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कुंडलिया ----- दिलबाग विर्क
बेटी मरती गर्भ में ,हम सब जिम्मेदार
चुप्पी धारण की तभी ,होता अत्याचार .
होता अत्याचार , हुई प्रताड़ित नारी
वेदों का है देश ,लगाते कलंक भारी .
कहत 'विर्क' कविराय , हो रही इससे हेठी
कहलाओ इन्सान , मारो गर्भ में बेटी .
* * * * *
हेठी --- अपमान ,बेइज्जती
* * * *
उच्चारण: "गजल और गीत क्या है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
उच्चारण: "गजल और गीत क्या है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"): "हृदय की बात कहने को,
कलम अपना चलाया है।।"
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कलम अपना चलाया है।।"
दोस्ती का पैगाम लेकर अमन सुकून की दुनिया बनाने निकले हैं भाई संजय भास्कर
जी हाँ दोस्तों एक प्यारे से ,समझदार से ,राष्ट्रप्रेम की भावना रखने वाले ब्लोगर संजय भास्कर दोस्ती का पैगाम लेकर अमन सुकून की दुनिया बनाने के लियें निकल पढ़े हैं और वोह अपनी इस कोशिश में काफी हद तक कामयाब भी हो रहे हैं खुदा करे एक रंगीन ,अमन सुकून की खुशहाल दुनिया बनाने का उनका सपना जल्दी ही साकार हो जाए .
भाई संजय भास्कर हरियाणा के फतेहाबाद में पैदा हुए वहीं पले बढ़े और अब वहीं के होकर रह गये हैं लेकिन एक छोटी सी जगह पर बैठ कर भाई संजय दुनिया और ब्लोगिंग में खुशियों के रंग भर रहे हैं यह चाहते हैं के दर्द भरे चेहरे सामने से हट जाएँ रोते बिलखते लोग रोना धोना छोड़ कर मुस्कुराने के आदतन हो जाएँ और इसी सोच से प्रभावित होकर संजय भास्कर ने भास्कर यानि सूरज की रौशनी फेलाने के लियें ब्लोगिंग की दुनिया में प्रवेश किया और उन्होंने खुद के ब्लॉग का नाम अपनी सोच के मुताबिक ...आदत मुस्कुराने की ......रख डाला . अपने इस ब्लॉग के माध्यम से संजय भाई दुनिया को दोस्ती का पाठ पढ़ाने निकल पढ़े हैं , और इनका नारा है दोस्त बनाओ दुनिया बनाओ सुकून खुद बा खुद मिल जाएगा और जब यह दोनों चीजें हमारे पास होंगी तो अमन चेन और खुशहाली खुद बा खुद साथ आया जायेगी .
भाई संजय विनम्रता से सभी ब्लोगर्स से किसी ना किसी तरीके से एक बार तो मिलने का प्रयास करते हैं ,वोह ब्लोगिग्न के कुछ टिप्स देते हैं तो कई टिप्स भाई ब्लोगरों से खुद के सूधार के लियें लेने से भी नहीं चुकते हैं यही वजह रही है के २३३ ब्लॉग लिख कर इन जनाब ने ८३०६ लोगों का टिप्पणियों के माध्यम से प्यार समेटा है .
टेलीकम्युनिकेशन का काम कर रहे भाई संजय कस्टमर केयर सर्विस का काम कर रहे हैं जो ब्लोगिंग की दुनिया में भी मधुरता घोल रहे हैं , इन्हें नई नई किताबे पढने और संगीत सुनने का शोक है , नई नई खोज करना इनकी आदत है और एक नेक इंसान की तरह नेक नियति रखते हुए सभी को प्यार बांटने का काम करने वाले भाई संजय भास्कर जब राजनीती पर चिन्तन लेख लिखते हैं तो एक कुशल सधे हुए राजनितिक लगते हैं ,भाई संजय जब को रिपोर्टिंग या हाल पर टिप्पणी लिखते हैं तो ऐसा लिखता हैं के एक साहित्यकार सधे हुए अल्फाजों में अपने विचारों की खुशबु आलेख के माध्यम से ब्लॉग पर बिखेर रहा है ,भाई संजय जब कोई गज़ल, कोई कविता ,कोई दर्शन ब्लॉग पर लिखते हैं तो साहित्य के निर्धारित मापदंडों को यह नहीं भूलते हैं और खान कोनसा मीटर कोंसी बहार रदीफ़ काफिया लगेगा इसका भी पूरा ध्यान रखते हैं लेकिन इनके हर ब्लॉग में एक जिंदगी ,एक रौशनी एक रंग होता है और विभिन्न ब्लोगों के विचारों से इनकी ब्लोगिंग सतरंगी हो गयी है भाई संजय खुद भी जिंदगी के रंगों को समेटकर जिंदगी को खुबसूरत सतरंगी बनाने में जुटे हैं और वोह कामयाब ही हो रहे हैं यही वजह है के आज हर ब्लोगर चाहे किसी भी विचार धारा का ,किसी भी धर्म का प्रमोटर या किसी भी अधर्म का रक्षक हो वोह संजय भाई और उनकी लेखनी को दिल से सलाम करता है ............इसीलियें सभी को आदत मुस्कुराने की रखना चाहिए और इस आदत को अपनाना चाहिए ..... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
बिना स्याही के उसने क्या लिख दिया ......
