी इस पर गर्व करे बात साफ़ है उनका पैगाम छुपा है के कोई ब्लोगर ऐसा काम न करे जिससे ब्लोगिंग की दुनिया या खुद ब्लोगर को शर्मिंदा होना पढ़े और श्यामल जी का यह संदेश उन सभी ब्लोगरों के लियें मील का पत्थर है जो ब्लोगिंग की दुनिया में शेतानी हरकते कर ज़हर घोल रहे हैं अस्थिरता लाने का प्रयास कर रहे हैं .
,कई सेकड़ों पत्र पत्रिकाओं में इनकी कविताये प्रकाशित हो चुकी हैं और खुद भाई श्यामल ने रेत में जगती नदी पुस्तक का प्रकाशन किया है जो साहित्य के क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध रही है . 
भाई श्यामल जी का हिंदी ब्लॉग मनोरमा है जिसपर अब तक १४२ कविताये और १८ व्यंग्य ,वगेरा प्रकाशित किये गए हैं श्यामल जी के ब्लॉग पर १६५ से भी अधिक फोलोवर्स हैं और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील विचारधारा के साठ राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत मनोरंजक रचनाएँ जिनमे एक नया दर्शन छुपा होता है श्यामल जी लिखते जा रहे हैं लिखते जा रहे हैं ........ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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कुछ लोग हर धर्म में गंदे होते

हर धर्म के उसूल
अच्छे होते
धर्म के नाम पर
हर धर्म में धंधे होते
कुछ लोग हर धर्म में
गंदे होते
धर्म के नाम पर
मतलब साधते
भोले भालों लोगों को
बरगलाते
निरंतर धर्म के नाम पर
सियासत करते
ऐसे लोगों को पहचानों
इनके जाल में ना फंसो   
खुद भी बचो
औरों को भी बचाओ
22-04-2011
731-153-04-11
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कुंडलिया ----- दिलबाग विर्क


बेटी मरती गर्भ में ,हम सब जिम्मेदार 
चुप्पी धारण की तभी ,होता अत्याचार .
होता अत्याचार , हुई प्रताड़ित नारी 
वेदों का है देश  ,लगाते कलंक भारी .
कहत 'विर्क' कविराय , हो रही इससे हेठी 
कहलाओ इन्सान , मारो गर्भ में बेटी .

                 * * * * * 
                        हेठी --- अपमान ,बेइज्जती 
                       * * * *
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उच्चारण: "गजल और गीत क्या है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

उच्चारण: "गजल और गीत क्या है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"): "हृदय की बात कहने को,
कलम अपना चलाया है।।"
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दोस्ती का पैगाम लेकर अमन सुकून की दुनिया बनाने निकले हैं भाई संजय भास्कर

