करकरे के हत्यारे कौन ?

Hindi translation of bestseller "Who Killed Karkare?"
Book:
 करकरे के हत्यारे कौन ?

भारत में आतंकवाद का असली चेहरा

एस. एम. मुशरिफ़
by S.M. Mushrif
[Former, IG Police, Maharashtra]
368 pages p/b
Price: Rs 250 / US $15  $20
ISBN-10: 81-7221-038-8
ISBN-13: 978-81-7221-038-0
Year: 2010
Publishers: Pharos Media Publishing Pvt Ltd

368 पन्‍नों की यह पुस्तक भारत में “इस्लामी आतंकवाद” की फ़र्ज़ी धारणा को तोड़ती है।

यह उन शक्‍तियों के बारे में पता लगाती है जिनका महाराष्ट्र ए टी एस के प्रमुख हेमंत करकरे ने पर्दाफ़ाश करने की हिम्मत की और आख़िरकार अपने साहस, और सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई।

एक पुस्तक जो साफ़ तौर पर यह कहती है कि ये “ब्राह्‌मणवादियों” का “ब्राह्‌मणवादी आतंकवाद” है, इस्लामवादियों का “इस्लामी आतंकवाद” नहीं...


From the back Cover:

राज्य और राज्यविहीन तत्त्वों द्वारा राजनीतिक हिंसा या आतंकवाद का एक लम्‍बा इतिहास भारत में रहा है। इस आरोप ने कि भारतीय मुसलमान आतंकवाद में लिप्त हैं, 1990 के दशक के मध्य में हिंदुत्ववादी शक्‍तियों के उभार के साथ ज़ोर पकड़ा और केंद्र में भाजपा की सत्ता के ज़माने में राज्य की विचारधारा बन गया। यहाँ तक कि “सेक्यूलर” मीडिया ने सुरक्षा एजेंसियों के स्टेनोग्राफ़र की भूमिका अपना ली और मुसलमानों के आतंकवादी होने का विचार एक स्वीकृत तथ्य बन गया | हद यह कि बहुत-से मुसलमान भी इस झूठे प्रोपेगण्डे पर विश्‍वास करने लगे।

पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एस.एम. मुशरिफ़ ने, जिन्होंने तेलगी घोटाले का भंडाफोड़ किया था, इस प्रचार-परदे के पीछे नज़र डाली है, और इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र व अपने लम्बे पुलिस अनुभव से प्राप्त ज़्यादातर जानकारियों (शोध-सामग्री) का उपयोग किया है। उन्होंने कुछ चौंकाने वाले तथ्यों को उजागर किया है, और अपनी तरह का पहला उनका यह विश्‍लेषण तथाकथित “इस्लामी आतंकवाद” के पीछे वास्तविक तत्त्वों को बेनक़ाब करता है। ये वही शक्‍तियां हैं जिन्होंने महाराष्ट्र ए टी एस के प्रमुख हेमंत करकरे की हत्या की, जिसने उन्हें बेनक़ाब करने का साहस किया और अपनी हिम्मत व सत्य के लिए प्रतिबद्धता की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई।
यह पुस्तक भारत में “इस्लामी आतंकवाद” से जोड़ी गयीं कुछ बड़ी घटनाओं पर एक कड़ी नज़र डालती है और उन्हें आधारहीन पाती है।

