ऐ मेरे देश के सांसदों थोड़ा शर्म करों क्या यही है संसद के विशेषाधिकार

Posted on
  • Wednesday, September 7, 2011
  • by
  • Akhtar khan Akela
  • in

  • दोस्तों जरा उठो और मेरे देश के इन बेशर्म सांसदों से जरा यह तो पूछ लो क्या संसद में रिश्वत लेकर वोट डालना ..रिश्वत लेकर सवाल पूंछना राष्ट्रहित से अलग हट कर संसद में अपनी पार्टी की गलत नीतियों की तरफ दुम हिलाना ....खर्राटें भरना या फिर बिना किसी वोट के संसद से बाई कोट कर देना ही तुम्हारा विशेषाधिकार हैं ...............दोस्तों मेरे देश के इन सांसदों को जेल में भरे पढ़े नेताओं के किस्से सुनाओ लालू का चारा ..अमरसिंह का संसद रिश्वत काण्ड ..झारखंड मुक्ति मोर्चा का रिश्वत काण्ड .संसद की जूतम पैजार ..रामजेठमलानी के फटेहाल कपड़े .....हर्षद मेहता का समर्थन .....क्या यही सब संसद का विशेषाधिकार है .दोस्तों अपने भी संसद देखी है आपने भी संसद पर हमले के वक्त संसद में दहाड़ने वाले इन लोगों की पतली दाल और दिल की धडकन देखी है हमारे देश में सर्वे करवा लो कुछ्द्र्जन सांसदों को अगर हम छोड़ दें तो सभी एक ही थाली के चाटते बट्टे हैं क्योंकि सो के लगभग जो सांसद देश का बन्टाधार कर रहे हैं उस मामले में यह लोग उनके खिलाफ जनहित में आवाज़ नहीं उठाते और जब जनता में इनकी छवि बिगडती है इनकी स्थिति बाहर बताई जाती है तो फिर यही लोग संसद के विशेषाधिकार के नाम पर खुन्नस खाकर जनता को सच बताने वालों को जेल डर दिखाते हैं अरे मेरे देश के सांसदों थोड़ा तो शर्म करो तुम सवा करोड़ लोगों की भावना से खेल रहे हो तुम में से कई ठीक लोग है तो कई कितने गंदे लोग है तुम भी तो जानते हो फिर क्यूँ ऐसे लोगों को संसद में आने से रोकने के लियें कानून नहीं बनवाते हो अगर ऐसा नहीं होता है और वेतन के मामले में तुम एक हो जाते हो जनता के हितों के मामले में धड़ों और पार्टियों में बंट जाते हो संसद में जनता के लियें जब कानून बन रहा हो तब तुम सो जाते हो .रिश्वत लेकर वोट डालते हो .रिश्वत लेकर सवाल पूंछते हो और वोह भी जनता के रुपयों पर जनता के टेक्स से दो करोड़ प्रतिवर्ष का खर्च लाखों का वेतन और दस रूपये का मुर्गा चिकन मटन खाते हो यानी हमारा खाते हो और हम पर ही गुर्राते हो जरा सुधरो अंतरात्मा को टटोलो राष्ट्रहित में इन सवालों का जवाब खोजो और जनता को कुछ करके दिखाओ जनता तो तुम्हे पलक पांवे बिछा कर कन्धों पर बिठाएगी और फिर कोई तुम्हारी तरफ ऊँगली भी उठाएगा तो जनता खुद ही उसकी ऊँगली काट देगी तो सांसदों जरा एक बार सिर्फ एक बार राष्ट्रहित और जनहित में तो सोचो यार तुम कहा गलत हो कहां तुम्हे सुधार करना है खुद ही समझ लोगे और संसद के विशेषाधिकार की बात करते हो तो जो आरोप तुम सांसदों पर लग रहे हैं जरा जन मत करा लो सवा करोड़ के सवा करोड़ को ही तुम्हे जेल भेजना होगा क्या कर सकोगे ऐसा सांसदों झूंठ मत बोलों खुदा के पास जाना है ......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

    3 comments:

    रविकर said...

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति |

    अमर दोहे



    Sanjay Dutt, Manyata and Amar Singh
    व्यर्थ सिंह मरने गया, झूठ अमर वरदान,
    दस जनपथ कैलाश से, सिब-बल अंतरध्यान |
    इतना रुपया किसने दिया ?

    फुदक-फुदक के खुब किया, मारे कई सियार,
    सोचा था खुश होयगा, जन - जंगल सरदार |
    जिन्हें लाभ वे कहाँ ??


    साम्यवाद के स्वप्न को, दिया बीच से चीर,
    बिगड़ी घडी बनाय दी, पर बिगड़ी तदबीर |
    परमाणु समझौता


    अर्गल गर गल जाय तो, खुलते बन्द कपाट,
    जब मालिक विपरीत हो, भले काम पर डांट |
    हम तो डूबे, तम्हें भी ---

    दुनिया बड़ी कठोर है , एक मुलायम आप,
    परहित के बदले मिला, दुर्वासा सा शाप |
    मुलायम सा कोई नहीं

    खट मुर्गा मरता रहे, अंडा खा सरदार,
    पांच साल कर भांगड़ा, जय-जय जय सरकार

    ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

    बहुत सही कहा आपने | पर इनका नैतिक सतर इतना गिर चुका है कि शायद ही कोई सांसद आपकी बात को सुनेगा या फिर उनपे अमल करेगा |बहुत सही कहा आपने | पर इनका नैतिक सतर इतना गिर चुका है कि शायद ही कोई सांसद आपकी बात को सुनेगा या फिर उनपे अमल करेगा |

    Masood Anwar Khan said...

    Nice.

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