जी हाँ दोस्तों एक प्यारे से ,समझदार से ,राष्ट्रप्रेम की भावना रखने वाले ब्लोगर संजय भास्कर दोस्ती का पैगाम लेकर अमन सुकून की दुनिया बनाने के लियें निकल पढ़े हैं और वोह अपनी इस कोशिश में काफी हद तक कामयाब भी हो रहे हैं खुदा करे एक रंगीन ,अमन सुकून की खुशहाल दुनिया बनाने का उनका सपना जल्दी ही साकार हो जाए .
भाई संजय भास्कर हरियाणा के फतेहाबाद में पैदा हुए वहीं पले बढ़े और अब वहीं के होकर रह गये हैं लेकिन एक छोटी सी जगह पर बैठ कर भाई संजय दुनिया और ब्लोगिंग में खुशियों के रंग भर रहे हैं यह चाहते हैं के दर्द भरे चेहरे सामने से हट जाएँ रोते बिलखते लोग रोना धोना छोड़ कर मुस्कुराने के आदतन हो जाएँ और इसी सोच से प्रभावित होकर संजय भास्कर ने भास्कर यानि सूरज की रौशनी फेलाने के लियें ब्लोगिंग की दुनिया में प्रवेश किया और उन्होंने खुद के ब्लॉग का नाम अपनी सोच के मुताबिक ...आदत मुस्कुराने की ......रख डाला . अपने इस ब्लॉग के माध्यम से संजय भाई दुनिया  को दोस्ती का पाठ पढ़ाने निकल पढ़े हैं , और इनका नारा है दोस्त बनाओ दुनिया बनाओ सुकून खुद बा खुद मिल जाएगा और जब यह दोनों चीजें हमारे पास होंगी तो अमन चेन और खुशहाली खुद बा खुद साथ आया जायेगी .
भाई संजय विनम्रता से सभी ब्लोगर्स से किसी ना किसी तरीके से एक बार तो मिलने का प्रयास करते हैं ,वोह ब्लोगिग्न के कुछ टिप्स देते हैं तो कई टिप्स भाई ब्लोगरों से खुद के सूधार के लियें लेने से भी नहीं चुकते हैं यही वजह रही है के २३३ ब्लॉग लिख कर इन जनाब ने ८३०६ लोगों का टिप्पणियों के माध्यम से प्यार समेटा है . 
टेलीकम्युनिकेशन का काम कर रहे भाई संजय कस्टमर केयर सर्विस का काम कर रहे हैं जो ब्लोगिंग की दुनिया में भी मधुरता घोल रहे हैं , इन्हें नई नई किताबे पढने और संगीत सुनने का शोक है , नई नई खोज करना इनकी आदत है और एक नेक इंसान की तरह नेक नियति रखते हुए सभी को प्यार बांटने का काम करने वाले भाई संजय भास्कर जब राजनीती पर चिन्तन लेख लिखते हैं तो एक कुशल सधे हुए राजनितिक लगते हैं ,भाई संजय जब को रिपोर्टिंग या हाल पर टिप्पणी लिखते हैं तो ऐसा लिखता हैं के एक साहित्यकार सधे हुए अल्फाजों में अपने विचारों की खुशबु आलेख के माध्यम से ब्लॉग पर बिखेर रहा है ,भाई संजय जब कोई गज़ल, कोई कविता ,कोई दर्शन ब्लॉग पर लिखते हैं तो साहित्य के निर्धारित मापदंडों को यह नहीं भूलते हैं और खान कोनसा मीटर कोंसी बहार रदीफ़ काफिया लगेगा इसका भी पूरा ध्यान रखते हैं