About the author

एस.एम. मुशरिफ़ महाराष्ट्र के एक पूर्व आई जी पुलिस थे जो सबसे ज़्यादा अब्दुल करीम तेलगी फ़र्ज़ी स्टांप पेपर घोटाले को उजागर करने के लिए याद किये जाते हैं। वह 1975 में महाराष्ट्र के लोक सेवा आयोग द्वारा सीधे पुलिस उपाध्यक्ष नियुक्‍त किये गये थे; और 1981 में भारतीय पुलिस सेवा में ले लिए गए थे।
श्री मुशरिफ़ को वर्ष 1994 में सराहनीय सेवा के लिए “राष्ट्रपति पुलिस पदक” से सम्मानित किया गया था । शानदार सेवा के लिए उन्हें पुलिस महानिदेशक का प्रतीक चिह्‌न भी दिया गया और बेहतरीन कार्यप्रदर्शन के लिए सीनियर अधिकारियों की तरफ़ से उन्हें बहुत सराहा गया। अक्‍तूबर 2005 में उन्होंने रिटॉयरमेंट लिया। अब वह सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 को लागू कराने, भ्रष्टाचार के ख़ात्मे, साम्प्रदायिक सौहार्द्र और किसानों व दलितों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।
विषय-सूची / Table of Contents:
तीसरे अंग्रेज़ी संस्करण का प्राक्‍कथन
प्राक्‍कथन
1. हिन्दू-मुस्लिम दंगे
आम हिन्दुओं (बहुजन) को दबोचे रखने के लिए ब्राह्‌मणवादियों की रणनीति
2. नई चाल, नया जाल
साम्प्रदायिकता के बजाय “मुस्लिम-दहशतगर्दी” का हव्वा
3. बम विस्फोटों की जाँच
ब्राह्‌मणवादियों को बचाने और मुसलमानों के फंसाने के लिए आई बी की ग़ैर ज़रूरी और सोची-समझी दख़ल अन्दाज़ी
i) 2006 का मुंबई ट्रेन बम विस्फोट मामला (11 जुलाई 2006)
ii) मालेगांव बम विस्फोट मामला (8 सितम्बर 2006)
iii) अहमदाबाद बम विस्फोट और सूरत के बिना फटे बम (26 जुलाई 2008)
iv) दिल्‍ली बम विस्फोट 2008 (13 सितम्बर 2008)
v) समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट केस (19 फ़रवरी 2007)
vi) हैदराबाद मक्‍का मस्जिद विस्फोट (18 मई 2007)
vii) अजमेर शरीफ़ दरगाह विस्फोट (11 अक्‍तूबर 2007)
viii) उत्तर प्रदेश की अदालतों में श्रृंखलाबद्‌ध विस्फोटक (23 नवम्बर 2007)
ix) जयपुर धमाके (13 मई 2008)
4. नानदेड़ बम धमाका (5 अप्रैल 2006)
जिसका राज़ संयोग से फ़ाश हो गया
5. मालेगांव बम धमाका केस : 2008
(मुंबई पर हमले से पहले की जाँच)
मामले की ईमानदारी के साथ पहली यथार्थ जाँच, हेमंत करकरे ने राह दिखाई
6. करकरे के हत्यारे कौन ?
मुंबई पर आतंकी हमला एक वास्‍तविकता है लेकिन सी एस टी-कामा-
रंगभवन लेन प्रकरण पर रहस्‍य का पर्दा पड़ा हुआ है
भाग-1 आई बी और नौसेना ख़ुफ़िया निदेशालय के ब्राह्‌मणवादी तत्त्वों
ने अमेरिका और रॉ द्वारा दी गयी धमाकेदार ख़ुफ़िया जानकारी को जान-बूझकर रोक दिया
भाग-2 सी एस टी पर लगे 16 सीसीटीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ हुई थी
भाग-3 सी एस टी के “आतंकवादियों” ने उन सिम कार्डों का प्रयोग किया था जिनके तार सतारा से जुड़े हुए थे।
भाग-4 उन 284 फ़ोनों में से कसाब और ईस्माइल ख़ान के पास एक भी फ़ोन नहीं आया जिनपर वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल टेक्नोलॉजी (वी ओ आई पी) का प्रयोग करके आतंकवादियों ने पाकिस्तान के
अपने आक़ाओं की कॉल रिसीव की थीं।
भाग-5 आतंकवादी धारा-प्रवाह मराठी बोल रहे थे
भाग-6 सी एस टी पर मारे गये 46 लोगों में से 22 मुसलमान थे
भाग-7 करकरे को फंदे में फंसाया गया
भाग-8 अजमल कसाब को भारतीय एजेंसियों द्वारा 2006 के पहले काठमांडू (नेपाल) में गिरफ़्तार किया गया था
भाग-9 अजमल कसाब की बहु-प्रचारित तस्‍वीर
भाग-10 एक महिला गवाह को पूछताछ और उसके बयान को दर्ज
करवाने के लिए जबरन अमेरिका ले जाया गया लेकिन वह अडिग रही
भाग-11 मुंबई अपराध शाखा की कहानी में झोल साफ़ नज़र आता है
ए) सी एस टी-कामा पर गोलीबारी का समय
बी) सी एस टी-कामा क्षेत्र पर आतंकवादियों की संख्‍या
सी) सी एस टी से आतंकवादियों का निकलना
डी) “स्कॉडा” थ्योरी
ई) गिरगांव चौपाटी मुठभेड़ में मारे गये आतंकवादियों की संख्‍या
मुंबई आतंकी हमले का एक वैकल्पिक दृष्टिकोण
1) विले पार्ले और वाडी बंदर पर टैक्सी धमाकों का राज़
2) ऑफ़िशियल सीक्रेट एक्ट के तहत एक मामला
3) प्रधान पैनल की रिपोर्ट को छिपाने के प्रति सरकार (पढ़ें आई बी) की चिंता रिपोर्ट के चुनिंदा हिस्सों का लीक होना गुमराह करने के लिए है
बाद की घटनाएं दृष्टिकोण की पुष्टि करती हैं
फिर से जाँच के लिए उपयुक्‍त मामला
7. मुंबई हमला केस की जाँच
आई बी और एफ बी आई असल जाँचकर्ता, मुंबई क्राइम ब्रांच महज़ एक कठपुतली
8. मालेगांव विस्फोट कांड 2008 (मुंबई हमले के बाद जाँच)
हेमंत करकरे की जाँच पर पानी फेरना
असल षडयंत्रकारी का चेला ही जाँच टीम का प्रमुख बना
अनेक भयंकर कोताहियां और कारगुज़ारियां
9. महाराष्‍ट्र के ब्राह्‌मणों की संदिग्‍ध भूमिका
10. आई बी के ख़िलाफ़ चार्ज शीट
11. देश व समाज को बचाने के लिए तुरन्त उपाय ज़रूरी

