देख तमाशा दुनिया का - 'एक लिंक्स चर्चा'

1- आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है
एक प्रिंसिपल चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी नियुक्त नहीं कर सकता, लेकिन उसने राजपत्रित अधिकारियों ( प्रवक्ता ) की नियुक्ति की । हरियाणा सरकार बैकडोर इंट्री के रूप में हुई इस भर्ती को जायज ठहराने की हर संभव कोशिश कर रही थी , लेकिन हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सरकार अतिथि अध्यापकों के दवाब में काम कर रही है , यह भर्ती न्यायसंगत नहीं है । यह फैसला झटका है गेस्ट टीचर्स को और ऊँगली उठाता है हरियाणा सरकार की कार्य प्रणाली पर ।

अतिथि कब जाओगे ? ( चर्चामंच - 798 )

2-

लंबे बच्चे चाहिए तो दूर की बीवी लाएं

BBCसुनने में यह बात अजीब-सी लग सकती है, लेकिन पोलैंड के वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पति और पत्नी एक ही शहर के हैं तो उनके बच्चे का कद नाटा रहेगा।





3-

सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से

नीम का तेल नाक के नथुनों में चंद क़तरे रोज़ाना टपकाएं आपके बाल अगर उम्र से पहले सफ़ेद हो गए हैं तो वे काले हो जाएंगे।


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होली आई रे

होली आई  रे  

फागुनी बयार चलने लगी है 
फागुन ऋतू आई है 
मोसम सुहाना होने लगा है 
डेसू के फूलों की लालिमा छाई है         
प्रेमियों के अरमान मचलने लगे हैं 
वैवाहिक जोड़े भी नए रंग में रंगने लगे हैं
सबपे प्रेम रंग छाने लगा है
भवंरा भी फूलों पर मंडराने लगा है
चारों तरफ मस्ती सी  छाई है
लगता है नजदीक ही होली आई है
रंग ,गुलाल उड़ने लगे हैं
ढोल नगाड़े बजने लगे हैं
ठंडाई,गुझिया ,मिठाई बनने लगीं हैं 

घर घर में खुशियाँ मनने लगी हैं
                           चारों और उल्लास ,उमंग छाया है            
                       क्योंकि होली जैसा प्यारा त्यौहार आया है 
                                सारे गम और परेशानियां भूल जाओ 
                             इस रंगों के त्यौहार में खो जाओ 
                              दुश्मन को भी दोस्त बनाओ
                           प्यार से रंग लगाकर गले लगाओ 
ये त्यौहार ही हमारी भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं
इसीलिए ये हमारे दिल के बहुत करीब हैं
जो प्यार और अपनापन की सीख सिखाते हैं 
दुश्मन को भी दोस्त और परायों को भी अपना बनाते हैं 
हमें इन्हें ख़त्म नहीं होने देना है 
गर्व से इसके बारे में नई पीढ़ी को बताना है     

Happy holi 


      
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यज्ञ में पशु बलि पर एक बहस निरामिष ब्लॉग पर

शाकाहारी भाइयों को यह गवारा नहीं है कि कोई यह कहे कि वैदिक यज्ञों में पशु बलि होती थी.
निरामिष ब्लॉग पर एक पोस्ट देखिये :

ऋषभ कंद - ऋषभक का परिचय ।। वेद विशेष ।।


इस पर यह कहा गया है:

पूछने वाले ने तो पहले यह पूछा था कि-
<b>वह कौन सी औषधि है जिसके पैर , आंखें और 26 पसलियां हों ?</b>
### क्या इस न मिलने वाले "ऋषभक" के पैर , आंखें और 26 पसलियां हैं ?
### अगर नहीं हैं तो फिर यह "ऋषभक" कहाँ हुआ ?
‘आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्राचीन कर्मकांड के मुताबिक़ वह अच्छा हिंदू नहीं जो गोमांस नहीं खाता. उसे कुछ निश्चित अवसरों पर बैल की बलि दे कर मांस अवश्य खाना चाहिए.‘
(देखें ‘द कंपलीट वकर््स आफ़ स्वामी विवेकानंद, जिल्द तीन, पृ. 536)
इसी पुस्तक में पृष्ठ संख्या 174 पर स्वामी विवेकानंद ने कहा है ,
‘भारत में एक ऐसा समय भी रहा है जब बिना गोमांस खाए कोई ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं रह सकता था.‘