लेकिन इनके हर ब्लॉग में एक जिंदगी ,एक रौशनी एक रंग होता है और विभिन्न ब्लोगों के विचारों से इनकी ब्लोगिंग सतरंगी हो गयी है भाई संजय खुद भी जिंदगी के रंगों को समेटकर जिंदगी को खुबसूरत सतरंगी बनाने में जुटे हैं और वोह कामयाब ही हो रहे हैं यही वजह है के आज हर ब्लोगर चाहे किसी भी विचार धारा का ,किसी भी धर्म का प्रमोटर या किसी भी अधर्म का रक्षक हो  वोह संजय भाई और उनकी लेखनी को दिल से सलाम करता है ............इसीलियें सभी को आदत मुस्कुराने की रखना चाहिए और इस आदत को अपनाना चाहिए ..... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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बिना स्याही के उसने क्या लिख दिया ......

बिना स्याही के उसने क्या लिख दिया ......

एक दिन
उसने
बढ़ी मासूमियत से
मेरी
हथेली पर
अपनी
नाज़ुक सी
उँगलियों से
गुदगुदाते हुए
लिखा .........
मुझे प्यार है तुमसे
हाँ मुझे
प्यार है तुमसे .....
जाने
केसी स्याही थी वोह
मेरी हथेली पर
वोह लफ्ज़
दिखे भी नही
मिटे भी नहीं
बस
यह लिखावट
ना जाने क्यूँ आज भी
मेरे दिल पर नक्श हो गयी है ...............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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गीतकार तो मिल जाए लेकिन दिमाग से पहले जातिवाद और राजनीति तो निकालें ढूँढने वाले Bihar song

अभी अभी एक जगह यह पढ़ा 
'पहले यह कहा जा रहा था कि बिहार के लिये एक गीत और प्रार्थना की खोज की जायेगी। गीत और प्रार्थना को बिहार सरकार द्वारा बिहार दिवस के मौके पर पूरे शान के साथ रिलीज किया जाना था। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मानव संसाधन विकास विभाग को 1800 गीत मिले। परंतु, एक भी रचना इस काबिल नहीं कि वे बिहार गीत और प्रार्थना का दर्जा हासिल कर सकें। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाबा नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, रामधारी सिंह दिनकर और आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की धरती में अब कोई भी ऐसा रचनाकार नहीं मिला, जो एक अदद गीत लिख सके। हालांकि राज्य सरकार की ओर से दुबारा गीतकारों और साहित्यकारों को आमंत्रित किये जाने की योजना को अंजाम दिया जा रहा है।'
इस क्या प्रतिक्रिया दें और क्या कहें ?
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iltijaa ek meri bhi maan lo yaaron

एक इल्तिजा एक सुझाव ................... .