संलग्‍नक अ
संलग्‍नक ब
नक़्शा : उस स्थान का चित्र जहां पर प्रमुख आतंकवादी हमला हुआ और हेमंत करकरे की हत्या हुई
 

Pharos Media is pleased to inform about our new book “Who Killed Karkare? — The real face of terrorism in India” written by a former senior police officer. For the first time, it probes deep into the "Islamic terrorism" in India. Of particular interest is the book's detailed study of the 26/11 attack on Mumbai during which Maharashtra ATS chief Hemant Karkare was killed.

Source :
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संतरे के छिल्के को तेल में बदल देगा माइक्रोवेव


यूनिवर्सिटी ऑफ यार्क के प्रोफेसर जेम्स क्लार्क ने कहा कि यह उच्च शक्ति वाला माइक्रोवेव फल के छिल्के के अणुओं को तोड़कर गैस पैदा करता है जिसे एकत्र करके तरल पदार्थ में बदला जा सकता है। इन अमूल्य गैसों का इस्तेमाल बाद में तेल, प्लास्टिक, रसायन तथा ईंधन बनाने आदि में किया जा सकता है।
आप इस पर यकीन करें या नहीं लेकिन ब्रिटेन में एक वैज्ञानिक ने एक ऐसा माइक्रोवेव बनाने का दावा किया है जो संतरे के छिल्के को तेल में बदल देता है।

क्लार्क के अनुसार, माइक्रोवेव विधि का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के पौधों के कचरे से ईंधन या अन्य इसी प्रकार के उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। इनमें भूसी, अखरोट के छिल्के, सेब का छिल्का, काफी या धान की भूसी भी इस्तेमाल की जा सकती है। डेली एक्सप्रेस में यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े संतरा उत्पादक देश ब्राजील में जूस निकालने के बाद आधा फल बर्बाद हो जाता है और यह सालाना 80 लाख टन कचरा बनाता है। ऐसे में इसका बेहतर इस्तेमाल इस माइक्रोवेव के जरिए किया जा सकता है।
http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/jeevenjizyasa/article1-orange-microwave-50-51-191103.html
साभार : 


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हरेक शास्त्र में हैं सत्य के सूत्र और संकेत

