ब्लॉगर्स मीट वीकली (26)
| आज सबसे पहले HBFI मंच की पोस्ट्स | |
अनवर जमाल जी की रचनाएँअमेरिका का प्रयास यह रहा है कि वह भारत समेत दूसरे देशों को ईरान से विमुख कर सके, दुर्भाग्य से भारत इस जाल में फंस चुका है India and Iranहाल ही में ईरान ने मध्यम दूरी तक मार करने वाले प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण कर यह प्रदर्शित कर दिया है कि वह अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से घबराया हुआ नहीं है और न ही शस्त्रास्त्रों की विकास परियोजनाओं को बाधित करने में अमेरिका सफल हो सका है। एक बार फिर अमेरिका ने नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। बाजारवाद का हिस्सा है,प्रलय का भययह आश्चर्य में डालने वाली बात है कि प्रलय के भय को अंगूठा दिखाते हुए सैलानी प्रलय के मुहाने पर नये साल का जश्न मनाने पहुंच गए।मुझे जन्म दोई. प्रदीप कुमार सहनी जीग़ज़लगंगा.dg: खून में डूबे हुए थे रास्ते सब इस नगर केदेवेन्द्र कुमार गौतम जीकोई रावण ले गया सीता को हर के.अपने तलवे थामकर कहने लगा इक राहरौचांदनी रातों में भी सब जायके थे दोपहर के.शोहरत, दौलत और ताक़त, जिंदगी भर की सियासतगौर से देखा तो जाना सब छलावे हैं नज़र केब्लॉगर्स मीट वीकली (25) Sufi culture | |
डॉ.अयाज अहमद जी की रचना | |
HBFI मंच के बाहर की पोस्टआशा जी की रचना बिना जाने मन की बात कोई चाहती नहीं की तुम से कुछ कहूँ कहा यदि मैंने कुछ तुमसे , और पूरा न हो सका तुमसे , यह सब नहीं होगा पसंद मुझे , कि मैं दंश अवमानना का सहूँ | कैलाश सी.शर्मा जी की रचना नयन ताकते रहे दिलबाग विर्कजी की रचना ![]() अनुपमा त्रिपाठी जी की रचना पिया गुनवंत आवन को हैं ...!!![]() मन को मन की चाह बना कर ... तीव्र मध्यम को - मार्ग विहाग का मार्ग दिखा कर ... लो उड़ चली मैं .. रविकर जी की रचना मचा बवंडर पाक में, रही दुर्दशा झाँक | आधे जन जेहाद में, धूल अर्ध-जन फाँक | उमर बढ गई या कम हो गई.......????? आज मन में यह ख्याल आ रहा है कि खुशियां मनाऊं या गम....? आज जन्मदिन है मेरा। उम्र एक साल बढ गई.... या कम हो गई....., क्या कहूं, क्या समझूं। साधना वैद जी की रचना मुक्ताकाश में सजी तारक मालिका से प्रेरणा ले मैंने आज अपनी पलकों की डोर में राजेश कुमारीजी की रचना जय भारत माता जयहिंद मेरे देश वासियों दोनों आँखे खुली रखना एक आँख संसद पर दूजी सरहद पर रखना ! कुवंर कुसुमेश जी की रचना नया साल 2012 मुबारक मालिक तू इत्मिनान से दैरो-हरम में है. पर चाहने वाला तेरा दरिया-ए-ग़म में है. मीनाक्षी पंतजी की रचना बहती नदियाअनमोल -पल ....पिकनिक उम्र का बदलाव तो दस्तूर -ऐ -जहाँ हैं ! अगर महसूस न करो तो, बुढ़ापा कहाँ हैं !! चन्द्र भूषण मिश्र "गाफिल "जी की रचना दिल से तस्वीर मिटायी न गयी। याद तेरी थी भुलायी न गयी।। ज़ीनते-गुफ़्तगू हो जाती बस बात बाक़द्र चलायी न गयी। कुमार राधारमण जी की रचना अक्सर माताओं को यह शिकायत रहती है कि उनका बच्चा दूध नहीं पीता। दूध का एक गिलास उसके गले से नीचे उतारने के लिए न जाने कितने जतन किए जाते हैं। कई माताएँ जबरदस्ती करती हैं और बच्चे के हाथ पैर जक़ड़कर दूध उसके मुँह में डालने का प्रयत्न तक करती हैं।
Blog News पर विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थैलियों में भर कर यूं ही फेंक दिया जाता है वृन्दावन में ![]() |
स्वराज करूँ अपने ब्लॉग दिल की बात पर कृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?खबर आयी है कि भगवान कृष्ण कन्हैया की पवित्र भूमि |