आदरणीय बन्धुवर, ब्लोगर साथियों आज बढ़े ही दुखी मन से मुझे यह सब इल्तिजा करना पढ़ रही है और इस इल्तिजा  के साथ साथ कुछ सुझाव भी देना पढ़ रहे हैं , मेरे भाइयों और बहनों, इन दिनों ब्लोगिंग में फिर से जिद और बहस के दोरान ब्लोगिंग की खुबसूरत दुनिया का स्वर्गिक सुख नरक में बदलता जा रहा है  और इसे सिर्फ और सिर्फ आप और हम ही मिलकर रोक सकते हैं .
दोस्तों आप और में, यानि हम सब मिलकर अगर चाहें तो इस ब्लोगिंग की इस गंदगी, इस विकार को दूर कर सकते हैं , आज ब्लोगिग्न में कुछ गिनती के लोगों ने एक दुसरे की भावनाएं आहत कर ,एक दुसरे के धर्म का मजाक उढ़ा कर, कमियाँ निकाल कर, माहोल को सनसनीखेज़ बनाया जा रहा है पहले भी ऐसा हुआ है लेकिन शुक्र है खुदा का, के सभी भाइयों को सदबुद्धी आई और फिर वातावरण प्यार का बना , बिचारे का बना सद्भावनाए एक दुसरे के लियें एक दुसरे के दिल में पैदा हुईं , लेकिन कुछ दिनों से फिर इस खुबसूरत दुनिया को उजाड़ने के लियें माहोल फिर से बिगाड़ना शुरू कर दिया है एक दुसरे को निचा दिखने का प्रयास शुरू हो गया है एक दुसरे के धर्म की फजीहत कर वैमनस्यता भड़काई जा रही है यह सब तात्कालिक विचार हैं जो कुछ लोगों द्वारा केवल गुस्से में लिए गए निर्णय के तहत किया जा रहा है कुछ लोगों के इस गुस्से , बदले के इस भाव से सभी ब्लोगर सकते में हैं उनकी सांस थम सी गयी है और सभी लोग ब्लोगिंग की दुनिया में इस जहरीले धुंए से घुटन का सा माहोल होने से उकता गए हैं हालत यह हैं के गुटबाजियां    बढ़ गयी हैं इस खतरनाक माहोल में अधिकतम ब्लोगर तटस्थ हैं लेकिन उनकी ख़ामोशी एक अपराध है इस माहोल को सहकर भी इसे सुधरने के प्रयास अगर नहीं किये जाते हैं तो भाई फिर तो हमें खुद के इन्सान होने पर भी शक होने लगता है एक जानवर एक कुत्ता एक दुसरे पर भोकता ही एक दुसरे पर हमला करता है से लहू लुहान करता है बस इसीलियें वोह जानवर कहलाता है और एक इन्सान छोटी मोटी मानवीय भूलों को नज़र अंदाज़ करता है जन बुझ कर अपराध करने वाले का सामूहिक विरोध करता है और हालात यहाँ तक होते हैं के उन्हें कानून के प्रावधानों के तहत दंडित भी करवाता ही .
दोस्तों इस माहोल में आज अगर हम हाथ पर हाथ धर कर बैठते हैं तो हम मानवता और राष्ट्रिता से ज्यादती कर रहे हैं देश का कानून है किसी को भी किसी के धर्म का अपमान करने का हक नहीं है कोई भी किसी के धर्म का मजाक उढ़ाकर या उसे निचा दिखाकर अगर भडकाऊ बात करता है तो उसे सजा देने का प्रावधान है और उसे सजा मिलना ही चाहिए , मेरी इल्तिजा है उन लोगों से जो मेरे छोटे या बढ़े भाई है गुस्से में आप खो बेठे हैं और देश के कानून को तमाशा बनाकर एक दुसरे के धर्म पर कीचड़ उछल रहे हैं लेकिन यह सब गंदगी अब ज्यादा दिन  चलने वाली नहीं है देश में साइबर कानून है और इंटरनेट की दुनिया में फर्जी आई डी बना कर या छदम  नामों से फर्जी ब्लॉग बना कर अगर अपराध किया जाता है तो उन्हें पकड़ना मुश्किल काम नहीं है अगर पकड़ा जाता है तो कमसेकम सात साल और तीन लाख जुरमाना दंड है कोटा में कई कोचिंग छात्र इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं और आज उनका जीवन इन मुकदमों के कारण बेकार हो गया है यह वोह बच्चे हैं जो कोटा में अपना भविष्य बनाने आये थे और सभी बच्चे प्रभावशाली लोगों के थे लेकिन यह लोग  सभी राजनेतिक और साम दाम दंड भेद के बाद भी अपने इन बच्चों को अपराध से नहीं बचा सके हैं . अगर कोई यह समझे के देश के कानून के साथ खिलवाड़ कर कोई अपराध से बच जाएगा तो उसे देश के आतंकवादियों और गद्दारों का सच देखलेना चाहिए हमारा देश ऐसे लोगों को पकड़ने और दंड दिलवाने के लियें सक्षम है में नहीं कहता के हमारे किसी भी ब्लोगर भाई को दंड मिले लेकिन मेरा यह फर्ज़ है के कोई भी ब्लोगर कोई भी फर्जी आई डी बनाकर वैमनस्यता भडकाने का अगर प्रयास करता है तो मुझे और मेरे शांत बेठे भाइयों को इस बारे में विचार करना होगा मेरे भाइयों प्लीज़ इस वातावरण को फिर से सुधार लो फिर से भाई चारे और सद्भावना का माहोल बना लोग प्यार दो प्यार लो का नारा बुलंद कर लो और एक शांत भ्रस्ताचार मुक्त भारत के निर्माण में मददगार बनो अगर किसी ब्लोगर की लेखनी से किसी की भावनाएं आहत हुई है तो में उन सभी की तरफ से आप सभी भाइयों से माफ़ी मांगता हूँ लेकिन प्लीज़ मेरी इल्तिजा स्वीकार करे और ब्लोगिंग का दम घोटू वातावरण फिर से प्यार और भाईचारे सद्भाव की फुहाल्र से मोहम्ब्बत की खुशबु से महका दो ............. अकह्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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कुंडलिया ----- दिलबाग विर्क