निष्पक्ष हो कर तथ्यों पर विचार करें तो सत्य को पा सकते हैं
ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) में हिंदी ब्लॉगर्स का आना अच्छा रहा .
जो लोग किसी शास्त्र में विश्वास रखते हैं और फिर उसके विरुद्ध चलते हैं वे अपनी आत्मा का हनन करते हैं . ऐसे लोग कभी अच्छे लोग नहीं कहलाये जा सकते ., शास्त्रों को आदर देना ही पर्याप्त नहीं है , उनके अनुसार आचरण करना भी ज़रूरी है ., यही वह बात है जिसकी अनदेखी आज सबसे ज्यादा की जा रही है ., विश्व साहित्य में गीता एक अलग और विशिष्ट स्थान रखती है.
इसके आधार पर भी जाना जा सकता है कि जो लोग मार्गदर्शन देने के लिए गला काट प्रतिस्पर्धा में जुटे हुए हैं , उनकी प्रवृत्ति और स्वभाव क्या है ?,
क्या गीता ऐसे लोगों का अनुसरण करने की अनुमति देती है ?
अनुमति न होने के बावजूद उनका अनुसरण करना ही बर्बादी का कारण है . बर्बादी के रास्ते पे चलना और कल्याण की प्रार्थना करना मूर्खता के सिवाय और क्या है ?,
हमारी मान्यता, हमारे कर्म और हमारी प्रार्थना में समन्वय होना अनिवार्य है , तभी हमारा कल्याण होगा और ऐसा सामूहिक रूप से होना ज़रूरी है . लोग निष्पक्ष हो कर तथ्यों पर विचार करें तो वे सत्य को पा सकते हैं.

सत्य के सूत्र और संकेत हरेक शास्त्र में मौजूद है.

Haj or Yaj विभिन्न धर्म-परंपराओं का संगम : हज By S. Abdullah Tariq


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बटला हाउस जैसी मुठभेड़ों के ख़िलाफ एक संयुक्त मोर्चा


बाटला जैसे फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ देश के सेकुलर समाज और मुसलमानों को सड़क पर उतरना होगा : अजीत शाही