भाई साहब ब्राह्मणों पर हम कोई आक्षेप नहीं लगा रहे हैं बल्कि जो कुछ स्वामी विवेकानंद जी आदि बता रहे हैं उसी का उद्धरण हम यहां दे रहे हैं और आप ऐसा नहीं कह सकते कि उन्हें वैदिक संस्कृति का सही ज्ञान नहीं था।

यज्ञ में पशुओं के साथ व्यवहार

उदीचीनां अस्य पदो निधत्तात् सूर्यं चक्षुर्गमयताद् वातं प्राणमन्ववसृजताद्.
अंतरिक्षमसुं दिशः श्रोत्रं पृथिवीं शरीरमित्येष्वेवैनं तल्लोकेष्वादधाति.

एकषाऽस्य त्वचमाछ्य तात्पुरा नाभ्या अपि शसो वपामुत्खिदता दंतरेवोष्माणं
वारयध्वादिति पशुष्वेव तत् प्राणान् दधाति.

श्येनमस्य वक्षः कृणुतात् प्रशसा बाहू शला दोषणी कश्यपेवांसाच्छिद्रे श्रोणी
कवषोरूस्रेकपर्णाऽष्ठीवन्ता षड्विंशतिरस्य वड्. क्रयस्ता अनुष्ठ्योच्च्यावयताद्. गात्रं गात्रमस्यानूनं कृणुतादित्यंगान्येवास्य तद् गात्राणि प्रीणाति...ऊवध्यगोहं पार्थिवं खनताद् ...अस्ना रक्षः संसृजतादित्याह.
-ऐतरेय ब्राह्मण 6,7
अर्थात इस पशु के पैर उत्तर की ओर मोड़ो, इस की आंखें सूर्य को, इस के श्वास वायु को, इस का जीवन (प्राण) अंतरिक्ष को, इस की श्रवणशक्ति दिशाओं को और इस का शरीर पृथ्वी को सौंप दो. इस प्रकार होता (पुरोहित) इसे (पशु को) दूसरे लोकों से जोड़ देता है. सारी चमड़ी बिना काटे उतार लो. नाभि को काटने से पहले आंतों के ऊपर की झिल्ली की तह को चीर डालो. इस प्रकार का वह पुरोहित पशुओं में श्वास डालता है. इस की छाती का एक टुकड़ा बाज की शक्ल का, अगले बाज़ुओं के कुल्हाड़ी की शक्ल के दो टुकड़े, अगले पांव के धान की बालों की शक्ल के दो टुकड़े, कमर के नीचे का अटूट हिस्सा, ढाल की शक्ल के जांघ के दो टुकड़े और 26 पसलियां सब क्रमशः निकाल लिए जाएं. इसके प्रत्येक अंग को सुरक्षित रखा जाए, इस प्रकार वह उस के सारे अंगों को लाभ पहुंचाता है. इस का गोबर छिपाने के लिए जमीन में एक गड्ढा खोदें. प्रेतात्माओं को रक्त दें.

