क्या इंसान की सेक्स लाइफ़ का कोई सम्बन्ध रोग और अपराध से भी होता है ?

Posted on
  • Wednesday, September 28, 2011
  • by
  • HAKEEM YUNUS KHAN
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  • क्या इंसान की सेक्स लाइफ़ का कोई सम्बन्ध रोग और अपराध से भी होता है ?
    इस बात पर रौशनी डालती हुई दो ख़बरें पढ़नेमें आई हैं . आप भी देखिये और सोचिये .
    (1)
    नपुंसक पुरूषों को ज्यादा होती हैं दिल की बीमारियां
    हाल में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि नपुंसक पुरूषों को संतान वाले लोगों की तुलना में दिल की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा होता है।
       
    कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक दल ने लगभग एक दशक तक 1,35,000 वृद्ध लोगों पर नजर रखी और पाया कि जिन लोगों को जीवन में कभी संतान नहीं हुई, उन्हें दिल की बीमारियों से मरने का खतरा अधिक था।
       
    डेली टेलीग्राफ के अनुसार, एक सिद्धांत यह है कि पिता बनने वाले लोग नपुंसक लोगों की तुलना में अधिक स्वस्थ जीवन बिताते हैं जबकि दूसरे सिद्धांत के अनुसार, टेस्टोस्टीरोन के उच्च स्तर के कारण दीर्घ अवधि में दिल की बीमारियों के होने का खतरा कम होता है।
       
    स्टैनफोर्ड में मूत्र विज्ञान के प्रोफेसर डॉ़ माइकल इजनबर्ग ने इस अध्ययन को शुरू किया और उन्होंने लगभग एक दशक तक सेवानिवृत्त लोगों की अमेरिकी ऐसोसिएशन के आंकड़ों पर गौर किया। अनुसंधानियों ने पाया कि दस साल की अवधि में लगभग दस प्रतिशत लोगों की मौत हो गयी और इनमें से 20 प्रतिशत लोगों की मौत दिल की बीमारियों से हुई थी।
    यह खबर यहाँ से ली गयी है :
    http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/jeevenjizyasa/article1-story-50-51-192824.html

    (2)
    आपके अंदर के अपराधी को मार सकती है शादी
    विवाह आपके अंदर के अपराधी को मार सकता है। विवाह के बाद व्यक्ति का आत्म-नियंत्रण बढ़ जाता है।

    मोनाश विश्वविद्यालय के अपराधविज्ञानी वाल्टर फॉरेस्ट व फ्लोरिडा स्टेट विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर कार्टर हेय ने एक अध्ययन में पाया कि गांजे का इस्तेमाल करने वाले युवाओं ने विवाह के बाद अविवाहितों की तुलना में इसका इस्तेमाल कम कर दिया।

    शोध में लोगों में होने वाले इस बदलाव की प्रमुख वजह भी खोज ली गई है। विवाह से लोगों के आत्म-नियंत्रण में महत्वपूर्ण सुधार होता है।

    'क्रिमनोलॉजी एंड क्रिमिनल जस्टिस' जर्नल के मुताबिक फॉरेस्ट कहते हैं कि अपराध में सक्रिय लोगों में आने वाले बदलावों में आत्म-नियंत्रण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद लोग जोखिम लेने से बचना चाहते हैं और अपने आवेगों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं।
    यह खबर यहाँ से ली गयी है :
    http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/jeevenjizyasa/article1-story-50-51-192821.html

    1 comments:

    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

    बहुत बढ़िया!
    आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की मंगलकामनाएँ!

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