By | September 19, 2011 at 5:48 pm | No comments | मुद्दा | Tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,
Sanjarpurसंजरपुर आजमगढ़ 19 सितम्बर 2011 । बाटला हाउस फर्जी एनकाउंटर की तीसरी बरसी पर संजरपुर में आयोजित साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और न्यायिक साम्प्रदायिकता के खिलाफ आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए तहलका के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार अजीत शाही ने कहा कि बाटला जैसे फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ देश के सेकुलर समाज और मुसलमानों को सड़क पर उतरना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार,पिछले 10 साल की तमाम आतंकी घटनाओं में पकड़े गये लोगों को न्याय दिलाने के लिए एक ज्यूडिशियल कमीशन का गठन किसी सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के नेतृत्व में होना चाहिए करे। जो एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट दे।
2004 में गुजरात पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ में मार दी गई इशरत जहां की मां शमीमा कौसर ने कहा कि हमारी बेटी के साथ जो हुआ आप लोगो के साथ न हो,इसलिए यह लड़ाई हम लड़ रहे हैं। जिन लोगों ने हमारी बेटी को मारा है,उन्हें सजा दिलाने के लिए हम लोग लड़ रहे हैं,जिसमें हमें आपकी जरूरत है। इशरत के भाई अनवर इकबाल ने कहा कि सरकार की नाइंसाफी के खिलाफ हम सब एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ेंगे। पौने चार साल बाद उत्तराखंड की जेल से रिहा हुए मानवाधिकार नेता और पत्रकार प्रशांत राही ने कहा कि सरकार सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं,बल्कि आदिवासियों और दलितों जैसे तमाम वंचित तबकों के अपने हक और अधिकार के लिए खड़े होने से रोकने के लिए फर्जी एनकाउंटरों में निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि वंचित तबकों का मनोबल तोड़ने के लिए सरकारों ने पुलिस को खुली छूट दी है। बाटला हाउस प्रकरण इसी का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश संविधान के तहत चले इसके लिए जरूरी है कि एक तमाम वंचित तबके एकजुट होकर सड़कों पर उतरे।
वरिष्ठ माकपा नेता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि आज जब मोदी अहमदाबाद में उपवास का ढोंग कर रहे हैं,ऐसे में इशरत जहां, जिसको मोदी की सरकार ने फर्जी मुठभेड़ में मार डाला, उनकी मां और भाई-बहन का संजरपुर में आना काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इशरत के मां के न्याय की लड़ाई मोदी को सलाखों के पीछे पहुंचा देगी। बस जरूरत है कि न्याय की लड़ाई निरंतर चलती रहे।
पीयूसीएल के राष्ट्रीय सचिव चितरंजन सिंह ने कहा कि न्यायपालिक में बढ़ती साम्प्रदायिकता देश की न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि पीयूसीएल आतंकी घटनाओं की जांच के लिए ज्यूडिशियल कमीशन की मांग के ले देशव्यापी अभियान चलायेगा।
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली से आये मानवाधिकार नेता महताब आलम ने कहा कि संजरपुर के इस आयोजन के साथ ही पूरे देश में  ‘इंडिया अगेस्ट टेरिरिज्म’ का अभियान चलाया जायेगा। जिसमें ज्यूडिशियल आयोग की मांग प्रमुख होगी। जिसकी जिम्मेदारी हर तरह की आतंकवादी घटनाओं चाहे उसमें हिंदू बंद हों या मुसलमान बंद हों, सब पर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
लखनऊ से आये अधिवक्ता मो.शुऐब ने कहा कि जिस तरह आतंकवाद के सवाल पर न्यायालय बिना किसी ठोस सबूतों के लंबे समय तक मुदकमों को लटकाया है, उसमें आम आदमी का मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। आजमगढ़ के ही तारिक कासिमी और खालिद मुजाहिद की गिरफ्तारी पर गठित आर डी निमेष जांच आयोग की रिपोर्ट को लटकाये रखा है और कोर्ट में लंबे समय से कोई गवाही नहीं करवायी जा रही है। जिससे वे जेलों में घुटने के लिए मजबूर हैं,जहां उन्हें खराब खाना व पानी दिया जा रहा है,जिससे वे धीरे-धीरे मौत के मुंह में जा रहे हैं।
एस आर दारापुरी   ने कहा कि पुलिस की साम्प्रदायिकता की वजह से ही न जाने कितने निर्दोष मुसलमान जलों में बंद हैं। आज जरूरत है कि पुलिस की साम्प्रदायिकता के खिलाफ आवाज उठे।
बनारस से आये सुनील सहस्र बुद्धे ने कहा कि आतंकवाद की राजनीति व्यवस्था की देन है। इसलिए आतंकी घटनाओं पर सवाल उठाने के साथ पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाना जरूरी है।
अयोध्या से आये महंत युगल किशोरशरण शास्त्री ने कहा कि हिंदू धर्म के नाम पर जो लोग राजनीति करते हैं, उनका खूफिया एजेंसियों और पुलिस के साथ वैचारिक एकता है। जिसको बेनकाब करना है, आतंकवाद की राजनीति के खिलाफ होने वाले किसी भी आंदोलन का जरूरी हिस्सा होना चाहिए। लखनऊ से आये ‘अलग दुनिया’ के के.के.वत्स ने कहा कि आजमगढ़ को मीडिया ने आतंकवाद की नर्सरी बताकर यहां के लोगों के विकास के सभी रास्तों को बंद कर दिया है। इसलिए मीडिया की साम्प्रदायिकता के खिलाफ भी आवाज उठाने की जररूत है। चित्रा सहस्र बुद्दे ने कहा कि बाटला हाउस में जो लड़के मारे गये हैं,वे शहीद हैं। और जो लोग बंद हैं, उन्हें राजनीतिक बंदी कहा जाना चाहिए, क्योंकि वे इस आतंक की राजनीति का शिकार हुए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरिमंदिर पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम संचालन पीयूसीएल के प्रदेश मंत्री मसीरूद्दीन संजरी ने किया। सम्मेलन के शुरूआत में तमाम आतंकी घटनाओं की याद में मारे गये लोगों की याद में एक मिनट का मौन रखा गया। अंत में सात सूत्र प्रस्ताव पेश किया गया-
  1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा बाटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी मानने के बाद दोषी पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाय।
  2. आतंकवाद के नाम पर कई वर्षो तक जेल मे रहने के बाद बेकसूर साबित होने वालों को मुआवजा दिया जाय।
  3. इंडियन मुजाहिद्दीन पर श्वेत पत्र जारी किया जाय।
  4. पिछले दस सालों में हुई आतंकी घटनाओं और आतंकवाद के नाम पर हुई मुठभेड़ों की उच्चतम न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश से जांच कराई जाय।
  5. आतंकवाद के आरोप में बंद युवकों की जेलों में सुनवाई न करके फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाय।
  6. मानवाधिकार कार्यकर्ता व पीयूसीएल की नेता सीमा आजाद और उनके पति विश्व विजय को तत्काल रिहा किया जाय।
  7. आजमगढ़ के लोगों का पासपोर्ट बनने में उत्पन्न की जा रही बाधाओं को तत्काल रोका जाय।
नोटः पीपुल्स इन्क्वायरी कमीशन गठित करने की घोषणा की जाती है। जिसके पूरे ढ़ांचे और कार्यक्षेत्र की विस्तृत घोषणा 2 अक्टूबर को की जायेगी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सालिम दाउदी, तारिक शफीक, जितेंद हरि पाण्डेय, फहीम अहमद, ओअज्जम शहबाज, अबु बकर फराही, मो. अकरम, आफताब अब्दुल्ला, असलम खान, कलीम अहमद, ऋषि कुमार सिंह, शाहनवाज आलम, राजीव यादव, रवि शेखर, एकता सिंह, लक्ष्मण प्रसाद, अंशुमाला सिंह,बलवंत यादव,बलवीर यादव,रवि राव, अवनीश राय इत्यादि मौजूद थे।
 साभार : हस्तक्षेप डोट कॉम
http://networkedblogs.com/nhVAw
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देश में औरत-मर्द का गड़बड़ अनुपात भविष्य में बहुत से ख़ून-ख़राबे और बहुत सी तबाहियों की वजह बनेगा