बिना स्याही के उसने क्या लिख दिया ......
एक दिन
उसने
बढ़ी मासूमियत से
मेरी
हथेली पर
अपनी
नाज़ुक सी
उँगलियों से
गुदगुदाते हुए
लिखा .........
मुझे प्यार है तुमसे
हाँ मुझे
प्यार है तुमसे .....
जाने
केसी स्याही थी वोह
मेरी हथेली पर
वोह लफ्ज़
दिखे भी नही
मिटे भी नहीं
बस
यह लिखावट
ना जाने क्यूँ आज भी
मेरे दिल पर नक्श हो गयी है ...............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
उसने
बढ़ी मासूमियत से
मेरी
हथेली पर
अपनी
नाज़ुक सी
उँगलियों से
गुदगुदाते हुए
लिखा .........
मुझे प्यार है तुमसे
हाँ मुझे
प्यार है तुमसे .....
जाने
केसी स्याही थी वोह
मेरी हथेली पर
वोह लफ्ज़
दिखे भी नही
मिटे भी नहीं
बस
यह लिखावट
ना जाने क्यूँ आज भी
मेरे दिल पर नक्श हो गयी है ...............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
गीतकार तो मिल जाए लेकिन दिमाग से पहले जातिवाद और राजनीति तो निकालें ढूँढने वाले Bihar song
अभी अभी एक जगह यह पढ़ा
'पहले यह कहा जा रहा था कि बिहार के लिये एक गीत और प्रार्थना की खोज की जायेगी। गीत और प्रार्थना को बिहार सरकार द्वारा बिहार दिवस के मौके पर पूरे शान के साथ रिलीज किया जाना था। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मानव संसाधन विकास विभाग को 1800 गीत मिले। परंतु, एक भी रचना इस काबिल नहीं कि वे बिहार गीत और प्रार्थना का दर्जा हासिल कर सकें। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाबा नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, रामधारी सिंह दिनकर और आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की धरती में अब कोई भी ऐसा रचनाकार नहीं मिला, जो एक अदद गीत लिख सके। हालांकि राज्य सरकार की ओर से दुबारा गीतकारों और साहित्यकारों को आमंत्रित किये जाने की योजना को अंजाम दिया जा रहा है।'इस क्या प्रतिक्रिया दें और क्या कहें ?
iltijaa ek meri bhi maan lo yaaron
एक इल्तिजा एक सुझाव ................... .
आदरणीय बन्धुवर, ब्लोगर साथियों आज बढ़े ही दुखी मन से मुझे यह सब इल्तिजा करना पढ़ रही है और इस इल्तिजा के साथ साथ कुछ सुझाव भी देना पढ़ रहे हैं , मेरे भाइयों और बहनों, इन दिनों ब्लोगिंग में फिर से जिद और बहस के दोरान ब्लोगिंग की खुबसूरत दुनिया का स्वर्गिक सुख नरक में बदलता जा रहा है और इसे सिर्फ और सिर्फ आप और हम ही मिलकर रोक सकते हैं .
दोस्तों आप और में, यानि हम सब मिलकर अगर चाहें तो इस ब्लोगिंग की इस गंदगी, इस विकार को दूर कर सकते हैं , आज ब्लोगिग्न में कुछ गिनती के लोगों ने एक दुसरे की भावनाएं आहत कर ,एक दुसरे के धर्म का मजाक उढ़ा कर, कमियाँ निकाल कर, माहोल को सनसनीखेज़ बनाया जा रहा है पहले भी ऐसा हुआ है लेकिन शुक्र है खुदा का, के सभी भाइयों को सदबुद्धी आई और फिर वातावरण प्यार का बना , बिचारे का बना सद्भावनाए एक दुसरे के लियें एक दुसरे के दिल में पैदा हुईं , लेकिन कुछ दिनों से फिर इस खुबसूरत दुनिया को उजाड़ने के लियें माहोल फिर से बिगाड़ना शुरू कर दिया है एक दुसरे को निचा दिखने का प्रयास शुरू हो गया है एक दुसरे के धर्म की फजीहत कर वैमनस्यता भड़काई जा रही है यह सब तात्कालिक विचार हैं जो कुछ लोगों द्वारा केवल गुस्से में लिए गए निर्णय के तहत किया जा रहा है कुछ लोगों के इस गुस्से , बदले के इस भाव से सभी ब्लोगर सकते में हैं उनकी सांस थम सी गयी है और सभी लोग ब्लोगिंग की दुनिया में इस जहरीले धुंए से घुटन का सा माहोल होने से उकता गए हैं हालत यह हैं के गुटबाजियां बढ़ गयी हैं इस खतरनाक माहोल में अधिकतम ब्लोगर तटस्थ हैं लेकिन उनकी ख़ामोशी एक अपराध है इस माहोल को सहकर भी इसे सुधरने के प्रयास अगर नहीं किये जाते हैं तो भाई फिर तो हमें खुद के इन्सान होने पर भी शक होने लगता है एक जानवर एक कुत्ता एक दुसरे पर भोकता ही एक दुसरे पर हमला करता है से लहू लुहान करता है बस इसीलियें वोह जानवर कहलाता है और एक इन्सान छोटी मोटी मानवीय भूलों को नज़र अंदाज़ करता है जन बुझ कर अपराध करने वाले का सामूहिक विरोध करता है और हालात यहाँ तक होते हैं के उन्हें कानून के प्रावधानों के तहत दंडित भी करवाता ही .