अब आप ख़ुद देख सकते हैं कि यह पशु का वर्णन है या किसी औषधि का ?
Link-
http://www.niraamish.blogspot.in/2011/11/mass-animal-sacrifice-on-eid.html

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चिरकुटानंद ब्लॉगर किसे कहते हैं ?, पुरस्कार वितरण विवाद

मनोज साहब ने ईनाम बांटने का काम शुरू किया। ईनाम उन्होंने कम को बांटा और ज़्यादातर को उन्होंने ‘चिरकुट‘ का खि़ताब दे दिया। कहते हैं कि जो ब्लॉगर प्रब्लेस शिखर पुरस्कार के लिए प्रविष्टि न भेजे या किसी के नाम का अनुमोदन न करें और हमारे पुरस्कार वितरण की समीक्षा करे तो वे ब्लॉगर ‘चिरकुटानंद‘ हैं। यह स्तर है प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ के सर्वेसर्वा के सोचने का, और इसके बावजूद वह चाहते हैं कि विद्वान हिंदी ब्लॉगर उनसे पुरस्कार पाने के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाएं।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ की पोस्ट पर उनकी टिप्पणियों में उनकी सोच का लेवल आप ख़ुद देखिए इस लिंक पर जाकर

ब्लॉगर्स को प्रब्लेस शिखर सम्मान मुबारक हो ! Prize

Khushdeep Sehgal said...

दो दोस्तों ने फलों के कारोबार का फैसला किया...एक संतरे का टोकरा लेकर बैठ गया...एक केले का...दोनों ने फैसला किया सिर्फ कैश बिक्री करेंगे, उधार का कोई काम नहीं...थोड़ी देर बाद संतरे वाले को भूख लगी, उसने दो का सिक्का केले वाले को देकर केला लेकर खा लिया...केले वाले ने कहा, चलो बोहणी तो हुई...शाम तक दोनों के टोकरे खाली हो गए...पास ही संतरे और केले के छिलके के ढेर लग गए थे...दोनों ने कहा, चलो बिक्री तो बहुत बढ़िया हुई...अब कैश गिन लिया जाए...लेकिन ये क्या दोनों के पास कुल मिलाकर वो दो का सिक्का ही निकला...पूरा दिन वो एक दूसरे से कैश ले लेकर खुद ही सारे संतरे और केले चट कर गए थे....
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (32) Gayatri Mantra





बलोगर्स मीट वीकली (32)
सबसे पहले मेरे सारे ब्लॉगर्स साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम /आप सभी का इस ब्लॉगर्स मीट में स्वागत है /आप सब जरुर पधारिये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप सभी इस मंच से जुड़े रहें यही कामना है /आभार /

अनवर जमालजी की रचनाएँ

गायत्री मंत्र रहस्य भाग 1 The mystery of Gayatri Mantra 1


ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो
देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्.

गायत्री मंत्र को वेदमाता कहा जाता है। जैसे बच्चे का आधार उसकी माता होती है वैसे सारे वेद का आधार गायत्री मंत्र है। जिसने गायत्री के रहस्य को समझ लिया। वास्तव में वही वेद के रहस्य को भी समझ सकता है...
...अब गायत्री मंत्र का एक शाब्दिक अनुवाद भी पहली बार प्रकट हुआ है। यह अनुवाद आप भी देखिए -

हम परमेश्वर के सूर्य के उस वरणीय प्रकाश का ध्यान करें जो हमारी बुद्धियों को प्रेरित करे।

अब मंच की पोस्ट्स

अयाज अहमदजी की रचना

कब्ज (कांस्टीपेशन) का इलाज.

अनियमित खान-पान के चलते लोगों में कब्ज एक आम बीमारी की तरह प्रचलित है। यह पाचन तन्त्र का प्रमुख विकार है।

प्रेरणा अर्गलजी की रचना

भविष्य का सपना


मन पखेरू उड़ने लगा है
नए नए सपने संजोने लगा है

मंच के बाहर की पोस्ट

"कुछ तराने नये मचलते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्रीजी 'मयंक')

बेक़रारी के खाद-पानी से,
कुछ तराने नये मचलते हैं।
सदाजी का सद्विचार

मनोज कुमारजी की रचना


सूफ़ी दर्शन-

अल्लाह अजन्मा और अनश्वर है। उसके अलावा जो कुछ है सब परिवर्तनशील और नश्वर है। वह रचयिता है और सभी जीव उसी की एक रचना है।
अमरेन्द्र शुक्ल " अमर" जी की रचना

मेरा शहर




मदमस्त हवाओ से भरा
ये मेरा शहर
आज मेरे लिए ही बेगाना क्यू है
हर तरफ
कैलाश सी.शर्माजी की रचना

जब ढाई आखर न जानो


आए हमको ज्ञान सिखाने,
ऊधो प्रेम मर्म क्या जानो.