देश में औरत-मर्द का अनुपात गड़बड़ा  गया है और यह गड़बड़ी आने वाले भविष्य में बहुत से ख़ून-ख़राबे और बहुत सी तबाहियों की वजह बनेगी .
रहम ए मादर में बच्चियों को मारने वाले मां बाप और डाक्टर को जितना बुरा कहा जाए, कम है.
इस  पोस्ट का वीडियो देखकर यही लगा.
शास्त्र के बारे में भी डा. अनवर जमाल साहब ने ख़ूब बताया.
आदमी जब किसी वेबसाइट का पता टाइप करता है तो वही टाइप करता है जो कि दिया गया है लेकिन दीन-धर्म के नाम पर उसे ज्ञानी गुरू जो बताते हैं, उसे करने के बजाय अपनी पसंद से जो चाहे वह करता रहता है.

ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) Against Female Feticide में 

यही मुद्दा उठाया गया है।
इन मुद्दों को हरेक मंच से उठाया जाना चाहिए.
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दो पल की खुशियाँ

खुशियों भरा जीवन अब मिलता है कहाँ,
चैन-सुकून हर पल अब रहता है कहाँ,
जीवन हर वक़्त लिए एक छड़ी होती है,
इसलिए दो पल की खुशियाँ भी बड़ी होती है |

संघर्ष ही जीवन का दूसरा नाम हो गया है,
कठिनाइयों का आना तो अब आम हो गया है,
किस्मत हर वक़्त मुह बाये खड़ी होती है,
इसलिए दो पल की खुशियाँ भी बड़ी होती है |

भागते ही हम रहते हैं श्वांस भी न लेते,
जीवन को सिद्दत से हम जी भी न लेते,
हम सबको हर वक़्त लगी हड़बड़ी होती होती है,
इसलिए दो पल की खुशियाँ भी बड़ी होती है |

कल क्या होगा किसी ने देखा भी नहीं,
निरंतर खुशियों की कोई रेखा भी नहीं,
जिंदगी भी तो बस घड़ी दो घड़ी होती है,
इसलिए दो पल की खुशियाँ भी बड़ी होती है |
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समाज सुधारक बनना कोई हंसी खेल नहीं है

प्रस्थान या पलायन ?
डा. दिव्या श्रीवास्तव जी अपने ब्लॉग ‘ज़ील‘ पर शायद अब और न लिखेंगी,
कारण उन्होंने यह बताया है कि किन्हीं अनुराग शर्मा जी ने एक पोस्ट लिखकर उनका अपमान कर दिया है और मर्धन्य से ब्लॉगर्स ने उनकी हां में हां मिलाई है।
यहां तक कि पाबला जी ने भी लिख डाला
‘छील कर रख दिया‘
बस यही बातें उन्हें खा गईं और वे हौसला हार बैठीं।
औरत ख़ुद को कितना ही ‘आयरन लेडी‘ लिख ले , लेकिन वास्तव में उसका दिल होता है मोम जैसा ही, जो एक आंच से ही पिघल जाता है और औरत का ही क्या ख़ुद मर्द का दिल भी ऐसा ही होता है चाहे वह कितना कह ले कि मर्द को दर्द नहीं होता।
दर्द भी होता है और टीस भी उठती है।
जो आदमी अपने रब की रज़ा की ख़ातिर उसका पैग़ाम आम करता है, सिर्फ़ वही इस दुख दर्द को ख़ातिर में नहीं लाता, वर्ना तो हरेक आदमी इसके सामने आखि़रकार घुटने टेक ही देता है।
समाज सुधारक बनना कोई हंसी खेल नहीं है।
जो इस राह पर चले वह चलने से पहले ही सोच ले कि
‘इक आग का दरिया है और डूब कर जाना है‘
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LOVE is LIFE: लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में भारत