दोस्तों इस माहोल में आज अगर हम हाथ पर हाथ धर कर बैठते हैं तो हम मानवता और राष्ट्रिता से ज्यादती कर रहे हैं देश का कानून है किसी को भी किसी के धर्म का अपमान करने का हक नहीं है कोई भी किसी के धर्म का मजाक उढ़ाकर या उसे निचा दिखाकर अगर भडकाऊ बात करता है तो उसे सजा देने का प्रावधान है और उसे सजा मिलना ही चाहिए , मेरी इल्तिजा है उन लोगों से जो मेरे छोटे या बढ़े भाई है गुस्से में आप खो बेठे हैं और देश के कानून को तमाशा बनाकर एक दुसरे के धर्म पर कीचड़ उछल रहे हैं लेकिन यह सब गंदगी अब ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है देश में साइबर कानून है और इंटरनेट की दुनिया में फर्जी आई डी बना कर या छदम नामों से फर्जी ब्लॉग बना कर अगर अपराध किया जाता है तो उन्हें पकड़ना मुश्किल काम नहीं है अगर पकड़ा जाता है तो कमसेकम सात साल और तीन लाख जुरमाना दंड है कोटा में कई कोचिंग छात्र इस मामले में गिरफ्तार हुए हैं और आज उनका जीवन इन मुकदमों के कारण बेकार हो गया है यह वोह बच्चे हैं जो कोटा में अपना भविष्य बनाने आये थे और सभी बच्चे प्रभावशाली लोगों के थे लेकिन यह लोग सभी राजनेतिक और साम दाम दंड भेद के बाद भी अपने इन बच्चों को अपराध से नहीं बचा सके हैं . अगर कोई यह समझे के देश के कानून के साथ खिलवाड़ कर कोई अपराध से बच जाएगा तो उसे देश के आतंकवादियों और गद्दारों का सच देखलेना चाहिए हमारा देश ऐसे लोगों को पकड़ने और दंड दिलवाने के लियें सक्षम है में नहीं कहता के हमारे किसी भी ब्लोगर भाई को दंड मिले लेकिन मेरा यह फर्ज़ है के कोई भी ब्लोगर कोई भी फर्जी आई डी बनाकर वैमनस्यता भडकाने का अगर प्रयास करता है तो मुझे और मेरे शांत बेठे भाइयों को इस बारे में विचार करना होगा मेरे भाइयों प्लीज़ इस वातावरण को फिर से सुधार लो फिर से भाई चारे और सद्भावना का माहोल बना लोग प्यार दो प्यार लो का नारा बुलंद कर लो और एक शांत भ्रस्ताचार मुक्त भारत के निर्माण में मददगार बनो अगर किसी ब्लोगर की लेखनी से किसी की भावनाएं आहत हुई है तो में उन सभी की तरफ से आप सभी भाइयों से माफ़ी मांगता हूँ लेकिन प्लीज़ मेरी इल्तिजा स्वीकार करे और ब्लोगिंग का दम घोटू वातावरण फिर से प्यार और भाईचारे सद्भाव की फुहाल्र से मोहम्ब्बत की खुशबु से महका दो ............. अकह्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
कुंडलिया ----- दिलबाग विर्क
बुराई रही जीत है , अच्छाई की हार
सब पासे उल्टे पड़े ,कलयुग की है मार .
कलयुग की है मार ,रावण राम पे भारी
हार रहा है धर्म , जीतती दुनियादारी .
बुराइयां छोड़कर , तुम सीखना अच्छाई
कहत ' विर्क ' कविराय , जगत से मिटे बुराई .
* * * * *
निर्भीकता और सत्यता के साथ ब्लोगिंग की दुनिया को स्वच्छ संदेश दे रहे हैं भाई सलीम खान
निर्भीकता और सत्यता के साथ ब्लोगिंग की दुनिया को स्वच्छ संदेश दे रहे हैं भाई सलीम खान
निर्भीकता और सत्यता के साथ ब्लोगिंग की दुनिया को स्वच्छ संदेश देने वाले सलीम भाई सच बोलने और सच लिखने के आदतन हैं और वोह जेसा व्यवहार खुद करते हैं ऐसा ही दूसरों से भी चाहते हैं अगर कोई सच का उपहास उढाये या फिर सच से मुंह फेर ले तो फिर भाई सलीम उससे निपटना अच्छी तरह जानते हैं .
भाई सलीम का विचार है के हर आदमी को अपने धर्म के प्रति कट्टर होना चाहिए और मानवता तभी जिंदा रह सकती है वोह कहते है के धर्म दिलों में रहता हे तो आचरण में मानवता आती है उनका कहना है के अगर में किसी के धर्म को नुकसान पहुंचाऊं तो उसे यह हक हे के मुझे दंडित करे और अगर कोई मेरे धर्म को नुकसान पहुंचाएगा तो मेरा भी फर्ज़ है के में उसे किसी कीमत पर नहीं बख्शुं ,बात साफ़ है भाई स्लिम जो कहते हैं वोह करते भी हैं इन्होने हिन्दू और मुस्लिम धर्म को एकरूपता देने के लियें दोनों के धर्म का अवलोकन किया और होली पर हजरत इब्राहीम और प्रहलाद के जलने के किसे की एकरूपता लोगों को बताई , भाई सलीम ने क़ुरबानी के जज्बे के लियें शंकर भगवान द्वारा गणेश जी का सर काटने और हजरत इब्राहिम द्वारा उनके पुत्र की गर्दन पर छुरी चलाने की एकरूपता को सभी लोगों तक पहुंचाया हैं .
