दाल में काला है प्रधानमंत्री जी...

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  • Thursday, September 15, 2011
  • by
  • महेन्द्र श्रीवास्तव
  • in


  • आज बात करेंगे देश को शर्मशार करने वाले एक स्पोर्टस इवेंट की। ये है फार्मूला वन इंडियन ग्रां प्री प्रतियोगिता। इसका आयोजन अगले महीने यानि अक्टूबर में दिल्ली के पास ही ग्रेटर नोएडा में होना है। आपको ये जानना जरूरी है कि इस रेस को सिर्फ अपने देश में ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में भी अभी तक "खेल" का दर्जा हासिल नहीं है, ये एक "मनोरंजक आयोजन" भर है। इस रेस का आयोजन पहली बार देश में हो रहा है। इसका आयोजन कराने वाली कंपनी के हाथ बहुत लंबे हैं और सत्ता के गलियारे में इसकी धमक है। यूपी की सरकार तो इसके ऊंगलियों के इशारे पर नाचती ही है, अब तो लगता है कि केंद्र सरकार भी दूध की धुली नहीं है।
    चलिए आपको पूरा मामला समझाते हैं। इस रेस के लिए बहुत ज्यादा सामान विदेशो से यहां लाया जाना है। यहां तक की जिस ट्रैक पर ये रेस होनी है, वो ट्रैक भी विदेशों से यहां लाई जानी है। इसके अलावा कई तरह के उपकरण भी लाए जाने है। इस पर कस्टम अधिकारियों ने आयोजकों को बता दिया कि उन्हें लगभग 150 करोड रुपये कस्टम ड्यूटी का भुगतान करना होगा। वैसे तो ये भुगतान आयोजकों को और जो प्रतियोगी आ रहे हैं, उन्हें अपनी कार और अन्य सामान का कस्टम ड्यूटी देना है, लेकिन भारी भरकम ड्यूटी से प्रतियोगियों ने आयोजकों से कहा है कि अगर ड्यूटी माफ नहीं होती है तो उनका इस प्रतियोगिता में भाग लेना मुश्किल हो सकता है। चूंकि आयोजकों ने भारी भरकम कीमत में इसकी टिकटें बेच दी हैं, इसलिए वो नहीं चाहते कि किसी तरह ये आयोजन खटाई में पडे।
    बस फिर क्या था, आयोजकों ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर डोरे डालने शुरू कर दिए। खेल मंत्रालय का ये मामला नहीं है, क्योंकि फार्मूला वन प्रतियोगिता को देश में खेल का दर्जा हासिल ही नहीं है। फिर भी मंत्रालय ने एक एनओसी जारी कर दी। इसके आधार पर कस्टम विभाग ने लगभग 150 करोड की ड्यूटी माफ कर दी है।
    आइये इसका नियम भी बता दूं। नियम के मुताबिक राष्ट्रीय महत्व वाले खेल आयोजनों के लिए खेल मंत्रालय एक प्रमाण पत्र जारी करता है, इसके आधार कस्टम विभाग सीमाशुल्क में छूट देता है। राष्ट्रमंडल खेलों और क्रिकेट विश्वकप के दौरान ये प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, इसके आधार पर कुछ छूट दी गई थी। अब बडा़ सवाल ये है कि जब फार्मूला वन प्रतियोगिता को देश में खेल का दर्जा हासिल ही नहीं है, तो खेल मंत्रालय ने ये प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया। इतना ही नहीं देश में  फार्मूला वन  रेस का राज्य या फिर राष्ट्रीय स्तर पर कोई आयोजन भी नहीं होता है। फिर इस रेस को किस आधार पर राष्ट्रहित में माना जा रहा है।
    इस मामले में खेल मंत्रालय और सीमा शुल्क विभाग पर उंगली उठने लगी तो बचाव में उतरे अधिकारियों का कहना है कि इसमें ज्यादातर सामान जो यहां लाया जाएगा, वो प्रतियोगिता खत्म होने के बाद वापस भेज दिया जाएगा। कुछ ऐसे सामान हैं जो यहां इस्तेमाल हो जाएंगे, उन पर लगभग आठ करोड़ रुपये सीमाशुल्क लगना है, वो आयोजकों से वसूला जाएगा। चलिए मैं कस्टम विभाग की इस दलील को स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन इन्हीं अफसरों से मेरा एक सवाल है। क्रिकेट विश्वकप के दौरान दुबई से यहां लाए गए "वर्ल्ड कप" को इन्हीं निकम्में अफसरों ने मुंबई एयरपोर्ट पर रोक लिया था और 20 लाख रुपये सीमा शुल्क की मांग की। आयोजकों ने उस समय भी बताया था कि ये "वर्ल्ड कप"  विजेता टीम को दी जाती है, उसके बाद इसे भी यहीं से आईसीसी के दुबई मुख्यालय वापस भेज दिया जाएगा। लेकिन तब इन्होंने बिना शुल्क के कप को एयरपोर्ट से बाहर नहीं जाने दिया और भारत को "नकली वर्ल्ड कप" कप दिया गया। यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि क्रिकेट को देश में खेल का दर्जा भी हासिल है।