पोथी पढ़ना व्यर्थ गया सब
जब ढाई आखर न जानो.
महेंद्र श्रीवास्तव जी की रचना

आसान नहीं है गुंडाराज की वापसी ...

यूपी चुनाव की सरगरमी बढ़ती जा रही है,
सभी लोग अपनी अपनी तरह से चुनाव
नतीजों को लेकर कयास लगा रहे हैं।
चन्द्र मोलेश्वर प्रशादजी की रचना

बैकुंठ नाथ पेशे से वास्तुविद भले ही हों, पर हृदय से
एक रचनाकार हैं जिनकी अब तक सात पुस्तकें
प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें उनके गीतों, कविताओं
और कहानियों की अभिव्यक्ति हुई है।
साधना वैदजी की माँ जी श्रीमती ज्ञानवती सक्सेनाजी "किरण"की रचना

मंथर गति से मलय पवन आ सौरभ से नहला जाता , कुहू-कुहू करके कोकिल जब मंगल गान सुना जाता !
साधना वैदजी कीरचना

चलो चलें माँ .... ( एक लघु कथा )



नन्हा लंगूर डिम्पी अपने कान में उंगली डाले ज़ोर ज़ोर से चीख रहा था ! जिस पेड़ पर उसका घर था उसके नीचे बहुत सारे बच्चे होली के रंगों से रंगे पुते ढोल बजा बजा कर हुड़दंग मचा रहे थे !

राजेश कुमारीजी की रचना
बीत गए बरस तिरसठ
हुआ देश स्वतंत्र
तन से नंगा हाथ में तिरंगा
कैसा ये गणतंत्र
शहरयार जी की रचना

है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़


लबरेज़ है शराबे हक़ीक़त से जामे हिन्द
सब फ़लसफ़ी हैं खि़त्ता ए मग़रिब के राम ए हिन्द
ब्लॉग की ख़बरें पर

सूफ़ी दर्शन - Manoj कुमार



सूफ़ी दर्शन-2 वाजिबुल वुजूद अल्लाह अजन्मा और अनश्वर है। उसके अलावा जो कुछ है सब परिवर्तनशील और नश्वर है। वह रचयिता है और सभी जीव उसी...

लम्बे बच्चे कैसे पैदा करें ? Height





1- लंबे बच्चे चाहिए तो दूर की बीवी लाएं BBCसुनने में यह बात अजीब-सी लग सकती है, लेकिन पोलैंड के वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पति...

क्या मैथुन के लिए हमें जानवर हो जान चाहिए ? -राम बंधु तिवारी





मानव प्राणी द्वारा विचार कर मैथुन करना ही, सभी प्राणियों में श्रेष्ठता प्रदान करती हैं|आख़िर मनुष्य और जान...

धन्यवाद !

By

धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! आपके प्यार की बदौलत हमने हिन्दी ब्लॉगिंग ...
रोजाना सिर्फ ये दो काम कर लेंगे तो बीमार नहीं पड़ेगे - आजकल बदलते मौसम के साथ तबीयत बिगड़ जाना एक आम समस्या है। सर्दी, खांसी, पेट व बुखार जैसी समस्याएं कमजोर इम्युनिटी पॉवर के कारण बदलते मौसम के साथ शरीर पर त...
WAQT KI AHMIYAT - By NISAAR NADIADWALA watch full Peace TV urdu talk - Nisar NadiadwalaNisar Nadiadwala has been a regular and familiar speaker at Islamic Research Foundation (IRF) auditoriums since the p...