वेसे तो सलीम भाई गजलों के शोकिन हैं लेकिन यह गज़ल से ज़्यादा लेख और खबरें लिखने में विश्वास करते हैं ,अपने आचरण पर गर्व करते हुए सलीम भाई कहते हैं के उन्हें भारतीय मुसलमान होने पर गर्व है, लेकिन भेदभाव के रवय्ये को वोह बर्दाश्त नहीं करते और जहां कहीं भी जातिगत और अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव किया जाता है तो भाई सलीम अपने क्लेम की तलवार मियान से बाहर निकाल कर ऐसे लोगों को सबक सिखाना शुरू कर देते हैं .बस इनके इसी सच के आगे कुछ तो नतमस्तक हैं और कुछ इनके दुश्मन बन गये हैं भाई सलीम इस्लाम को विज्ञानं से जोड़कर इस दर्शन को लोगों को तार्किक तरीके से समझाने का प्रयास भी करते हैं और कहते हैं के में तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया ..........
भाई सलीम की निर्भीकता और सत्यता से ओत प्रोत सात सो से भी अधिक आलेख स्वच्छ संदेश हिंदी ब्लॉग पर लिखे गए हैं और इस सजे संवरे ब्लॉग में जमीन से आसमान तक की सभी जानकारियाँ भरने का प्रयास भाई सलीम ने किया है .इण्डिया ब्लोगिंग में इनकी ७४ वीं रेंक है इन्होने स्वच्छ संदेश के नाम से फेंस क्लब भी बनाया है और इनके ब्लॉग पर किताबों के बारे में भी सम्पूर्ण जानकारी एक लाइब्रेरी सजा कर दी गयी है .
पोलीथिन पर रोक के बारे में यह जज्बाती संदेश देते हुए अपने ब्लॉग में लिखते हैं के गायों की मोत का प्रमुख कारन पोलीथिन हैं क्योंकि गायें पोलीथिन खाती हैं और इसके बाद इनकी पाचन क्रिया खराब होने से इनकी म्रत्यु हो जाती है सलीम भाई कहते हैं के अगर आप सही गौ भक्त हैं अगर आप सच में गायों की म्रत्यु रोकना चाहते हैं तो पोलीथिन का उपयोग बंद कर दें विज्ञान की आवाज़, जिंदगी की आरजू इनके अपने अलग बोल हैं , भाई सलीम कई दुसरे सांझा ब्लोगों में जुड़े हुए हैं सांझा ब्लॉग में इनकी ख्याति देख कर कई लोगों को इनसे नाराज़गी भी है सलीम भाई जब सच का विरोध करने वालों के खिलाफ कुछ लिखते हैं तो वोह लोग इनसे इतने नाराज़ होते हैं के इनके ब्लॉग इनकी रचनाएँ बेन हो जाती हैं भाई सलीम को कई ब्लोगर्स ,एग्रीगेटर,सांझा ब्लॉग मालिकों ने इनके आलेखों को ब्लेकलिस्टेड घोषित किया हैं लेकिन ब्लेकलिस्टेड क्यूँ किया गया है इसका जवाब किसी शख्सियत के पास नहीं हैं .
भाई सलीम ने जिंदगी की सच्चाई और महत्वाकांक्षाओं की दोड़ धूप का सच वर्ष १९९९ में ही जान लिया अथा वोह लिखते हैं जिंदगी में आरजू कभी पूरी नहीं होती और अगर आरजू पूरी हो जाए तो फिर जिंदगी जीने की चाहत नहीं रहती और यह सच भी है के जिंदगी में आदमी चाहत के पीछे दोड़ता है और इसी चाहत को पाने के लियें वोह ज़िंदा रहता है अगर जिंदगी की चाहत खत्म तो जिंदगी खत्म हो जाती है इसलियें भाई सलीम का येह फलसफा जिंदगी और सच्ची जिंदगी जीने का एक सूत्र बन गया है ..भाई सलीम जब गजलों का संकलन कनरे बैठते हैं तो दर्द भरी गजलों के अशआरों में सभी लोगों को डुबो देते हैं और इनके जिंदगी की आरजू ब्लॉग पर दर्द भरी गजलों के कई संकलन मोजूद हैं कुल मिलाकर ब्लोगिंग में निर्भीकता,नहीं झुकने वाला स्वभाव लेकर एक नई क्रान्ति पैदा करने वाले सलीम भाई किसी के आगे झुके नहीं हैं और अपनी ताकत प्रतिभा के बल पर अपनी पहचाना बनाते जा रहे हैं और कम से कम विवादों से अपना सम्बन्ध रखते हैं लेकिन इनका एक ही सिद्धांत है के या तो छेडो मत और अगर छेडो तो छोड़ों मंत ....जनवरी २००१ से अब तक भाई सलीम सात सो से भी अधिक ब्लोगों पर हजारों वाह वाही लूट चुके हैं इनका सिद्धांत है यह खामोश मिजाजी हमें जीने नहीं देगी इस दोर में जीना है तो कोहराम मचा दो ......................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
उत्तर प्रदेश के अदबी नगर लखनऊ में जन्मे सलीम की पीलीभीत के तराई इलाके में परवरिश हुई है इन्होने टूरिज्म में एम बी ऐ किया है और इसके बाद सलीम भाई लखनऊ और आसपास आने जाने वाले सेलानियों के हर दिल अज़ीज़ गाइड बने हैं ....