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अटल-मोदी युगल नीति के प्रभाव

मुसलमानों के संदर्भ में

 
राजनीति में जिसका स्वांग चल जाए वही सफल है
इस शीर्षक के तहत हमने प्रमोद जोशी जी का एक लेख पढ़ा।
इस पर हमने अपनी प्रतिक्रिया देना ज़रूरी समझा ताकि कुछ ऐसे तथ्य सामने लाए जाएं जो कि आम तौर पर लोग नहीं  जानते। हमने कहा कि
मोदी भाई साहब की महत्वाकांक्षा के बारे में आपने बहुत सही लिखा है लेकिन वस्तानवी साहब को मोदी के बारे में नरम बयान देने का ख़मियाज़ा नहीं भुगतना पड़ा बल्कि हक़ीक़त को देवबंद के लोग मीडिया से ज़्यादा जानते हैं।
मदनी ख़ानदान दीन के नाम पर मुसलमानों पर बादशाहों जैसी ज़िंदगी गुज़ार रहा है। वस्तानवी साहब के आने से उनकी बादशाहत गए दौर की गुज़री हुई बात बनने वाली थी और मदरसे के छात्रों में जो जागरूकता उनके प्रबंधन में आती, उसके बाद उन्हें गुमराह करके दिल्ली में भीड़ के तौर पर इस्तेमाल करना और सोनिया गांधी को अपने पीछे मुस्लिम भीड़ दिखाकर राज्य सभा की सीट का सौदा करना संभव न रह जाता।
इसी भय के चलते आपस में गुत्थम गुत्था मदनी चाचा-भतीजा आपस में एक हो गए और दोनों के समर्थक आलिम जो शूरा के सदस्य हैं, वे भी वस्तानवी साहब के खि़लाफ़ एक हो गए। सो वस्तानवी साहब को हटना पड़ा।
दीन में सियासत करने वाले ऐसे ही लोग मुसलमानों के रहनुमा बने हुए हैं और मुसलमानों का बेड़ा ग़र्क़ करने में ऐसे ही रहनुमाओं का हाथ है।
ऐसे ही रहनुमाओं में से कुछ को एक पार्टी के साथ देखा जा सकता है तो कुछ दूसरे रहनुमाओं को उसकी मुख़ालिफ़ दूसरी पार्टी के साथ।
अटल-मोदी युगल काल में मुसलमानों के साथ जो भी बीती, उसका एक सकारात्मक पक्ष भी है और वह यह है कि मुसलमानों में इस्लाम को जानने और उस के अनुसार ज़िंदगी गुज़ारने का जज़्बा बढ़ा है और इसी के साथ दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों मुस्लिम संगठनों ने जन्म लिया जो कि अपने हमवतन बिरादरान से साथ संवाद करके उनकी ‘ग़लतफ़हमियों का निवारण‘ करने में लगा हुआ है।
लोगों की ग़लतफ़हमियां बड़ी भारी तादाद में दूर हो रही है और उम्मीद है कि जल्दी ही सारे देश के भ्रमकारों की ग़लतफ़हमियां दूर कर दी जाएगी।
यह क्रांति जो चल रही है लेकिन जिसे देखा नहीं जा रहा है, इसका परोक्ष श्रेय अटल-मोदी युगल नीति को ही जाता है।
मुसलमानों के जनजागरण में इनका अप्रतिम योगदान है।
मोदी जी की सफलता मुसलमानों में असुरक्षा के भाव को गहरा और उनकी जद्दोजहद को तेज़ ही करेगी।
ग़लतफ़हमियों को दूर होता हुआ देखना चाहें तो आपको आना होगा,
ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) में
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ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) Against Female Feticide



ब्लॉगर्स मीट वीकली (9)
सबसे पहले अपने सारे ब्लॉगर साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम . 
आदरणीय श्री रूपचंद शास्त्री मंयक जी का इस महफ़िल में   अपने सभापति  के रूप  में स्वागत करते हैं और आप सभी हिंदी ब्लॉगर्स का भी  हार्दिक स्वागत है .
 