कल्कि अवतार का मत करो इन्तजार

मदन मोहन बाहेती घोटू



नैतिकता का सर्वोच्च शिखर...

लेखक नकीबुल हक
नैतिकता को सर्वोच्च शिखर पर पहुचाने के लिए आया हूं आज से 1400 सौ वर्ष पहले आलमें इंसानियत पर जुल्मों सितम का राज चलता था। लोग बेटियों को पैदा होते ही जिंदा दफन कर देते थे। बात बात पर तलवारें निकल आया करती थीं तथा औरतों को पैर की जूती समझा जाता...
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जबर्दस्त हो जाएगी याददाश्त अपनाएं ब्रह्मी व बादाम का ये अचूक उपाय




कमजोर याददाश्त को बुढ़ापे की निशानी माना जाता है, लेकिन बार-बार भूलने की समस्या केवल बूढ़े लोगों के साथ ही नहीं बल्कि जवान लोगों के साथ भी होती है। दरअसल भूलने का मुख्य कारण एकाग्रता की कमी है। स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए दिमाग को सक्रिय रखना आवश्यक है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है कमजोर स्मरण शक्ति आपके लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, तो नीचे लिखे घरेलू उपायों को जरुर अपनाएं।
- अखरोट स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। 20 ग्राम अखरोट और साथ में 10 ग्राम किशमिश रोजाना लेना चाहिये।
- अलसी का तेल आपकी एकाग्रता बढाता है, आपकी स्मरण शक्ति तेज करता है तथा सोचने समझने की शक्ति को भी बढ़ाता है। नियमित रूप से अलसी के तेल के सेवन से आपको मष्तिष्क सम्बन्धी कोई विकार नहीं रहेगा।
- ब्रह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जड़ी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके 7 पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ये दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।
- बादाम 9 नग रात को पानी में गलाएं। सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बना लें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें। इसमें 3 चम्मच शहद भी डालें। जाने पर उतारकर मामूली गरम हालत में पीएं। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें।
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भविष्य का सपना

भविष्य का सपना 

मन पखेरू उड़ने लगा है 
नए नए सपने संजोने लगा है 
दिल में एक नया एहसास उमंगें ले रहा है 
नई पीढ़ी का भविष्य भी अब सुनहरा हो रहा है 
एक जिम्मेदारी जो अब अपनी मंजिल पा रही है 
आँखों में नए-नए सपने और अरमान जगा रही है 
जल्द ही वो दिन आयेगा जब वो अपनी मंजिल पा जाएगी 
अपने नए संसार में सुखी ,खुश और  मस्त हो जाएगी 
उसके सुख में ही हम अपना सुख पा जायेंगे 
उसके उल्लास और उमंग में हम भी खो जायेंगे 
जब वो अपनी अगली पीढ़ी को लेकर खुशी-ख़ुशी आएगी  
उसकी मीठी मीठी और प्यारी किलकारी से घर गुन्जाएगी  
तो ऐसा लगेगा की जीवन सम्पूर्ण हो गया 
सारे जहाँ का सुख हमको मिल गया 
जिम्मेदारियां जब अपनी मंजिल पा जाएँगी 
अपनी सुखी और प्यारी दुनिया बसाएंगी 
फिर हम अपने कर्तव्यों से मुक्त हो जायेंगे 
एक दूसरे में पूरी तरह खो जायेंगे 
अपनी अधूरी इच्छाओं और शोकों को पूर्ण करेंगे 
और सिर्फ और सिर्फ एक दुसरे के लिए जियेंगे 
मन पखेरू उड़ने लगा है 
नए-नए सपने संजोने लगा है 
 
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कब्ज (कांस्टीपेशन) का इलाज.