सलीम भाई की शख्सियत यूँ तो किसी भी परिचय की मोहताज नहीं है लेकिन यह परिचय श्रंखला है और सभी को एक दुसरे के बारे में जानने का हक है ताकि भाई चारा और सद्भाव में बढ़ोत्तरी हो सके .भाई सलीम १९९८ से लखनऊ में अंतर्जाल पर हैं ,२००१ से लेखन के कार्यों से जुड़े हुए हैं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखों के प्रकाशन के साथ साथ भाई सलीम ने कई वेब्साइटें बनाई हैं और इसीलियें सलीम भाई आज इंटरनेट की दुनिया में धूम मचा रहे हैं , वर्ष २००९ से ब्लॉग जगत से जुड़ने का बाद भाई सलीम ने जब अपना ब्लॉग स्वच्छ संदेश बनाया तो इनकी पोस्टों इनके लेखन को कई लोगों ने सराहा और इनकी लेखनी को सभी लोगों ने अपने अपने तरीके से जांचा परखा किसी ने इन्हें कट्टरपंथी कहा तो किसी ने इन्हें साम्प्रदायिक कहा तो किसी ने इन्हें कोमी एकता का सन्देशवाहक कहा , सलीम भाई ने ब्लोगिंग के अखाड़े में कई पट्ठे तय्यार किये कई सन्गठन बनाये ,कई ब्लॉग बनाये ,कई सांझा ब्लॉग तय्यार कर एक दुसरे से ज्ञान बांटने की परम्परा को ज़िंदा किया और कुछ दिनों में ही भाई सलीम ब्लोगिंग की दुनिया में किसी के लियें काँटा तो किसी के लियें खुशबूदार फूल बन गए .भाई सलीम का विचार है के हर आदमी को अपने धर्म के प्रति कट्टर होना चाहिए और मानवता तभी जिंदा रह सकती है वोह कहते है के धर्म दिलों में रहता हे तो आचरण में मानवता आती है उनका कहना है के अगर में किसी के धर्म को नुकसान पहुंचाऊं तो उसे यह हक हे के मुझे दंडित करे और अगर कोई मेरे धर्म को नुकसान पहुंचाएगा तो मेरा भी फर्ज़ है के में उसे किसी कीमत पर नहीं बख्शुं ,बात साफ़ है भाई स्लिम जो कहते हैं वोह करते भी हैं इन्होने हिन्दू और मुस्लिम धर्म को एकरूपता देने के लियें दोनों के धर्म का अवलोकन किया और होली पर हजरत इब्राहीम और प्रहलाद के जलने के किसे की एकरूपता लोगों को बताई , भाई सलीम ने क़ुरबानी के जज्बे के लियें शंकर भगवान द्वारा गणेश जी का सर काटने और हजरत इब्राहिम द्वारा उनके पुत्र की गर्दन पर छुरी चलाने की एकरूपता को सभी लोगों तक पहुंचाया हैं .
वेसे तो सलीम भाई गजलों के शोकिन हैं लेकिन यह गज़ल से ज़्यादा लेख और खबरें लिखने में विश्वास करते हैं ,अपने आचरण पर गर्व करते हुए सलीम भाई कहते हैं के उन्हें भारतीय मुसलमान होने पर गर्व है, लेकिन भेदभाव के रवय्ये को वोह बर्दाश्त नहीं करते और जहां कहीं भी जातिगत और अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव किया जाता है तो भाई सलीम अपने क्लेम की तलवार मियान से बाहर निकाल कर ऐसे लोगों को सबक सिखाना शुरू कर देते हैं .बस इनके इसी सच के आगे कुछ तो नतमस्तक हैं और कुछ इनके दुश्मन बन गये हैं भाई सलीम इस्लाम को विज्ञानं से जोड़कर इस दर्शन को लोगों को तार्किक तरीके से समझाने का प्रयास भी करते हैं और कहते हैं के में तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया ..........
भाई सलीम की निर्भीकता और सत्यता से ओत प्रोत सात सो से भी अधिक आलेख स्वच्छ संदेश हिंदी ब्लॉग पर लिखे गए हैं और इस सजे संवरे ब्लॉग में जमीन से आसमान तक की सभी जानकारियाँ भरने का प्रयास भाई सलीम ने किया है .इण्डिया ब्लोगिंग में इनकी ७४ वीं रेंक है इन्होने स्वच्छ संदेश के नाम से फेंस क्लब भी बनाया है और इनके ब्लॉग पर किताबों के बारे में भी सम्पूर्ण जानकारी एक लाइब्रेरी सजा कर दी गयी है .
