डिज़ायनर ब्लॉगिंग में रामबाण है ‘हनी बी तकनीक‘ Hindi Blogging Guide (27)

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  • Friday, August 19, 2011
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
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  • डिज़ायनर ब्लॉगिंग की तकनीक को जानने के बाद आप अपने ब्लॉग को हिंदी का एक सफल ब्लॉग बना सकते हैं, एक ऐसा ब्लॉग जिसे बहुत पढ़ा जाएगा और जिस ब्लॉग को बहुत से पाठक पढ़ते हैं, वह ब्लॉग ख़ुद ब ख़ुद सफल हो जाता है। ब्लॉगर की असल ताक़त उसका लेखन है और उसकी असल कामयाबी यह है कि उसके लिखे हुए को ज़्यादा से ज़्यादा लोग पढ़ें।
    पाठकों का सैलाब अपने ब्लॉग पर देखने के लिए आपको पहले यह देखना होगा कि पाठक फ़िलहाल कहां जमे हुए हैं ?
    किन ब्लॉग्स को आजकल ज़्यादा पढ़ा जा रहा है ?
    आप देखेंगे कि उपदेश वाले ब्लॉग पर सबसे कम पाठक मौजूद होंगे और हल्की फुल्की पोस्ट लिखने वाले ब्लॉगर्स के पास पाठकों की बड़ी तादाद मौजूद होगी।
    इसका मतलब यह है कि लोग खुलकर इंजॉय करना चाहते हैं। उन्हें यह करो और वह मत करो का उपदेश और अनुशासन अपनी आज़ादी पर पाबंदी लगती है।
    लोगों के मिज़ाज को जांच लेने के बाद अब आप भी एक हल्की फुल्की सी पोस्ट लिखिए।
    मिसाल के तौर पर सबसे पहले आप अपनी पोस्ट की थीम तय करते हैं तो वह एक लतीफ़ा निश्चित होती है और वह लतीफ़ा यह है कि

    एक दोस्त - यार ग़ज़ल और उपदेश में क्या अंतर है ?
    दूसरा दोस्त - शादी से पहले महबूबा की हर बात ग़ज़ल लगती है और शादी के बाद पत्नी की हर बात उपदेश लगने लगती है।

    सहज ब्लॉगर तो इस लतीफ़े को मात्र दो तीन लाइन में लिखकर बैठ जाएगा और सोचेगा कि उसने बहुत मनोरंजक पोस्ट लिखी है, अब इस पर बहुत कमेंट आ जाएंगे लेकिन जब उसकी उम्मीद के खि़लाफ़ होगा तो उसका मन खिन्न हो जाएगा।
    एक डिज़ायनर ब्लॉगर इसी बात को सादा अंदाज़ में बयान करने के बजाय इसे कहने के लिए एक डिज़ायन बनाएगा। इसके लिए वह ‘हनी बी तकनीक‘ का इस्तेमाल करेगा।
    ‘हनी बी तकनीक‘ अर्थात मधुमक्खी तकनीक एक सफल तकनीक है जो सदा काम करती है और आपके ब्लॉग तक पाठक खींच लाती है और न सिर्फ़ बहुत से पाठक खींच लाती है बल्कि उन पाठकों को टिप्पणी करने के लिए मजबूर भी करती है।

    यह बात सभी लोग जानते हैं कि शहद के छत्ते की सभी मक्खियां रानी मक्खी के पीछे होती हैं। जहां रानी मक्खी जाएगी वहां उसकी मज़्दूर और सैनिक मक्खियां भी जाएंगी। यही हाल लोकप्रिय हिंदी ब्लॉगर्स का भी है।
    एक डिज़ायनर ब्लॉगर इसी बात को कहने के लिए पांच-सात लोकप्रिय हिंदी ब्लॉगर्स के नाम का ज़िक्र अपनी पोस्ट में ज़रूर करेगा और इस तरह उसकी पोस्ट कुछ इस तरह के डिज़ायन में नज़र आएगी।
    डिज़ायनर पोस्ट
    ब्लॉगवाणी के जिस ब्लॉग को मैंने सबसे पहले फ़ोलो किया वह डाक्टर टीकाराम जी का था और मुझे आज भी याद है कि मैंने चिठ्ठाजगत पर सबसे पहले जिस ब्लॉग के शीर्षक पर क्लिक किया वह ब्लॉग मिस कंचन का था। उसके बाद मैंने कितने ही ब्लॉग पढ़े और उनसे बहुत कुछ सीखा और गर्व होता है कि हमारे बीच अमीर लाल जी, कबीर लाल जी , नयनसुख जी और मुन्नीबाई जी जैसे हिंदी के सशक्त हस्ताक्षर मौजूद हैं। मुझे भाई अरबाज़ हुसैन की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में इन सभी के साथ रू ब रू मिलने का इत्तेफ़ाक़ भी हुआ और वे पल जीवन के अविस्मरणीय पल बन चुके हैं।
    मुझे याद है कि जब मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया तो ठीक उसी दिन हमारा कुत्ता टॉमी बीमार हो गया। जिसका इलाज फ़ॉरेन रिटर्न डाक्टर टेकचंद गोयल जी से कराया जाना बहुत ज़रूरी था। इसका मतलब यह था कि अपनी पज़ेरो तो टॉमी के लिए बुक हो गई और बेटा अपनी स्पोर्ट मोटर साइकिल हमें देगा नहीं। मन मारकर हमें सूमो पर ही समझौता करना पड़ा। हमारी श्रीमति जी ने हमें बहुत शर्म दिलाने की कोशिश की कि हम अपना कार्यक्रम रद्द करके उनके साथ टॉमी को लेकर डाक्टर के पास चलें लेकिन हमें तो उनकी हर बात बस एक ऐसा उपदेश लग रही थी जिसे पूरा करना हमारे बस में नहीं था और सही भी है। इस बात को एक मशहूर लतीफ़े में इस तरह बयान किया गया है