    150 करोड  रुपये माफ करने के पीछे मुझे तो दाल में कुछ काला नजर आ रहा है। अभी मैं ये नहीं कह सकता कि इसमें खेल मंत्रालय के साथ किन किन मंत्रियों और अफसरों का हाथ है, लेकिन पक्का भरोसा है कि इस गोरखधंधे में केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों के मंत्री और अफसर शामिल हैं।
    आपको यह भी बता दूं कि कस्टम विभाग और भी तमाम सहूलियत इन आयोजकों को दे रहा है। मसलन एयर कार्गो से जो भी सामान आएगा, उसे एयरपोर्ट पर खोल ये अफसर चेक नहीं करेंगे। बल्कि कुछ अफसरों की तैनाती ग्रेटर नोएडा के स्पोर्टस सिटी में की गई है, वहां कार्गो को खोले जाने के दौरान चेक किया जाएगा। भाई ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
    अगर हम ये कहें कि फार्मूला वन रेस को देश में बढावा देने के लिए ऐसा किया जा रहा है तो आपको हैरानी होगी इसके टिकट के दाम सुनकर। इसमें 35 हजार का टिकट है, ये टिकट लेने पर आप को वीआईपी सुविधा होगी। यहां पर आपके लिए लंच और दारू का इंतजाम भी होगा, जो आप अतिरिक्त पैसे देकर ले सकते हैं। हां अगर आप तीन टिकट लेते हैं तो एक कार पार्किंग भी मिलेगी और दो टिकट लेने पर एक बाइक की पार्किंग आपको मिलेगी। इसके बाद जनरल टिकट हैं, जिसकी कीमत 12,500 से लेकर 2500 तक है। यहां आपको किसी तरह की खास सुविधा नहीं होगी। आप आसानी से समझ सकते हैं कि इस कीमत पर टिकट से क्या आम आदमी की पहुंच यहां हो सकती है। प्रधानमंत्री जी मुझे तो दाल में काला नजर आ रहा है।
    मित्रों इस पूरे आयोजन में बडे़ बडे़ उद्योगपति, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री और अफसरों की सांठ-गांठ है। इस पर मैं आगे भी आपको खास जानकारी देता रहूंगा। मैं चाहता हूं कि इस विषय पर आप सभी ब्लागर साथी भी, नई जानकारी के साथ ब्लाग पर जरूर उपस्थिति दर्ज कराएं।

    3 comments:

    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

    काली दाल में काले पत्थर जल्दी दिखाई नहीं देते। इसीलिए तो उन्हे काली दाल बहुत पसंद है!

    prerna argal said...

    बहुत`सही जानकारी दी आपने /हमारे देश में सब कुछ संभव है /जनता महंगाई के मार से मर रही है, सरकार विदेशी कंपनियों के १५० करोड़ का टैक्स माफ कर रही है /पता नहीं क्या घोटाला है /आपका धन्यवाद की आपने इतने अच्छे विषय की जानकारी हम सबको दी /
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है /जरुर आइये


    www.prernaargal.blogspot.com

    mahendra srivastava said...

    आद. शास्त्री जी, प्रेरणा जी आपको ये लेख अच्छा लगा, बहुत बहुत आभार..

    सच तो ये है कि मुझे पता है कि फार्मुला वन रेस के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। मैने सिर्फ इसलिए लिखा कि लोगों को आसान भाषा में इसके बारे में जानकारी दी जा सके। इसीलिए इस रेस से संबंधित तमाम टेक्नालिटीज को मैने इसमें शामिल नहीं किया है।
    बहरहाल आप सबको ये बताना जरूरी समझता हूं कि खेल मंत्रालय अपने फैसले पर दोबारा रिव्यू कर रहा है, हो सकता है कि मंत्रालय द्वारा जारी एनओसी को वापस ले लिया जाए।

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