"राष्ट्रसंघ में कब अपनी भाषा का भाग जगेगा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") 

आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स 

 अनवर जमालजी की रचनाएँ 










ब्लॉगर्स मीट वीकली (8)

शिशु गर्भनाल से 130 लाइलाज बीमारियां होंगी छूमंतर Good news

  अख्तर  खान  'अकेला जी '   की रचनाएँ

जी हाँ ..में हिंदी यानी भारत माता की राष्ट्र भाषा हूँ .प्रदीप साहनीजी की रचना 

एक इंजिनियर की आत्मकथा

हिंदी हिन्दुस्तान है

राष्ट्रभाषा हिंदी

**वो लोकगीत**

जेबकतरी सरकार






बढ़ती कीमत देख 

महेंद्र श्रीवास्तवजी की रचनाएँ   

मोटापे के दुश्मन, मेरे दुश्मन...

दाल में काला है प्रधानमंत्री जी...














बहाना है उपवास, मंजिल पीएम निवास...


सत्यम शिवम् जी  की रचना 

 कहते है हिन्दूस्तानी है हम....







रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिराजी "

गूगल, ऑरकुट और फेसबुक के दोस्तों, पाठकों, लेखकों और टिप्पणिकर्त्ताओं के नाम एक बहुमूल्य संदेश

मंच के बाहर की पोस्ट   

  चौराहा रश्मि प्रभाजी की रचना 








क्या हुआ..? ( दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')

कितने रूप ,कितने नाम.प्रतिभा सक्सेनाजी 
   
मेरा फोटो

हिन्दी को नजर अंदाज करना अब सम्भव नहीं - कृष्ण कुमार यादवजी 

एक बात सुनोगे गर..... सुन सको तो
 कह लूँ 
पी.के .शर्माजी 

"बाँध के फाटक उठाओ"राजीवजी की रचना 

अपने जायज़ रिश्तों के प्रति वफादार रहिये एस .एम्.मासूमजी 












पत्रकार-अख्तर खान "अकेलाजी"

























व्यर्थ हमने सिर कटाए   रविकरजी














काव्य प्रतियोगिता मैं पुरस्कार 
  
राजेंद्र स्वर्णकार जी 



मेरा फोटो
अब अंत मैं मेरी रचना 



प्रेरणा जी आपने इतने सलीक़े से यह सभा सजाई है कि वाक़ई यह एक मुकम्मल पेशकश है .
आपका शुक्रिया .

धर्मशास्त्र की ज़रूरत क्या है ?

आज आपको ऐसे बहुत लोग मिल जाएंगे जो कहेंगे कि आदमी को अच्छा इंसान बनना चाहिए और उसे अच्छे काम करने चाहिएं लेकिन जब आप उनसे पूछेंगे कि इंसान बनने के लिए कौन कौन से अच्छे काम करने ज़रूरी हैं ?
तो वह बता नहीं पाएगा।
 यही हाल खान-पान , यौन संबंध और अंतिम संस्कार का है।
इनमें से किसी भी बात पर आज भारतीय समाज एक मत नहीं है।
शास्त्रों के देश में यह क्या हो रहा है ?
- डा. अनवर जमाल  
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गर्मियों की छुट्टियां

अनवर भाई आपकी गर्मियों की छुट्टियों की दास्तान पढ़ कर हमें आपकी किस्मत से रश्क हो रहा है...ऐसे बचपन का सपना तो हर बच्चा देखता है लेकिन उसके सच होने का नसीब आप जैसे किसी किसी को ही होता है...बहुत दिलचस्प वाकये बयां किये हैं आपने...मजा आ गया. - नीरज गोस्वामी

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  • - कहीं भी अपनी भाषा में टंकण (Typing) करें - Google Input Toolsप्रयोगकर्ता को मात्र अंग्रेजी वर्णों में लिखना है जिसप्रकार से वह शब्द बोला जाता है और गूगल इन...
    13 years ago

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