    एक दोस्त - यार ग़ज़ल और उपदेश में क्या अंतर है ?
    दूसरा दोस्त - शादी से पहले महबूबा की हर बात ग़ज़ल लगती है और शादी के बाद पत्नी की हर बात उपदेश लगने लगती है।


    ...और इन महान हस्तियों से मिलने के बाद मुझे अपने फ़ैसले पर गर्व ही हुआ।
    --------
    एक डिज़ायनर ब्लॉगर ने दो लाइन का संदेश देने के लिए जिस तरह व्यूह रचना की है, वह वाक़ई एक उम्दा डिज़ायन है। इसमें कुछ फ़ोटो अपनी कार, कोठी और कुत्ते के भी लगा दिए जाते हैं ताकि वाक़या ‘आंखन देखी‘ भी बन जाए।
    पोस्ट लिखने के बाद यह पोस्ट एग्रीगेटर पर तो नज़र आएगी ही और गिनती के कुछ लोगों को लिंक भी भेज दिया जाता है। ये वे लोग होने चाहिएं जिनका नाम पोस्ट में आया है या फिर वे जो कि उनके प्रशंसक हैं। इस तरकीब से उसने सात लोगों को अपने ब्लॉग पर आकर टिप्पणी देने के लिए मजबूर कर दिया।
    जो लोग उन सात ब्लॉगर्स को ‘रानी मधुमक्खी‘ जैसा मान देते हैं उनमें से भी कुछ लोग आकर वहां ‘बहुत ख़ूब, सुंदर प्रस्तुति और बधाई‘ लिखे बिना न मानेंगे। हरेक का एक एक भी मानकर चलें तो कुल चैदह टिप्पणियां तो हो ही गईं। कुछ लोग ईमानदारी से पढ़कर टिप्पणी देते हैं। उनमें से भी तीन टिप्पणियां आ जाएंगी तो सत्रह टिप्पणियां हो गईं और कुछ लोग आदमी के पास दो-दो कार , कार में सवार कुत्ता और स्पोर्ट मोटर सायकिल देखकर ही सोचते हैं कि आदमी रूतबे वाला है, कभी भी काम आ सकता है। वे यही सोचकर टिप्पणी देने लगते हैं और टिप्पणियां बीस से ऊपर कूद जाती हैं। इसके बाद कुछ लोग वहां ब्लॉगर्स का जमावड़ा देखकर अपनी पोस्ट का लिंक देने के लिए पहुंच जाते हैं और जब वहां टिप्पणियां होने लगती हैं तो दूसरे लोग भी वहां अपना चेहरा और नाम चमकाने पहुंच जाते हैं। इस तरह टिप्पणियां तीस के आस पास पहुंच जाती हैं और डिज़ायनर ब्लॉगर बीच बीच में किसी को भाई और किसी को बहन और किसी को मां कहकर कभी उनका आभार प्रकट करता है और कभी उनके सवाल न पूछने के बावजूद भी उनकी बात में से कोई अंश उठाकर उसका सवाल बनाकर हल कर देता है और कभी ख़ुद ही उसकी व्याख्या कर देता है और कभी उससे मिलती जुलती एक और बात बढ़ा देता है और अपनी टिप्पणियों में मुस्काता भी है कि उसका डिज़ायन सफल रहा। इस तरह उसकी टिप्पणियां आराम से 40 पार कर जाती हैं।
    40 के बाद भी कुछ ब्लॉगर्स की पोस्ट पर टिप्पणियां आती रहती हैं तो यह टिप्पणियां वे ब्लॉगर करते हैं जो उनसे नियमित टिप्पणियां पाते रहते हैं।
    लोगों को आब्लाइज करने के लिए और उनके ब्लॉग पर टिप्पणी देने के लिए अपनी आसानी की ख़ातिर ये ब्लॉगर बहुत सारे ब्लॉग्स का लिंक भी अपने ब्लॉग पर लगाए रहते हैं और जितने ब्लॉगर्स द्वारा ख़ुद को फ़ोलो होते हुए देखना चाहते हैं, ख़ुद उससे दो गुने और तीन गुने ब्लॉग्स को फ़ोलो कर लेते हैं जबकि पढ़ना इन्हें ख़ाक भी नहीं होता।
    समय का मूल्य जानने वाला डिज़ायनर ब्लॉगर और सहज ब्लॉगर दोनों की नज़र में ही ये टिप्पणियां प्रायोजित और कृत्रिम टिप्पणियां सिद्ध होती हैं और ऐसी टिप्पणियों को वे बेकार मानते हैं लेकिन हमारी नज़र में ये टिप्पणियां भी ब्लॉग का श्रृंगार हैं और औरत के पास ज़ेवर जितने भी हों वे कम ही लगते हैं।
    यह सही है कि ब्लॉगर की असल ताक़त उसका लेखन है लेकिन जिसके पीछे लोग जुटने लगते हैं तो यह जुटना भी उसकी ताक़त को बढ़ाता ही है।
    यह टिप्पणियां देने वाले केवल मेरे ब्लॉग पर ही जुटें या फिर मेरी पसंद के ब्लॉग्स  पर और जिन्हें मैं पसंद नहीं करता, उन पर ये ब्लॉगर टिप्पणी न करें, जब इसके लिए एक डिज़ायनर ब्लॉगर पोस्ट लिखता है तो इससे एक ‘एम्बेडिड डिज़ायनिंग वॉर‘ की शुरूआत होती है और युद्ध कोई भी हो उसके नतीजे अच्छे नहीं होते।
    डिज़ायनर ब्लॉगिंग के कुछ मशहूर और सदाबहार डिज़ायन और भी हैं, जिन्हें किसी दूसरी पोस्ट में बताया जाएगा। आज आपके सामने डिज़ायनर पोस्ट तैयार करने का तरीक़ा और उसका नफ़ा-नुक्सान आ गया है। अब आप इसके नुक्सान से बचते हुए इससे लाभ उठाएं और ज़्यादा से ज़्यादा पाठकों को अपने ब्लॉग तक खींच लाएं।
    हमारी दुआएं आपके साथ हैं।