बुराई रही जीत है  , अच्छाई की हार
सब पासे उल्टे पड़े ,कलयुग की है मार .
कलयुग की है मार ,रावण राम पे भारी
हार रहा है धर्म , जीतती दुनियादारी .
बुराइयां छोड़कर  , तुम सीखना अच्छाई 
कहत ' विर्क ' कविराय  , जगत से मिटे बुराई .

                      * * * * *  
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निर्भीकता और सत्यता के साथ ब्लोगिंग की दुनिया को स्वच्छ संदेश दे रहे हैं भाई सलीम खान

निर्भीकता और सत्यता के साथ ब्लोगिंग की दुनिया को स्वच्छ संदेश दे रहे हैं भाई सलीम खान

निर्भीकता और सत्यता के साथ ब्लोगिंग की दुनिया को स्वच्छ संदेश देने वाले सलीम भाई सच बोलने और सच लिखने के आदतन हैं और वोह जेसा व्यवहार खुद करते हैं ऐसा ही दूसरों से भी चाहते हैं अगर कोई सच का उपहास उढाये या फिर सच से मुंह फेर ले तो फिर भाई सलीम उससे निपटना अच्छी तरह जानते हैं .
उत्तर प्रदेश  के  अदबी नगर लखनऊ में जन्मे सलीम की पीलीभीत  के तराई इलाके में परवरिश हुई है इन्होने टूरिज्म में एम बी ऐ किया है और इसके बाद सलीम भाई लखनऊ और आसपास आने जाने वाले सेलानियों के हर दिल अज़ीज़ गाइड बने हैं ....
सलीम भाई की शख्सियत यूँ तो किसी भी परिचय की मोहताज नहीं है लेकिन यह परिचय श्रंखला है और सभी को एक दुसरे के बारे में जानने का हक है ताकि भाई चारा और सद्भाव में बढ़ोत्तरी हो सके .भाई सलीम १९९८ से लखनऊ में अंतर्जाल पर हैं ,२००१ से लेखन के कार्यों से जुड़े  हुए हैं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखों के प्रकाशन के साथ साथ भाई सलीम ने कई वेब्साइटें बनाई हैं और इसीलियें सलीम भाई आज इंटरनेट की दुनिया में  धूम मचा रहे हैं , वर्ष २००९ से ब्लॉग जगत से जुड़ने का बाद भाई सलीम ने जब अपना ब्लॉग स्वच्छ संदेश बनाया तो इनकी पोस्टों इनके लेखन को कई लोगों ने सराहा और इनकी लेखनी को सभी लोगों ने अपने अपने तरीके से जांचा परखा किसी ने इन्हें कट्टरपंथी कहा तो किसी ने इन्हें साम्प्रदायिक कहा तो किसी ने इन्हें कोमी एकता का सन्देशवाहक कहा , सलीम भाई ने ब्लोगिंग के अखाड़े में कई पट्ठे तय्यार किये कई सन्गठन बनाये ,कई ब्लॉग बनाये ,कई सांझा ब्लॉग तय्यार कर एक दुसरे से ज्ञान बांटने की परम्परा को ज़िंदा किया और कुछ दिनों में ही भाई सलीम ब्लोगिंग की दुनिया में किसी के लियें काँटा तो किसी के लियें खुशबूदार फूल बन गए .
भाई सलीम का विचार है के हर आदमी को अपने धर्म के प्रति कट्टर होना चाहिए और मानवता तभी जिंदा रह सकती है वोह कहते  है के धर्म दिलों में रहता हे तो आचरण में मानवता आती है उनका कहना है के अगर में किसी के धर्म को नुकसान पहुंचाऊं तो उसे यह हक हे के मुझे दंडित करे और अगर कोई मेरे धर्म को नुकसान पहुंचाएगा तो मेरा भी फर्ज़ है के में उसे किसी कीमत पर नहीं बख्शुं ,बात साफ़ है भाई स्लिम जो कहते हैं वोह करते भी हैं इन्होने हिन्दू और मुस्लिम धर्म को एकरूपता देने के लियें दोनों के धर्म का अवलोकन किया और होली पर हजरत इब्राहीम और प्रहलाद के जलने के किसे की एकरूपता लोगों को बताई , भाई सलीम ने क़ुरबानी के जज्बे के लियें शंकर भगवान द्वारा गणेश जी का सर काटने और हजरत इब्राहिम द्वारा उनके पुत्र की गर्दन पर छुरी चलाने की एकरूपता को सभी लोगों तक पहुंचाया हैं .
वेसे तो सलीम भाई गजलों के शोकिन हैं लेकिन यह गज़ल से ज़्यादा लेख और खबरें लिखने में विश्वास करते हैं ,अपने आचरण पर गर्व करते हुए सलीम भाई कहते हैं के उन्हें भारतीय मुसलमान होने पर गर्व है, लेकिन भेदभाव के रवय्ये को वोह बर्दाश्त नहीं करते और जहां कहीं भी जातिगत और अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव किया जाता है तो भाई सलीम अपने क्लेम की तलवार मियान से बाहर निकाल कर ऐसे लोगों को सबक सिखाना शुरू कर देते हैं .बस इनके इसी सच के आगे कुछ तो नतमस्तक हैं और कुछ इनके दुश्मन बन गये हैं भाई सलीम इस्लाम को विज्ञानं से जोड़कर इस दर्शन को लोगों को तार्किक तरीके से समझाने का प्रयास भी करते हैं और कहते हैं के में तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया ..........