अनियमित खान-पान के चलते लोगों में कब्ज एक आम बीमारी की तरह प्रचलित है। यह पाचन तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल निष्कासन की फ़्रिक्वेन्सी अलग अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को दिन में २-३ बार होता है। कुछ लोग हफ़्ते में २ य ३ बार मल विसर्जन करते हैं। ज्यादा कठोर,गाढा और सूखा मल जिसको बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे यह कब्ज रोग का प्रमुख लक्छण है।ऐसा मल हफ़्ते में ३ से कम दफ़ा आता है और यह इस रोग का दूसरा लक्छण है। कब्ज रोगियों में पेट फ़ूलने की शिकायत भी साथ में देखने को मिलती है। यह रोग किसी व्यक्ति को किसी भी आयु में हो सकता है हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज रोग की प्राधानता पाई जाती है।


कब्ज निवारक नुस्खे इस्तेमाल करने से कब्ज का निवारण होता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी बचाव हो जाता है--


१---कब्ज का मूल कारण शरीर मे तरल की कमी होना है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। अत: कब्ज से परेशान रोगी को दिन मे २४ घंटे मे मौसम के मुताबिक ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। इससे कब्ज रोग निवारण मे बहुत मदद मिलती है।


२...भोजन में रेशे की मात्रा ज्यादा रखने से कब्ज निवारण होता है।हरी पत्तेदार सब्जियों और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।


३... सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।


४..पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।


५.. रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।




६..इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।


७..नींबू कब्ज में गुण्कारी है। मामुली गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें। जरूर लाभ होगा।


८..एक गिलास दूध में १-२ चाम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।


९...एक कप गरम जल मे १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन मे ३ बार पीना हितकर है।


१०.. जल्दी सुबह उठकर एक लिटर गरम पानी पीकर २-३ किलोमीटर घूमने जाएं। बहुत बढिया उपाय है।


११..दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।


१२..अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जीत होता है।


१२..अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।


13..एक और बढिया तरीका है। अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी मे २० ग्राम के करीब यह पावडर डालें और ३-४ घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है।


१४.. पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।


१५.. अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।


16.. मुनका में कब्ज नष्ट करने के तत्व हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है।

‘जान है जहान है‘ ब्लॉग से शुक्रिया के साथ पेश है.
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (31) Carrier in Homoeopathy


ब्लॉगर्स मीट वीकली (31)

सबसे पहले मेरे सारे ब्लॉगर साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम / आप सभी का इस ब्लोगर्स मीट में स्वागत है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये /आप सभी का आशीर्वाद और स्नेह इस मंच को मिलता रहे यही कामना है /आभार /

आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स

अनवर जमालजी की रचनाएँ

अयाज अहमदजी की रचना

मंच के बाहर की पोस्ट

एक किरण अब भी बाकी है........ (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्रीजी ‘मयंक')

पिछले कई वर्षों से मैं दो-मंजिले पर रहता हूँ। मेरे कमरे में तीन रोशनदान हैं। उनमें जंगली कबूतर रहने लगे थे।

कुमार राधारमण जी की रचना

शकर का हिसाब

इस तरह जो लोग "मीठे केशौकीन" नहीं होते,

वे भी अपने दिनभर के आहार में कई तरह से

शकर ले लेते हैं। सिर्फ कहने की बात रहती है कि

"हम ज़्यादा मीठा नहींखाते।"

कैलाश सी.शर्माजी की रचना
घर की अलगनी के दो छोर जोड़े रहे दो दीवारों की दूरी, दूर हो कर भी बने रहे

एक ही सूत्र के दो छोर

साधना वैदजी की रचना
फागुन का मास तो
हर बरस आता है ,
लाल, पीले,
हरे, नीले
आशा सक्सेनाजी की रचना

दोशी कौन

अर्श से ज़मीन तक
वजूद है तेरा
होता सुखद अहसास
सानिध्य पा तेरा
महेश्वरी कनेरीजी की रचना