    10 comments:

    अभिषेक मिश्र said...

    रोचक सुझाव है आपका. धन्यवाद.

    Bhushan said...

    टिप्पणियाँ खींचने के नुस्खे रोचक हैं.

    शारदा अरोरा said...

    bhai vaah , ye to aaj ke blogger ka manovigyan hai ....blog kholte vakt mai to apne aap se kah leti hoon ki ye ummeed rakhni hai ki tippni to aaee hi nahi hogi ...kuchh likh kar khushi milti hai aur kuchh padh kar agar vaakai comment karne ka man kiya to kar denge ...varna oopar vale kee ichchha nahi hai ...soch kar aage badh jaate hain ....itni chhoti baat ko issue banane kee galti ham afford nahi karte .
    aapki racna padhi socha kuchh blog designing kee technique hogi...

    devendra gautam said...

    अच्छे टिप्स दिए हैं. काबिले-गौर.

    Rahul Singh said...

    बढि़या डिजाइनदार पोस्‍ट.

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ आदरणीय राहुल सिंह जी ! क्या आप जानते हैं कि मुझे आपकी शक्ल से ही प्यार है ?
    और इसकी एक वजह यह भी है कि आप मुस्कुरा रहे हैं और दूसरी बात यह है कि आपकी लेखन शैली बिल्कुल सादा है और उसमें तथ्य होते हैं।

    आपका आना हमारे लिए एक सम्मान की बात है।

    Shukriya .

    डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

    रोचक..

    ------
    लो जी, मैं तो डॉक्‍टर बन गया..
    क्‍या साहित्‍यकार आउट ऑफ डेट हो गये हैं ?

    anita agarwal said...

    वाकई दिलचस्प लगा आपके लेखन का विषय .... जो सोचा वो भी देखा और जो नहीं सोचा वह भी पाया ... अब क्या आप मुझे oblige करने के लिये मेरे ब्लॉग पर आयेंगे? हा..हा..हा...

    DR. ANWER JAMAL said...

    @ अनिता जी ! आपकी तारीफ़ हमारे मन को भा गई है। अब अगर आपको बार बार इस ब्लॉग पर बुलाना है तो आपके ब्लॉग पर हमें जाना तो पड़ेगा ही वर्ना आप दोबारा क्यों आएंगी भला ?

    इंजी० महेश बारमाटे "माही" said...

    बहुत सही सुझाव...

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