भाई सलीम की निर्भीकता और सत्यता से ओत प्रोत सात सो से भी अधिक आलेख स्वच्छ संदेश हिंदी ब्लॉग पर लिखे गए हैं और इस सजे संवरे ब्लॉग में जमीन से आसमान तक की सभी जानकारियाँ भरने का प्रयास भाई सलीम ने किया है .इण्डिया ब्लोगिंग में इनकी ७४  वीं रेंक है इन्होने स्वच्छ संदेश के नाम से फेंस क्लब भी बनाया है और इनके ब्लॉग पर किताबों के बारे में भी सम्पूर्ण जानकारी एक लाइब्रेरी सजा कर दी गयी है .
पोलीथिन पर रोक के बारे में यह जज्बाती संदेश देते हुए अपने ब्लॉग में लिखते हैं के गायों की मोत का प्रमुख कारन पोलीथिन हैं क्योंकि गायें  पोलीथिन खाती हैं और इसके बाद इनकी पाचन क्रिया खराब होने से इनकी म्रत्यु हो जाती है सलीम भाई कहते हैं के अगर आप सही गौ  भक्त हैं अगर आप सच में गायों की म्रत्यु रोकना चाहते हैं तो पोलीथिन का उपयोग बंद कर दें विज्ञान की आवाज़, जिंदगी की आरजू इनके अपने  अलग बोल हैं , भाई सलीम कई दुसरे सांझा ब्लोगों में जुड़े हुए हैं सांझा ब्लॉग में इनकी ख्याति देख कर कई लोगों को इनसे नाराज़गी भी है सलीम भाई जब सच का विरोध करने वालों के खिलाफ कुछ लिखते हैं तो वोह लोग इनसे इतने नाराज़ होते हैं के इनके ब्लॉग इनकी रचनाएँ बेन हो जाती हैं भाई सलीम को कई ब्लोगर्स ,एग्रीगेटर,सांझा ब्लॉग मालिकों ने इनके आलेखों को ब्लेकलिस्टेड घोषित किया हैं लेकिन ब्लेकलिस्टेड क्यूँ किया गया है इसका जवाब किसी शख्सियत के पास नहीं हैं .
भाई सलीम ने जिंदगी की सच्चाई और महत्वाकांक्षाओं   की दोड़ धूप का सच वर्ष १९९९ में ही जान लिया अथा वोह लिखते हैं जिंदगी में आरजू कभी पूरी नहीं होती और अगर आरजू पूरी हो जाए तो फिर जिंदगी जीने की चाहत नहीं रहती और यह सच भी है के जिंदगी में आदमी चाहत के पीछे दोड़ता है और इसी चाहत को पाने के लियें वोह ज़िंदा रहता है अगर जिंदगी की चाहत खत्म तो जिंदगी खत्म हो जाती है इसलियें भाई सलीम का येह फलसफा जिंदगी और सच्ची जिंदगी जीने का एक सूत्र बन गया है ..भाई सलीम जब गजलों का संकलन कनरे बैठते हैं तो दर्द भरी गजलों के अशआरों में सभी लोगों को डुबो देते हैं और इनके जिंदगी की आरजू ब्लॉग पर दर्द भरी गजलों के कई संकलन मोजूद हैं कुल मिलाकर ब्लोगिंग में निर्भीकता,नहीं झुकने वाला स्वभाव लेकर एक नई क्रान्ति पैदा करने वाले सलीम भाई किसी के आगे झुके नहीं हैं और अपनी ताकत प्रतिभा के बल पर अपनी पहचाना बनाते जा रहे हैं और कम से कम विवादों से अपना सम्बन्ध रखते हैं लेकिन इनका एक ही सिद्धांत है के या तो छेडो मत और अगर छेडो तो छोड़ों मंत ....जनवरी २००१ से अब तक भाई सलीम सात सो से भी अधिक ब्लोगों पर हजारों वाह वाही लूट चुके हैं इनका सिद्धांत है यह खामोश मिजाजी हमें जीने नहीं देगी इस दोर में जीना है तो कोहराम मचा दो ......................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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खुदा

लोग मंदिर,
मस्जिद में मुझे ढूंढते
धर्म के ठेकेदारों से
पता मेरा पूंछते
निरंतर नए तरीकों से
मुझे खोजते
फिर भी मुझे पाते नहीं
मैं इंसान के दिल में रहता
ईमान और इंसानियत में
बसता
लालच से नफरत मुझे
सूरज बन
उजाला दिन में करता
रात को
चाँद बन कर निकलता
जो दिल से ढूंढता,
सिर्फ उसे मिलता
17-04-2011
696-120-04-11
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अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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