खाली पन्ने

बहते अश्रु जल ने शायद सब अक्षर मिटा दिए हैं
तभी तो जीवन की किताब के कुछ पन्ने खाली रह गए हैं
रविकरजी की रचना

मनमे अतीत की याद लिए फिरते है

निज अंतर में उन्माद लिए फिरते हैं,
उन्मादों में अवसाद लिए फिरते हैं,
अंदर ही अन्दर झुलस रही है चाहें,
मनमे अतीत की याद लिए फिरते है।
संगीता स्वरुपजी की रचना

उन्मादी प्रेम

वन्दना जी की रचना
उफनते समुद्र की
लहरों सा
उन्मादी प्रेम
चाहता है
पूर्ण समर्पण
चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद जी की रचना

मजाज़ की कविता

Mother calms the sad daughter  Stock Photo - 9626488
अतुल श्रीवास्तवजी की रचना

गर्व की बात है... हम उस देश में पैदा हुए, जिस देश की मिट्टी को माथे पर लगाया जाता है। गर्व की बात है..... हम उस देश में पैदा हुए, जिस देश के संत महात्‍माओं की सीखों से पूरी दुनिया रौशन है।
चौंकिए नहीं साहब! यह बलात्कार वैसा नहीं है जो आप समझ रहे हैं और डॉक्टर भी वो नहीं जिसे आप जान रहे हैं। यह शब्दों के साथ बलात्कार है और बलात्कारी हैं पी-एच.डी. उपाधिधारी डॉक्टर

Mahesh Barmate

आपके लिए कुछ लिंक भेज रहा हूँ..
इन्हें ब्लॉगर्स मीट में शामिल करियेगा...

१ - इंडियन आइडल ६ में शामिल होयें - जानकारी
२ - एप्पल आई फ़ोन के आई ओ एस ५ में हिंदी की-बोर्ड सक्रिय करें -

भारतीय नारी सुकन्या के विचार आज कितने प्रासंगिक हैं ? Sukanya

औरत का दूसरा विवाह होने के विषय में और पुत्र होने के विषय में सुकन्या के विचार क्या आज भी प्रासंगिक हैं ?

‘आर्य भोजन‘ ब्लॉग पर



  • कलौंजी-एक रामबांण दवा kalonji


    बथुआ तीनों दोषों को शांत करता है

    सेक्स पावर बढ़ानी है तो लहसुन, काले चने, सफेद मुसली खाओ

    ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर

    पुरस्‍कार और सम्‍मान की परम्‍परा -Ajit Gupta



    ‘आपका सूत्रधार‘ एक नया ब्लॉग सामने आया है और उसने ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ का लिंक अपनी एक ताज़ा पोस्ट पर दिया है जो कि ‘प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ‘

    ब्लॉगर्स को प्रब्लेस शिखर सम्मान मुबारक हो ! Prize



    Khushdeep Sehgal said... दो दोस्तों ने फलों के कारोबार का फैसला किया...एक संतरे का टोकरा लेकर बैठ गया...एक केले का...

    निरामिष ब्लॉग Niraamish.blogspot.in



    वेद और शाकाहार के प्रचार में जुटा है ...इस पर एक अच्छी चर्चा चल रही है, जिसे देखना सभी ब्लॉगर्स के लिए एक सुखद अनुभव रहेगा।

    ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक Gorakh Dhandha



    भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक रोज़ी रोटी की तो क्या यहां हलवा पूरी की भी कोई समस्या

    किस उम्र में क्या खाएं महिलाएं ? Age



    हर 10 साल में औरतों में मेटाबॉलिज्म रेट 2 से 8 पर्सेंट कम हो जाता है। इसका मतलब है कि 25 की उम्र में आपको जितनी कैलरी चाहिए थी, 35 की उम्र

    ‘कमेंट्स गार्डन‘ पर
    च्यवन ऋषि ने ताज़ा आंवले खाए और वे जवान हो गए


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