पोलीथिन पर रोक के बारे में यह जज्बाती संदेश देते हुए अपने ब्लॉग में लिखते हैं के गायों की मोत का प्रमुख कारन पोलीथिन हैं क्योंकि गायें पोलीथिन खाती हैं और इसके बाद इनकी पाचन क्रिया खराब होने से इनकी म्रत्यु हो जाती है सलीम भाई कहते हैं के अगर आप सही गौ भक्त हैं अगर आप सच में गायों की म्रत्यु रोकना चाहते हैं तो पोलीथिन का उपयोग बंद कर दें विज्ञान की आवाज़, जिंदगी की आरजू इनके अपने अलग बोल हैं , भाई सलीम कई दुसरे सांझा ब्लोगों में जुड़े हुए हैं सांझा ब्लॉग में इनकी ख्याति देख कर कई लोगों को इनसे नाराज़गी भी है सलीम भाई जब सच का विरोध करने वालों के खिलाफ कुछ लिखते हैं तो वोह लोग इनसे इतने नाराज़ होते हैं के इनके ब्लॉग इनकी रचनाएँ बेन हो जाती हैं भाई सलीम को कई ब्लोगर्स ,एग्रीगेटर,सांझा ब्लॉग मालिकों ने इनके आलेखों को ब्लेकलिस्टेड घोषित किया हैं लेकिन ब्लेकलिस्टेड क्यूँ किया गया है इसका जवाब किसी शख्सियत के पास नहीं हैं .
भाई सलीम ने जिंदगी की सच्चाई और महत्वाकांक्षाओं की दोड़ धूप का सच वर्ष १९९९ में ही जान लिया अथा वोह लिखते हैं जिंदगी में आरजू कभी पूरी नहीं होती और अगर आरजू पूरी हो जाए तो फिर जिंदगी जीने की चाहत नहीं रहती और यह सच भी है के जिंदगी में आदमी चाहत के पीछे दोड़ता है और इसी चाहत को पाने के लियें वोह ज़िंदा रहता है अगर जिंदगी की चाहत खत्म तो जिंदगी खत्म हो जाती है इसलियें भाई सलीम का येह फलसफा जिंदगी और सच्ची जिंदगी जीने का एक सूत्र बन गया है ..भाई सलीम जब गजलों का संकलन कनरे बैठते हैं तो दर्द भरी गजलों के अशआरों में सभी लोगों को डुबो देते हैं और इनके जिंदगी की आरजू ब्लॉग पर दर्द भरी गजलों के कई संकलन मोजूद हैं कुल मिलाकर ब्लोगिंग में निर्भीकता,नहीं झुकने वाला स्वभाव लेकर एक नई क्रान्ति पैदा करने वाले सलीम भाई किसी के आगे झुके नहीं हैं और अपनी ताकत प्रतिभा के बल पर अपनी पहचाना बनाते जा रहे हैं और कम से कम विवादों से अपना सम्बन्ध रखते हैं लेकिन इनका एक ही सिद्धांत है के या तो छेडो मत और अगर छेडो तो छोड़ों मंत ....जनवरी २००१ से अब तक भाई सलीम सात सो से भी अधिक ब्लोगों पर हजारों वाह वाही लूट चुके हैं इनका सिद्धांत है यह खामोश मिजाजी हमें जीने नहीं देगी इस दोर में जीना है तो कोहराम मचा दो ......................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
खुदा
लोग मंदिर,
मस्जिद में मुझे ढूंढते
धर्म के ठेकेदारों से
धर्म के ठेकेदारों से
पता मेरा पूंछते
निरंतर नए तरीकों से
निरंतर नए तरीकों से
मुझे खोजते
फिर भी मुझे पाते नहीं
मैं इंसान के दिल में रहता
ईमान और इंसानियत में
फिर भी मुझे पाते नहीं
मैं इंसान के दिल में रहता
ईमान और इंसानियत में
बसता
लालच से नफरत मुझे
सूरज बन
लालच से नफरत मुझे
सूरज बन
उजाला दिन में करता
रात को
रात को
चाँद बन कर निकलता
जो दिल से ढूंढता,
जो दिल से ढूंढता,
सिर्फ उसे मिलता
17-04-2011
696-120-04-11
माफियाओं के चंगुल में ब्लागिंग
क्या इसी सभ्यता पर करेंगे हिंदी का सम्मान
रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय ,
टूटे से फिर ना जुटे, जुटे गांठ पड़ जाय.
मनुष्य जीवन इस सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ रचना है. भगवन ने अपनी सारी कारीगरी समेट कर इसे बनाया है. जिन गुणों और विशेषताओं के साथ इसे भेजा गया है, वे किसी अन्य प्राणी को प्राप्त नहीं हैं. भगवान तो सबका पालनहार पिता है. उसे अपनी संताने एक सामान प्रिय हैं. और वह न्यायप्रिय है. स्वयं निराकार होने के कारण उसने मनुष्य को अपना मुख्य प्रतिनिधि बनाकर भेजा है. ताकि वह सृष्टि {विश्व व्यवस्था} की देखरेख कर सके. उसे उसकी आवश्यकता से अधिक सुख सुविधाएँ और शक्तियां इसलिए दी हैं की वह उसके विश्व उद्यान को सुन्दर,सभ्य और खुशहाल बनाने में अपनी जिम्मेदारियों को ठीक ढंग से निभा सके.
