ब्लॉगर्स मीट वीकली (19) Happy Islamic New Year

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  • Monday, November 28, 2011
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  • Prerna Argal
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  • सबसे पहले अपने सभी ब्लोगर साथियों को प्रेरणा अर्गल का प्रणाम और सलाम /
    सबसे पहले मैं इस मंच के सभापति श्री शास्त्रीजी का अभिनन्दन करती हूँ/ जिनके आशीर्वाद से यह मंच सफलता के पथ पर अग्रसर है /फिर आप सभी का स्वागत करती हूँ /आपके अनमोल संदेशों से ही हमारा उत्साह बढ़ता है /इसलिए जरुर इस मंच पर आयें और हमें कृतार्थ करें.    
       आदरणीय रूपचंद शास्त्री जी

    "आ गये फकीर हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


    रोटियों को बीनने को, आ गये फकीर हैं।
    अमन-चैन छीनने को, आ गये हकीर हैं।।

    आज सबसे पहले मंच की पोस्ट्स 

     अनवर जमालजी की रचनाएँ

    धर्म और विज्ञान में विरोध इस्लाम के नज़रिये के खि़लाफ़ है किसी भी ज्ञान को अधार्मिक नहीं कहा जा सकता, उलमा साइंस की बुनियाद को समझकर पश्चिमी संस्कृति के चैलेंज का मुक़ाबला करें। - मौलाना सालिम क़ासमी साहब
    पेड़ पौधों में भी होता है तंत्रिका तंत्र और वे प्रतिक्रिया भी देते हैं
    ब्लॉगर्स मीट वीकली (18) Indira Gandhiथप्पड़ की प्रशंसा निंदनीय है

      अख्तर  खान  "अकेलाजी "   की रचनाएँ

    अयाज  अहमद जी की रचना

    इस्लामी नया साल मुबारक


    इस्लामी नए साल को मनाने का तरीका यह है कि बेबसों, बेवाओं (विधवाओं), बेसहारा लोगों की मदद करना, जरूरतमंदों और यतीमों (अनाथ बच्चे-बच्चियों) की दिल से सहायता करना और जुबान से चुप रहना यानी सहायता करके प्रचार के ढोल नहीं पीटना, बीमारों, बूढ़ों और अपंगों-अपाहिजों यानी विकलांगों तथा निःशक्तों की मदद करना, बुजुर्गों का सम्मान करना अपना कर्तव्य (फर्ज) पूरी मुस्तैदी और ईमानदारी से निभाना। इस्लामी नया साल यानी सब रहें खुशहाल!

    मछली को ज़िंदा भी निगल सकती हैं हसीनाएं , चित्र सहित ...Treatment for asthma, live fish for wonder cure, Thousands swallow
    ब्लॉग परिषद की तैयारियां कैंसिल कर दी गई हैं, अपना सुझाव अपने पास ही रखें.प्रदीप कुमार साहनीजी की रचना 
    हस्ती हमारीदेवेन्द्र गौतम जी की रचना  अरे भई साधो......: जनजीवन को जटिल बनाते अपराधी
     महेंद्र भीष्म जी की रचना  जानकी पुल: नफरत करनेवालों के सीने में प्यार भरनेवाले इन्दीवरसाधना  वैद जी की रचना घर फूँक तमाशा

    मंच के बाहर की पोस्ट   

    कुमार राधारमण जी 

    पद्मासन से शुद्ध होती हैं नाड़ियां 

    आशा है कि आपके पाठकों के लिए यह जानकारी नई होगी.

     रवीन्द्र प्रभातजी की रचना 

     मनाते खुशियाँ रहो तुम जियो जब तक

    अनुपमा त्रिपाठीजी की रचना 

    मेरा प्रतिबिम्ब ही है.. जीवन ...!!


    रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'जी की रचना 


    आँखों में दरिया (माहिया)


    रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
    आशाजी की रचना 


    रविकरजी की रचना
     http://2510377621267661116-a-1802744773732722657-s-sites.googlegroups.com/site/pahleaap/DSC01364.JPG?attachauth=ANoY7cpaYEO7QvNrhRBDEf5RBAhGT0wf40oQZCJ_rFAWxJ8RhK_J7pnFpylk1daCiSqaNMwm8AjmkHlbzQJ2_tqH8yiFin9f9KWySSM6xvBUi0S5TEALkxeGy97hz160aFkuU2Pq4vBH4C0KVY0bgc8JsWpUKcGqpDQ0aOnOUfvnzp69j_e45MNTE1-r3YN9ln6YtWs3uXWJ&attredirects=0
    नीरज द्विवेदी जी  की रचना 
    आनंद द्विवेदी जी की रचना 

    तू तू ..मैं मैं ...(1)


    दिव्या जी की रचना 


      पी.सी.गोदियाल "परचेत"जी 

    कार्टून कुछ बोलता है - दूध का जला...


    बब्लीजी की रचना 


    तुझे अपना मुकद्दर बनायेंगे हम,
    तेरे संग हर लम्हा बितायेंगे हम,
    ज़िन्दगी भले ही रूठे तू न रूठ जाना,
    तेरे बिन न जी पायेंगे हम !






    अलबेला खत्रीजी की रचना 

    इन पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार

     का आरोप मत लगाना

    प्रेम सरोवरजी की रचना 
    ये पृष्ठ कोरे कहाँ है मल्लिका !”
    My Photo 

    साधना वैद जी

    कुछ कह न पायेंगे


    किस्सा कहा जो दर्द का वो सह न पायेंगे ,
    हर इक बयाँ पे रोये बिना रह न पायेंगे !
    हर रंग है जफा का मेरी दास्ताँ में दोस्त ,
    इलज़ाम खुद पे एक भी वो सह न पायेंगे !
    नीलकमल वैष्णव  जी की रचना 

    कसम...