पर मनुष्य की पिपाशा, लोभ और स्वार्थ इतना बढ़ गया है की वह विश्व उद्यान को सजाने सवारने के बजाय उसे नष्ट करने में जुट गया है. हम सभी मानते हैं की ईश्वर एक है, मात्र वही एक पालनहार पूरी सृष्टि का सञ्चालन कर रहा है. धर्म या जाति का बंटवारा ईश्वर ने नहीं बल्कि मनुष्य ने किया है. हिन्दू मानता है की मनु और सतरूपा से मनुष्य जाति का प्रादुर्भाव हुवा और मुसलमान आदम और हव्वा को बताता है. मेरी खुद की सोच है की दोनों एक को ही अलग अलग भाषाओ में परिभाषित करते हैं. हो सकता है की यही सोच आप लोंगो की भी हो. जब सभी मनुष्य जाति एक ही पूर्वज की संतान हैं तो झगडे किस बात के हो रहे हैं. सभी आपस में भाई-भाई होने के बावजूद क्यों लड़ते हैं. यह श्रृंखला जब मैंने शुरू की तो कुछ लोंगो ने मुझपर आरोप लगाये की मैं सलीम खान और अनवर जमाल का समर्थन करता हू, जी नहीं यह बात सर्वथा अनुचित है. दोनों ब्लोगर हैं मैं दोनों का सम्मान करता हूँ. पर आपत्तिजनक विचार किसी के हो उसका मैं समर्थन नहीं करता. और न ही "बी एन शर्मा जी ,सुरेश चिपलूनकर जी हमारे लिए दुश्मन है. जिस तरह मुसलमान सलीम खान और अनवर जमाल को अपना प्रतिनिधि नहीं मानता उसी तरह हिन्दू भी बी एन शर्मा और सुरेश चिपलूनकर को अपना प्रतिनिधि नहीं मानता है. मेरा विरोध किसी से भी व्यक्तिगत नहीं बल्कि विचारों का है. फिर भी इनके लेखो पर समस्त मुसलमानों और समस्त हिन्दुओ पर अंगुलिया उठाई जाने लगती हैं. जब सलीम खान ने लिखा की "
जापान दुनियाँ का पहला देश जिसने इस्लाम को प्रतिबंधित किया !
तब मुझे यह बिलकुल अच्छा नहीं लगा था क्योंकि एक तरफ उसी परमात्मा के बनाये हुए इन्सान भयंकर हादसे से पीड़ित थे और दूसरी तरफ सलीम खान "इस्लाम" का प्रचार करने में जुटे थे. मैं सलीम भाई से पूछना चाहूँगा की पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक सहित कई मुस्लिम देश जो इस्लाम को ही मानते हैं फिर उन पर मुसीबते क्यों आई. अब कोई यह मत कह देना की यहाँ मनुष्यों द्वारा शुरू की गयी लड़ाई है और वह खुदा के फज़ल से हुआ....... जी नहीं खुदा इतना कठोर नहीं हो सकता की अपनी संतानों को इस तरह की यातना दे. निश्चित रूप से हर मनुष्य अपने कर्मो की सजा भोगता है. प्रकृति के साथ किया गया खिलवाड़ मनुष्य को ही भोगना पड़ेगा. सलीम खान की पोस्ट में अहंकार भी झलकता है जो उनके व्यक्तित्व को छोटा कर देता है. अपने ही ब्लॉग पर उन्होंने ने लिखा है.
दोस्तों का दोस्त और दुश्मनों का दुश्मन हूँ::: सलीम ख़ान
भई ! सीधा सा फ़ॉर्मूला है TIT FOR TAT ! अभी पिछले दिनों एक सज्जन ने मुझे फ़ोन करके पूछा कि आप ऐसे क्यूँ हैं?
मैं कहा::: क्यूँ वे ऐसे है, इसलिए. जब मैं मोहब्बत से बात करता हूँ तो लोग डरपोंक समझते हैं और जब मैं जूता उठता हूँ तो वो सलाम करते हैं.
तो भई जूता खाना कौन चाहता है और कौन मोहब्बत से रहना चाहता है वो खुद ही तय कर ले.
-सलीम ख़ान
हद तो यह है की ऐसे अहंकार भरे शब्दों का विरोध करने के बजाय कुछ लोंगो ने उनकी तारीफ भी की...
सलीम खान के कई लेख निश्चित रूप आपत्तिजनक है. पर उसी ब्लॉग पर उन्होंने कई ऐसे लेख भी लिखे है जो निश्चित रूप से प्रेरणा देते हैं. हम सलीम खान के उसी रूप को पसंद करते हैं जहा पर वे आपसी सौहार्द और भाईचारे की बात करते हैं. यही हाल अनवर जमाल खान का भी है. बन्दा पठान है जोश में आकर कुछ भी लिख देता है. जैसे उन्होंने शिवलिंग के बारे में जो आपत्तिजनक बाते लिखी वह और लोंगो की तरह मुझे भी पसंद नहीं आई. पर वही अनवर भाई ने भगवन शिव के बारे में बेहतरीन पोस्ट भी लिखी है. यही नहीं प्रेम, हिन्दू-मुस्लिम एकता के बारे में भी उन्होंने काफी कुछ लिखा है.