    अंत में एक सूचना ...

    "यह क्षण माता जी के जीवन में अब कभी नहीं आयेंगे।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

    अपने बाल सखा
    डॉ. धर्मवीर को
    शत्-शत् नमन!

    जन्मः 01-01-1947
    मृत्युः 19-11-2011
    साथ-साथ में खेले-कूदे,
    साथ-साथ ही हुए बड़े।
    हरिद्वार की पुण्यभूमि में,
    गुरुकुल में हम साथ पढ़े।।

    12 comments:

    रविकर said...

    बहुत बहुत आभार प्रेरणा जी |

    अनुपमा त्रिपाठी... said...

    bahut dino baad charcha lagayi Prerna,abhar meri rachna rakhne ke liye ...
    bahut achchhi rachnayen chatan ki hain ...badhai. ..

    prerna argal said...

    बहुत बहुत धन्यवाद रविकरजी और अनुपमाजी आपका की आप मंच पर आये और इतने अच्छे सन्देश दिए /अनुपमाजी चर्चा तो प्रत्येक सोमवार को लगाते हैं आप ही बहुत दिनों के बाद इस मंच पर आयी हैं /बस अब हर सोमवार को आती रहिए और अपने सन्देश द्वारा हमारा उत्साह बढाती रहिये /आभार /

    NEELKAMAL VAISHNAW said...

    बहुत बहुत धन्यवाद प्रेरणा जी जो मेरी रचना को यहाँ स्थान दिए,
    बहुत सुन्दर सुन्दर लिंक्स मिला यहाँ पर आकार साभार सभी लिंक्स के लिए

    आशा said...

    बहुत बहुत आभार मेरी रचना शामिल करने के लिए |
    आज कुछ लिंक्स तो बहुत ही अच्छी लगीं |अच्छी लिंक्स के लिए बधाई |
    आशा

    Babli said...

    ढेर सारे सुन्दर लिंक्स के साथ शानदार रूप से चर्चा प्रस्तुत किया है आपने प्रेरणा जी! मेरी शायरी शामिल करने के लिए धन्यवाद!

    Anand Dwivedi said...

    सच में सभी लिंक्स बहुत स्तरीय है ...प्रेरणा जी बहुत बहुत बधाई ...और इन सभी रत्नों के बीच में मुझ कोयले को भी स्थान देने के लिए आभार !

    devendra gautam said...

    बेहतरीन लिंक्स...सुंदर आयोजन...आभार

    Dr. Ayaz Ahmad said...

    सोमवार आते ही इस मीट की याद आने लगती है।
    प्रेरणा जी की मेहनत को सलाम !
    आपके चुने हुए लिंक ऐसे होते हैं जिनमें से कुछ तक तो हम पहुंच ही न पाएं अगर हम इस मीट में न आएं।
    शास्त्री साहब के परिवार के लिए भी दुआएं करते हैं कि उन्हें सहने की ताक़त मिले और हर अच्छी बात उन्हें नसीब हो।

    http://www.youtube.com/watch?v=thDTEKONqg4&feature=mfu_in_order&list=UL

    prerna argal said...

    आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद की आप सभी इस मंच पर पधारे /और मेरे द्वारा चयन किये गए लिनक्स पसंद किये /आप सभी का स्नेह इस मीट को मिल रहा है मुझे मिल रहा है /इसके लिए मैं आप सभी की बहुत आभारी हूँ /आप सबका सहयोग प्रत्येक सोमवार को इस मीट को मिलता रहे यही कामना है /आभार /

    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

    ब्लॉगर्स मीट वीकली की 19वीं कड़ी में आप सवका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ।
    ब्लॉगर्स मीट के सभी पाठकों से एक विनम्र निवेदन है कि आपके ही लिए साप्ताहिक ब्लॉगर्स मीट का आयोजन किया जाता है। जो एक निष्काम सेवा है। अतः आप इस मीट में शामिल लोगों के ब्लॉग पढ़ने के साथ-साथ अपनी प्रतिक्रिया भी टिप्पणी के रूप में अवश्य दिया करें। इससे आयोजकों का मनोबल निश्चितरूप से बढ़ता है।
    ढेर सारे लिंकों को एक जगह सहेजना कोई आसान कार्य नहीं होता है। इसके लिए बहुत सारे ब्लॉगों को पढ़ना और हफ्तेभर तक उन्हें सहेजने में आपके ही लिए तो बहन प्रेरणा अर्गल और डॉ. अनवर ज़माल संलग्न रहते हैं।
    फिर भी सभी की पोस्ट तो मीट में शामिल नहीं की जा सकती है। क्योंकि स्थान की भी मजबूरी है और ऊपर से डर यह भी है कि ज्यादा लिंक देखकर लोग ऊब भी जाते हैं।
    किन्तु इतना तो निश्चित है कि एक न एक दिन पका भी नम्बर यहाँ आ जायेगा। आप अच्छा-अचचा लिखे - इसी कामना के साथ!

    Sadhana Vaid said...

    ३-४ दिन के अंतराल के बाद दिल्ली से वापिस आने पर इस मीट के पूरे प्रारूप को आज देख पाई हूँ ! बहुत सुन्दर लिंक्स लगाई हैं आपने ! मेरे आलेख और गज़ल को इसमें स्थान दिया उसके लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! सभी लिंक्स बेहतरीन हैं !

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