पर हिन्दुज्म की बात करने वाले बी एन शर्मा और सुरेश चिपलूनकर ने इस्लाम और अल्लाह की बुराई के सिवा कुछ भी नहीं लिखा. इसी तरह कई ऐसे लेखक भी हैं जो चेहरा छुपाकर लोंगो को गालियाँ देने में ही अपनी शान समझते हैं. उन नकाबपोशो से यह लोग अच्छे हैं जो कुछ कहते हैं तो खुलेआम कहते हैं.
मैं मानता हूँ कश्मीर में जो हिन्दुओ के साथ हो रहा है वह निश्चित रूप से गलत है. जो गुजरात में हुआ वह भी गलत है. देखा जाय तो हिन्दू-मुसलमान को लेकर देश में कितनी लड़ाईयां हो चुकी हैं, अब तो जाति के नाम पर, शिया सुन्नी के नाम पर लोग एक दुसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं. आखिर क्यों.? अभी तक बाबरी मस्जिद को लेकर लाखो लोग अपनी जान गँवा चुके हैं. जिन लोंगो की जान दंगे में गयी क्या वही लोग दोषी थे, जिनके परिवार आज भी उस त्रासदी को झेल रहे हैं उनका कुसूर क्या है..? जिन बातों को बहुत पहले भुला देना चाहिए था उसी बातों को हम बार-बार जिन्दा करके कही न कही मानवता को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
मैंने ब्लोगिंग के दौरान बहुत से ब्लोगों पर गया और देखा की ९९ प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो किसी भी विवाद से दूर रहना चाहते हैं. ऐसे लोंगो के नाम गिनना शुरू करूँ तो शायद सारे नाम लिखने के लिए मुझे कई दिनों का वक़्त चाहिए, मैं ऐसे सभी लोंगो को प्रणाम करता हूँ जो हिन्दू मुसलमान होने से पहले एक सच्चे इन्सान हैं और इन्ही लोंगो से आज इंसानियत जिन्दा हैं. आज यदि देश में अमन चैन कायम है तो ऐसे ही लोंगो की देन हैं., मैं देखता हूँ कई लोग मुझे गलियां देते हैं, अपशब्दों से नवाजते हैं पर मैं उनकी बातों का बुरा नहीं मानता. क्योंकि गालियाँ देने वाले डरपोक लोग हैं. ना तो उनकी कोई पहचान होती है और ना ही ऐसे लोग अपने नाम उजागर करना चाहते है. निश्चित रूप से ऐसे लोग डरते हैं.... सच भी है जिनकी मानसिकता गलत है. जो समाज में विन्द्वंश फैलाना चाहते हैं वे तो डरेंगे ही. यदि सच कहना ही है तो पहचान छुपाने की जरुरत क्या है.
मैं एक पत्रकार हूँ पर यह अच्छी तरह जानता हूँ जो बातें अख़बार में लिखी जाती हैं वह लोग पढ़ते हैं और भूल जाते है. पर ब्लॉग पर लिखी बाते हमारी आने वाली पीढियां भी पढ़ेंगी, वे क्या सोचेंगी हमारे बारे में. लिहाजा बाते वही होनी चाहिए जो इन्सान और इन्सान के बीच आपसी सौहार्द कायम रखे. आपसी प्रेम बनाये रखे.
आज यदि हिन्दू मुसलमान के बीच बनी खाई गहरी होती जा रही है तो उसके गुनाहगार हम सभी हैं. प्रत्येक मानव धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर आपस में मनमुटाव बनाये हुए है. मात्र चंद लोंगो के किये की सजा सभी को भुगतनी पड़ती है. आखिर धर्म और जाति की बेड़ियों में जकड़कर हम कब तक मानवता को दागदार करते रहेंगे.
एक अनुरोध सभी से...........
आप सभी लोंगो से अनुरोध है की उन सभी ब्लागरों का विरोध करें जो आपसी प्रेम में खटास पैदा कर रहे हैं. जो मानवता को शर्मशार कर रहे हैं. उनका सबसे अच्छा विरोध यही है की उनकी किसी भी पोस्ट पर न तो कमेन्ट करें और न ही उन्हें तरजीह दें. आज दुनिया कहा से कहा जा रही है और लोग फालतू बातो में वक्त जाया कर रहे हैं है.
यदि आपको लगता है की मेरे विचार गलत हैं, मुझे प्रेम व भाईचारा की बात नहीं करनी चाहिए तो आप सभी बताएं, मैं आज के बाद ब्लॉग लिखना छोड़ दूंगा. क्योंकि जहाँ पर गन्दी मानसिकता के लोंगो का जमावड़ा हो वहा पर रहना मुझे गंवारा नहीं.
डा श्याम गुप्त की गज़ल....सिज़दे में..
ग़ज़ल...
थे बहुत तनहा से जब हम भीड़ में |
सोचते अपना न कुछ तकदीर में |
आप जब से मिलगये जाने जहां ,
ख़ास था हाथों की कुछ लकीर में |
आप जो आये तो कुछ एसा हुआ ,
आ बसा हो खुद खुदा तस्वीह में |
अब खुदा में आप में अंतर नहीं ,
बस गए हो यूं दिले तस्वीर में |
अब तो हरसू आप हैं या खुद खुदा,
नीर घट में या की घट है नीर में |
श्याम 'सिज़दे में झुकें,किसके झुकें,
आपके ,या खुदा की तासीर में ||
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